सारांश
भारत फरवरी 2026 में पैक्स सिलिका (Pax Silica) में शामिल हुआ। यह अमेरिका के नेतृत्व वाला गठबंधन है जो वैश्विक एआई अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक खनिज़, चिप, ऊर्जा और कंप्यूट रिसोर्स को सुरक्षित करने पर केंद्रित है। भारत इस गठबंधन में कई महत्वपूर्ण विशेषताओं के साथ आता है और इसे कंप्यूट रिसोर्स, आपूर्ति श्रृंखला में सुधार, निवेश और बेहतर भू–राजनीतिक स्थिति तक अधिक पहुँच मिल सकती है। यह शोधपत्र इन रणनीतिक अवसरों की पड़ताल करता है और इस बात का आकलन करता है कि भारत की भागीदारी किस प्रकार उसके तकनीकी, आर्थिक और भू– राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाती है।
परिचय
20 फरवरी 2026 को, भारत ने नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन(घोषणापत्र)[i] पर हस्ताक्षर किए।[ii] यह अमेरिकी विदेश विभाग की प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य एआई आपूर्तिश्रृंखला को लेकर 17 सहयोगी देशों के बीच “आर्थिक सुरक्षा पर आम सहमति” बनाना है।[iii] पैक्स सिलिका एआई अवसंरचना बनाने वाले महत्वपूर्ण खनिज, चिप, ऊर्जा और कंप्यूट तक पहुँच में तालमेल बिठाने की कोशिश करती है।
हालांकि, भारत वैश्विक एआई शासन पहलों में सक्रिए रूप से शामिल रहा है, लेकिन पैक्स सिलिका में शामिल होना रणनीतिक परिवर्तन को दर्शाता है– यह परिवर्तन एआई के लिए नियम निर्धारित करने से इतर, उस अवसंरचना को सुरक्षित करने की ओर है जिस पर एआई टिका है। इसलिए, यह घोषणा केवल एक और बहुपक्षीय पहल नहीं है बल्कि एआई अवसंरचना कूटनीति की दिशा में भारत का एक कदम है।
भारत– अमेरिका एआई अवसर साझेदारी पर संयुक्त बयान,[iv] जिसे बहुपक्षीय घोषणापत्र में एक द्विपक्षीय परिशिष्ट के रूप में जोड़ा गया था, दोनों पक्षों को अगली पीढ़ी के डेटा सेंटर, नवाचार को बढ़ावा देने वाले नियम–कानून और मुक्त उद्यम पर सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध करता है, जिसे पैक्स सिलिका के उद्देश्यों को द्विपक्षीय रूप से लागू किया जा सके। भारत इस पहल में इस मंशा से शामिल हुआ है कि उभरते हुए एआई सिस्टम को आकार देने में सकारात्मक योगदान दे सके और साथ ही यह भी सुनिश्चित करे कि ग्लोबल साउथ के हितों का उचित प्रतिनिधित्व हो।
इसी पृष्ठभूमि में यह शोधपत्र गठबंधन के नए सदस्य के रूप में भारत के लिए पैक्स सिलिका से मिलने वाले रणनीतिक अवसरों का आकलन करने का प्रयास करता है।
पैक्स सिलिका और भारत के लिए अवसर
इस घोषणापत्र पर हस्ताक्षरकर्ता देश के रूप में भारत को कई प्रकार का लाभ मिलेगा। पहला, भारत को कंप्यूटिंग संसाधनों तक बेहतर पहुँच मिलेगी। इसका अर्थ है कि उसे ऐसे उन्नत प्रोसेसर और हाई–परफॉर्मेंस जीपीयू (GPUs) मिल सकेंगे जो पर्याप्त ऊर्जा और कनेक्टिविटी वाले डेटा सेंटरों में लगे होते हैं। एआई के मूलभूत मॉडल को प्रशिक्षित करने, उन्हें लागू करने और उनका दायरा बढ़ाने के लिए एडवांस्ड कंप्यूटिंग रिसोर्स तक पहुँच आवश्यक है। वर्तमान में चीन विश्व के रिफाइंड कम–शुद्धता वाले गैलियम का लगभग 98 प्रतिशत और वैश्विक जर्मेनियम उत्पादन का 68 प्रतिशत हिस्सा नियंत्रित करता है।[v]
