
7 सितंबर, 2025 को, रेड सी में कई सबमरीन संचार केबल (सब-केबल/सबमरीन केबल) टूट गए, जिससे मध्य पूर्व और एशिया के कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवा बाधित हो गई। इंटरनेट व्यवस्था पर नज़र रखने वाली संस्था, नेटब्लॉक्स ने बताया कि एक पोत के कारण हुई इस क्षति का असर बड़ी समुद्री प्रणालियों, विशेष रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया-मध्य पूर्व-पश्चिमी यूरोप 4 (एसएमडब्ल्यू4) और भारत-मध्य पूर्व-पश्चिमी यूरोप (आईएमईडब्ल्यूई) लाइनों पर पड़ा।
यह घटना सबमरीन केबलों, उनके महत्व, उनके बदलते परिदृश्य और अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता पर आधारित सब-केबलों के माध्यम से भू-राजनीति के संचालन के तरीकों पर पुनर्विचार का विषय है। इस विशेष रिपोर्ट का उद्देश्य सबमरीन केबलों, उनके पीछे की तकनीक, उनके विकसित होते जटिल परिदृश्य एवं भू-राजनीति पर चर्चा करना है।
डेटा से सब कुछ पता चलता है: सब-केबल और उसके पीछे की तकनीक
भारत में नेटफ्लिक्स पर फ्रेंड्स (एक अमेरिकी सिटकॉम) देखने से लेकर लंदन में किसी विदेशी द्वारा क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने, या मल्टीप्लेयर ऑनलाइन गेमिंग और इंटरनेशनल वीडियो कॉल आदि करने तक, क्या आपने कभी सोचा है कि यह सब कैसे हो पाता है? ऐसा लगता है जैसे अनगिनत लेन वाला एक काल्पनिक सुपर-हाईवे मौजूद है जिसके ज़रिए हमारा डेटा एक साथ अपनी यात्रा करता है। ये सुपर-हाईवे इंटरनेट और आधुनिक संचार प्रणालियों की रीढ़ हैं जिन्हें सबमरीन केबल कहा जाता है। ये केबल दुनिया के लगभग सभी इंटरनेशनल इंटरनेट ट्रैफ़िक, यानी 95% से ज़्यादा, को संभालते हैं, जबकि उपग्रह इसका केवल एक छोटा सा हिस्सा ही संचारित करते हैं।[i] ये केबल प्रति सेकंड कई टेराबिट डेटा संचारित कर सकते हैं, जिससे ग्लोबल डेटा ट्रांसमिशन का सबसे तेज़ और सबसे विश्वसनीय माध्यम उपलब्ध होता है। उदाहरण के लिए, एक केबल लाखों लोगों का डेटा ले जा सकती है।
इसकी शुरुआत ब्रिटेन में हुई जब ज़मीन पर टेलीग्राफ़ लाइनें सफलतापूर्वक बिछाई गईं और इसने समुद्री संचार का रास्ता खुला। और 1800 के दशक में जब एक अमेरिकी-ब्रिटिश कंपनी ने अटलांटिक महासागर के पार केबल सफलतापूर्वक बिछाईं, तो अमेरिकी राष्ट्रपति जेम्स बुकानन और महारानी विक्टोरिया के बीच बधाई संदेशों का औपचारिक आदान-प्रदान हुआ, जिसे एक अखबार ने उस क्षण को "पुरानी एवं नई दुनिया के बीच संचार" कहकर सराहा।[ii] समय के साथ, तांबे के केबलों की जगह फ़ाइबर ऑप्टिक[iii] केबलों ने ले ली क्योंकि वे ज़्यादा कुशल थीं और उनसे वैश्विक स्तर पर डेटा का तेज़ हस्तांतरण होता था।
आज वीडियो मैसेज़, फ़ोटो, वॉयस मैसेज, ईमेल आदि के रूप में डेटा को बाइनरी कोड (1 और 0) में बदल दिया जाता है। उदाहरण के लिए, जब कोई नेपाल में विरोध प्रदर्शन के बारे में ऑनलाइन जानकारी सर्च करता है, तो एक रेडियो सिग्नल उस व्यक्ति के डिवाइस से ज़मीन पर मौजूद नज़दीकी मोबाइल टावर तक जाता है। वहाँ से, सिग्नल प्रकाश तरंगों[iv] में परिवर्तित होकर केबलों के ज़रिए अमेरिका जैसे दूर-दराज की जगहों पर स्थित दूरस्थ सर्वरों (डेटा केंद्रों) तक भेजा जाता है। ये सर्वर फिर डेटा प्राप्त करते हैं, उसे छोटे डेटा पैकेटों (बाइनरी कोड में डेटा के छोटे टुकड़े) में तोड़ते हैं, और उसी ऑप्टिकल मार्ग से तरंगों के ज़रिए वापस भेजते हैं और व्यक्ति को आवश्यक जानकारी मिल जाती है।[v] ये केबल समुद्र तल तक जाती हैं। तटरेखाओं के पास, इन्हें सुरक्षित रखने हेतु समुद्र तल के नीचे दबा दिया जाता है, लेकिन गहरे समुद्र में इन्हें समुद्र तल पर ही बिछा दिया जाता है।
