भारतीय वैश्विक परिषद (आईसीडब्ल्यूए/ICWA) और रशन इंटरनेशनल अफेयर्स काउंसिल (आरआईएसी/ RIAC) ने 20 फरवरी 2026 को मॉस्को में “भारत– रूस: बदलती विश्व व्यवस्था में सहयोग की रूपरेखा” विषय पर अपने वार्षिक संवाद के 9वें संस्करण का आयोजन किया।
उद्घाटन भाषण रूस के उप–विदेश मंत्री महामहिम आंद्रे रुडेंको; रूस में भारत के असाधारण एवं पूर्णाधिकारी राजदूत महामहिम विनय कुमार; आईसीडब्ल्यूए के संयुक्त सचिव अभिजीत चक्रबर्ती और आरआईएसी के महानिदेशक डॉ. इवान टिमोफीव ने दिया।
तीन सत्रों में हुआ यह संवाद भारत– रूस संबंधों के वैश्विक, क्षेत्रीय और द्विपक्षीय पहलुओं पर केंद्रित था। यह संवाद 4-5 दिसंबर, 2025 को 23वें भारत–रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हाल ही में भारत की राजकीय यात्रा की पृष्ठभूमि में हुआ।
दिसंबर में 23 वें भारत– रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत की राजकीय यात्रा
पहले सत्र का विषय था “उभरते हुए बहुध्रुवीय विश्व के ध्रुव के तौर पर रूस और भारत।" इस सत्र की अध्यक्षता आरआईएसी (RIAC) की एशिया और यूरेशिया कार्यक्रम की प्रमुख जूलिया मेलनिकोवा ने की। सत्र के अन्य वक्ताओं में थे– एचएसई यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ वर्ल्ड इकॉनमी एंड इंटरनेशनल अफेयर्स की डीन डॉ. अनास्तासिया लिखाचेवा; आईसीडब्ल्यूए की शोध अध्येता डॉ. हिमानी पंत; एमजीआईएमओ यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज़ के अग्रणी शोध अध्येता डॉ. इवान सफ्रांचुक; एमजीआईएमओ यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ अप्लायड इंटरनेशनल एनालिसिस के प्रमुख डॉ. इगोर इस्तोमिन और आईसीडब्ल्यूए के रिसर्च एसोसिएट श्री अमन कुमार।
वक्ताओं ने बहुध्रुवीयता और बहुपक्षीय सहयोग पर भारत एवं रूस के विचार साझा किए, साथ ही वैश्विक शासन को बदलने के लिए बेहतर बहुपक्षवाद की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने ब्रिक्स पर भी अपने विचार साझा किए जिसमें विशेष रूप से 2026 में भारत की अध्यक्षता पर फोकस किया गया।
दूसरे सत्र का संवाद " रूस– भारत संबंध और यूरेशियाई दृष्टिकोण" विषय पर केंद्रित था। इस सत्र की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज़ के सेंटर फॉर यूरोपियन स्टडीज़ के प्रोफेसर और जीन मोनेट चेयर प्रोफेसर गुलशन सचदेवा ने की। वक्ताओं में शामिल थे– डॉ. इवान टिमोफीव, डीजी, आरआईएसी; रूस के विदेश मंत्रालय के एम्बेसडर– एट– लार्ज, राजदूत अलेक्जेंडर ट्रोफिमोव; आईसीडब्ल्यूए के वरिष्ठ शोध अध्येता डॉ. अतहर ज़फर; एमजीआईएमओ यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज़ की वरिष्ठ शोध अध्येता डॉ. जॉर्जी माचिटिडेज़; सेंटर फॉर सेंट्रल एशियन स्टडीज़ की कार्यवाहक निदेशक डॉ. एलेक्जेंड्रा पर्मिनोवा और आईसीडब्ल्यूए की शोध अध्येता डॉ. हिमानी पंत।
रूस के प्रतिभागियों ने यूरेशियाई सुरक्षा संरचना पर एक विशेष रिपोर्ट प्रस्तुत किया जबकि भारतीय प्रतिभागियों ने यूरेशिया पर भारतीय नजरिए पर बात की। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) पर फोकस करते हुए यूरेशिया में बहुपक्षवाद पर भी चर्चा की गई।
तीसरा सत्र " रूस और भारत के बीच व्यावहारिक सहयोग" विषय पर केंद्रित था। इस सत्र की अध्यक्षता रशन अकैडमी ऑफ साइंसेस के प्रिमाकोव नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ वर्ल्ड इकॉनमी एंड इटरनेशनल रिलेशंस के साउथ एशिया एंड इंडियन ओशन ग्रुप के कनिष्ठ शोध अध्येता डॉ. इवान शेड्रोव ने की। वक्ताओं में शामिल थे– एमजीआईएमओ यूनिवर्सिटी के वर्ल्ड इकॉनमी डिपार्टमेंट की प्रमुख डॉ. नतालिया गैलिस्टचेवा; जेएनयू के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज़ के प्रोफेसर गुलशन सचदेवा; स्कोल्कोवो स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में इंडियन स्टडीज़ डिपार्टमेंट की प्रमुख और आरएएस के इंस्टीट्यूट ऑफ ओरिएंटल स्टडीज़ की वरिष्ठ शोधार्थी एवं आरआईएसी सदस्य डॉ. लिडिया कुलिक और आईसीडब्ल्यूए के शोध सहयोगी श्री अमन कुमार।
वक्ताओं ने भारत– रूस आर्थिक संबंधों की बढ़ती अहमियत पर बात की, यह एक ऐसा रुझान है जिसे नई दिल्ली में हुए 23वें भारत– रूस शिखर सम्मेलन के बाद नई गति मिली है। वक्ताओं ने भारत रूस गतिशीलता समझौते, जिस पर शिखर सम्मेलन के दौरान सहमति बनी थी, के प्रयोजनों पर भी चर्चा की। सत्र का समापन भारत– यूरेशियाई आर्थिक संघ (ईएईयू/ EAEU) मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए/ FTA) और क्षमता निर्माण परियोजनाओं के लिए त्रिपक्षीय सहयोग की संभावनाओं की तलाश के साथ हुआ।
समापन भाषण आईसीडब्ल्यूए के संयुक्त सचिव श्री अभिजीत चक्रबर्ती और आरआईएसी के महानिदेशक डॉ. इवान टिमोफीव ने दिया।
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