श्रीलंका की स्थानीय सरकार/परिषद के चुनाव 6 मई 2025 को हुए थे। चुनाव के नतीजों को छह महीने पुरानी जनता विमुक्ति पेरामुना (जेवीपी) के नेतृत्व वाली नेशनल पीपुल्स पावर (एनपीपी) सरकार पर एक फैसले के रूप में देखा गया, जिसने देश में व्यापक आर्थिक और राजनीतिक बदलाव का वादा किया था। एनपीपी ने 339 स्थानीय सरकारी निकायों/परिषदों में से 265 पर जीत हासिल की, लेकिन जीती गई स्थानीय परिषदों में से लगभग आधी में उसे पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया। पिछले वर्ष सितम्बर में हुए राष्ट्रपति चुनाव तथा नवम्बर 2024 में हुए संसदीय चुनावों के दौरान एनपीपी सरकार ने सत्ता में आने पर स्थानीय सरकार के चुनाव कराने का वादा किया था, जो आर्थिक संकट के कारण काफी समय से विलंबित थे। जैसा कि वादा किया गया था, एनपीपी सरकार ने फरवरी 2025 में संसद में स्थानीय प्राधिकरण परिषद विधेयक पारित कर दिया, जिससे चुनावों का मार्ग प्रशस्त हो गया।
स्थानीय सरकार के चुनाव हर चार साल में आयोजित किए जाते हैं। इस तरह का आखिरी चुनाव 2018 में मैत्रिपाला सिरिसेना के नेतृत्व वाली श्रीलंका की राष्ट्रीय एकता सरकार (एनयूजी) के तहत हुआ था। बहरहाल, विपक्षी पार्टी, श्रीलंका पोदुजना पेरमुना (एसएलपीपी) ने 2018 के स्थानीय परिषद चुनावों में जीत हासिल की और इसके बाद गोटबाया राजपक्षे के नेतृत्व में 2019 के राष्ट्रपति चुनावों में भी विजय प्राप्त की। जुलाई 2022 में उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया, क्योंकि उनकी आर्थिक नीतियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके कारण देश दिवालियापन और राजनीतिक अस्थिरता की ओर बढ़ गया था। उस स्थिति में, जुलाई 2022 में श्रीलंका के राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालने वाले रानिल विक्रमसिंघे ने सत्तारूढ़ एसएलपीपी के समर्थन से आर्थिक संकट के कारण धन की अनुपलब्धता का हवाला देते हुए स्थानीय परिषद के चुनावों को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया था। उस समय तक एसएलपीपी सरकार ने शासन करने की वैधता खो दी थी और डरती थी कि यदि उस समय स्थानीय चुनाव हुए तो पार्टी का पारंपरिक आधार और कमजोर हो सकता है, क्योंकि जनता "अर्गलया" विरोध प्रदर्शनों के पीछे एकत्रित हो रही थी जो प्रणाली परिवर्तन की मांग कर रही थी। इस बीच, जेवीपी के नेतृत्व वाली एनपीपी ने जनता के बीच दो मुख्य राजनीतिक दलों, एसएलपीपी और समागी जन बालवेगया (एसजेबी) के एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में लोकप्रियता हासिल की, जिन्हें लोग श्रीलंका की आर्थिक मंदी के लिए जिम्मेदार मानते थे।[i]
चुनाव अभियान
स्थानीय सरकार के पदों के लिए अभियान मुख्य रूप से पिछले छह महीनों के दौरान एनपीपी सरकार के प्रदर्शन पर केंद्रित था। सत्तारूढ़ गठबंधन, एनपीपी, ने अपनी नीतियों को उजागर करके मतदाताओं को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा, जबकि विपक्ष ने सुस्त आर्थिक सुधार और अराजकता से संबंधित मुद्दों की आलोचना की। इस वर्ष मई दिवस पर एक विशाल सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने लोगों से एनपीपी को वोट देने का आग्रह किया ताकि वह “एकल दृष्टिकोण के तहत काम कर सके।”[ii] राष्ट्रपति, मंत्रिमंडल और संसद एनपीपी के नेतृत्व में हैं; इसलिए, राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि स्थानीय परिषदों और शहरी परिषदों को एक एकीकृत दिशा में काम करने के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन को सौंपा जाना चाहिए।[iii] सरकार ने चुनाव के दौरान किए गए कुछ वादों पर काम किया, विशेष रूप से भ्रष्टाचार और सार्वजनिक व्यय को तर्कसंगत बनाने पर।
