Indian Council of World Affairs
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Call for Conference Grant

Indian Council of World Affairs (ICWA) announces a scheme for every Financial Year to support national/ international conferences by recognised universities and UGC centres on themes of mutual interest in international relations and foreign policy in accordance with the mandate and objectives of the ICWA. These may be viewed on its website Under the scheme, the ICWA is willing to offer support of monetary value not exceeding Rs. 2 lakhs only per national/international conference, half of which may be disbursed in advance to the applicant(s) concerned with the balance being provided upon submission of itemised accounts with supporting bills and vouchers after the conference has concluded.

ICWA will consider financial assistance upto a maximum of Rs. 2 lakhs subject to following conditions:
1. ICWA is treated as partner and due credit is given by the organisers in all its publicity at the venue like conference materials, banners etc.
2. The Proceedings of the seminar/conference are published as an edited volume within one year. The edited volume must carry the logo of ICWA as a sponsoring institution and a similar citation must be made in the text of the volume. Ten copies must be given free of cost to ICWA. ICWA should be able to purchase any additional copies at publisher's discounted price.
3. A complete audio recording and a set of papers/conference proceedings (in soft copy also) must be provided to ICWA.
4. ICWA will be represented by DG/DDG/Director(R) and/or at least one Research Fellow who will present an original paper at this conference. The cost of travel of ICWA representatives will be borne by ICWA but logistical arrangements must be made by the host organisation.

Rules for Conference Grant
• The applicant Institute/University should apply to ICWA (in the attached format) citing the need for such conference and how it would contribute to developing greater understanding about India's foreign policy or any contemporary politico-strategic development of importance for India.
• The seminar / conference / workshop proposals should fall in one of the areas of interest listed.
         a) India's foreign policy.
         b) The changing politico-strategic dynamics of the Asian region and how it affects India.
         c) India's relations with its neighbours and the extended neighbourhood.
        d) Area studies: South Asia, Asia-Pacific, Latin America, Africa, EU, Russia, China, Africa, multilateral institutions, nuclear issues, etc.
• The request for Conference grant should clearly mention the number of participants (both national and international), the topics for working sessions and whether additional funding for the said conference is also being solicited from other agencies.
• The grant would be approved only after the applicant provides the complete list of participants, concept note and provisional budget under different heads.
• The grantee will have to submit the final manuscript which would include all papers presented in the conference. The conference proceedings will be published by ICWA in partnership with other funding agencies or institutions. The submitted manuscript would undergo referring process before final publication.
• A Summary of the Conference should also be submitted after the Conference/Workshop/Seminar elucidating the objectives of the event, salient points raised during event and the actionable suggestions.
• The decision of the Research Committee would be final and binding in this regard.

Proposals received will be scrutinised for approval or rejection by the ICWA. ICWA will require a minimum lead time of six months for consideration of proposal received.

The proposal must include a forwarding letter from the Dean or Head of the Department of the Centre/think tank. Proposals in a sealed cover (not through email) clearly indicating "Conference Grant Proposal" on the top left hand corner may be submitted (in prescribed format) to:
       Deputy Director General
       Indian Council of World Affairs
       Sapru House, Barakhamba Road,
       New Delhi-110001

कॉन्फ्रेंस के लिए आह्वान

विश्व मामलों की भारतीय परिषद के अधिदेश एवं उद्देश्य के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय संबंधों तथा विदेश नीति के आपसी हितों की विषय वस्तु् पर मान्याता प्राप्त विश्वविद्यालयों तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा आयोजित किए जाने वाले राष्ट्रीय / अंतराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस को सहायता प्रदान करने के लिए विश्व मामलों की भारतीय परिषद प्रत्येक वित्त वर्ष में एक योजना की घोषणा करता है। इस योजना को विश्व मामलों की भारतीय परिषद की वेबसाइट पर देखा जा सकता है। इस योजना के तहत विश्व मामलों की भारतीय परिषद प्रत्येक राष्ट्रीय / अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के लिए 2 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता प्रदान करने की इच्छुिक है। संबंधित आवेदक (आवेदकों) को आधी राशि का भुगतान अग्रिम रूप से किया जाएगा। शेष राशि का भुगतान कान्फ्रेंस की समाप्ति के बाद संबंधित बिल, वाउचर प्रस्तुत करने पर किया जाएगा।

