मास्को में एस सी ओ की सरकार के प्रमुखों की परिषद 2025 की बैठक दर्शाता है कि यह संगठन बदलते भू-राजनीति में व्यावहारिक क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को अधिक गति देना चाहता है
रूसी प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्टिन ने शंघाई सहयोग संगठन (एस सी ओ) के सरकार के प्रमुखों की परिषद (एच ओ जी) की 18 नवंबर 2025 को 24वीं बैठक की मेज़बानी की (रूस 2024-25 में सरकार के प्रमुखों की परिषद का अध्यक्ष था)। परिषद की बैठकें दो प्रारूप में हुई। एस सी ओ के सदस्यों (बेलारूस, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान), एस सी ओ के महासचिव और एस सी ओ के क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना की कार्यकारी समिति के निदेशक ने सीमित प्रारूप की बैठक में भाग लिया। विस्तारित बैठक में एस सी ओ बिजनेस काउंसिल, एस सी ओ इंटरबैंक संघ, स्वतंत्र राज्यों का राष्ट्रमंडल (सी आई एस), यूरेशियन आर्थिक संघ (ई ए ई यू) और एशिया में पारस्परिक संपर्क और विश्वास निर्माण उपायों का सम्मेलन (सी आई सी ए) के प्रतिनिधि शामिल हुए।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सरकार के प्रमुखों की परिषद के प्रतिनिधिमण्डल की अलग से मेज़बानी की। उनके अनुसार, एस सी ओ के सदस्य संगठन के यूरेशिया महाद्वीप और दुनिया भर में अधिकार और प्रभाव को बढ़ाने के साझा लक्ष्य से बंधे हैं। उन्होंने कहा कि अंतर-एस सी ओ व्यापार बढ़ रहा है। एस सी ओ सदस्यों के बीच व्यावसायिक लेन-देन में उपयोग की जाने वाली राष्ट्रीय मुद्राओं का प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है; रूस के लिए एस सी ओ भागीदारों के साथ व्यापार में यह प्रतिशत पहले ही 97 प्रतिशत से अधिक चुका है।
मॉस्को 2025 बैठक के अहम मुद्दे
शंघाई सहयोग संगठन में राष्ट्राध्यक्षों की परिषद के बाद सरकार के प्रमुखों की परिषद दूसरी उच्चतम सभा है। यह संगठन में क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विचार करने और फ़ैसला लेने के लिए एक मुख्य मंच है । यह मंच विकास सहयोग, वित्तीय, संपर्क (कनेक्टिविटी) और आर्थिक कार्यक्रम आदि पहलुओं को शामिल करता है। मास्को की बैठकें कई कारणों से महत्वपूर्ण रहीं तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में मौजूदा रुझानों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठकों में साझा हित के मुद्दे जैसे बहुपक्षवाद, खतरों का मुकाबला करना, संपर्क, व्यापार और आर्थिक संबंधों को बढ़ाना और एस सी ओ क्षेत्र में सांस्कृतिक-मानवीय सहयोग शामिल थे। नेताओं ने उभरते और विकासशी देशों की अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संगठनों में भागीदारी बढ़ाने की वकालत की तथा वैश्विक आर्थिक शासन में सुधार का समर्थन किया। एस सी ओ विकास रणनीति 2026-2035 को लागू करना, जिसे 1 सितंबर, 2025 को तियानजिन (चीन) एस सी ओ शिखर सम्मेलन में मंजूरी दी गई थी, कार्यसूची में एक अहम मुद्दा था।
विकास रणनीति 2026-2035 एस सी ओ के लक्ष्यों और उद्देश्यों को परिभाषित करती है, साथ ही साल 2035 तक संगठन द्वारा उन्हें हासिल करने के तरीकों को भी बताती है। एस सी ओ के सिद्धांतों और मूल्यों के आधार पर, यह दस्तावेज़ सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास और अच्छे पड़ोसी संबंधों को मज़बूत करने; एस सी ओ क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों और खतरों का मिलकर मुकाबला करने; और व्यापार, अर्थव्यवस्था, वित्त और निवेश जैसे अन्य क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को गहरा करने के लिए कार्यों की रूपरेखा बताती है।
बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम (2026-2030) के कार्यान्वयन के लिए एक कार्योजना तैयार करने का निर्णय लिया गया। सरकार के प्रमुखों की परिषद की बैठक के पहले, रूसी पक्ष की अध्यक्षता में सदस्य देशों के विशेषज्ञ समूह ने बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2026-2030 को लागू करने के लिए मसौदा पर एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान सहमति जताई थी।
एस सी ओ द्वारा प्रस्तावित वित्तीय और आर्थिक संस्थान ‘एस सी ओ विकास बैंक’ और ‘एस सी ओ विकास कोष’ को भी चर्चा में शामिल किया गया। अभी यह घोषणा नहीं की गई है कि बैंक कब शुरू होगा, लेकिन इसका मकसद कार्यक्षमता और क्षेत्र की सामाजिक विकास को गति देना होगा। एस सी ओ विकास कोष एक प्रस्तावित साझा वित्तपोषण तंत्र (कॉमन फाइनेंसिंग मैकेनिज्म) है जो सदस्य देशों के बीच व्यावहारिक आर्थिक और विकास सहयोग परियोजनाओं की सहायता करेगा। इसके अतिरिक्त, यह प्रस्तावित किया गया कि संगठन के वित्तीय सहयोग में वाणिज्यिक बैंकों की भागीदारी अधिक ठोस एवं उपयोगी परिणाम प्राप्त करने में मदद कर सकती है।
