सारांश: अप्रैल 2025 में इबेरियन प्रायद्वीप में हुए ब्लैकआउट के बाद से साइबर हमले और हाइब्रिड युद्ध चर्चा का विषय रहे हैं। हालाँकि आधिकारिक तौर पर इसे एक तकनीकी विफलता माना जाता है लेकिन भू– राजनीतिक संदर्भ जिसमें यूक्रेन में युद्ध, यूरोप में रूसी साइबर गतिविधियों में वृद्धि और साथ ही साथ दुष्प्रचार अभियान शामिल हैं– जानबूझकर इमारतों को निशाना बनाने की संभावना को बढ़ाते हैं। यह लेख यूरोपीय सुपरग्रिड के संदर्भ में पावर ग्रिड ठप्प करने की भू–राजनीति का पता लगाएगा और ऐसे युग में महत्वपूर्ण इमारतों की रक्षा के लिए यूरोपीय संघ– व्यापी इमारतों की जरूरत पर प्रकाश डालेगा, जहाँ अब अपरंपरागत तरीकों से जंग लड़ी जा रही है।
परिचय
स्पेन और पुर्तगाल में सोमवार 28 अप्रैल 2025 की सुबह बड़े पैमाने पर बिजली कटौती हुई, जिससे लगभग 6 करोड़ (60 मिलियन) लोग प्रभावित हुए।[i] मेट्रो ट्रेन बीच सफ़र में रुक गईं, ट्रैफिक लाइटें बंद हो गईं, अस्पतालों को बैकअप जनरेटरों पर निर्भर करना पड़ा और दूरसंचार नेटवर्क ध्वस्त हो गए, इससे जनजीवन अस्त– व्यस्त हो गया। ज्यादातर इलाकों में दस घंटे से ज्यादा समय तक बिजली पूरी तरह बहाल नहीं हो पाई। आधुनिक समाज के सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की मज़बूती को लेकर गंभीर चिंताएं जताई गईं। इस घटना के बाद, एक बड़ा विरोधाभास सामने आया।
स्पेन की सरकार और ग्रिड संचालक इलेक्ट्रिका दे एस्पाना (आरईई/REE) ने इस घटना के लिए बिजली की मांग में अचानक होने वाली बढ़ोतरी और योजनागत खामियों के कारण हुई तकनीकी गड़बड़ी को जिम्मेदार ठहराया है। हालाँकि, ब्लैकआउट से पहले दूरसंचार या इंटरनेट में व्यवधान, अचानक पतन और रूस के साथ बढ़ते तनाव जैसी विसंगतियों ने जानबूझकर साइबर गड़बड़ी की आशंका को जन्म दिया है।
पतन का गहन विश्लेषण: इबेरियन ब्लैकआउट का पुनर्निर्माण
घटना के बाद, यूरोपियन नेटवर्क ऑफ ट्रांसमिशन सिस्टम ऑपरेटर्स फॉर इलेक्ट्रिसिटी (ENTSO-E), रेडेस एनर्जेटिकास नेसियोनैस (REN), और आरईई (REE) की आधिकारिक रिपोर्टों ने इस घटना के लिए तकनीकी खराबी को जिम्मेदार ठहरायाः दक्षिणी स्पेन में 2,200 मेगावाट (MW) बिजली की कमी के कारण बिजली आपूर्ति बड़े पैमाने पर बाधित हुई जिससे कुछ ही सेकंड में इबेरियन ग्रिड यूरोप से कट गया। 12:33:24 CEST तक, प्रायद्वीप की लगभग 60% बिजली गुल हो चुकी थी।[ii] हालाँकि, स्वतंत्र इंटरनेट निगरानी से कुछ और ही कहानी सामने आती है। इंटरनेट आउटेज डिटेक्शन एंड एनालिसिस (IODA) के आंकड़ों से पता चला है कि दूरसंचार व्यवधान 12:25 बजे यानी पहली बार दर्ज की गई बिजली की खराबी से सात मिनट पहले शुरू हुआ। पुर्तगाल में दोपहर 12:30 बजे तक इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली व्यवस्था के कुछ हिस्से ठप पड़ चुके थे। यह आधिकारिक समय–सीमा के विपरीत है और इस संभावना को बढ़ाता है कि स्पेन नहीं, बल्कि पुर्तगाल ही विफलता का पहला बिंदु था।[iii] पावर ग्रिड और संचार नेटवर्क अत्यधिक समन्वित प्रणालियां हैं, जिनमें व्यवधान सेकेंड के कुछ अंशों में घटित हो जाता है।
