सारांश: भूटान, छोटा और हिमालय की गोद में बसा भारत का पवित्र पड़ोसी देश है। हाल ही में यहाँ वैश्विक शांति प्रार्थना महोत्सव (जीपीपीएफ/ GPPF) 2025 का समापन हुआ है। भूटान द्वारा GPPF की मेज़बानी करना इस देश की वैश्विक पहुँच को दर्शाता है जो एक ऐसी दुनिया में शांति और आरोग्य के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दिखाता है जो तेजी से अनिश्चित, बेमेल, ध्रुवीकृत और युद्धों से भरे भविष्य की ओर बढ़ रही है। भारत, जिसे बौद्ध धर्म का जन्मस्थान और शांति एवं अहिंसा का सच्चा समर्थक माना जाता है, उसने भूटान को बहुमूल्य एवं पवित्र पड़ोसी के रूप में अपनाया है। मैत्री की इसी भावना से भारत ने जीपीपीएफ को अपना समर्थन दिया है और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की थिम्पू की दो दिन की यात्रा का प्रबंध किया है।
परिचय
हाल ही में भूटान में थिम्पू में वैश्विक शांति प्रार्थना महोत्सव (जीपीपीएफ/ GPPF) 2025[i] संपन्न हुआ। यह महोत्सव 4 नवंबर से 19 नवंबर 2025 तक चला। इस महोत्सव का फोकस वैश्विक शांति, करुणा और सद्भाव को बढ़ावा देना था।[ii] इस 16-दिवसीय महोत्सव का आयोजन भूटान की शाही सरकार द्वारा किया गया था। इसे अपनी तरह का अनोखा महोत्सव माना गया है क्योंकि "21वीं सदी के पहले हिस्से का सबसे महत्वपूर्ण वज्रयान संमिलन” था।[iii]
भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे के अनुसार, “हम ऐसे समय में रह रहे हैं जहाँ शांति, करूणा और तालमेल की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। इसी भावना के साथ हमने GPPF की मेज़बानी करने का सौभाग्य मिला है।” भूटान की विदेशी आउटरीच एजेंसियों, जैसे कि विदेशों में दूतावासों और स्थायी मिशनों ने महोत्सव में हिस्सा लेने को प्रेरित किया और विश्व का ध्यान इस महोत्सव पर आकर्षित करने का प्रयास किया।[iv] भूटान का GPPF 2025 की मेज़बानी करना तेज़ी से अनिश्चितता, अशांत, ध्रुवीकृत और विवादों से भरी इस दुनिया में वैश्विक शांति और आरोग्य के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दिखाता है।
भारत, वह देश जहाँ कुमार सिद्धार्थ (राजकुमार सिद्धार्थ) को ज्ञान (प्रबोध) प्राप्त करने के बाद बुद्धत्व और निर्वाण (परम मुक्ति) प्राप्त हुआ, उसने GPPF के आयोजन हेतु भूटान की शाही सरकार को अपना समर्थन दिया। संस्कृति मंत्रालय ने भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को पिपरहवा से थिम्पू तक पहुँचाने में मदद की जो 08 नवंबर 2025 को पहुँचे। इन पवित्र अवशेषों को महोत्सव के दौरान 12 से 17 नवंबर तक लोगों के दर्शन के लिए रखा गया।[v], [vi]
भारत और भूटान के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों पर ज़ोर देते हुए, भूटान के प्रधानमंत्री ने भारत सरकार का आभार व्यक्त किया और इस महोत्सव को “भूटान– भारत संबंधों में महत्वपूर्ण चरण” बताया।[vii] विशेष बात यह है कि यह पवित्र प्रदर्शनी भारत की “अपनी बौद्ध विरासत को विश्व के साथ साझा करने की परंपरा” का एक हिस्सा है।[viii]