चित्र 1 सबमरीन केबल के भाग, टेलीग्राफी
समुद्र के नीचे स्थित साम्राज्य का बदलता परिदृश्य

चित्र 2 सबमरीन केबलों का वर्तमान मानचित्र
इन केबलों के मानचित्र को देखने से उनकी भौगोलिक अवस्थिति का पता चलता है जिससे यह समझ आता है कि किस देश, कंपनियाँ और व्यावसायिक केंद्र का इस महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना पर नियंत्रण है। हिनरिच फ़ाउंडेशन की एक स्टडी के अनुसार, केबलों के सबसे सघन समूह संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) और यूरोप के बीच उत्पन्न एवं खत्म होते हैं, और इन्हीं जगहों से एशिया के आर्थिक केंद्रों, जैसे जापान, चीन, ताइवान व लगभग एक दर्जन अन्य जगहों, को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग हैं।[vi] वित्तीय, महत्वपूर्ण सैन्य, सरकारी डेटा आदि सहित सभी डेटा इन्हीं समूहों से होकर गुजरता है। एक दर्जन से भी कम देशों के पास समुद्र के नीचे केबल नेटवर्क को डिज़ाइन, तैनात एवं संचालित करने की उन्नत क्षमताएँ हैं, जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका, कई प्रमुख यूरोपीय सहयोगी, जापान, दक्षिण कोरिया, चीन व रूस (कुछ हद तक) शामिल हैं।[vii]
मुख्यतः, सबमरीन केबल प्राइवेट कंपनियों द्वारा बिछाई जाती हैं जिन्हें 'केबल-ऑपरेटर' कहा जाता है, और इनके रखरखाव का काम भी प्राइवेट कंपनियों द्वारा अलग से किया जाता है, जो विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए पोतों के ज़रिए उच्च कुशल तकनीशियनों द्वारा संचालित होती हैं।[viii] सबमरीन केबलों का रखरखाव या तो 'क्लब एग्रीमेंट'[ix] या 'प्राइवेट मेंटेनेंस एग्रीमेंट'[x] के ज़रिए किया जाता है।[xi] दुनिया की लगभग 98 प्रतिशत सबमरीन केबलों का निर्माण, स्वामित्व, स्थापना, संचालन एवं रखरखाव चार निजी कंपनियों : अमेरिकी सबकॉम, फ्रांसीसी अल्काटेल सबमरीन नेटवर्क्स, जापानी निप्पॉन इलेक्ट्रिक कंपनी, और अब चीनी एचएमएन टेक्नोलॉजीज (जिसे पहले हुआवेई मरीन नेटवर्क्स कंपनी लिमिटेड के नाम से जाना जाता था) द्वारा किया जाता है।[xii] कमर्शियल सबमरीन केबलों का स्वामित्व आमतौर पर या तो किसी एक कंपनी के पास होता है या, आमतौर पर, कुछ कंपनियों के पास होता है। इसका स्वामित्व दूरसंचार कंपनियों, मेटा (जिसे पहले फेसबुक कहा जाता था) जैसे कंटेंट प्लेटफॉर्म और गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न जैसे प्रमुख क्लाउड सेवा प्रदाताओं तक के पास है।[xiii]
सबमरीन केबल का लैंडस्कैप एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है, जिसमें स्वामित्व में बदलाव, स्ट्रैटिजीक केबल मार्गों का तेजी से बढ़ना, मेगा प्रोजेक्ट्स के रूप में अधिक क्षमता वाली केबल की तैनाती, भौगोलिक वितरण में बदलाव आदि शामिल हैं। स्वामित्व पारंपरिक दूरसंचार कंपनियों और सरकार समर्थित कंपनियों से हाइपरस्केलर्स यानी बड़े क्लाउड और कंटेंट सेवा प्रदाताओं जैसे कि गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न के पास स्थानांतरित हो रहा है।[xiv] पहले, सबमरीन केबलों का स्वामित्व दूरसंचार कैरियर्स के पास होता था जो निवेश एवं साझा क्षमता वाले संघों के ज़रिए काम करते थे लेकिन 1990 के दशक के अंत में, निजी कंपनियों ने अपने स्वयं के केबल का निर्माण और यूजर्स को सीधे क्षमता बेचना शुरू कर दिया।[xv] 2010 की शुरुआत से, बैंडविड्थ की बढ़ती मांग ने कंटेंट प्रदाताओं को थोक क्षमता खरीदने से वैश्विक परिवहन बुनियादी ढांचे के स्वामित्व और प्रबंधन में बदलाव हेतु प्रेरित किया।[xvi] चारों कंपनियाँ (गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न) मात्र एक दशक में 10% से भी कम हिस्सेदारी से तेज़ी से बढ़कर 71% स्वामित्व तक पहुँच गई हैं।[xvii]