तकनीकी समस्या और लक्षित हमले के बीच एक मिनट का अंतर हो सकता है। घटनाओं के क्रम को फिर से बनाने, विफलता के वास्तविक कारण का पता लगाने और यह पता लगाने के लिए क्या कई प्रणालियों पर एक साथ या समन्वित क्रम में हमला हुआ था, सटीक टाइमस्टैम्प जरूरी हैं। इस मामले में सात मिनट का अंतर महत्वपूर्ण है; यह आधिकारिक विवरण में उल्लिखित कार्य–कारण संबंध पर प्रश्न उठाता है और पूर्व नियोजित गड़बड़ी समेत वैकल्पिक व्याख्याओं के लिए द्वारा खोलता है।2
महत्वपूर्ण रूप से, घटनाओं का क्रम जानबूझकर किए गए होने के संकेत देता है। सामान्य ब्लैकआउट के कारण दूरसंचार सेवाएं ग्रिड के बाद ठप पड़ जाती हैं। इस मामले में ये पहले ही ठप पड़ चुकी थीं। यह उलटफेर एक समन्वित साइबर हमले का संकेत देता हैः पहले अंधे ऑपरेटरों के संचार को निशाना बनाया गया, फिर ग्रिड पर हमला किया गया, जिससे भौतिक रूप से ठप हो गया।[iv] ऐसी रणनीतियाँ परिष्कृत ख़तरा पैदा करने वाले तत्वों द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीतियों के अनुरूप हैं। स्थिति को सामान्य करने में कई घंटे लग गए। फ्रांस और मोरक्को की मदद से आपातकालीन उपाय किए गए। पुर्तगाल में आधी रात और स्पेन में सुबह 4:00 बजे पूरी तरह से बिजली बहाल कर दी गई। इस घटना ने यह बताया कि आधुनिक अवसंरचनाएं न केवल तकनीकी विफलताओं के प्रति बल्कि क्रॉस– डोमेन, पूर्व– नियोजित हमलों के प्रति भी कितना असुरक्षित हो सकती हैं।[v]
विरोधाभास: दो प्रतिस्पर्धी आख्यान
रिपोर्ट के अनुसार ग्रिड ऑपरेटर आरईई (REE) वोल्टेड को नियंत्रित करने और सिस्टम को स्थिर रखने के लिए पर्याप्त गैस और जल विद्युत संयंत्रों का रखरखाव करने में विफल रहा। जब मांग बढ़ी, कई नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र, विशेषरूप से पुराने सौर पीवी संयंत्र, इन्वर्टर सुरक्षा कारणों से बंद हो गए, अस्थिरता और बढ़ गई। आरईई (REE) ने बिजली उत्पादकों को ठीक से प्रतिक्रिया न देने के लिए दोषी ठहराया, जबकि कंपनियों ने खराब सिस्टम प्लानिंग की ओर इशारा किया। इस आंतरिक विवाद ने घरेलू तकनीकी विफलता की धारणा को और पुष्ट किया, जिससे संभावित बाहरी संकट से ध्यान हट गया। स्पेन और यूरोपीय संघ के संस्थानों ने आधिकारिक तौर पर किसी भी साइबर हमले से इनकार किया।
स्पेन के राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा संस्थान और ऑडिएंसिया नेशनल ने यह पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है कि क्या यह व्यवधान जानबूझकर किया गया था। ब्लैकआउट के कारण केवल पांच सेकेंड में 15 गीगावाट (GW) (स्पेन के कुल उत्पादन का लगभग 60%) की अचानक हानि हुई।[vi] इबेरिया में इंटरनेट कनेक्टिविटी का धीमा पड़ जाना (डेटा सेंटर्स, दूरसंचार एक्सचेंज, सेल टावर और आईएसपी (ISPs) में बिजली की बड़े पैमाने पर कटौती के कारण पुर्तगाल में लगभग 90% और स्पेन में 80%) पहली बार दर्ज किए गए ग्रिड खराबी से कई मिनट पहले शुरू हुई, जिससे ब्लैकआउट का सामान्य क्रम उलट गया।[vii]