GPPF ने भूटान और विश्व भर के अलग– अलग बौद्ध परंपराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले आध्यात्मिक गुरुओं, विद्वानों और अनुयायियों को एक साथ लाने की कोशिश की।[ix] इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य प्रेम और दया की भावना को बढ़ावा देना था जो अधिक शांतिपूर्ण भविष्य निर्माण एवं इंसानियत की भलाई हेतु आरोग्य पहलों का समर्थन करने के लिए आवश्यक हैं।[x]
महोत्सव की तैयारी और वैश्विक शांति प्रार्थनाएं
इस महोत्सव की तैयारी सितंबर– अक्टूबर 2025 में ही शुरू कर दी गई थी, जिसमें भूटानी[xi] और नेपाली कारीगरों ने 14– फुट ऊंची कालचक्र की मूर्ति[xii] और पवितत्र लकड़ियों से अन्य बौद्ध मूर्तियां हाथों से तैयार कीं।[xiii] इस महोत्सव का मुख्य स्थान चांगलिमिथांग राष्ट्रीय स्टेडियम था जिसे भूटान और विश्व भर से 20,000 से अधिक लोगों के रहने के लिए तैयार किया गया था।[xiv]
तैयारी से जुड़े कार्यों में भारत के श्रमिकों और निर्माण कामगारों ने सहयोग दिया था। इसके अलावा, GPPF के आयोजकों ने भूटानी और अंतरराष्ट्रीय शुभचिंतकों के अनुरोध पर पसंदीदा मुद्राओं जैसे– अमेरिकी डॉलर, यूरो, येन, वस्तुओं के रूप में दान और सबसे ज़रूरी बात– यूपीआई (UPI) और यूनियन–पे (Union-Pay) ऐप द्वारा समर्थित क्यूआर कोड के माध्यम से दान देने के लिए एक पोर्टल भी चलाया गया।[xv],[xvi]
कालचक्र मूर्ति की तैयारी
तस्वीर का स्रोत: https://www.bbs.bt/wp-content/uploads/2025/10/3.jpg
इस महोत्सव में छह पवित्र रस्में की गईं जिनमें ‘जबझी धोईकोक’ भी शामिल था। यह एक शांतिपूर्ण तरीके से भेंट चढ़ाने का समारोह होता है जिसमें शरीर, वाणी और मन के नकारात्मक कर्मों को ठीक करने, स्वच्छ करने और शुद्ध और पवित्र करने के उद्देश्य से क्रोधित देवताओं से सुरक्षा भी शामिल थी (चित्र 2)।[xvii] इसमें वज्रयान बौद्ध परंपरा में वैश्विक शांति प्रार्थना, सम्मानित लामाओँ द्वारा सार्वजनिक आशीर्वाद और विश्व शांति के लिए वज्र गुरु मंत्र का सामूहिक पाठ भी शामिल था।[xviii]
इसके अलावा, इस महोत्सव में कालचक्र दीक्षा और सशक्तिकरण भी किया गया जिससे व्यक्ति के छोटे रूप और ब्रह्मांड के बड़े रूप के बीच पवित्र संबंध की समझ को बढ़ावा मिला, साथ ही भिक्खुणियों (नन) को दीक्षा भी दी गई।[xix]

स्रोत: वैश्विक शांति प्रार्थना महोत्सव, https://globalpeaceprayers.org/about-gpp/
इस महोत्सव में लगभग 84 बौद्ध आध्यात्मिक गुरुओं,[xx] और भूटान के 'हिंदू धर्म समुदाय' के लगभग 26 पंडितों[xxi] ने हिस्सा लिया।[xxii] यह वैश्विक शांति प्रार्थना महोत्सव 4-10 नवंबर तक चला। [xxiii] इस महोत्सव में चीन, सिंगापुर और ताइवान से महायान शाखा के कई “लामा और दूसरे प्रतिनिधि; कंबोडिया, म्यांमार, श्रीलंका और थाईलैंड से थेरवाद शाखा के प्रतिनिधि; और भूटान, भारत एवं तिब्बती क्षेत्र से वज्रयान शाखा के प्रतिनिधियों,”[xxiv] ने हिस्सा लिया।