इसके अलावा, एक अन्य स्पष्ट बात यह सामने आती है कि एचएमएन, एक चीनी दूरसंचार अनुसंधान फर्म का 2023 में सब-सी कंस्ट्रक्शन खर्च हेतु वैश्विक बाजार हिस्सेदारी का केवल लगभग 10% ही था, लेकिन 2008 से 2023 तक यह अपने किसी भी प्रतिस्पर्धी की तुलना में तेज़ी से बढ़ी है।[xviii] इसके अलावा, वैश्विक समुद्री केबल परिदृश्य में एक उल्लेखनीय बात चीनी मरम्मत क्षमताओं पर अत्यधिक निर्भरता है, जो सबमरीन इंफ्रास्ट्रक्चर का एक अहम हिस्सा है क्योंकि रिपेयर इंडस्ट्री को अधिक प्रशिक्षित दल और सभी सुविधाओं से लैस पोतों की आवश्यकता होती है। चीन रिपेयर इंडस्ट्री के साथ-साथ केबल निर्माण में चौथा सबसे बड़ा देश बना हुआ है और चीनी फर्म एचएमएन टेक्नोलॉजीज मौजूदा सब-सी केबल निर्माण या मरम्मत के लगभग 25% हिस्सा रखती है, जो इसकी बढ़ती रणनीतिक प्रासंगिकता को दर्शाता है।[xix]
इसके अलावा, सबमरीन केबलों के निर्माण और इन्हें बिछाने की प्रक्रिया विगत कुछ वर्षों में तेज़ हुई है। नीचे दिया गया चार्ट दर्शाता है कि 2020 के बाद से सबमरीन केबल की लॉन्चिंग में तेज़ी से वृद्धि हुई है और ग्लोबल डेटा ट्रैफ़िक में वृद्धि, नए बाज़ारों के लिए कम सेवा वाले क्षेत्रों में केबल बिछाने, और रूट रिडंडेंसी के माध्यम से नेटवर्क लचीलापन सुनिश्चित करने की आवश्यकता के कारण इसमें वृद्धि जारी रहेगी।[xx] 2010 के बाद से सबमरीन केबल की कुल संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, और 2020 के बाद से इनकी तैनाती में तेज़ी आई है, जैसा कि नीचे दिए गए चित्र में दिखाया गया है।[xxi]

नए और तेजी से विवादित होते भौगोलिक क्षेत्रों में सबमरीन केबल प्रोजेक्ट्स की संख्या बढ़ने की प्रवृत्ति सामने आई है। उदाहरण के लिए विकसित एशिया-प्रशांत में इसके लॉन्च के आंकड़े तेजी से बढ़े हैं, जो 2020 में 21 से बढ़कर 2023 में 33 हो गए, जबकि उभरते एशिया-प्रशांत में ये 26 से बढ़कर 38 हो गए। एनालिसिस मेसन के अनुसार 2010 और 2023 के बीच, पश्चिमी यूरोप में सबसे अधिक नए सबमरीन केबल का प्रक्षेपण किया गया, कुल 77, इसके बाद उभरते एशिया-प्रशांत में 71 नई केबल और विकसित एशिया-प्रशांत में 68 नई केबलें थीं।[xxii] अन्य क्षेत्रों में उत्तरी अमेरिका में 45, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में 44, उप-सहारा अफ्रीका में 30, लैटिन अमेरिका में 28 और मध्य व पूर्वी यूरोप में 7 नई केबलें शामिल हैं। डेटा और सर्विस हेतु तैयार मानचित्र (नीचे) से पता चलता है कि सबसे अधिक नियोजित/तैनात केबल विकसित एवं उभरते एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पाए जा सकते हैं।

चित्र 4 शोधकर्ता द्वारा को-पायलट की सहायता से तैयार किया गया

2025 तक हेतु तैयार सब-केबलों का मानचित्र
स्रोत: सबमरीन केबल्स
इसके अलावा, हाल ही में घोषित सब-केबल प्रोजेक्ट्स मेगा प्रोजेक्ट्स हैं और प्रभाव का एक साधन बन रहे हैं। उदाहरण के लिए, मेटा का प्रोजेक्ट वाटरवर्थ, 50,000 किलोमीटर लंबा केबल नेटवर्क, इस स्तर का पहला ऐसा नेटवर्क है जिसका स्वामित्व केवल एक कंपनी, यानी मेटा, के पास है। यह दुनिया का सबसे लंबा, पृथ्वी की परिधि से भी लंबा नेटवर्क होगा और अमेरिका, भारत, दक्षिण अफ्रीका, ब्राज़ील और अन्य क्षेत्रों को जोड़ेगा। यह एक मौलिक बदलाव का प्रतीक है क्योंकि ये कंपनियाँ न केवल डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर हावी हैं, बल्कि वे इंटरनेट की फिजिकल नींव को भी नियंत्रित कर रही हैं।