ये महत्वपूर्ण तत्व सेमीकंडक्टर चिप और दूसरे रणनीतिक अवसंरचनाओं जैसे फाइबर– ऑप्टिक केबल, इन्फ्रारेड ऑप्टिक्स और अक्षय ऊर्जा तकनीक के उत्पादन के लिए आवश्यक हैं। किसी एक बड़े निर्यातक पर बहुत अधिक निर्भरता से व्यापार असंतुलन पैदा होता है और भारत की तकनीकी एवं विनिर्माण स्वतंत्रता सीमित हो जाती है। पैक्स सिलिका भारत को इस प्रतिकूल व्यापार संतुलन से निपटने में मदद करता है।
इस समझौते के ज़रिए भारत अपनी तकनीक साझेदारी में विविधता ला सकता है, चीन के नियंत्रण वाली तकनीक आपूर्तिश्रृंखला पर निर्भरता कम कर सकता है और 'विश्वसनीय पारितंत्र' का साझेदार बन सकता है, जिसमें महत्वपूर्ण तकनीक तक पहुँचने में कम बाधाएं होंगी।
दूसरा, उन्नत माइक्रोप्रोसेसर, चिप और एक्सेलेरेटर का व्यापार अमेरिका के निर्यात नियंत्रण के दायरे में आते हैं। पैक्स सिलिका भारत को सभी हस्ताक्षरकर्ता देशों के साथ एडवांस्ड कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुँच के लिए बातचीत करने का बहुपक्षीय मंच प्रदान करता है जिससे अलग– अलग तरह के तकनीकी सहयोग के रास्ते खुलते हैं। इसके अलावा, संयुक्त बयान में भारत और अमेरिका विशेष रूप से ‘एआई के लिए कंप्यूटिंग और प्रोसेसर के विकास और उन तक पहुँच के मामले में सहयोग करने' के लिए प्रतिबद्ध हैं।[vi]
तीसरा, पैक्स सिलिका भारत को अपनी सेमीकंडक्टर क्षमताओं को मज़बूत करने के बड़े मौके देता है। सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला कच्चे माल से लेकर चिप डिज़ाइन, फैब्रिकेशन, असेंबली और पैकेजिंग एवं आखिर में उपकरण बनाने तक फैली हुई है जिसमें प्रत्येक चरण पर मूल्य और रणनीतिक महत्व बढ़ जाता है। भारत अभी असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP) चरण पर है। यह समझौता एडवांस्ड फैब्रिकेशन तकनीक तक पहुँच को सरल बना सकता है जिन्हें देश में अभी विकसित और चालू किया जाना बाकी है।
एडवांस्ड फैब्रिकेशन तकनीक तक पहुँच भारत को सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में ऊपर की ओर बढ़ने में मदद करेगी। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के धोलेरा फैब्रिकेशन प्लांट के लिए एएसएमएल (ASML) के साथ साझेदारी जैसी पहल, भारत की इस प्रगति को और तेज़ कर सकती हैं। यह समझौता केवल सरकार–से–सरकार के बीच संबंधों से कहीं आगे जाता है। यह बिज़नेस–टू– बिज़नेस साझेदारी को भी बढ़ावा देता है जिससे भारतीय कंपनियाँ वैश्विक तकनीक मूल्य श्रृंखला का हिस्सा बन सकती हैं और अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा क्षमता को बढ़ा सकती हैं।
चौथा, भारत को डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर बनाने वाले संयंत्र, महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण और अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवसंरचनात्मक निवेश की ज़रूरत है। 1000 करोड़ रुपये के बजट वाला सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 एक शुरुआत तो है,[vii] लेकिन भारत की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए यह काफी नहीं है।