GPPF महोत्सव भूटान के चौथे ड्रुक ग्यालपो (राजा) जिग्मे सिंग्ये वांगचुक के 70वें जन्ममदिन, जो 11 नवंबर 2025 को होता है, के उत्सव के साथ हुआ। ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस मौके पर भारत के प्रधानमंत्री विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस घटना ने देश के इतिहास में भूटान की राजशाही के महत्व और भारत के साथ उसके संबंधों को रेखांकित किया। साथ ही दोनों देशों के राजनयिक संबंधों और सांस्कृतिक सह– संबंधों पर भी ज़ोर दिया।
कालचक्र तंत्र और भारत से उसका संबंध
इस महोत्सव की मुख्य बातों में से एक कालचक्र को अभिमंत्रित करना था जिसकी प्रक्रिया 12 नवंबर 2025 को शुरू हुई। कार्यक्रम का उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भूटान के चौथे राजा जिग्मे सिंग्ये वांगचुक ने मिल कर किया।[xxv],[xxvi]
कालचक्र तंत्र (केटी/KT) या “समय का पहिया,” भारतीय बौद्ध रहस्यवाद की अंतिम और सबसे जटिल एवं गहन अभिव्यक्तियों में से एक है जो एक ही पल में पूर्ण अंतर्दृष्टि के भीतर प्राप्त ज्ञान के तांत्रिक नज़रिए को दर्शाता है।[xxvii], [xxviii] कालचक्र का अभिमंत्रण सबसे पहले राजा सुचंद्र (दावा सांगपो) को शाक्यमुनि बुद्ध ने स्वयं राजा के अनुरोध पर दिया था।[xxix], [xxx], [xxxi], [xxxii] राजा सुचंद्र के उत्तराधिकारी, कल्कि यश, पच्चीस राजाओं में से पहले ऐसे राजा बने जिन्हें धर्म की रक्षा और उसकी स्थापना का कार्यभार सौंपा गया था।[xxxiii], [xxxiv]
आगे चलकर, 12वीं सदी में बंगाली विद्वान अतीसा दीपांकर ने केटी का प्रसार तिब्बत में किया जिसने वहां बौद्ध धर्म को फिर से जीवित करने में अहम भूमिका निभाई और वज्रयान शाखा का मुख्य अंग बन गया।[xxxv]
कालचक्र मंडल
तस्वीर का स्रोत: https://www.facebook.com/centralmonkbody/posts/a-glimpse-of-the-ongoing-meticulous-creation-of-the-kalachakra-mandala-in-prepar/805474695448838/
केटी भारतीय योग और दर्शन परंपरा में गहराई से शामिल है जो समय (काल) के आपस में जुड़े चक्रों और पहियों (चक्र) के बारे में बताता है जो ब्रह्मांड और मनुष्य के शरीर, दोनों को नियंत्रित करते हैं।[xxxvi] केटी की जड़ें भारत की नालंदा परंपरा में है और इसकी जड़ें कश्मीर के समृद्ध आध्यात्मिक माहौल एवं वज्रयान विचार को आकार देने में इसकी भूमिका में भी है। [xxxvii]
यह हिमालय के रास्ते से आगे बढ़ा जिसने तिब्बत, मंगोलिया और भूटान की रस्मों एवं कला विरासत को बहुत अधिक प्रभावित किया, जहाँ इसके मंडल और दीक्षाएं आज भी शांति एवं ज्ञान के प्रतीक के रूप में काम करते हैं। भारतीय बौद्धिक गहराई को हिमालयी रहस्यवाद से जोड़ते हुए, कालचक्र भारत की आध्यात्मिक विरासत एवं भूटान की स्थायी वज्रयान संस्कृति के बीच एक जीवित पुल बना हुआ है।
कालचक्र ग्रंथ उन आखिरी संस्कृत रचनाओं में से एक है जो मध्य एशिया की धरती पर लिखी गई थी और कहा जाता है कि वहीं से यह भारत आया।[xxxviii] इस ग्रंथ में शम्भाला को “सीता नदी के उत्तर में” बताया गया है, यह एक ऐसा राज्य है जिसे कई विद्वान आज के शिनजियांग और पूर्वी किर्गिस्तान के ऐतिहासिक क्षेत्र से जोड़ कर बताते हैं और सीता नदी को तारिम नदी मानते हैं।[xxxix], [xl]