[xxiii] इसके अलावा, लगभग 45,000 किलोमीटर लंबा 2 अफ्रीका केबल एशिया-प्रशांत, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका, उप-सहारा अफ्रीका और पश्चिमी यूरोप के उभरते क्षेत्रों के 33 देशों को जोड़ेगा। वहीं, बिफ्रॉस्ट केबल एक ओपन केबल सिस्टम है जो 15,000 किलोमीटर से अधिक लंबा होगा और संयुक्त राज्य अमेरिका, सिंगापुर, गुआम, इंडोनेशिया, मैक्सिको और फिलीपींस को जोड़ेगा। एक अन्य महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट, इको केबल, जिसपर गूगल और मेटा का संयुक्त स्वामित्व है, संयुक्त राज्य अमेरिका को सिंगापुर, गुआम, इंडोनेशिया और पलाऊ से जोड़ेगा, जिससे दक्षिण पूर्व एशिया और उत्तरी अमेरिका के बीच डिजिटल अवसंरचना मज़बूत होगी।
हाइपरस्केलर्स द्वारा केबल स्वामित्व में इस बदलाव ने उन्हें केबलों को बिछाने की जगह तय करने की शक्ति प्रदान की है, जिससे ग्लोबल केबल नेटवर्क की संरचना में नया परिवर्तन आया है। इन टेक्नोलॉजी कंपनियों या हाइपरस्केलर्स के पास अब विशाल डेटा तक पहुँच है, जिसमें विशाल महत्वपूर्ण, संवेदनशील एवं निजी डेटा शामिल है। भविष्य में, इस प्रभुत्व की वजह से अन्य के लिए पहुँच की शर्तें तय की जा सकती हैं और विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के छोटे देशों को इसमें प्रवेश में बाधाएँ उत्पन्न हो सकती हैं। निजी कंपनियों के रणनीतिक हित और निर्णय देशों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं।
अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता पर केंद्रित सब-केबलों के ज़रिए भू-राजनीतिक व्यवहार
भू-राजनीति को मुख्यतः बड़े रणनीति एवं महाशक्ति राजनीति (जैसे सैन्य समझौते, राजनयिक शिखर सम्मेलन, रणनीतिक सिद्धांत, विदेश नीति आदि) के माध्यम से समझा जाता है। लेकिन जैसा कि प्रसिद्ध भूगोलवेत्ता जॉन एग्न्यू कहते हैं, हमें भू-राजनीति के वास्तविक कार्यप्रणाली को समझने की ज़रुरत है, अर्थात, भू-राजनीति वास्तव में कैसे काम करती एवं इसका अनुभव कैसे किया जाता है, यह सिद्धांत और क्रिया के बीच की खाई को पाटता है।[xxiv] सबमरीन केबलों के भू-राजनीतिक व्यवहार सुरक्षा से जुड़े नैरेटिव, भौतिकता, ग्रे-ज़ोन रणनीति, संस्थागत संकेत आदि के माध्यम से वैश्विक राजनीति को दर्शाते हैं। इस शोधपत्र में, सबमरीन केबलों को उभरते हुए ऐसे क्षेत्र के रूप में माना गया है जहाँ भू-राजनीति सक्रिय रूप से की जाती है और अनुभव की जाती है, विशेष रूप से अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता के संदर्भ में।[xxv]
भू-राजनीति की सबसे अधिक स्पष्टता इस बात में देखी जाती है कि कैसे देश अप्रत्यक्ष रूप से इन केबलों के स्वामित्व और बिछाने हेतु कॉर्पोरेट्स के साथ सांठगांठ कर रहे हैं। मेटा, गूगल, अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट और इसी तरह की अन्य अमेरिकी हाइपरस्केलर कंपनियाँ इनमें से अधिकांश केबलों के निर्माण, पट्टे, बिछाने व संचालन में प्रमुख भू-राजनीतिक पक्ष के रूप में उभरी हैं। मेटा के वाटरवर्थ, मेटा और गूगल के ट्रांस-पैसिफिक इको और बिफ्रॉस्ट, गूगल के इक्वियानो जैसे मेगा प्रोजेक्ट अफ्रीका को यूरोप से जोड़ते हैं आदि।[xxvi] चीनी सरकार के डिजिटल बेल्ट और सिल्क रोड के तहत, चीनी टेक कॉर्पोरेशन जिसे पहले हुआवेई कहा जाता था अब एचएमएन टेक्नोलॉजीज इंडो-पैसिफिक में अंडरसी केबल नेटवर्क के निर्माण का विस्तार करने में सबसे आगे है, उदाहरण के लिए चीन के पास अब पाकिस्तान एंड ईस्ट अफ्रीका कनेक्टिंग यूरोप (पीईएसीई) केबल के ज़रिए इंडो-पैसिफिक में अंडरसी केबल लैंडिंग स्टेशनों तक एक स्थायी पहुंच है, जिसका मूल्य $425 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग ने इंडोनेशिया में 11 अंडरसी केबल प्रोजेक्ट, दक्षिण कोरिया में सात और संयुक्त अरब अमीरात में छह पूरे किए हैं।