इस साझेदारी में शामिल होने से एआई अवसंरचनात्मक पारितंत्र में निवेश के लिए भारत आकर्षक स्थान बन जाता है। पैक्स सिलिका फंड, जिसमें 250 मिलियन डॉलर[viii] की विदेशी मदद और सॉफ्ट बैंक, टेमासेक और मुबाडाला जैसे बड़े निवेशकों का वैश्विक समूह शामिल है,[ix] इस पहल की आर्थिक और वित्तीय नींव को मज़बूत करता है। यदि कांग्रेस से इस फंड को मंजूरी मिल जाता है तो इस गठबंधन में भारत की सदस्यता से अतिरिक्त पूंजी मिल सकती है, जो एआई अवसंरचना में वर्तमान घरेलू निवेश को और बढ़ाएगी।
पांचवां, आर्थिक लाभों के अलावा पैक्स सिलिका तेज़ी से बंट रही वैश्विक तकनीक व्यवस्था में भारत के भू–राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाती है। पैक्स सिलिका भारत को एआई से जुड़े नियम मानने वाले के बजाय नियम बनाने वाले के तौर पर एआई के नियम निर्धारित करने का मौका देती है। इस गठबंधन की शुरुआती सदस्य के तौर पर भारत यह सुनिश्चित कर सकता है कि एआई अवसंरचना से जुड़े नियम विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के हितों और प्राथमिकताओँ को ध्यान में रखें। इसमें अवसंरचना से लेकर शासन तक, एआई के पूरे दायरे तक समान पहुँच की वकालत करना शामिल है।
इस घोषणा के माध्यम से, बड़े खिलाड़ियों की तरफ से ज़रूरत से ज्यादा क्षमता और अनुचित डंपिंग प्रैक्टिसi के खिलाफ भारत का रुख स्पष्ट किया गया है। भारत अब विश्वसनीय पारितंत्र बनाने में शामिल है, जो सेमीकंडक्टर से कहीं अधिक कूटनीतिक महत्व का संकेत देता है। इसके अलावा, भारत केवल होस्टेड कंप्यूट के लिए बाज़ार बने रहने की बजाय, अपना संप्रभु एआई अवसंरचना बनाकर इस समझौते का लाभ उठा सकता है। एआई के दौर में, रणनीतिक स्वायत्तता उस बुनियादी ढांचे के मालिकाना हक और उसे विकसित करने पर निर्भर करती है जो इसे चलाता है। एआई के दौर में, रणनीतिक स्वायत्तता उस बुनियादी ढांचे के मालिकाना हक और उसे विकसित करने पर निर्भर करती है जो इसे चलाता है।
पैक्स सिलिका का रणनीतिक महत्व आपसी है। जहाँ यह गठबंधन भारत को एआई अवसंरचना, तकनीक और निवेश के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है वहीं भारत की सक्रिए भागीदारी भी बाज़ार के आकार, तकनीकी क्षमता, कुशल मानव संसाधन और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का योगदान देकर इस गठबंधन को और मज़बूत बनाती है। भारत के समग्र रणनीतिक महत्व का आकलन करने में इन योगदानों को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
पैक्स सिलिका में भारत का योगदान
भारत इस गठबंधन में कई महत्वपूर्ण विशेषताओं को प्रस्तुत करता है। भारत के पास अपने बड़े बाज़ार का लाभ उठाने का मौका है क्योंकि यहाँ इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग 400 अरब डॉलर से अधिक[x] की है और 2030 तक सेमीकंडक्टर बाज़ार का मूल्य 104.4 अरब डॉलरix होने का अनुमान है। इससे गठबंधन के सदस्यों को विश्व के सबसे तेज़ी से बढ़ते बाज़ारों में से एक में अपने एआई उत्पादनों को लॉन्च करने और उनका दायरा बढ़ाने के मौके मिलते हैं।
भारत में योग्य और कुशल लोगों का विशाल समूह मौजूद है जो समझौते में शामिल देशों के लिए उपलब्ध वैश्विक एकीकृत सर्किट (IC) डिज़ाइन कार्यबल का लगभग 20 प्रतिशत है।[xi] चिप डिज़ाइन और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विविध और कुशल कार्यबल अनिवार्य शोध और नवाचार को बढ़ावा देकर , साथ ही कार्यबल की महत्वपूर्ण कमी को पूरा कर, पूरे गठबंधन को मज़बूत बनाता है।