मुख्य विपक्षी दल एसजेबी ने चेतावनी दी कि सरकार चुनावों के बाद बिजली की दरें बढ़ा देगी और उसने आईएमएफ की मांगों को मान लिया है।”[iv] एसजेबी नेता, साजिथ प्रेमदासा ने अपनी पार्टी के लिए जनता से समर्थन मांगा ताकि “स्थानीय परिषदों, पुलिस और सुरक्षा बलों को शामिल करते हुए जन-केंद्रित, विकेन्द्रित शासन मॉडल के माध्यम से कानून और व्यवस्था बहाल की जा सके।”[v] उन्होंने आवश्यक वस्तुओं जैसे दूध पाउडर, चावल, नारियल आदि की ऊंची कीमतों का मुद्दा उठाया। एसजेबी द्वारा उठाए गए अन्य मुद्दों में अंडरवर्ल्ड गतिविधियों में वृद्धि और समाज में बढ़ती अराजकता शामिल थी। रिपोर्टों के अनुसार, इस वर्ष अकेले, पिछले चार महीनों में, संगठित अपराध, अंडरवर्ल्ड और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ी 42 गोलीबारी की घटनाएं और 28 मौतें दर्ज की गईं, जिससे लोगों में चिंता बढ़ गई है।[vi] दूसरी ओर, एसएलपीपी नेता नमल राजपक्षे ने लोगों को पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे द्वारा दशकों से चले आ रहे गृहयुद्ध को समाप्त करके देश के लिए किए गए योगदान तथा पूर्व राष्ट्रपति के कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्यों की याद दिलाई।[vii]
सभी राजनीतिक दलों ने श्रीलंका के तमिल बहुल उत्तरी और पूर्वी प्रांतों में मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की है। श्रीलंका के राष्ट्रपति ने उत्तर में जाफना का दौरा किया और सुरक्षा कारणों से पिछली सरकारों द्वारा ली गई ज़मीन को वापस दिलाने का वादा किया।[viii] लेकिन उत्तरी प्रांत में 6000 एकड़ भूमि के संबंध में सरकार द्वारा हाल ही में जारी परिपत्र, जिसे तीन महीने के भीतर निजी स्वामित्व के संबंध में कोई दावा प्राप्त नहीं होने पर राज्य की भूमि घोषित कर दिया जाएगा, ने भूमि से संबंधित दस्तावेज दिखाने के लिए घोषित कम अवधि को देखते हुए तमिल समुदाय में चिंता पैदा कर दी।[ix]
तमिल पार्टियों द्वारा अभियान के दौरान अन्य मुद्दे भी उठाए गए, जिनमें गृहयुद्ध के दौरान और उसके बाद लापता लोगों के लिए न्याय, दीर्घकालिक तमिल कैदियों की रिहाई और आतंकवाद निरोधक अधिनियम (पीटीए) को निरस्त करना शामिल हैं। श्रीलंकाई तमिल राजनीतिक दल, जैसे कि इलांकाई तमिल अरासु कच्ची (आईटीएके), तमिल नेशनल पीपुल्स फ्रंट (टीएनपीएफ) और डेमोक्रेटिक तमिल नेशनल अलायंस (डीटीएनए) कुछ तमिल दल हैं, जिन्होंने जातीय तमिल मुद्दे पर एनपीपी के दृष्टिकोण को निशाना बनाते हुए चुनाव लड़ा था, ताकि खोई जमीन वापस मिल सके। स्मरणीय है कि तमिल बहुल उत्तर और पूर्व ने राष्ट्रपति और संसदीय चुनावों में एनपीपी के पक्ष में मतदान किया था, तथा उन पारंपरिक तमिल पार्टियों से दूरी बना ली थी, जो वर्षों से तमिल हितों की वकालत करती रही हैं, जबकि तमिल पार्टियों ने मतदाताओं से केवल उनके लिए ही मतदान करने की अपील की थी।
परिणाम