[xxvii] संयुक्त राज्य अमेरिका राजनीतिक रूप से सुरक्षित और भू-राजनीतिक रूप से संरेखित क्षेत्रों जैसे गुआम, जापान और ऑस्ट्रेलिया में लैंडिंग को अहमियत दे रहा है, जबकि चीन बीआरआई के ज़रिए दक्षिण पूर्व एशिया, अफ्रीका और दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है।
फिर से, शांति के समय में होने वाली रणनीतियाँ, यानी ग्रे-ज़ोन रणनीतियाँ (युद्ध से पहले अस्वीकार्य हमले), इस बात का संकेत देती हैं कि कैसे समुद्र के नीचे केबल व्यवधानों का इस्तेमाल रोज़ाना भू-राजनीतिक दबाव के हथियार के रूप में किया जा रहा है। उदाहरण के लिए, ताइवान के मात्सु द्वीप समूह में, संदिग्ध चीनी पोतों ने केबल काट दिए, जिससे 14,000 निवासियों को छह हफ़्तों तक ऑफ़लाइन रहना पड़ा, जिसे ताइपे बीजिंग की "ग्रे-ज़ोन एग्रेशन" कहता है, और 2018 से अब तक ऐसी 27 घटनाएँ हो चुकी हैं।[xxviii] बाल्टिक सागर में, फ़िनलैंड, एस्टोनिया और स्वीडन को जोड़ने वाले दूरसंचार और गैस अवसंरचना को 2023 में नुकसान पहुँचा था, और जाँचकर्ताओं ने इस घटना के पीछे रूसी-ध्वज वाले जहाज और एक चीनी जहाज, द न्यू पोलर बियर, का हाथ होने की बात कही थी। ग्रे ज़ोन रणनीतियों का पालन करते हुए, देश सबमरीन केबलों के ज़रिए राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरों का नैरेटिव गढ़ते हैं।[xxix] इन ग्रे ज़ोन घटनाओं (जिन्हें अस्वीकार किया जा सकता है और जिनके लिए ज़िम्मेदारी नहीं ली जा सकती) का इस्तेमाल इस मामले में अमेरिका जैसे देश चीन के संदर्भ में केबलों के प्रतिभूतिकरण के पूरे नैरेटिव को गढ़ने और उसे उचित ठहराने हेतु करते हैं।[xxx] उदाहरण के लिए, अमेरिकी सांसदों ने अल्फाबेट, मेटा, अमेज़न और माइक्रोसॉफ्ट जैसी प्रमुख अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों से पनडुब्बी संचार केबलों की सुरक्षा पर सवाल उठाने में राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बारे में पूछा, और दिखाया कि कैसे यह चर्चा प्रतिभूतिकरण में तब्दील हो जाती है।[xxxi]
सबमरीन केबलों पर अमेरिकी चर्चा अक्सर चीनी कंपनियों को अपनी डिजिटल सिल्क रोड पहल के माध्यम से साइबर जासूसी और निगरानी करने वाली कंपनियों के रूप में पेश करती है।[xxxii] चीन अमेरिका को आधिपत्यवादी के रूप में दर्शाता है।[xxxiii] ये चर्चाएँ अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों को आकार दे रही हैं, निवेश संबंधी निर्णयों को प्रभावित कर रही हैं, और केबलों के पुनर्निर्देशन एवं विविधीकरण को उचित ठहरा रही हैं। इसके अलावा, नियमों और विनियमों के माध्यम से संस्थागत संरेखण भी केबलों की भू-राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए, 2021 में, गूगल और मेटा अमेरिकी न्याय विभाग के साथ एक राष्ट्रीय सुरक्षा समझौते के पक्षकार थे, जिसने पैसिफिक लाइट केबल नेटवर्क (पीएलसीएन) को तभी आगे बढ़ने की अनुमति दी, जब वे अपने चीनी साझेदार को बाहर करने और इंडोनेशिया, वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों में लैंडिंग पॉइंट्स में विविधता लाने पर सहमत हुए।[xxxiv] चीन ने परमिट लेना अनिवार्य कर दिया है, जिससे चीनी प्राधिकारी विशेष रूप से दक्षिण चीन सागर में अपनी संप्रभुता को सुदृढ़ कर सकेंगे।[xxxv]
आलोचनात्मक चिंतन