आधुनिक बुनियादी ढांचे में बिजली ग्रिड और डिजिटल संचार नेटवर्क एक– दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं; ग्रिड नियंत्रण प्रणालियाँ लोड संतुलन, दोष पहचान और दूरस्थ स्विचिंग के लिए इंटरनेट पर वास्तविक समय के डेटा हस्तांतरण पर निर्भर करती हैं। कनेक्टिविटी में खराबी ग्रिड की तनाव झेलने की क्षमता को कमज़ोर कर सकती है जबकि एक सिस्टम पर साइबर हमला दूसरे सिस्टम तक फैल सकता है। यह घटना दूरस्थ नोड्स पर एक साथ खराबी आने और तेज़ी से सिस्टम के खराब होने के पैटर्न के बाद हुई, जो यूक्रेन के ग्रिड पर हुए ज्ञात साइबर हमलों की तरह ही थी।
बिजली की खराबी की भू– राजनीति: गड़बड़ी से कहीं अधिक
हाइब्रिड युद्ध में, साइबर हमले, दुष्प्रचार और आर्थिक दबाव जैसे पारंपरिक और अपरंपरागत साधनों का इस्तेमाल विरोधियों को खुले युद्ध की दहलीज़ से नीचे गिराने के लिए एक साथ किया जाता है। पावर ग्रिड, फाइबर– ऑप्टिकल केबल और औद्योगिक सॉफ्टवेयर नए युद्ध क्षेत्र हैं। अगर ब्लैकआउट जानबूझकर किया गया था तो यह बिल्कुल सही बैठता है: एक नॉन– काइनेटिक, अस्वीकार्य हमला जिसका व्यापक भौतिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव होगा जो ग्रिड प्रणालियों की जटिलताओं से छिपा हुआ है और रूस द्वारा की गई पिछली कार्रवाईयों में भी दिखाई देता है।[viii]
यूरोप में तनावपूर्ण माहौल, ट्रान्सअटलांटिक संबंधों में अनिश्चितता और यूक्रेन में चल रहे युद्ध से चिन्हित, ने पश्चिम के खिलाफ रूसी हाइब्रिड युद्ध के एक सुप्रलेखित अभियान को हवा दी।[ix] मास्को का रणनीतिक लक्ष्य स्पष्ट थाः यूरोपीय एकता को खंडित करना और यूक्रेन के समर्थन को कमज़ोर करना, जिससे विघटनकारी हमलों के लिए एक स्पष्ट मकसद तैयार हो सके।[x] साल 2024 के आखिर और 2025 की शुरुआत में, यूरोपीय खुफिया एजेंसियों ने गंभीर चिंताएं जताईं। जैसे, डच सैन्य खुफिया एजेंसियों ने एक सार्वजनिक सुविधा के डिजिटल नियंत्रण तंत्र को नुकसान पहुँचाने के रूसी प्रयास का पर्दाफाश किया। यह घटना साइबर हमलों एवं दुष्प्रचार के प्रयासों को मिलाकर पश्चिमी समाजों में आंतरिक कलह पैदा करने की व्यापक रणनीति को दर्शाती है।
डिजिटल अवसंरचना पर नियंत्रण अब महत्वपूर्ण भू– राजनीतिक महत्व रखता है। इस संदर्भ में, इबेरियन ब्लैकआउट को एक साइबर अभियान के रूप में देखा जा सकता है जिसका उद्देश्य यूरोप की सहनशक्ति का परीक्षण करना, अनिश्चितता फैलाना और अस्वीकार्य किंतु प्रभावशाली तरीके से दबावकारी शक्ति का प्रदर्शन करना है। यूरोपीय संघ और नाटो क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर, अस्वीकार्य ब्लैकआउट, गैर– सरकारी तत्वों के कई रणनीतिक लक्ष्यों को आगे बढ़ा सकता है। यह आवश्यक बुनियादी ढांचे को बाधित करने और पश्चिम की संकटकालीन प्रतिक्रिया का आकलन करने की उनकी क्षमता को प्रदर्शित करेगा और वह भी खुले युद्ध की दहलीज पर रहते हुए।
महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं के संकट का मुकाबला
इबेरियन ग्रिड के पतन जैसी भविष्य की आपदा को रोकने के लिए, यूरोप को एक बहुस्तरीय रक्षा रणनीति अपनानी होगी जो उसके अवसंरचनाओं को मजबूत बनाए और साथ ही आक्रामकता को भी रोके। बहुस्तरीय रक्षा रणनीति भौतिक, डिजिटल और संस्थागत क्षेत्रों में अतिव्यापी सुरक्षा उपायों को एकीकृत करती है ताकि व्यवधानों को रोका जा सके, उनका जवाब दिया जा सके और उनसे उबरा जा सके। इसके लिए तकनीकी, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में एक समन्वित प्रयास की जरूरत है।