यह प्रदेश, जो कभी कम सूखा और बौद्ध एवं बोन संस्कृति से परिपूर्ण था, उसमें रेगिस्तान की रेत के नीचे दबे हुए पुराने स्तूपों के खंडहर हैं।[xli] हालांकि ग्रंथ में शम्भाला के भाग्य के बारे में कुछ भी नहीं लिखा गया लेकिन तिब्बती टिप्पणीकार इसे या तो एक ऐसे क्षेत्र के रूप में मानते हैं जिसने सामूहिक रूप से ज्ञान प्राप्त किया हो या एक ऐसी पवित्र भूमि के रूप में जो केवल शुद्ध नज़र वाले लोगों को दिखाई देती हैं, जो शायद कैलाश पर्वत के “पीछे” या “अंदर” स्थित हो सकती है।[xlii]
कालचक्र की भविष्यवाणी एक ऐसे भविष्य के समय के बारे में बताती है जब “भेदभाव, भौतिकवाद, अज्ञान और विभाजन पर काबू पा लिया जाएगा और ज्ञान एवं करुणा के नेतृत्व में आध्यात्मिक विकास का दौर शुरू होगा।”[xliii], [xliv],[xlv] इसका सीधा कार्मिक लिंक एक ऐसी दुनिया बनाने से है जहाँ शांति एक स्वपन नहीं बल्कि एक जीती– जागती सच्चाई हो। कालचक्र की शिक्षाएं ज्ञान और करुणा को एक साथ लाती हैं।
GPPF 2025 के दौरान कालचक्र अभिमंत्रण भूटान की एक सामंजस्यपूर्ण वज्रयान राज्य (एक जीवित धर्म– पूजा करने वाला राजतंत्र), एक संतुलित राज्य बनने की इच्छा का प्रतीक है, जो आध्यात्मिक जीवन शाक्ति, राजीनीतिक स्थिरता और बौद्ध धर्म की विरासत को एक साथ लाता है जहाँ सभी बौद्ध स्कूल संवेदनशील राजनीतिक स्थितियों के डर के बिना एक साथ आ सकते हैं।
भारतीय प्रधानमंत्रियों का दौरा
GPPF 2025 के दौरान एक और विशेष घटना हुई– प्रधानमंत्री मोदी का थिम्पू दौरा। भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक के आमंत्रण पर भारत के प्रधानमंत्री मोदी 11-12 नवंबर 2025 को थिम्पू के दो दिन के दौरे पर गए। पीएम मोदी ने भूटान के चौथे नरेश के 70वें जन्मदिन के जश्न में हिस्सा लिया और भूटान के नेताओं के साथ GPPF में भी शामिल हुए।[xlvi] वर्ष 2014 में पदभार संभालने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी का भूटान का यह पांचवा दौरा और भारत के प्रधानमंत्री के रूप में उनके वर्तमान कार्यकाल का यह दूसरा दौरा था।
इस दौरे के दौरान, दोनों देशों के बीच सहयोग के मुख्य क्षेत्रों– क्षेत्रीय विकास और साझा वैश्विक प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई, जिसमें 1020 मेगावाट पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना का संयुक्त उद्घाटन और पुनात्सांगछू-I पर काम में तेज़ी लाने की प्रतिबद्धताएं शामिल रहीं।[xlvii] दोनों देशों के नेताओं ने अपनी गहरी दोस्ती को फिर से प्रगाढ़ बनाया, भूटान ने दिल्ली धमाके पर दुख जताया और भारत ने भूटान की एकता की तारीफ की। [xlviii]
इसके अलावा, भारत ने भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-2029) और गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी के लिए महामहिम के विज़न के साथ संचार और व्यापार को बेहतर बनाने के लिए हतिसर में नई आव्रजन चेक पोस्ट बनाने के लिए भी अपने समर्थन को दोहराया।[xlix]
इसके अलावा, इस दौरे के दौरान अक्षय ऊर्जा, स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग हेतु तीन महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।[l] इस दौरे ने भूटान– भारत साझीदारी की मज़बूती पर ज़ोर दिया, जो विश्वास, आपसी सम्मान और सतत विकास एवं क्षेत्रीय स्थिरता के लिए साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है।