जैसा कि समाजशास्त्री मैनुअल कास्टेल्स ने सही कहा है, आज हम नेटवर्क से जुड़े समाज में रहते हैं और इस नेटवर्क से जुड़े समाज में, दुनिया के पूरे डेटा का 95 प्रतिशत हिस्सा सब-केबलों के ज़रिए प्रवाहित होता है, इसलिए इन सबमरीन केबलों को समझना बेहद ज़रुरी है। इस रिपोर्ट के माध्यम से, इन केबलों पर प्रकाश डाला गया है कि ये केबल क्या हैं, इनके पीछे की तकनीक क्या है, ये क्यों महत्वपूर्ण हैं और सब-केबल परिदृश्य में किस तरह का परिवर्तन देखा जा रहा है। नए भौगोलिक स्थानों से लेकर नए स्वामित्व, सबमरीन प्रोजेक्ट्स के प्रकार और इन केबलों की भू-राजनीति तक, सबमरीन केबलों में और इनके माध्यम से बहुत कुछ बदल रहा है। यह रिपोर्ट सबमरीन केबलों को लेंस के रूप में उपयोग करके उन अक्सर उपेक्षित पद्धतियों को उजागर करती है जिनके ज़रिए देश भू-राजनीति को अंजाम देते हैं जो अक्सर मेटा सिद्धांतों और विदेश नीति के विमर्श से प्रभावित होती हैं। रिपोर्ट हमें दुनिया भर में हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुकी चीज़ों के बारे में नैरेटिव और सिद्धांत गढ़ने में सावधानी बरतने के महत्व के बारे में बताती है और उन्हें भू-राजनीति से जोड़कर दिखाती है कि कैसे सबमरीन केबल राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नैरेटिव, नियामक निर्णयों, भौतिक विकास और संस्थागत संकेतों के सामान्य रोज़मर्रा के ढाँचे के ज़रिए रोज़मर्रा की भू-राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। समुद्री केबल यह स्पष्ट करते हैं कि अमेरिका और चीन जैसी शक्तियाँ अपनी नियमित गतिविधियों के ज़रिए भू-राजनीति कैसे करती हैं और उसे अंजाम देती हैं। यह सिर्फ़ सैन्य रणनीति या विदेश नीतियाँ या सबमरीन केबलों के संदर्भ में रणनीतिक तेवर ही नहीं हैं, बल्कि रोज़मर्रा की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नैरेटिव, भौतिकता, ग्रे-ज़ोन रणनीति, संस्थागत संकेत आदि भी हैं जो केबलों के ज़रिए विशेष रूप से अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता के संदर्भ में प्रदर्शित और अनुभव किए जाते हैं।
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*अनुभा गुप्ता, रिसर्च एसोसिएट, विश्व मामलों की भारतीय परिषद, नई दिल्ली
अस्वीकरण: व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
पाद-टिप्पणियाँ
[i] Deep, A. (2025, September 8). Indian networks face higher ‘latency’ to Europe following Red Sea cable cuts. The Hindu. https://www.thehindu.com/incoming/indian-networks-face-higher-latency-to-europe-following-red-sea-cable-cuts/article70026779.ece (Accessed September 8, 2025)
[ii] Chataut, R. (2024, April 1). Submarine cables are the unseen backbone of the global internet. The Conversation. https://theconversation.com/undersea-cables-are-the-unseen-backbone-of-the-global-internet-226300 (Accessed September 22, 2025)
[iii] Fiber-optic cables use hair-thin glass or plastic strands to transmit data through total internal reflection, allowing light signals to travel long distances with minimal loss. Optical repeaters placed along the seabed amplify weakened signals, enabling high-speed data transfer across oceans.
[iv] Radio waves received at a tower are converted into electrical signals, which a laser or LED then turns into pulses of light for transmission through optical fibers. At the other end, photodetectors reverse the process, restoring the signal for delivery to the user’s device.