एस सी ओ 2026 के बजट को मंजूरी देने के अलावा, मॉस्को बैठक ने बहुपक्षीय व्यापार, आर्थिक सहयोग और रेलवे परिवहन में सहयोग के विकास के संबंध में निर्णय लिए। इसके अतिरिक्त सतत विकास, संपर्क पहल (connectivity initiative), वित्तीय सहयोग आदि को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया। बैठक ने डिजिटल अर्थव्यवस्था और औद्योगिक सहयोग को भी प्राथमिकता दी | पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग के लिए आपूर्ति श्रृंखला, परिवहन गलियारों और भुगतान में सुधार एवं उनके प्रभावी संचालन के लिए प्रतिबद्धता भी दिखाई गई।
भारत और एस सी ओ मास्को बैठक
एस सी ओ की मास्को में सरकार के प्रमुखों की परिषद की बैठक 2025 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने किया। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक आर्थिक स्थिति विशेष रूप से अनिश्चित और अस्थिर है। ऐसे समय में आपूर्ति और मांग के क्षेत्र में जोखिम कम करने और विविधता लाने की तत्काल आवश्यकता है और यह व्यापक आर्थिक संबंध बनाने से अच्छी तरह से किया जा सकता है। मगर साथ ही यह आवश्यक है कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और न्यायसंगत हो।
अपने वक्तव्य में डॉ. जयशंकर ने सांस्कृतिक सहयोग के महत्व पर भी ज़ोर दिया और ‘एस सी ओ सभ्यता संवाद मंच’ की स्थापना की आवश्यकता पर बल दिया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तियानजिन 2025 एस सी ओ शिखर सम्मेलन के दौरान प्रस्तावित किया था । एस सी ओ के भीतर बेहतर समझ को बढ़ावा देने के लिए ये मंच शिक्षाविदों, कलाकारों, खिलाड़ियों और सांस्कृतिक व्यक्तियों के बीच भागीदारी को बढ़ावा देना चाहता है।
विदेश मंत्री ने आतंकवाद पर शून्य सहिष्णुता और भारत के आत्मरक्षा के अधिकार वाले रुख की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि एस सी ओ की स्थापना आतंकवाद, अलगाववाद और अतिवाद तीन बुराइयों से लड़ने के लिए की गई थी। हाल के वर्षों में ये खतरे और भी गंभीर हो गए हैं। उन्होंने कहा कि जैसा कि भारत ने प्रदर्शित किया है, हमें आतंकवाद के खिलाफ अपने लोगों की रक्षा करने का अधिकार है और हम इसका प्रयोग करेंगे। इस बात पर ज़ोर दिया कि यह अनिवार्य है कि दुनिया आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के प्रति अपनी शून्य सहिष्णुता प्रदर्शित करे।
एस सी ओ में आधुनिकीकरण या आंतरिक बदलाव के बारे में मंत्री महोदय ने कहा कि जैसे-जैसे संगठन का विकास जारी है, भारत इसके सुधार-उन्मुख कार्यसूची का पुरजोर समर्थन करता है। एस सी ओ को अधिक अनुकूलनशील और लचीला होने की आवश्यकता है क्योंकि संगठन अधिक विविध हो रहा है। भारत की पहलें, जैसे कि एस सी ओ स्टार्टअप और नवाचार विशेष कार्य समूह और एस सी ओ स्टार्टअप मंच (SCO Special Working Group on Startups and Innovation; SCO Start-Up Forum), अच्छे उदाहरण हैं। यह ताज़ा सोच और नए सहयोग को परिलक्षित करता है।
अपने वक्तव्य में डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत एस सी ओ के द्वारा साइबर सुरक्षा, नशीली दवाओं की तस्करी और संगठित अपराध को रोकने के लिए संबंधित केन्द्रों के स्थापना की सराहना करता है। 1 सितंबर 2025 को तियानजिन में हुए 25वें शिखर सम्मेलन में, एस सी ओ नेताओं ने संस्थागत मज़बूती और व्यापक आर्थिक-सुरक्षा सहयोग के लिए नए सहयोग केंद्र और मंच स्थापित करने पर सहमति जताई। एससीओ सुरक्षा चुनौतियों और खतरों का मुकाबला करने के लिए सार्वभौमिक केंद्र ताशकंद, उज़्बेकिस्तान में होगा (SCO Universal Center for Countering Security Challenges and Threats)। कजाकिस्तान ने सूचना सुरक्षा केंद्र (Information Security Center) अल्माटी में बनाने का एक प्रस्ताव दिया है। संगठित अपराध से निपटने के लिए एक ढांचा (Center for Combating Transnational Organized Crime) बिश्केक, किर्गिज़स्तान में बनाया जाएगा और एंटी-ड्रग केंद्र (Anti-Drug Center) दुशांबे, ताजिकिस्तान में स्थापित होगा। यहां यह यह बताया जा सकता है कि ये चार नए केंद्र होंगे, जबकि ताशकंद में एस सी ओ आतंकवाद विरोधी ढांचा (Regional Anti-Terrorist Structure) पहले से कार्यरत है।
निष्कर्ष
एस सी ओ क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग के आयामों को व्यावहारिक बनाने का गंभीर प्रयास कर रहा हैl मास्को की सरकार के प्रमुखों की परिषद 2025 की बैठक महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह ‘एस सी ओ विकास रणनीति 2035’ के दृष्टि को व्यवहार में लाने की दिशा में पहली बैठक थी, विशेष रूप से आर्थिक विकास, संपर्क और आपूर्ति श्रृंखला, डिजिटल सहयोग, और खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा आदि के क्षेत्रों में। बैठक प्रतिबिंबित करता है एस सी ओ बदलाव के चरण में है और व्यावहारिक क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग की ओर अग्रसर है जिसमें भारत एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
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*डॉ. अतहर ज़फ़र, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली, में एक वरिष्ठ शोध अध्येता हैं।
अस्वीकरण: व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं।