परिचय
अफ़्रीकी महाद्वीप तेज़ी से ऊर्जा में बदलाव के दौर से गुज़र रहा है, जहाँ सौर ऊर्जा महाद्वीप में बिजली की कमी को पूरा करने और ऊर्जा आपूर्ति को डीकार्बनाइज़ करने में अहम भूमिका निभा रही है। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आई. एस. ए. ) एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच के तौर पर उभरा है जो क्षमता निर्माण, वित्त पोषण तंत्र, नवचार पहल, और परियोजनाओ के ज़रिए अफ़्रीकी देशों की सहायता कर रहा है।
अफ़्रीका को ऊर्जा उपलब्धता और ऊर्जा विश्वनीयता की बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, खासकर सब-सहारा अफ़्रीका में, भले ही इस इलाके में प्रचुर सौर संसाधन हैं। सब-सहारा अफ़्रीका में 620 मिलियन से ज़्यादा लोगों के पास बिजली नहीं है और लगभग 730 मिलियन लोग खाना पकाने के लिए ठोस बायोमास के पारंपरिक स्रोत के इस्तेमाल पर निर्भर हैं।[i] सौर तकनीक, जिसमें फोटो वोल्टेइक (पी.वी.) यूटिलिटी, डिस्ट्रिब्यूटिव मिनी ग्रिड, रूफटॉप इंस्टॉलेशन, भण्डारण जैसे पूरक ऊर्जा समाधान और फ्लोटिंग सोलर शामिल हैं[ii], ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करते हुए उपलब्धता बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को तेज़ी से आगे बढ़ाने का मौका देती हैं।
सौर क्षमता को संस्थापित क्षमता और सेवाओं में बदलने के लिए बहुपक्षीय सहयोग,दक्षिण-दक्षिण सहयोग और मिश्रित वित्तपोषण बहुत ज़रूरी हैं। भारत में आई.एस.ए. का मुख्यालय ऐसे सहयोग का एक उदाहरण है। आई. एस. ए. एक संधि आधारित अंतर सरकारी संगठन है जिसे भारत और फ्रांस ने 2015 में मिलकर शुरू किया था, जो अफ़्रीका समेत अपने सदस्य देशों में सौर ऊर्जा परिनियोजनाओ को तेज़ करने के लिए समर्पित है। भारत विकासशील देशों में सौर ऊर्जा तक पहुंच बढ़ाने और परियोजनाओ को जोखिम मुक्त करने के लिए वित्त, तकनीकी विशेषज्ञता और नीति समर्थन देकर आई.एस.ए. के साथ नेत्तृत्व की मुख्य भूमिका निभा रहा है।
इस संदर्भ में, यह पेपर बिजली पहुंच और ऊर्जा विश्वनीयता की चुनौतियों से निपटने में आई.एस.ए. केअ धिदेश और साधन की बात करता है। यह अफ़्रीका के साथ अपने सम्बन्धो को आकार देने में आई.एस.ए. के अंदर भारत की भूमिका का भी आकलन करता है और इससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करता है।
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन: मुख्य अधिदेश और साधन
आई.एस.ए. का काम नौ विषय वाले कार्यक्रम में फैला है,[iii] जो सोलर रूफटॉप, मिनी-ग्रिड, खेती के लिए सोलर एप्लीकेशन, किफायती वित्त, सोलर पार्क, क्षमता निर्माण कार्यक्रम, एक सूरज एक विश्व एक ग्रिड (ओएस.ओडब्लु.ओजी.), सौरकरण में होने वाले जोखिम को काम करने की पहल और सोलर टेक्नोलॉजी एप्लीकेशन रिसोर्स सेंटर (स्टार -सी ) पर केंद्रित हैं। ये कार्यक्रम बैंकयोग्य सौर परियोजनाओं को बढ़ावा देने और निजी और रियायती वित्त को आकर्षित करने के लिए तकनीकी मदद, तैयारी का आकलन, प्रोजेक्ट पाइपलाइन डेवलपमेंट, मानक खरीद ढांचा और तकनीकी-आर्थिक अध्ययन में सहायता देते हैं। इस तरीके का एक खास पहलू पम्प, मिनी-ग्रिड और रूफटॉप सिस्टम जैसे सौर उपकरण की मांग को इकट्ठा करना है, जिससे लेन-देन लागत को कम करने में मदद मिल सके।
आई.एस.ए. की मुख्य पहल, "टुवर्ड्स 1000" स्ट्रैटेजी का मकसद 2030 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाना है, ताकि 1,000 गीगावाट सौर क्षमता लगाई जा सके, एक अरब लोगों तक ऊर्जा की पहुंच बढ़ाई जा सके, और कार्बन उत्सर्जन को हर साल एक अरब टन कम किया जा सके।[iv]
आई.एस.ए. ने वर्ल्ड बैंक, ग्लोबल एनर्जी अलायंस फॉर पीपल एंड प्लैनेट और अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी के साथ मिलकर दुनिया भर में तकनीकी मदद, जोखिम कम करने की सुविधा, निजी निवेश के ज़रिए वित्त की सुविधा और ज्ञान के आदान प्रदान को बढ़ाया है। साथ ही आई.एस.ए. नीति बनाने वालों, फाइनेंसरों, और तकनीकी कौशल विशेषज्ञ को एक साथ लाता है।
अभी वैश्विक दक्षिण में ज़्यादातर सौर परियोजनाओं को आई.एस.ए से सहयोग मिल रहा है, जिसमें अफ़्रीका में 20 से ज़्यादा परियोजनाएं शामिल हैं, जो स्कूलों,चिकित्सा सुविधाओं, सिंचाई प्रणाली और ग्रामीण मिनी-ग्रिड के लिए बिजली की सुविधा देते हैं, जिससे दूर-दराज के इलाकों में ऊर्जा सुरक्षा बेहतर होती है।[v]
आई.एस.ए में भारत की भूमिका और अफ़्रीका में इसकी भागीदारी
भारत सौर ऊर्जा के माध्यम से वर्ष 2030 तक 280 गीगावाट[vi] बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखता है। वर्ष 2014 में जहाँ सौर ऊर्जा उत्पादन केवल 3 गीगावाट था, वहीं यह बढ़कर 2025 तक 129 गीगावाट[vii] हो गया है। यह आई.एस.ए. के अधिदेश के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आई.एस.ए. का एजेंडा वैश्विक दक्षिण के लिए पर्याप्त ऊर्जा उपलब्धता के साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भारत की प्रतिबद्धता को भी दिखाता है। भारत आई.एस.ए की रणनीति बनाने में सहायता करता है, ज्ञान हस्तानांतरण को बढ़ावा देता है, और तकनिकी सहयोग देता है। एक मज़बूत विनिर्माण क्षेत्र और नीलामी आधारित परियोजना आवंटन मॉडल की सहयता से सौर क्षमता मे भारत की घरेलू उपलब्धियां आई.एस.ए. सदस्य देशों के लिए कीमती सबक और रूपरेखा देती हैं। भारत का प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा दृष्टीकोण - ओएस.ओडब्लु.ओजी.[viii], आई.एस.ए. के साथ एक अहम कार्यक्रम है। इसका मकसद सौर ऊर्जा साझा करने के लिए एक वैश्विक इंटरकनेक्टेड ग्रिड बनाना है, जो असल में सूरज की 'हमेशा चलने वाली ऊर्जा ' को एक भरोसेमंद 24/7 वैश्विक संसाधन में बदलना है।
आई.एस.ए. की एक और पहल में क्षमता निर्माण कार्यक्रम शामिल है, जिसके तहत कई देशों में (सेनेगल,इथियोपिया,सोमालिया,घाना,कैमरून,कोट डी आइवर) ज़रूरी कौशल की कमी को दूर करने के लिए स्टार-सी सेंटर बनाए गए हैं।[ix] भारत इस पहल में एक अहम सहयोगी है, जो संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (यू .एन .आई .डी .ओ. ) और फ्रांस द्वारा शुरू किया था। इस अभियान ने सौर परियोजनाओं में तेज़ी लाने और संस्थागत स्वामित्वा को बढ़ावा देने के लिए 2000 से ज़्यादा अफ़्रीकी पेशेवरों को प्रशिक्षण दिया है।[x] आई.एस.ए और इन्वेस्ट इंडिया द्वारा शुरू किया गया 'द सोलरएक्स ग्रैंड चैलेंज' प्लेटफ़ॉर्म, मार्गदर्शन और इनक्यूबेशन के ज़रिए नवाचार और सोलर स्टार्टअप्स को बढ़ावा देता है। 2022 में इसका पहला चरण अफ़्रीका पर केंद्रित था। 28 देशों से आवेदन मिले, जिनमें से 20 स्टार्टअप चुने गए, और इनमें सात का नेतृत्व महिलाओं ने किया। इन स्टार्टअप्स को विकसित करने और सौर ऊर्जा के व्यवसायीकरण हेतु मार्गदर्शकों व निवेशकों से जोड़ा जा रहा है, जिससे स्थानीय उद्यम को बढ़ावा मिल रहा है। इसे और सफल बनाने के लिए आई.एस.ए. ने 2023 में बेनिन, घाना, नाइजीरिया, सेनेगल आदि 13 पश्चिमी अफ़्रीकी देशों के प्रतिनिधियों हेतु भारत में अध्ययन दौरे का आयोजन किया, जिससे सौर ऊर्जा परिनियोजन और ग्रिड इंटीग्रेशन मॉडल्स पर जानकारी साझा की जा सके।[xi]
आई.एस.ए. ने 2024 में अफ़्रीका में सौर परियोजनाओं हेतु निजी निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से ग्लोबल सोलर फैसिलिटी (जीएसएफ) के तहत अफ़्रीका सोलर फैसिलिटी (एएसएफ) लॉन्च की।[xii] इसके माध्यम से भारत अपने घरेलू अनुभव के आधार पर वित्तीय व तकनीकी सहायता दे रहा है और जीएसएफ में 25 मिलियन [xiii] अमेरिकी डॉलर का योगदान कर अफ़्रीका में सौर व वितरित अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा दे रहा है। 2025 में, आई.एस.ए. ने सात अफ्रीकी देशों के साथ मिलकर बड़े सौर ऊर्जा परियोजनओं के लिए व्यवहारता अध्ययन शुरू कीं, जिसमें फ्लोटिंग सोलर टेक्नोलॉजी जैसे उन्नत समाधान शामिल हैं, जिसमें भारत की नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एन. टी. पी. सी.) एक अहम तकनीकी और संस्थागत भूमिका निभा रही है। ऐसी परियोजनाएं ऊर्जा की कमी को दूर करने और बिजली की पहुँच को बढ़ाने में सहायक है, जो की अफ़्रीका के सतत विकास में बहुत ज़रूरी हैं।[xiv] इस बारे में,आईएसए की 8 वीं असेंबली ने भारत में वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) हब बनाने की घोषणा की, जिससे ग्लोबल सोलर गवर्नेंस मज़बूत होगा, " सोलर के लिए सिलिकॉन वैली" के तौर पर देखे गए इस हब का मकसद सौरकरण के उन्नत तकनीक, अनुसन्धान एवं विकास, नवाचार और ज्ञान हस्तानांतरण करना है।
अफ़्रीका की चुनौतियां
तरक्की के बावजूद नियामक समन्वय, समय पर परियोजना पूर्णता, राजनीतिक स्थिरता, वित्त और नवाचार जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। अफ़्रीका के सोलर स्टार्टअप्स को वित्तीय बाधाओं, नियामक अनिश्चितता और बुनियादी ढांचे की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।[xv] ज़्यादा लागत, बिखरे हुए बाजार, अविकसित पूंजी बाजार और भिन्न भिन्न आपूर्ति श्रृंखला विकास और नवाचार में रुकावट डालते हैं। जिस वजह से विकेंद्रीकृत सौर उधम को समय पर भुगतान नहीं हो पाता है।
इसके अलावा बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा हेतु तकनीकी क्षमता सीमित है, और उच्च परिवहन लागत, कमजोर वेयरहाउसिंग व सप्लाई चेन की कमियां, विशेषकर दूर-दराज क्षेत्रों में, परियोजनाओं की लागत बढ़ा देती हैं।[xvi] इसके अलावा, कमज़ोर प्रशासन निवेशको का भरोसा कम करते है और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में रुकावट आती है। ये आई.एस.ए. की नीतियों को असरदार तरीके से लागू करने में ज़रूरी चुनौतियां हैं, जिन पर ध्यान देने की ज़रूरत है।
आगे का रणनीति
आईएसए अफ़्रीकी महाद्वीप के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य का एक प्रमुख प्रेरक है, जो नियामक सहायता, तकनीकी क्षमता, वित्त पोषण और उद्यमशीलता को बढ़ावा देता है। हालांकि पूरी सौर क्षमता का विकास वित्त, नियमन, संस्थागत क्षमता और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों के समाधान पर निर्भर है।
साथ ही,आईएसए के कार्यक्रम को महाद्वीपीय ढांचे , जैसे कि अफ्रीकन यूनियन के पावर इंटीग्रेशन प्लान और मिशन 300[xvii], के साथ आने से अफ़्रीका की सौरकरण की संभावना बढ़ती है। भारत का नेतृत्व और आईएसए का बढता वैश्विक प्रसार इस गठबंधन को सोलर-पावर्ड अफ़्रीका बनाने की स्थिति में लाती है, जिससे वैश्विक दक्षिण में सतत ऊर्जा सहयोग मज़बूत होता है।
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*जियाउल हसन भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली, में एक शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण: व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं।
[i] ओउएड्राओगो, नादिया एस. 2017. “अफ़्रीका एनर्जी फ्यूचर: अल्टरनेटिव सिनेरियो और सस्टेनेबल डेवलपमेंट स्ट्रेटेजी के लिए उनके असर।” एनर्जी पॉलिसी 106 (जुलाई): 457–71. https://doi.org/10.1016/j.enpol.2017.03.021.
[ii]विकरमैन, जेरेमी. 2024. “फ्लोटिंग सोलर प्लांट्स की बुनियादी बातें — रेटेड पावर.” Ratedpower.com. 14 मार्च, 2024. https://ratedpower.com/glossary/floating-solar/.
[iii]इंटरनेशनल सोलर अलायंस। 2025. Isa.int. 2025. https://isa.int/membership.
[iv] “भारत उज्ज्वल चमकता है!” 2024. Pib.gov.in. 2024. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2071486®=3&lang=2.
[v]“केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रहलाद जोशी का सातवीं ऊर्जा परियोजना पर संबोधन
ISA की आम सभा।” 2024. Pib.gov.in. 2024.
https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2070668®=3&lang=2.
[vi] Pib.gov.in. (2023). सरकार ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है: केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री भगवंत खुबा. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1944145®=3&lang=2.
[vii] “इंडियाज़ सोलर मोमेंटम.” 2025. Pib.gov.in. 6 दिसंबर, 2025.
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2199729®=3&lang=2.
[viii] उक्त(ibid)
[ix]“इंटरनेशनल सोलर अलायंस।” 2025b. Isa.int. 2025. https://isa.int/star-c.
[x]मैगज़ीन, pv. 2024. “इंटरनेशनल सोलर अलायंस नए प्रोजेक्ट्स और बेहतर सहयोग से अफ़्रीका में सोलर विस्तार को बढ़ावा दे रहा है।” pv मैगज़ीन इंडिया। 29 अगस्त, 2024. https://www.pv-magazine-india.com/press-releases/international-solar-alliance-catalyses-solar-expansion-in-africa-with-new-projects-and-enhanced-collaboration/.
[xi]“इंटरनेशनल सोलर अलायंस और वेस्ट अफ्रीकन पावर पूल ने सोलर डिप्लॉयमेंट में बेस्ट प्रैक्टिस शेयर करने के लिए नई दिल्ली में 13 अफ्रीकी देशों की मेज़बानी की।” 2023. Pib.gov.in. 2023. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1899198®=3&lang=2.
[xii]“अफ़्रीका सोलर फैसिलिटी: सोलर के प्रोडक्टिव इस्तेमाल के लिए खास फाइनेंसिंग को बढ़ावा देना।” 2025. Https://Isaassembly.org. 29 अक्टूबर, 2025. https://isaassembly.org/high_evel_conference/1115_1230_hours_Africa_Solar_Facility_Catalysing_tailored_financing_for_productive_use_of_solar.pdf.
[xiii]“इंटरनेशनल सोलर अलायंस की ग्लोबल सोलर फैसिलिटी को 35 मिलियन डॉलर का कैपिटल कंट्रीब्यूशन मिलने वाला है।” 2023. Pib.gov.in. 31 अक्टूबर, 2023. https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1973514®=3&lang=2 .
[xiv] शर्मा, अभिमन्यु. 2025. “ISA, NTPC 7 अफ्रीकी देशों के साथ त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे
सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए राष्ट्र।” CNBCTV18. 9 अप्रैल, 2025.
https://www.cnbctv18.com/market/isa-ntpc-to-sign-tripartite-agreements-with-7-african
राष्ट्र-सौर-ऊर्जा-परियोजनाओं-के-लिए-19587018.htm.
[xv]इंटरनेशनल सोलर अलायंस की असेंबली का छठा सेशन। 2023. इंटरनेशनल
सोलर अलायंस। 31 अक्टूबर, 2023।
https://isaassembly.org/pdf/english/20.%20Agenda%20Item%2013.%20Annual%20Report
202023%20of%20the%20ISA_ISA_A.06_WD.06.pdf.
[xvi]इलियट टॉटमैन. 2025. “क्लीन एनर्जी की मांग में अफ़्रीका का सोलर इंपोर्ट बढ़ा।” एनर्जी न्यूज़
नेटवर्क। 8 अक्टूबर, 2025. https://energy-news-network.com/industry-news/africas-solar
स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए आयात में तेजी.
[xvii]“मिशन 300 अफ़्रीका को पावर दे रहा है।” 2023. वर्ल्ड बैंक। 2023. https://www.worldbank.org/en/programs/energizing-africa/dashboard.