सारांश: भारत और दक्षिण कोरिया के बीच सेमीकंडक्टर साझेदारी, अमेरिका– चीन तकनीकी प्रतिद्वंद्विता के जवाब में रणनीतिक गठबंधन को दर्शाती है। जैसे– जैसे सेमीकंडक्टर भू– राजनीतिक तनावों का केंद्र बिंदु बनते जा रहे हैं, दोनों देश तकनीकी आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन को बढ़ाने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं। नीतिगत योजना, अनुसंधान में निवेश, क्षमता निर्माण और पूरक शक्तियों का लाभ उठाकर भारत और दक्षिण कोरिया हिंद– प्रशांत क्षेत्र में मजबूत सेमीकंडक्टर पारितंत्र (इकोसिस्टम) हेतु आधार बना रहे हैं।
1. अमेरिका– चीन चिप युद्ध
साल 2019 से उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीक तक चीन की पहुँच पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण चल रहे अमेरिका– चीन चिप युद्ध ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है और एआई (AI), 5जी (5G) एवं रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भू– राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। बदले में, चीन ने “मेड इन चाइना 2025” [i] 863 कार्यक्रम, और “बिग फंड” जैसी पहल शुरू की। फिर भी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इंटरनेशनल कॉरपोरेशन (एसएमआईसी/ SMIC) जैसी चीनी कंपनियां नीदरलैंड की एडवांस्ड सेमीकंडक्टर मैटेरियल्स लिथोग्राफी (एएसएमएल/ ASML) और अमेरिकी मूल के इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (ईडीए/ EDA) सॉफ्टवेयर जैसी विदेशी प्रौद्योगिकियों पर निर्भर रहना जारी रखे हुए हैं। इस प्रतिद्वंद्विता ने सेमीकंडक्टर विनिर्माण और व्यापार पर निर्भर देशों के लिए बहुत अनिश्चितता और जोखिम पैदा कर दिया है जिससे उन्हें कमियों को दूर करने और अधिक विविध पारितंत्र को सुरक्षित करने हेतु अपनी रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
2. दक्षिण कोरिया और भारत पर प्रभाव: अनुवर्ती सहयोग
अमेरिका– चीन के बढ़ती तकनीकी प्रतिद्वंद्विता, विशेष रूप से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में, ने, भारत और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को भी अपनी औद्योगिक रणनीतियों को पुनःसमायोजित करने के लिए बाध्य किया है।
सैमसंग और एसके हाइनिक्स जैसी प्रमुख वैश्विक कंपनियों के साथ दक्षिण कोरिया, वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख नोड है जो 70% से अधिक डीआरएएम (DRAM –DYNAMIC RANDOM ACCESS MEMORY) और आधे से अधिक एनएएनडी (NAND –NOT AND) फ्लैश मेमोरी[ii] का उत्पादन करता है। हालांकि बढ़ते भू– राजनीतिक दबावों और आपूर्ति श्रृंखला की कमियों ने दक्षिण कोरिया को अपनी अर्धचालक उत्पादन क्षमताओं को सुरक्षित एवं विविधतापूर्ण बनाने के प्रयासों को तेज करने के लिए प्रेरित किया है।
भू– राजनीतिक दबावों के जवाब में, सियोल घरेलू उत्पादन और तकनीकी नेतृत्व पर दोगुना ज़ोर दे रहा है। दक्षिण कोरिया ने घरेलू उत्पादन को बेहतर करने और एआई अनुप्रयोगों के लिए उच्च– बैंडविड्थ मेमोरी समेत अगली पीढ़ी की चिप तकनीकों में अग्रणी बनने के लिए 2021 में 450 अरब डॉलर की “ के– सेमीकंडक्टर बेल्ट (K-Semiconductor Belt)” पहल शुरू की थी।[iii] वे दक्षिण कोरिया में सेमीकंडक्टर अनुसंधान एवं विकास और उत्पादन में निवेश करने वाली घरेलू और विदेशी कंपनियों को कर प्रोत्साहन एवं बुनियादी ढांचागत सहायता भी प्रदान कर रहे हैं।
भारत, हालांकि अभी सेमीकंडक्टर निर्माण के शुरुआती दौर में है, वैश्विक मूल्य श्रृंखला में एक प्रतिस्पर्धी विकल्प के रूप में अपनी स्थिति बनाने के लिए वर्तमान आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों का लाभ उठा रहा है। भारत का 10 अरब डॉलर का सेमीकंडक्टर कार्यक्रम सरकार के ठोस नीतिगत समर्थन को दर्शाता है।
माइक्रोन टेक्नोलॉजी और एएमडी(AMD) जैसी अमेरिकी कंपनियों ने भारत में निवेश की घोषणा की है जो अंतरराष्ट्रीय रुचि का संकेत है।[iv] भारत का बहुराष्ट्रीय टाटा समूह भी गुजरात में चिप निर्माण इकाईयां बनाने की योजना तैयार कर रहा है।[v] हालाँकि, भारत अभी भी अपर्याप्त अवसंरचना, प्रतिभा की कमी और परियोजना निष्पादन में देरी जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है।
इन बदलावों के बीच, भारत और दक्षिण कोरिया द्विपक्षीय सहयोग के माध्यम से लचीली और विविधीकृत सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखलाएं बनाने हेतु अपने हितों को संरेखित कर रहे हैं। दक्षिण कोरिया राजनीतिक रूप से स्थिर और तकनीकी रूप से महत्वाकांक्षी साझेदारों की तलाश में है और भारत को दक्षिण कोरियाई निवेश एवं विशेषज्ञता से लाभ होगा। चिप डिजाइन, पैकेजिंग और डिस्प्ले तकनीक जैसे क्षेत्रों में उनका सहयोग एक साझा रणनीतिक नज़रिए का संकेत देता है।
यह उभरती हुई साझेदारी सुरक्षित, चीन– प्रत्यास्थी और उच्च स्तरीय तकनीकी पारितंत्र की ओर व्यापक हिंद– प्रशांत बदलाव को रेखांकित करती है जो भविष्य के लिए तैयार सेमीकंडक्टर सहयोग की नींव रखती है।
भारत की सक्रिय सेमीकंडक्टर नीतियों, विशेष रूप से अगस्त 2022 में शुरु की गई गुजरात की सेमीकंडक्टर रणनीति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिलचस्पी रखने वालों को आकर्षित किया। इसी गति को आगे बढ़ाते हुए, वेदांता ने भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के विकास हेतु अप्रैल 2023 में 20 कोरियाई डिस्प्ले ग्लास फर्मों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।[vi]
इसके बाद सितंबर 2023 में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईईएसए/ IESA) और कोरिया डिस्प्ले इंडस्ट्री एसोसिएशन (केडीआईए/ KDIA) के बीच हुए समझौता ज्ञापन ने संस्थागत गति पकड़ी गई।[vii] यह समझौता संयुक्त अनुसंधान एवं विकास, प्रदर्शन प्रौद्योगिकियों, कार्यबल विकास और तकनीकी आदान– प्रदान पर केंद्रित था।
इसके अलावा, भारत के सेमीकंडक्टर मिशन और अनुसंधान एवं विकास पहलों के साथ– साथ दक्षिण कोरिया के के– चिप्स (K-CHIPS) अधिनियम, जिसे फरवरी 2025 में राष्ट्रीय असेंबली द्वारा पारित किया गया था, के माध्यम से सहयोग कार्य किए जा रहे हैं।[viii] ये पर्याप्त निवेश एक मजबूत सेमीकंडक्टर पारितंत्र के निर्माण में सहयोग को बेहतर बना रहे हैं।[ix]
5 जून 2025 को नई दिल्ली में कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक पॉलिसी (केआईईपी) और अर्न्स्ट एंड यंग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित तीसरे कोरिया– भारत भावी अर्थव्यवस्था एवं उद्योग फोरम ने इस बात पर ज़ोर दिया कि किस प्रकार कोरिया का चिपमेकिंग नेतृत्व और भारत की डिजिटल अवसंरचना मिलकर अगली पीढ़ी के नवाचार को शक्ति प्रदान कर सकते हैं।[x]
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने कथित तौर पर मई 2025 में आंध्र प्रदेश में 5000 करोड़ रुपये की लागत से एक प्लांट सिटी बनाने का काम शुरू कर दिया है, जहाँ कोरियाई कंपोनेंट सप्लायर्स की मदद से कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन किया जाएगा।[xi] एसके हाइनिक्स कथित तौर पर भारत की सेमीकंडक्टर प्रोत्साहन योजनाओं का भी मूल्यांकन कर रहा था, विशेष रूप से पैकेजिंग और परीक्षण में।[xii] कोरियाई कंपनियां सेमीकंडक्टर पुर्जों और अनुसंधान एवं विकास के लिए गुजरात में दिलचस्पी दिखा रही हैं। यह सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को गहरा करने में बढ़ती दिलचस्पी को दिखाता है।[xiii]
दक्षिण कोरिया के लिए, भारत एक स्थिर, निवेश के अनुकूल गंतव्य प्रदान करता है जहाँ उपभोक्ता आधार बढ़ रहा है, कुशल मानव संसाधन उपलब्ध हैं और भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत सरकार द्वारा समर्थित अवसंरचनागत सहायता भी उपलब्ध है। बदले में भारत को कोरिया की तकनीकी विशेषज्ञता, पूंजी और पारिस्थितिकी तंत्र निर्माण क्षमताओं से लाभ मिलता है। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) द्वारा शुरु किया गया “चिप्स– टू– स्टार्टअप(Chips-to-Startup)” कार्यक्रम, जिसका उद्देश्य 85,000 सेमीकंडक्टर पेशेवरों को प्रशिक्षित करना है, इंटर्नशिप और कौशल विकास के माध्यम से दक्षिण कोरियाई फर्मों द्वारा मदद के उपयुक्त क्षेत्र हैं। [xiv]
निष्कर्ष
भारत और दक्षिण कोरिया की सेमीकंडक्टर साझेदारी आर्थिक योजना से कहीं अधिक का प्रतिनिधित्व करती है; यह दो नवाचार केंद्रों का रणनीतिक संमिलन है जो सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता, औद्योगिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाता है।
भारत की सेमीकंडक्टर नीतियों को दक्षिण कोरिया की विनिर्माण क्षमता के साथ जोड़कर, दोनों देश तकनीकी प्रगति के लिए मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं। यह गहरा होता सहयोग भारत और दक्षिण कोरिया के बीच क्षेत्रीय स्थिरता और साझा विकास को बढ़ावा देने में मदद करेगा। इस साझेदारी को मजबूत करने के लिए, दोनों पक्षों को संयुक्त अनुसंधान, नियमों को आसान बनाने और दीर्घकालिक सफलता के लिए कुशल श्रमिकों को प्रशिक्षित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
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*कुशुबु कुमारी यादव , भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण:
[i] ORF Asia, n.d., Made in China 2025: Ambitions, Challenges, and Implications, available at: https://orcasia.org/made-in-china-2025
[ii] SSRN, “India–South Korea Semiconductor Collaboration: A Strategic Pathway to Technological Resilience and Supply Chain Diversification,” available at: https://papers.ssrn.com/sol3/papers.cfm?abstract_id=4854445
[iii] KBS WORLD, ““K‑Semiconductor Belt Strategy” to Establish the World’s Largest Supply Network by 2030,” KBS WORLD, published May 17, 2021, available at: https://world.kbs.co.kr/service/contents_view.htm?board_seq=403357.
[iv] Kumarasamy, D., and Jain, V., “India–South Korea CEPA 2.0: Potentials and Opportunities for Supply Chain Integration,” Journal of Social and Economic Development, 2025, available at: https://doi.org/10.1007/s40847-025-00452-x
[v] India Briefing, Melissa Cyrill & Yashoda Kapur, “Setting Up a Semiconductor Fabrication Plant in India: What Foreign Investors Should Know,” India Briefing, June 3, 2025, available at: https://www.india-briefing.com/news/setting-up-a-semiconductor-fabrication-plant-in-india-what-foreign-investors-should-know-22009.html
[vi] The Hindu BusinessLine, “Vedanta signs MoU with 20 Korean companies for display glass business,” BusinessLine, April 17, 2023, available at: https://www.thehindubusinessline.com/companies/vedanta-signs-mou-with-20-korean-companies-for-display-glass-biz/article66747746.ece
[vii] India Electronics & Semiconductor Association, “India Electronics and Semiconductor Association (IESA) Signs MoU with Korea Display Industry Association (KDIA),” CXOToday, published September 15, 2023, available at: https://cxotoday.com/press-release/india-electronics-and-semiconductor-association-iesa-signs-mou-with-korea-display-industry-association-kdia/
[viii] Chosun biz , “K-Chips Act Passes National Assembly, Increasing Semiconductor Tax Credit Rates,” available at: https://biz.chosun.com/en/en-policy/2025/02/27/FZ5DBVBG25CR7A2BUUXWKVVCBU/
[ix] Kim & Chang, “Enactment of the K‑Chips Act – Government’s Support and Regulatory Policies for the Semiconductor Industry,” Kim & Chang Insights, May 22, 2023, available at: https://www.kimchang.com/en/insights/detail.kc?sch_section=4&idx=27331
[x] Asian Community News, “Korea‑India Forge Strategic Semiconductor Alliance at 3rd Future Economy & Industry Forum,” Asian Community News, published June 9, 2025, reporting on the high‑level Korea‑India Economic Policy forum in New Delhi, available at: https://www.asiancommunitynews.com/korea-india-forge-strategic-semiconductor-alliance-at-3rd-future-economy-industry-forum/
[xi] Times of India, “LG begins work on massive Rs 5,000‑crore plant in Andhra’s Sri City,” Times of India, May 9, 2025, available at: https://timesofindia.indiatimes.com/business/india-business/lg-begins-work-on-massive-rs-5000-crore-plant-in-andhras-sri-city/articleshow/121028818.cms
[xii] The Indian Express, “South Korea’s SK Hynix looking to set up chip packaging plant in India,” available at:
https://indianexpress.com/article/business/semiconductor-manufacturing-in-india-south-korean-chipmaker-sk-hynix-8828128/
[xiii] Department of Science & Technology–Gujarat, Gujarat Semiconductor Policy 2022–27, July 2022, available at: https://dst.gujarat.gov.in/Home/GujaratSemiconductorPolicy
[xiv] MeitY, Chips to Startup (C2S) Programme, available at: https://www.c2s.gov.in/