सारांश: यूरोपीय संघ की अंतरिक्ष नीति में परिवर्तन दर्शाता है कि यूरोप की अंतरिक्ष रूपरेखा अब मुख्य रूप से विज्ञान पर केंद्रित न रहकर प्रतिस्पर्धा, रणनीतिक स्वायत्तता और सुरक्षा पर केंद्रित हो गया है। रूस– यूक्रेन युद्ध, ट्रांस–अटलांटिक संबंधों में अनिश्चितता और चीन की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं जैसी भू– राजनीतिक घटनाओं से प्रेरित इस नीति का उद्देश्य पहले से अधिक एकीकृत और रणनीतिक रूप से संचालित यूरोपीय अंतरिक्ष पारितंत्र बनाना है। यदि इसे सही तरीके से लागू किया जाए तो यह व्यावसायिक स्थान, साइबर– सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और रक्षा के क्षेत्रों में भारत–यूरोपीय संघ सहयोग के लिए नए रास्ते खोल सकता है।
परिचय
25 जून 2025 को शुरू किया गया ईयू स्पेस एक्ट (यूरोपीय संघ अंतरिक्ष अधिनियम) यूरोपीय अंतरिक्ष नीति में बड़ा संरचनात्मक सुधार है। यूरोपीय संघ के बहुत हद तक बिखरे हुए अंतरिक्ष नियमों में तालमेल बैठाने के लिए बनाया गया यह अधिनियम सभी सदस्य देशों पर लागू होने वाली एक ही संरचना तैयार करने की कोशिश करता है।[i] ऐसा करके, इसका उद्देश्य बाज़ार में हिस्सेदारी से संबंधित पुरानी बाधाओं को दूर करना, नियमों को लेकर अनिश्चितता कम करना और निवेश एवं नवाचार के लिए बेहतर माहौल बनाना है। नियमों का पालन करने की आवश्यकताओं को सरल बनाकर और अधिक कानूनी स्पष्टता देकर यह अधिनियम नियमों के बोझ को कम करने, अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा करने और पूरे यूरोपीय संघ में कारोबार के लिए निष्पक्ष और अनुमान लगाने योग्य माहौल बनाने की कोशिश करता है।[ii]
आर्थिक पहलुओं के अलावा, यह अधिनियम यूरोपीय रणनीतिक विचार में आए बड़े बदलाव को दिखाता है। अंतरिक्ष को अब आर्थिक मज़बूती, तकनीकी आत्मनिर्भरता, सुरक्षित संचार और रक्षा के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जा रहा है। इसी के तहत, यह अधिनियम यूरोप की रणनीतिक क्षमताओं को मज़बूत करने के लिए शुरू की गई एक से अधिक पहलों के बड़े पारितंत्र का हिस्सा है। इनमें यूरोपीय अंतरिक्ष बाज़ार में विविधता लाना, IRIS² (उपग्रह के माध्यम से मज़बूती, आपसी कनेक्टिविटी और सुरक्षा हेतु अवसंरचना) तारामंडल का विकास और यूरोपीय स्पेस शील्ड एक्शन प्लान जैसे नए प्रस्ताव शामिल हैं। इन सभी उपायों का उद्देश्य बाहरी प्रदाताओं पर निर्भरता को कम करना, अनिवार्य अवसंरचनाओं की सुरक्षा करना और तेज़ी से प्रतिस्पर्धी होते अंतरिक्ष माहौल में यूरोप की स्वतंत्र रूप से काम करने की क्षमता को बढ़ाना है।
परिवर्तन लाने वाले कारक
हालाँकि यूरोपीय संघ में नियमों में बिखराव को लंबे समय से चुनौती माना जाता रहा है लेकिन हाल की भू– राजनीतिक घटनाओं ने अंतरिक्ष के बारे में यूरोपीय विचार को पूरी तरह से बदल दिया है जिससे उसे अपनी रणनीति का व्यापक रूप से पुनर्मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित होना पड़ा है।