विश्व मामलों की भारतीय परिषद निम्नलिखित शर्तों पर अधिकतम 2 लाख रुपए की वित्तीय सहायता पर विचार करेगाः
1. विश्व मामलों की भारतीय परिषद को साझीदार समझा जाएगा तथा स्थल पर कॉन्फ्रें स सामग्रियों, बैनरों आदि के प्रकाशन में संगठनकर्ता द्वारा परिषद को इसका श्रेय देना होगा।
2. एक साल के अंदर सेमिनार / कॉन्फ्रेंस की कार्यवाहियों का प्रकाशन संपादित अंक के रूप में किया जाएगा। संपादित अंक में विश्व मामलों की भारतीय परिषद का ‘लोगो’ (प्रतीक चिन्ह) प्रायोजक संस्थान के रूप में लगाना होगा तथा इसी तरह का उल्लेख अंक की विषयवस्तु में भी करना अनिवार्य होगा। इसकी 10 प्रतियां विश्व मामलों की भारतीय परिषद को निःशुल्क उपलब्ध करानी होगी। विश्व मामलों की भारतीय परिषद प्रकाशक द्वारा दी जाने वाली छूट की दर पर अतिरिक्त प्रतियों को खरीद सकेगी।
3. एक पूर्ण ऑडियो रिकार्डिंग तथा पेपर / कॉन्फ्रेंस के कार्यवाहियों की सॉफ्ट कॉपी भी विश्व् मामलों की भारतीय परिषद को उपलब्ध करानी होगी।
4. महानिदेशक/उप महानिदेशक/संयुक्त सचिव/निदेशक (आर) और/या कम से एक अनुसंधान फेलो द्वारा विश्वि मामलों की भारतीय परिषद का प्रतिनिधित्व किया जाएगा, जो कि इस कॉन्फ्रेंस में मौलिक शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। विश्व् मामलों की भारतीय परिषद के प्रतिनिधियों द्वारा की गई यात्रा की लागत विश्व मामलों की भारतीय परिषद द्वारा वहन की जाएगी परंतु ठहरने, खाने-पीने और स्थानीय परिवहन संबंधी व्यवस्था मेजबान संस्था द्वारा अनिवार्य रूप से की जाएगी।

कॉन्फ्रेंस अनुदान के लिए नियम
• आवेदक संस्थान / विश्वविद्यालय को संलग्नं प्रारूप में विश्व मामलों की भारतीय परिषद में आवेदन करना होगा, जिसमें इस तरह के कॉन्फ्रेंस की आवश्यकता का उल्लेख करना होगा तथा ऐसे कॉन्फ्रेंस किस तरह भारत की विदेश नीति में अत्यधिक समझ विकसित करेंगे अथवा भारत के लिए किसी समकालीन राजनीतिज्ञ-सामरिक विकास के महत्व में योगदान देंगे, का भी उल्लेख करना होगा।
• सेमिनार / कॉन्फ्रेंस / कार्यशाला का प्रस्तााव रुचिगत निम्नललिखित क्षेत्रों में से एक होना चाहिए।
       भारत की विदेश नीति।
        एशिया क्षेत्र की बदलती राजनीतिज्ञ-सामरिक गतिशीलता तथा भारत पर इसका प्रभाव।
        भारत का अपने पड़ोसियों तथा वृहद पड़ोस के साथ संबंध।
        अध्यायन क्षेत्रः दक्षिण एशिया, एशिया प्रशांत, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका, यूरोपीय संघ, रूस, चीन, अफ्रीका, बहुपक्षीय संस्था न, परमाणु मुद्दे आदि।

• कॉन्फ्रें स अनुदान आवेदन में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सहभागियों की संख्यास का स्प्ष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिए। उपर्युक्त कॉन्फ्रेंंस के लिए चाहे कार्यकारी सत्र की विषयवस्तु् हो अथवा अतिरिक्त‍ अनुदान हेतु अन्य एजेंसियाँ उनका भी उल्लेख होना चाहिए ।
• आवेदक द्वारा भागीदारों, संकल्पकना पत्र तथा विभिन्न शीर्षों के अंतर्गत अंतिम बजट की पूर्ण सूची उपलब्ध कराने के बाद ही अनुदान जारी किया जाएगा।
• अनुदान ग्राही को अंतिम रूप से तैयार हुयी पाण्डुलिपि प्रस्तुत करना होगा जिसमें कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत किए जाने वाले सभी शोधपत्र शामिल होंगे। कॉन्फ्रेंस की कार्यवाहियां विश्व मामलों की भारतीय परिषद द्वारा एवम अन्य अनुदान देने वाली एजेंसियों अथवा संस्थानों के साथ साझी की जाएगी। प्रस्तुत पाण्डुलिपि को अंतिम रूप से प्रकाशन से पूर्व समीक्षा की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
• कॉन्फ्रेंस / वर्कशॉप / सेमिनार की समाप्ति के बाद कार्यक्रम के उद्देश्यों, कार्यक्रम के दौरान उठाए गए प्रमुख मुद्दों तथा कार्यवाही योग्य सुझावों को स्पष्ट करते हुए कॉन्फ्रेंस का सारांश भी प्रस्तुत करना होगा।
• इस संबंध में अनुसंधान समिति का निर्णय अंतिम एवं बाध्य होगा।

विश्व मामलों की भारतीय परिषद को प्राप्त प्रस्तावों के अनुमोदन अथवा अस्वीरकण के लिए परिषद् छटनी की प्रक्रिया अपनाएगी । प्राप्त प्रस्तावों पर विचार के लिए विश्व मामलों की भारतीय परिषद को कम से कम 6 माह के समय सीमा की आवश्यकता होगी।

इस प्रस्ताव हेतु संकाय अध्य्क्ष अथवा केन्द्र/ थिंक टैंक विचार मंच के विभागाध्यक्ष द्वारा अग्रेषित पत्र अवश्य शामिल होना चाहिए। प्रस्ताव निर्धारित प्रारूप में मुहरबंद लिफाफे में (ईमेल द्वारा नहीं) जिसके बाएं हाथ की तरफ शीर्ष पर कोने में ''कॉन्फ्रेंस अनुदान प्रस्तााव’’ लिखा हो, उपमहानिदेशक, विश्व मामलों की भारतीय परिषद, सप्रू हाउस, बाराखंबा रोड, नई दिल्ली’-110001 को प्रस्तुत किया जाए।