इसके अलावा, भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) स्टैक (आधार, UPI, ONDC, डिजिलॉकर/DigiLocker) डिजिटल क्षेत्र में मुकाबला करने और सहयोग करने के लिए आवश्यक सॉफ्ट पावर दर्शाता है। जैसे, भारत ने इंडिया स्टैक पर सहयोग के लिए 24 देशों[xii] के साथ समझौता किया है जिनमें संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर और क़तर शामिल हैं, ये सभी देश इस घोषणापत्र पर हस्ताक्षरकर्ता देश हैं।
इससे भारत किफायती और बड़े पैमाने पर प्रयोग की जा सकने वाली तकनीक के निर्यातक के रूप में स्थापित होता है जिससे तकनीकी क्षमता के वैश्विक वितरण में विविधता लाने में मदद मिलती है। साथ ही, यह भारत को अपने वादों को पूरा करने और अलग– अलग क्षेत्र में एआई को लागू करने में मौजूद अंतर को पाटने की क्षमता को भी दिखाता है।
निष्कर्ष
पैक्स सिलिका एक ऐसा फ्रेमवर्क देता है जिससे ऐसी तकनीक को समझा और संभाला जा सके, जिसकी दिशा का पूरी तरह से अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता। एआई में आर्थिक और सैन्य शक्ति को इस प्रकार से बदलने की क्षमता है जिसे संभालने के लिए मौजूदा संस्थाएं तैयार नहीं हैं। ब्लेचली [xiii] और सियोल[xiv] जैसी बहुपक्षीय शासन फ्रेमवर्क, एआई के नियुक्त होने के बाद उससे जुड़े जोखिमों को देखते हैं। वहीं दूसरी ओर, पैक्स सिलिका का उद्देश्य ऐसी अवसंरचना को प्रबंधित करना है जिससे बाज़ार में गड़बड़ियों के कारण पैदा होने वाले जोखिमों को रोका जा सके।
हाल ही में शुरू की गई इस पहल के तहत, यह घोषणा एक ऐसी संरचना है जो अभी विकसित हो रही है और जिसका संस्थागत स्वरूप अभी बन ही रहा है, इससे भारत को विकास में योगदान देने का भरपूर मौका मिलता है। भारत इस गठबंधन के अगले चरण में कमज़ोर स्थिति से नहीं, बल्कि बड़े पैमाने, डिज़ाइन टैलेंट और रणनीतिक महत्व जैसी अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्रवेश कर रहा है। पहले बताए गए चार रणनीतिक लाभ– कंप्यूट संसाधनों तक बेहतर पहुँच, आपूर्ति श्रृंखला में तरक्की, अधिक निवेश और बेहतर भू–राजनीतिक स्थिति– मिलकर भारत के ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता में वैश्विक प्रणेता’ बनने के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हैं।[xv]
पैक्स सिलिका तकनीकी प्रगति और आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने जैसे बड़े लक्ष्यों में योगदान दे सकता है। इससे भारत को ज्ञान के प्रसार, आर्थिक प्रगति हासिल करने और भू– राजनीतिक जोखिमों से निपटने में मदद मिलेगी। इस उभरते हुए ढांचे को आकार देने में भारत की सतत भागीदारी बहुत आवश्यक होगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एआई अवसंरचना का लाभ अधिक समान रूप से मिल सके, विशेष रूप से ग्लोबल साउथ में।
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*साची चंदवानी, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण:
[i] US Department of State, “Pax Silica,” accessed June 2026, https://www.state.gov/pax-silica.