श्रीलंका के चुनाव आयोग के अनुसार, 339 स्थानीय परिषदों के प्रतिनिधियों को चुनने के लिए 17,156,338 मतदाता वोट डालने के पात्र थे, जिनमें 28 नगर पालिका परिषदें, 36 शहरी परिषदें और 275 प्रादेशिक सभाएं (तृतीय-स्तरीय नगर पालिकाएं) शामिल हैं। करीब 60 प्रतिशत पात्र मतदाताओं ने मतदान किया। इस चुनाव में कुल 75,589 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा, जिनमें 49 राजनीतिक दल और 14 स्वतंत्र समूह शामिल थे।[x] एनपीपी ने इस चुनाव में कुल डाले गए मतों में से लगभग 43.26 प्रतिशत मत प्राप्त करके स्थानीय परिषदों में बहुमत हासिल किया तथा 266 स्थानीय निकायों पर कब्जा किया। प्राप्त मत प्रतिशत के संदर्भ में, विपक्षी एसजेबी को लगभग 21.6 प्रतिशत वोट मिले, श्रीलंका पोदुजना पेरामुना (एसएलपीपी) को 9.17 प्रतिशत वोट मिले और यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) को लगभग 4.69 प्रतिशत वोट मिले।[xi]
तमिल पारंपरिक दलों के बीच एकता की कमी और एक साझा राजनीतिक कार्यक्रम[xii] के अभाव के बावजूद, तमिल बहुल उत्तर और पूर्व में चुनाव परिणामों ने पारंपरिक तमिल दलों के समर्थन में बदलाव का संकेत दिया। आईटीएके के साथ, ऑल सीलोन मुस्लिम कांग्रेस (एसीटीसी), श्रीलंका मुस्लिम कांग्रेस (एसएलएमसी) और सीलोन वर्कर्स कांग्रेस (सीडब्ल्यूसी) कुछ ऐसी पार्टियाँ हैं, जिन्होंने 2024 में होने वाले संसदीय चुनावों में वोट शेयर की तुलना में क्षेत्र में वर्तमान स्थानीय सरकार के चुनावों में अपने वोट शेयर में वृद्धि करके मजबूत वापसी की है। उदाहरण के लिए, केवल जाफ्ना जिले में, आईटीएके का वोट शेयर 2024 के संसदीय चुनावों में प्राप्त 19.47 प्रतिशत से बढ़कर 2025 के स्थानीय सरकार के चुनावों में लगभग 32 प्रतिशत हो गया। एसीटीसी ने अपना वोट शेयर भी लगभग दोगुना कर लिया है, जो 2024 के संसदीय चुनावों में 8.6 प्रतिशत से बढ़कर स्थानीय सरकार के चुनाव में 18.46 प्रतिशत हो गया है।[xiii] दूसरी ओर, जाफना जिले में एनपीपी का वोट शेयर 2024 के संसदीय चुनावों के दौरान प्राप्त 25 प्रतिशत वोट शेयर से घटकर 20 प्रतिशत रह गया।
इस चुनाव में खास बात यह है कि सत्तारूढ़ एनपीपी को मिले वोटों के प्रतिशत में कमी आई है। नवंबर 2024 के संसदीय चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन को 61.6 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन इस चुनाव में उसे करीब 43.3 प्रतिशत वोट ही मिल पाए। विपक्षी दलों ने परिणामों को सकारात्मक माना है, जो 2024 में हुए पिछले दो चुनावों में खोए अपने लोकप्रिय वोट आधार को फिर से हासिल करने की उम्मीद कर रहे हैं। परिणाम घोषित होने के बाद विपक्षी नेता साजिथ प्रेमदासा ने कहा कि विपक्षी एसजेबी "लोगों के फैसले का सम्मान करती है और स्थानीय निकायों के माध्यम से पारदर्शी और प्रभावी सेवा वितरण सुनिश्चित करने के लिए अन्य विपक्षी दलों के साथ सहयोग करने को तैयार है, जहां विपक्ष बहुमत में है।"[xiv] लेकिन एनपीपी ने किसी भी विपक्षी दल के साथ गठबंधन करके उन परिषदों की स्थापना करने से इनकार कर दिया, जहां पार्टी को बहुमत सदस्य नहीं मिले। इसके बजाय, इसने स्वतंत्र समूहों/सदस्यों के साथ मिलकर उन परिषदों की स्थापना करने में रुचि दिखाई, जहां पार्टी के पास बहुमत नहीं है।[xv]
निष्कर्ष