इस रणनीतिक परिवर्तन की एक बड़ी वजह 2022 में शुरू हुई रूस–यूक्रेन जंग थी। इस युद्ध ने आधुनिक युद्ध में अंतरिक्ष–आधारित संसाधनों (जैसे खुफिया जानकारी जुटाना, सुरक्षित संचार, नेविगेशन और युद्धक्षेत्र में तालमेल) के बढ़ते महत्व को उजागर किया।[iii] इसी दौरान यूरोप ने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस और साइबर टेक्नोलॉजी से बढ़ते संकटों पर भी ध्यान दिया। इसके जवाब में यूरोपीय संघ ने अपनी रक्षा क्षमता को मज़बूत करने के प्रयास तेज किए जिसके परिणामस्वरूप रणनीतिक दिशासूचक (स्ट्रैटेजिक कंपास) को अपनाया गया।[iv]
विशेष बात यह है कि रणनीतिक दिशासूचक ने अंतरिक्ष को रणनीतिक क्षेत्र के रूप में पहचाना, जिसकी संपत्तियां और सेवाएं यूरोप की सुरक्षा, मज़बूती और सैन्य क्षमता के लिए आवश्यक हैं।[v] इन कमियों को समझते हुए, यूरोपीय संघ ने अंतरिक्ष मामले में सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने वाला नज़रिया अपनाया। परिणामस्वरूप, 2023 में, यूरोप की सुरक्षा और रक्षा हेतु अंतरिक्ष रणनीति बनी, जिसमें महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अवसंरचनाओं की सुरक्षा, विरोधी गतिविधियों के खिलाफ लचीलेपन को बढ़ाने और रणनीतिक निर्भरता को कम करने को प्राथमिकता दी गई।[vi] इन सभी पहलों ने मिलकर यूरोपीय विचार में बुनियादी परिवर्तन किया। अंतरिक्ष को अब केवल वैज्ञानिक और व्यावसायिक गतिविधि के रूप में नहीं बल्कि रक्षा योजना, सीमा प्रबंधन, समुद्री निगरानी और संकट के समय कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक संसाधन के रूप में देखा जाने लगा।
वर्ष 2024 में इस रणनीतिक पुनर्मूल्यांकन को और गति मिली क्योंकि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्षेत्र की घटनाओं ने सुधारों की तत्काल आवश्यकता को और पुख़्ता किया। अमेरिका ने स्पेसX (SpaceX) जैसी निजी कंपनियों के माध्यम से व्यावसायिक अंतरिक्ष क्षेत्र में अपना दबदबा बनाए रखा,[vii] जबकि चीन ने सरकार समर्थित निरंतर निवेश और चांग'ई–6 (Chang’e-6) मिशन जैसी बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियों के माध्यम से अपनी महत्वकांक्षाओं को और गति दी है।[viii] साथ ही, वैश्विक अंतरिक्ष बाज़ार में यूरोप की घटती हिस्सेदारी[ix] और उसकी नवाचार क्षमता को लेकर चिंताओं ने उसकी लंबे समय की प्रतिस्पर्धात्मकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इन हालात को देखते हुए, यूरोपीय संघ ने यह निष्कर्ष निकाला कि धीरे– धीरे किए जाने वाले सुधार अब काफी नहीं होंगे। इन संरचनात्मक चुनौतियों को समझते हुए सितंबर 2024 में जारी द्राघी रिपोर्ट ( Draghi report) ने यूरोपीय संघ को बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता बढ़ाने और बाहरी निर्भरता कम करने के लिए बड़े बदलावों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।[x] रिपोर्ट में सिंगल मार्केट स्ट्रक्चर को और बेहतर तरीके से शामिल करने की बात कही गई और अंतरिक्ष को महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में शामिल किया गया। इससे अंतरिक्ष से जुड़े नियमों का एक साझा ढांचा बनाने का रास्ता साफ हुआ जिसके परिणामस्वरूप यूरोपीय संघ अंतरिक्ष अधिनियम 2025 की शुरुआत हुई।
साल 2025 और 2026 में हुई घटनाओं ने इन सुधारों के पीछे की रणनीतिक वजहों को और मज़बूत किया। अमेरिका के बदले रणनीतिक रुख– जिसमें प्रशुल्क (टैरिफ) संबंधि उपाय और ट्रांस–अटलांटिक सुरक्षा वादों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता शामिल है, ने, यूरोप के ज्यादा रणनीतिक स्वायत्तता की आवश्यकता को उजागर किया।[xi] इन घटनाक्रमों ने IRIS² मिशन[xii] और यूरोपीय स्पेस शील्ड एक्शन प्लान जैसी पहलों के पक्ष को और मज़बूत किया,[xiii] वहीं, बढ़ती तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच साइबर सुरक्षा का रणनीतिक महत्व और भी बढ़ गया है।
इसके साथ ही, अंतरिक्ष क्षमताओं में चीन की तेज़ी से होगी प्रगति और व्यावसायिक अंतरिक्ष उद्योग पर अमेरिका के लगातार दबदबे ने यूरोपीय संघ को हिंद– प्रशांत क्षेत्र में अपने सहयोगियों के साथ संबंध बेहतर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। नतीजतन, 2026 की यूरोपीय संघ अंतरिक्ष नीति में आपूर्ति श्रृंखला की मज़बूती बढ़ाने के लिए इस क्षेत्र के साथ सहयोग पर अधिक ज़ोर दिया गया।
भारत– यूरोपीय संघ सहयोग
यूरोपीय संघ की अंतरिक्ष नीति में हो रहे परिवर्तन से परंपरागत और नए, दोनों ही क्षेत्रों में भारत और यूरोपीय संघ के बीच सहयोग बढ़ाने के महत्वपूर्ण मौके बन रहे हैं। वैश्विक अंतरिक्ष क्षेत्र में दो बड़े खिलाड़ी होने के नाते भारत और यूरोपीय संघ पहले से ही लॉन्च सेवा, भूप्रेक्षण (अर्थ ऑब्जर्वेशन), उपग्रह अनुप्रयोग (सैटेलाइट एप्लीकेशन) और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। बाज़ार में प्रतिस्पर्धा, तकनीकी मज़बूती, साइबर सुरक्षा और चीन के बढ़ते वैश्विक प्रभाव जैसी चिंताओं समेत उनके हितों का बढ़ता मेल, उनकी साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाने के लिए मज़बूत आधार प्रदान करता है।
यूरोपीय संघ के रणनीतिक परिवर्तन का एक तात्कालिक प्रभाव यह होगा कि सुरक्षा और रक्षा संबंधी अंतरिक्ष गतिविधियों में सहयोग बढ़ाने की गुंजाइश बनेगी। भारत और यूरोप दोनों की प्राथमिकताएं एक जैसी हैं जिनमें रणनीतिक स्वायत्तता, मज़बूती, सुरक्षित अवसंरचना और अंतरिक्ष के क्षेत्र में स्वदेशी तकनीकी क्षमताएं शामिल हैं। भारत–यूरोपीय संघ अंतरिक्ष वार्ता, 2026 के लिए भारत–यूरोपीय संघ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी एवं कार्ययोजना 2030 जैसी वर्तमान व्यवस्था, साझेदारी के मुख्य– स्तंभों में से एक के रूप में अंतरिक्ष के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए संस्थागत संरचना प्रदान करती हैं।
इसके प्रभाव केवल सुरक्षा सहयोग तक ही सीमित नहीं हैं। यूरोपीय संघ की ओर से अधिक एकीकृत और प्रतिस्पर्धी अंतरिक्ष बाज़ार बनाने की कोशिशों से भारत और यूरोप के बीच निजी क्षेत्र की भागीदारी, निवेश, औद्योगिक साझेदारी और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है। यूरोपीय संघ के एक जैसे नियम व्यापार और निवेश की बाधाओं को कम कर सकते हैं जिससे यूरोपीय संघ का अंतरिक्ष क्षेत्र भारतीय कंपनियों के लिए अधिक आकर्षक बन सकता है।
इसके उलट, भारत का बढ़ता व्यावसायिक अंतरिक्ष पारितंत्र यूरोपीय संघ को अपनी साझेदारी में विविधता लाने और परंपरागत बाज़ारों पर व्यापार की अत्यधिक निर्भरता कम करने के अवसर देता है। जनवरी 2026 में यूरोपीय संघ–भारत एफटीए (FTA)[xiv] पर हस्ताक्षर और उसके बाद जून 2026 में भारत– स्लोवाकिया और साइप्रस– भारत व्यापार समझौतों से यब बात साबित होती है।
इन मौकों के बावजूद, यूरोपीय संघ– भारत सहयोग को प्रगाढ़ करने की संभावनाएं आखिरकार यूरोपीय संघ अंतरिक्ष अधिनियम के सफलतापूर्वक लागू होने पर निर्भर करती हैं। हालाँकि यह बहुत ही सोच– समझकर किया गया प्रयास है, लेकिन इस अधिनियम पर अभी भी विचार– विमर्श चल रहा है और इसे अभी पास होना बाकी है। इसके अलावा, स्पेस शील्ड प्लान जैसी पहल अभी शुरुआती दौर में हैं। साथ ही, यूरोपीय संघ की अंदरूनी राजनीति और संकटों को लेकर अलग– अलग सोच के कारण इनके लागू होने में देरी हो सकती है। जब तक ये सुधार पूरी तरह से लागू नहीं हो जाते, तब तक यूरोपीय संघ– भारत सहयोग को यूरोपीय संघ की पुरानी अंतरिक्ष नीति से संबंधित कुछ संरचनात्मक बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
यूरोपीय संघ की अंतरिक्ष नीति का विकास यूरोप के रणनीतिक माहौल में आए बड़े बदलावों को दिखाता है, जो बदलती भू– राजनीति, सुरक्षा चुनौतियों और प्रतिस्पर्धी वैश्विक माहौल की वजह से हुए हैं। रणनीतिक दिशासूचक (स्ट्रैटेजिक कंपास) और सुरक्षा एवं रक्षा के लिए यूरोपीय संघ अंतरिक्ष रणनीति से शुरुआत करते हुए यूरोप ने अंतरिक्ष को मुख्य रूप से एक वैज्ञानिक प्रयास मानने की बजाय आर्थिक मज़बूती, सुरक्षा एवं स्वायत्तता के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्र के रूप में पहचानना शुरू किया है।
भारत के लिए यह परिवर्तन सहयोग के नए रास्ते खोलता है जो वैज्ञानिक सहयोग से कहीं आगे हैं। रणनीतिक स्वायत्तता, मज़बूत अवसंरचनाएं, साइबर सुरक्षा और उन्नत प्रौद्योगिकी के मामले में साझा प्राथमिकताएं द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के लिए ठोस आधार प्रदान करती हैं। यदि इसे सफलतापूर्वक लागू किया जाता है तो यूरोपीय संघ अंतरिक्ष अधिनियम रक्षा, व्यावसायिक अंतरिक्ष गतिविधियों और डिजिटल प्रौद्योगिकी में गहन सहयोग को बढ़ावा दे सकता है जिससे यह साझेदारी पहले से अधिक ऊँचे रणनीतिक स्तर पर पहुँच जाएगी।
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*दिया शंकर, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण:
[i] European Commission. Directorate-General for Defence Industry and Space. “EU Space Act.” June 25, 2025. Accessed June 28, 2026. https://defence-industry-space.ec.europa.eu/eu-space-act_en.
[ii] European Commission. Directorate-General for Communication. “EU Space Act: Enhancing Market Access and Space Safety.” June 25, 2025. Accessed June 28, 2026. https://commission.europa.eu/news-and-media/news/eu-space-act-enhancing-market-access-and-space-safety-2025-06-25_en.
[iii] Bingen, Kari A. “Extending the Battlespace to Space.” Center for Strategic and International Studies. September 16, 2025. Accessed June 28, 2026. https://www.csis.org/analysis/chapter-8-extending-battlespace-space.
[iv] Council of the European Union, A Strategic Compass for Security and Defence — For a European Union That Protects Its Citizens, Values and Interests and Contributes to International Peace and Security, March 21, 2022, accessed June 28, 2026, https://www.consilium.europa.eu/en/press/press-releases/2022/03/21/a-strategic-compass-for-a-stronger-eu-security-and-defence-in-the-next-decade/.
[v] Clapp, Sebastian, and Clément Evroux. “EU Space Strategy for Security and Defence.” Briefing PE 754.598. European Parliamentary Research Service (EPRS), European Parliament. November 2023. Accessed June 28, 2026. https://www.europarl.europa.eu/RegData/etudes/BRIE/2023/754598/EPRS_BRI(2023)754598_EN.pdf.
[vi] Gonçalves dos Reis, João Carlos. “European Union Defense and Security Strategy for Space and Ground-Based Systems against Hybrid Threats.” Acta Astronautica 225 (2024): 55–66. https://doi.org/10.1016/j.actaastro.2024.09.003.You said: give key points
[vii] Andrea Dugo and Dyuti Pandya, “Europe at a Critical Juncture in the Evolution of the Global Space Economy,” ECIPE Occasional Paper No. 04/2026, European Centre for International Political Economy, April 2026, accessed June 28, 2026, https://ecipe.org/wp-content/uploads/2026/04/ECI_OccasionalPaper_04-2026_LY02.pdf.
[viii] Jones Andrew, "Chang'e 6 Is Just the Tip of China's Space Ambitions," BBC Future, May 10, 2024, accessed June 28, 2026, https://www.bbc.com/future/article/20240510-change-6-is-just-the-tip-of-chinas-space-ambitions.
[ix] European Space Agency. (2026, January 27). European Space Conference in Bruxelles: ESA DG keynote address [Video]. YouTube. https://www.esa.int/ESA_Multimedia/Videos/2026/01/European_Space_Conference_in_Bruxelles_ESA_DG_keynote_address
[x] International Capital Market Association (ICMA). “Draghi Report: Summary of Recommendations on CMU and Financial Services.” September 10, 2024. Accessed June 28, 2026. https://www.icmagroup.org/assets/Draghi-report_Sept-9.pdf.
[xi] Apps Peter. “The US Is Not Making It Simple for European Defence to Stand on Its Own Feet.” Reuters. June 26, 2026. Accessed June 28, 2026. https://www.reuters.com/commentary/us-is-not-making-it-simple-european-defence-stand-its-own-feet-2026-06-26/.
[xii] European Commission. Directorate-General for Defence Industry and Space. "IRIS² — Secure Connectivity." Accessed June 28, 2026. https://defence-industry-space.ec.europa.eu/eu-space/iris2-secure-connectivity_en.
[xiii] Clapp, S. (February 20, 2026). European Space Shield – action plan. European Parliament Legislative Train Schedule. https://www.europarl.europa.eu/legislative-train/theme-a-new-era-for-european-defence-and-security/file-european-space-shield-–-action-plan
[xiv] Press Information Bureau, Ministry of Commerce and Industry. “India–EU Free Trade Agreement Concluded: A Strategic Breakthrough in India's Global Trade Engagement.” Government of India. January 27, 2026. Accessed June 28, 2026. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2219065®=3&lang=2.