ऊर्जा प्रणालियों में उन्नत एआई– संचालित साइबर सुरक्षा को शामिल कर और उन्हें लचीलेपन के लिए डिजाइन कर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण करना जरूरी है। इसमें अतिरेक (रिडन्डन्सी) जोड़ना और ब्लैक स्टार्ट क्षमताएं सुनिश्चित करना शामिल हैं, जिससे बिजली संयंत्रों को पूर्ण ब्लैक आउट के दौरान बाहरी पावर ग्रिड पर निर्भर हुए बिना स्वतंत्र रूप से फिर से चालू करने की अनुमति होती है। इन उन्नयनों का प्रबंधन सरकारों के साथ– साथ निजी क्षेत्र के समन्वित प्रयासों से किया जाना चाहिए।[xi]
इस मजबूत रक्षात्मक रुख को एक अडिग निवारक नीति का समर्थन प्राप्त होना चाहिए। दुर्भावनापूर्ण तत्वों, चाहे वे राष्ट्र प्रायोजित हों या नहीं, को निश्चित और गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यूरोपीय संघ और नाटो को हमलों के लिए त्वरित, सार्वजनिक रूप से जिम्मेदारी तय करने के स्पष्ट सिद्धांत के प्रति प्रतिबद्ध होना चाहिए और समन्वित एवं दंडात्मक प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार रहना चाहिए। यह समझते हुए कि हाइब्रिड हमले का लक्ष्य अराजकता फैलाना है, सरकारों को स्पष्ट संचार रणनीतियां और जन जागरूकता अभियान लागू करने चाहिए।
निष्कर्ष: एक काले दिन का अनचाहा सबक
अप्रैल 2025 में इबेरियन ग्रिड का अचानक से ठप्प पड़ जाना, हाइब्रिड युद्ध और साइबर भू– राजनीति के नज़रिए से देखने पर एक चिंताजनक संभावना नज़र आती है, यह एक जानबूझकर की गई कार्रवाई थी, जिसका उद्देश्य उसी जटिलता का फायदा उठाना था जो इसे जिम्मेदार ठहराए जाने से बचाती है। इस विश्लेषण का तर्क है कि ठप्प पड़ जाने की वजहें, जिनमें गति, पैमाना, समय संबंधी विसंगतियां और प्रतिकूल साइबर सिद्धांतों के साथ संरेखण शामिल हैं, एक नए प्रकार के संघर्ष के अनुरूप हैं।
ब्लैकआउट युद्ध और हाइब्रिड ऑपरेशन अब केवल सैद्धांतिक अवधारणाएं नहीं रह गए हैं; ये आधुनिक शासन कला में सक्रिय उपकरण बन गए हैं। इस संदर्भ में, इबेरियन ब्लैकआउट एक अलग– थलग सिस्टम की खराबी से ज्यादा क्षमता, इरादे और जबरदस्ती के प्रभाव प्रतीत होते हैं। असली खतरा ऐसी घटनाओं को दुर्घटना मानकर अस्वीकार करना है क्योंकि वे तकनीकी रूप से संभव हैं। ऐसे युग में जब बुनियादी ढांचा या इमारतें एक हथियार और लक्ष्य दोनों हो सकता है, अस्पष्टता ही रणनीति है।
तकनीकी व्याख्या को कभी भी रणनीतिक व्याख्या पर तरजीह नहीं दी जानी चाहिए, विशेष रूप से जब विरोधी दोनों को मिलाने में माहिर हों। इसलिए, इबेरियन ब्लैकआउट को न केवल एक संकट के रूप में बल्कि एक चेतावनी के रूप में भी देखा जाना चाहिए। आज के युद्धक्षेत्रों में कोडबेस, नियंत्रण कक्ष और केबल शामिल हैं जो हमारे दैनिक जीवन को शक्ति प्रदान करते हैं। अब सबसे बड़ा खतरा यह नहीं है कि ऐसे हमले जारी रहेंगे बल्कि यह है कि हम एक बार फिर बिना तैयारी की स्थिति में होंगे।
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*गगनदीप बजार, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
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