एनपीपी को अधिकतम स्थानीय निकाय चुनाव जीतने का भरोसा था और 1 मई 2025 को पार्टी द्वारा आयोजित मई दिवस रैली में भारी भीड़ जुटी थी। इससे पता चलता है कि पार्टी की आम जनता के बीच अभी भी पकड़ है, जबकि विपक्षी दलों जैसे एसजेबी, एसएलपीपी और यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) द्वारा आयोजित रैलियों में भीड़ कम थी। निष्कर्ष बताते हैं कि लोग तीव्र आर्थिक सुधार और कई वादा किए गए राजनीतिक सुधारों के क्रियान्वयन की आशा कर रहे हैं, जिससे आवश्यक जांच और संतुलन के साथ आर्थिक सुधार हो सकता है। श्रीलंका का आर्थिक सुधार कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मार्गदर्शन में कार्यान्वित किया जा रहा है। आईएमएफ स्टाफ और श्रीलंकाई प्राधिकारियों ने विस्तारित निधि सुविधा के तहत 25 अप्रैल 2025 को श्रीलंका के आर्थिक सुधार कार्यक्रम की चौथी समीक्षा पर स्टाफ स्तर का समझौता किया। समीक्षा के बाद, श्रीलंका को लगभग 344 मिलियन डॉलर का वित्तपोषण प्राप्त होगा।[xvi] लेकिन आईएमएफ ने कहा कि “वैश्विक व्यापार नीति अनिश्चितता श्रीलंका की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण नकारात्मक जोखिम पैदा करती है।”[xvii] इसने स्थायी राजस्व सृजन सुनिश्चित करने के लिए अन्य पहलों के अलावा बिजली के लिए लागत-वसूली मूल्य निर्धारण को बहाल करने और बिजली के बुनियादी ढांचे में उपयुक्त निवेश करने जैसी रणनीतियों का प्रस्ताव दिया है।[xviii] विपक्ष ने चेतावनी दी है कि इससे बिजली की दरों में वृद्धि हो सकती है, जिसका असर आम जनता पर पड़ सकता है क्योंकि बिजली की लागत में संभावित वृद्धि हो सकती है। श्रीलंका के उत्तर और पूर्व में आए नतीजों में पारंपरिक तमिल पार्टियों की ओर झुकाव भी दिखा। श्रीलंका के राष्ट्रपति ने उत्तर और पूर्व में चुनाव अभियान का व्यक्तिगत रूप से नेतृत्व किया, लेकिन परिणाम दर्शाते हैं कि सत्तारूढ़ पार्टी को समुदाय से किए गए वादों को जल्द से जल्द पूरा करना होगा, ताकि समुदाय द्वारा सत्तारूढ़ पार्टी के नेतृत्व पर छह महीने पहले राष्ट्रपति और संसदीय चुनावों के दौरान दिखाया गया विश्वास पुनः प्राप्त किया जा सके।
श्रीलंका की जनता द्वारा दिया गया जनादेश दर्शाता है कि विपक्ष जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। परिणाम स्थानीय सरकारी निकायों में राजनीतिक दलों के बीच सहयोग को भी सुनिश्चित करेंगे, क्योंकि राजनीतिक दलों को कुछ परिषदों की स्थापना के लिए गठबंधन बनाना होगा और साथ मिलकर काम करना होगा, जहाँ किसी भी एक पार्टी को बहुमत वाली सीटें/सदस्य नहीं मिले। उदाहरण के लिए, कोलंबो नगर परिषद (सीएमसी) में, एसजेबी के नेतृत्व वाले विपक्ष ने कोलंबो के मेयर का चुनाव करने के लिए गठबंधन बनाने हेतु अन्य दलों से संपर्क किया है, क्योंकि संयुक्त विपक्ष की सीटें सीएमसी में एनपीपी द्वारा प्राप्त सीटों से अधिक हैं। विपक्षी दलों के नेतृत्व वाली विभिन्न परिषदों की मांगों को पूरा करना भी सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इस संदर्भ में, सरकार स्थानीय निकायों के स्तर पर मतभेदों को कैसे दूर करती है, यह देखने वाली बात होगी कि विभिन्न सुधार नीतियों को कैसे लागू किया जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब स्थानीय सरकार के चुनाव लंबे समय से विलंबित प्रांतीय परिषद चुनावों का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
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*डॉ. सामथा मल्लेमपति आईसीडब्ल्यूए (ICWA) में शोध अध्येता हैं।
अस्वीकरण: व्यक्त किए गए विचार लेखिका के व्यक्तिगत विचार हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण
[i] Rathindra Kuruwita, “Sri Lanka Government Develops Cold Feet, Calls Off Local Elections”, February 21, 2023, https://thediplomat.com/2023/02/sri-lanka-government-develops-cold-feet-calls-off-local-elections/. Accessed April 27, 2025.