[v] Singh, R. (2025, September 9). Red Sea cable cut interrupts internet in Asia: How data travels to you under the ocean. The Indian Express. https://indianexpress.com/article/explained/explained-sci-tech/undersea-cables-red-sea-internet-working-simplified-10239041/ (Accessed September 22, 2025)
[vi] HowStuffWorks. (2000, June 15). How does a fiber optic cable work? HowStuffWorks. https://electronics.howstuffworks.com/question402.htm
[vii] Capri, A. (2024, April). The new geopolitics of submarine cables. Hinrich Foundation. https://research.hinrichfoundation.com/hubfs/White%20Paper%20PDFs/The%20new%20geopolitics%20of%20undersea%20cables%20%28Alex%20Capri%29/The%20New%20Geopolitics%20of%20Undersea%20Cables%20-%20Hinrich%20Foundation%20-%20Alex%20Capri%20-%20April%202024.pdf (Accessed September 22, 2025)
[viii] Ibid.
[ix] Club Agreement, cable operators form a consortium and share maintenance costs.
[x] Private Maintenance Agreements are bilateral agreements between cable operators and maintenance ship owners.
[xi] Runde, D. F., Murphy, E. L., & Bryja, T. (2024, August 16). Safeguarding subsea cables: Protecting cyber infrastructure amid great power competition [Report]. Center for Strategic & International Studies. https://www.csis.org/analysis/safeguarding-subsea-cables-protecting-cyber-infrastructure-amid-great-power-competition (Accessed September 22, 2025)
[xii] Ibid.
[xiii] Calabrese, J. (2025, April 10). China’s new underwater tool cuts deep, exposing vulnerability of vital network of subsea cables. The Conversation. https://theconversation.com/chinas-new-underwater-tool-cuts-deep-exposing-vulnerability-of-vital-network-of-subsea-cables-251877 (Accessed September 18, 2025)
[xiv] Congressional Research Service. (2024, December 13). Protection of undersea telecommunication cables: Issues for Congress (CRS Product No. R47648). Library of Congress. https://www.congress.gov/crs-product/R47648(Accessed September 18, 2025)
[xv] PYMNTS. (2024, October 1). Big Tech’s undersea cable empire is building tomorrow’s digital economy. PYMNTS. https://www.pymnts.com/connectedeconomy/2024/big-techs-undersea-cable-empire-is-building-tomorrows-digital-econom (Accessed September 18, 2025)
[xvi] https://www2.telegeography.com/submarine-cable-faqs-frequently-asked-questions
[xvii] https://blog.telegeography.com/telegeography-content-providers-submarine-cable-holdings-list-new
[xviii] Kang, J., & Jacob, J. (2024, September). Connecting the Indo-Pacific: The future of subsea cables and opportunities for Australia [Policy brief]. Australian Strategic Policy Institute. https://ad-aspi.s3.ap-southeast-2.amazonaws.com/2024-09/Connecting%20the%20Indo-Pacific%20-%20The%20future%20of%20subsea%20cables%20and%20opportunities%20for%20Australia_0.pdf?VersionId=.LcTT0ZYi0Nab6DeTCLgQ8M1a15m42nD (Accessed September 18, 2025)
[xix] Library of Congress, Congressional Research Service. (2023). Undersea Telecommunication Cables: Technology Overview and Issues for Congress (CRS Report No. R47237). Retrieved from https://www.congress.gov/crs-product/R47237/ (Accessed September 18, 2025)
[xx] Ibid.
[xxi]Analysys Mason. (2025, May 10). Submarine cable launches. Retrieved September 22, 2025, from https://www.analysysmason.com/research/content/articles/submarine-cable-launches-rma22-rdfi0 (Accessed September 15, 2025)
[xxii] Ibid.
[xxiii] Ibid.
[xxiv] Badshah, N. (2025, February 17). Meta plans to link US and India with world’s longest undersea cable project. The Guardian. https://www.theguardian.com/technology/2025/feb/17/meta-plans-to-build-worlds-longest-underwater-sub-sea-cable-venture (Accessed September 12, 2025)
[xxv] Agnew, J. (1994). The territorial trap: The geographical assumptions of international relations theory. Review of International Political Economy, 1(1), 53–80. https://doi.org/10.1080/09692299408434268
[xxvi] Lehdonvirta, V., & Mikelsaar, A. (2025, March 10). What Meta’s plan to build the world’s longest undersea cable means for digital infrastructure and geopolitics. Oxford Internet Institute. https://www.oii.ox.ac.uk/news-events/what-metas-plan-to-build-the-worlds-longest-undersea-cable-means-for-digital-infrastructure-and-geopolitics/ (Accessed September 12, 2025)
[xxvii] Lehdonvirta, V., & Mikelsaar, A. (2025, March 10). What Meta’s plan to build the world’s longest undersea cable means for digital infrastructure and geopolitics. Oxford Internet Institute. https://www.oii.ox.ac.uk/news-events/what-metas-plan-to-build-the-worlds-longest-undersea-cable-means-for-digital-infrastructure-and-geopolitics/ (Accessed September 12, 2025)
[xxviii] Reuters. (2025, June 13). China says Taiwan politicising cable damage issue, after ship’s captain jailed. Reuters. https://www.reuters.com/business/media-telecom/china-says-taiwan-politicising-cable-damage-issue-after-ships-captain-jailed-2025-06-13; Murphy, E. L., & Pearl, M. (2025, April 4). China’s underwater power play: The PRC’s new subsea cable-cutting ship spooks international security experts [Commentary]. Center for Strategic and International Studies. https://www.csis.org/analysis/chinas-underwater-power-play-prcs-new-subsea-cable-cutting-ship-spooks-international; Patil, S., & Gupta, P. (2024, May 21). Undersea chokepoints: The Red Sea cable disruptions. Observer Research Foundation. https://www.orfonline.org/expert-speak/undersea-chokepoints-the-red-sea-cable-disruptions (Accessed September 9, 2025)
[xxix] Reuters. (2025, June 13). China says Taiwan politicising cable damage issue, after ship’s captain jailed. Reuters. https://www.reuters.com/business/media-telecom/china-says-taiwan-politicising-cable-damage-issue-after-ships-captain-jailed-2025-06-13; Murphy, E. L., & Pearl, M. (2025, April 4). China’s underwater power play: The PRC’s new subsea cable-cutting ship spooks international security experts [Commentary]. Center for Strategic and International Studies. https://www.csis.org/analysis/chinas-underwater-power-play-prcs-new-subsea-cable-cutting-ship-spooks-international; Patil, S., & Gupta, P. (2024, May 21). Undersea chokepoints: The Red Sea cable disruptions. Observer Research Foundation. https://www.orfonline.org/expert-speak/undersea-chokepoints-the-red-sea-cable-disruptions (Accessed September 9, 2025)
[xxx] Reuters. (2025, June 13). China says Taiwan politicising cable damage issue, after ship’s captain jailed. Reuters. https://www.reuters.com/business/media-telecom/china-says-taiwan-politicising-cable-damage-issue-after-ships-captain-jailed-2025-06-13; Murphy, E. L., & Pearl, M. (2025, April 4). China’s underwater power play: The PRC’s new subsea cable-cutting ship spooks international security experts [Commentary]. Center for Strategic and International Studies. https://www.csis.org/analysis/chinas-underwater-power-play-prcs-new-subsea-cable-cutting-ship-spooks-international; Patil, S., & Gupta, P. (2024, May 21). Undersea chokepoints: The Red Sea cable disruptions. Observer Research Foundation. https://www.orfonline.org/expert-speak/undersea-chokepoints-the-red-sea-cable-disruptions (Accessed September 9, 2025)
[xxxi] Reuters. (2025, June 13). China says Taiwan politicising cable damage issue, after ship’s captain jailed. Reuters. https://www.reuters.com/business/media-telecom/china-says-taiwan-politicising-cable-damage-issue-after-ships-captain-jailed-2025-06-13; Murphy, E. L., & Pearl, M. (2025, April 4). China’s underwater power play: The PRC’s new subsea cable-cutting ship spooks international security experts [Commentary]. Center for Strategic and International Studies. https://www.csis.org/analysis/chinas-underwater-power-play-prcs-new-subsea-cable-cutting-ship-spooks-international; Patil, S., & Gupta, P. (2024, May 21). Undersea chokepoints: The Red Sea cable disruptions. Observer Research Foundation. https://www.orfonline.org/expert-speak/undersea-chokepoints-the-red-sea-cable-disruptions (Accessed September 9, 2025)
[xxxii] Browne, R. (2024, July 16). The next front in U.S.-China tech battle? Underwater cables that power the global internet. CNBC. https://www.cnbc.com/2024/07/16/next-front-in-us-china-tech-battle-is-underwater-internet-cables.html
[xxxiii] Brock, J. (2023, March 24). U.S. and China wage war beneath the waves – over internet cables. Reuters. https://www.reuters.com/investigates/special-report/us-china-tech-cables/
[xxxiv] Thomas, P. A. (2025, July 22). US lawmakers question big tech over undersea cable safeguards. Network World. https://www.networkworld.com/article/4026355/us-lawmakers-question-big-tech-over-undersea-cable-safeguards.html (Accessed September10, 2025)
[xxxv] Mastro, O. S. (2020, December 16). How China is bending the rules in the South China Sea. Lowy Institute. https://www.lowyinstitute.org/the-interpreter/how-china-bending-rules-south-china-sea (Accessed September10, 2025)