[ii] ‘India Joins Pax Silica at India AI Impact Summit 2026, Deepens Strategic Technology Cooperation with United States’, Press Information Bureau, Government of India, February 20, 2026. Available at: https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2230648
[iii] U.S. Department of State, “Pax Silica,” accessed June 25, 2026, https://www.state.gov/pax-silica. Signatories include Australia, the European Union, Finland, Germany, Greece, India, Israel, Japan, the Netherlands, Norway, Qatar, the Republic of Korea, Singapore, Sweden, the Philippines, the United Arab Emirates, and the United Kingdom.
[iv] Ministry of External Affairs, Government of India, ‘India Joins Pax Silica Initiative, Signs the Joint Statement on India-US AI Opportunity Partnership”, Press Release, February 20, 2026. Available at: https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/40800/India_Joins_Pax_Silica_Initiative_Signs_the_Joint_Statement_on_IndiaUS_AI_Opportunity_Partnership
[v] Gracelin Baskaran and Meredith Schwartz, “From Mine to Microchip: Addressing Critical Mineral Supply Chain Risks in Semiconductor Production,” Center for Strategic and International Studies, October 7, 2024, https://www.csis.org/analysis/mine-microchip.
[vi] Ministry of External Affairs, Government of India, “Joint Statement on the India-U.S. AI Opportunity Partnership: A Bilateral Addendum to the Pax Silica Declaration,” February 20, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents?dtl/40801/Joint_Statement_on_the_IndiaUS_AI_Opportunity_Partnership_A_Bilateral_Addendum_to_the_Pax_Silica_Declaration
[vii] Press Information Bureau, Ministry of Electronics & IT, Government of India, “Budget 2026-27 Announces the Launch of India Semiconductor Mission (ISM) 2.0,” February 1, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221522®=3&lang=1
[viii] US Department of State, Office of the Spokesperson, “Department of State Launches Pax Silica Fund,” media note, March 26, 2026, https://www.state.gov/releases/office-of-the-spokesperson/2026/03/department-of-state-launches-pax-silica-fund/.
[ix] GCC wealth funds, SoftBank and Temasek part of US investment consortium backing AI projects. Zawya, March 25, 2026. https://www.zawya.com/en/business/investment/gcc-wealth-funds-softbank-and-temasek-part-of-us-investment-consortium-backing-ai-projects-mb6rsojz
[x] Indian Electronics and Semiconductor Association, India Semiconductor Market Report 2030, released at the Utkarsha Odisha Conclave, Bhubaneswar, January 28–29, 2025, as cited in “India’s Semiconductor Market Set to Reach $103.4 Billion by 2030,” IndBiz, Economic Diplomacy Division, Ministry of External Affairs, Government of India, February 12, 2025, https://indbiz.gov.in/indias-semiconductor-market-set-to-reach-103-4-billion-by-2030/.
[xi] Stephen Ezell, “Assessing India's Readiness to Assume a Greater Role in Global Semiconductor Value Chains” (Information Technology and Innovation Foundation, February.
[xii] Press Information Bureau, “India's Digital Public Infrastructure: Setting a Global Benchmark for Population-Scale DPI,” Government of India, March 6, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2235812®=3&lang=2.
[xiii] Prime Minister's Office, 10 Downing Street, “The Bletchley Declaration by Countries Attending the AI Safety Summit, November 1-2, 2023,” GOV.UK, November 1, 2023, https://www.gov.uk/government/publications/ai-safety-summit-2023-the-bletchley-declaration/the-bletchley-declaration-by-countries-attending-the-ai-safety-summit-1-2-november-2023.
[xiv] Ministry of Foreign Affairs, Republic of Korea, “Seoul Declaration for Safe, Innovative and Inclusive AI by Participants Attending the Leaders’ Session of the AI Seoul Summit, 21st May 2024,” May 21, 2024, https://www.mofa.go.kr/eng/brd/m_5674/view.do?seq=321007.
[xv] Press Information Bureau, Government of India, “Transforming India with AI: Over ₹10,300 Crore Investment & 38,000 GPUs Powering Inclusive Innovation,” PIB Backgrounder, Ministry of Electronics and Information Technology, October 12, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2178092®=48&lang=2