[ii] newswire.lk, “We should not expect results in 6 months”: President’s full May Day speech”, May 02, 2025, https://www.vivalanka.com/newspage/12125192ai-we-expect-results-6-months-president-s-full-day-speech. Accessed May 3, 2025.
[iii] Ibid.
[iv] The Island, “Sajith: Govt. planning to increase electricity tariff after 6 May”, May 02, 2025, https://island.lk/sajith-govt-planning-to-increase-electricity-tariff-after-6-may/. Accessed May 3, 2025.
[v] P. Kethees -Talawakelle Group Corr, “Govt has failed to deliver on its promises – Sajith”, May 02, 2025, https://www.dailynews.lk/2025/05/02/politics/771251/govt-has-failed-to-deliver-on-its-promises-sajith/ Accessed May 3, 2025.
[vi] Darshna Sanjeewa Balasuriya, “Gun violence continues unabated with 28 shot dead”, May 06, 2025, https://www.dailymirror.lk/breaking-news/Gun-violence-continues-unabated-with-28-shot-dead/108-308150. Accessed May 7, 2025.
[vii] “Mahinda Rajapaksa initiated massive development in the country – Namal”, May 02, 2025, https://www.dailynews.lk/2025/05/02/politics/771259/mahinda-rajapaksa-initiated-massive-development-in-the-country-namal/. Accessed May 3, 2025.
[viii] Kasun Warakapitiya, “Tussle for foothold in local bodies intensifies”, April 20, 2025, https://www.sundaytimes.lk/250420/news/tussle-for-foothold-in-local-bodies-intensifies-595286.html. Accessed May 4, 2025.
[ix] Jehan Perera, “From Promises to Results”, May 06, 2025, https://www.colombotelegraph.com/index.php/from-promises-to-results/. Accessed May 7, 2025.
[x] News First, “2025 Local Government Elections Begin today”, May 06, 2025, https://www.news.lk/current-affairs/2025-local-government-elections-begin-today. Accessed May 7, 2025.
[xi] Daily Mirror, “NPP sweeps 2025 LG elections with over 4.5 Mn votes”, May 07, 2025, https://www.dailymirror.lk/top-story/NPP-sweeps-2025-LG-elections-with-over-4-5-Mn-votes/155-308335. Accessed May 8, 2025.
[xii] Veeragathy Thanabalasingham, “Local Government Elections: Tamil political parties risking their future”, April 20, 2025, https://www.themorning.lk/articles/fLosKVOIb8Eu6WDdMtCL. Accessed May 3, 2025.
[xiii] Tamil Guardian, “Tamil nationalist parties surge in local polls as NPP loses votes in North-East”, 7 May 2025, https://www.tamilguardian.com/content/tamil-nationalist-parties-surge-local-polls-npp-loses-votes-north-east.
[xiv] Daily Mirror, “Will Work with All Opposition Parties to Ensure Transparent Local Governance: Sajith”, May 08, 2025, https://www.dailymirror.lk/breaking-news/Will-Work-with-All-Opposition-Parties-to-Ensure-Transparent-Local-Governance-Sajith/108-308412. Accessed May 9, 2025.
[xv] Ajith Siriwardana, “NPP rules out joining opposition parties to form councils: Tilvin”, May 08, 2025, https://www.dailymirror.lk/breaking-news/NPP-rules-out-joining-opposition-parties-to-form-councils-Tilvin/108-308411. Accessed May 9, 2025.
[xvi] International Monitory Funds, “IMF Reaches Staff-Level Agreement on the Fourth Review under the Extended Fund Facility with Sri Lanka”, 25 April 2025, https://www.imf.org/en/News/Articles/2025/04/25/pr25122-sri-lanka-imf-reaches-sla-on-the-4th-review-under-the-20the%20Executive,continues%20to%20deliver%20commendable%20outcomes. Accessed May 3, 2025.
[xvii] Ibid.
[xviii] International Monitory Fund, Op.Cit. No 15.