निष्कर्ष
भूटान द्वारा आयोजित यह भव्य वैश्विक शांति प्रार्थना महोत्सव विश्व के साथ जुड़ने के देश के विज़न और एक ऐसे विश्व में शांति को बढ़ावा देने के प्रति उसके समर्पण का प्रमाण है जो अक्सर विवादित, अनिश्चित और विभाजित नज़र आती है। यह महोत्सव भारत को छोड़कर अपने दूसरे दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के सामने आने वाली राजनीतिक एवं आर्थिक चुनौतियों का सामना करने में भूटान की मज़बूती को दर्शाती है। इसके अलावा, यह इस बात की भी पुरज़ोर तरीके से याद दिलाती है कि शांति, करुणा और सद्भाव के लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं।
भारतीय उपमहाद्वीप (दक्षिण एशिया) की समृद्ध ऐतिहासिक और आध्यात्मकि परंपराओं ने दीर्घकालिक शांति एवं सतत विकास की रूपरेखा प्रदान की है जो कठिन समय में भारतीय दार्शनिक और राजनीतिक परंपराओं की प्राचीन शिक्षाओं का प्रयोग करने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हैं।
इसके अलावा, वैश्विक शांति प्रार्थना महोत्सव को आयोजित करने में भारत के सहयोग और इस महोत्सव के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का थिम्पू का दो दिन का दौरा, भूटान को भारत के पवित्र हिमालयी पड़ोसी के रूप में और भारत की वैश्विक शांति एवं सद्भाव के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह महोत्सव सबको साथ लेकर चलने का जश्न था, जिसमें अलग– अलग बौद्ध संप्रदायों और दूसरे धर्मों के साधु और आध्यात्मिक गुरु एक साथ मिल कर विश्व में शांति, दया और सामाजिक सुधार के लिए आवाज़ उठा रहे थे। इस मिलेजुले प्रयास से, यह महोत्सव न केवल एकता और सद्भाव की भावना को बढ़ावा देता है, बल्कि रचनात्मक संवाद और सकारात्मक बदलाव का मार्म भी प्रशस्त करता है।
*****
*डॉ. सुबोध चंद्र भारती, रिसर्च एसोसिएट, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली
अस्वीकरण: व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण
[i] DD News. “Bhutan hosts Global Peace Prayer Festival uniting Buddhist leaders worldwide for compassion and harmony.” Doordarshan News .November 4, 2025. https://ddnews.gov.in/en/bhutan-hosts-global-peace-prayer-festival-uniting-buddhist-leaders-worldwide-for-compassion-and-harmony/ (Accessed November 04, 2025).
[ii] Kuensel. “His Majesty the King Graces Global Peace Prayer Festival,” Kuensel. November 05, 2025. https://kuenselonline.com/news/his-majesty-the-king-graces-global-peace-prayer-festival (Accessed November 05, 2025).
[iii] Raymond Lam, “‘Sign of Shambhala’—The Revolution of Bhutan’s Global Peace Prayer Festival,” Tea House – Buddhistdoor. posted October 23, 2025, https://teahouse.buddhistdoor.net/sign-of-shambhala-the-revolution-of-bhutans-global-peace-prayer-festival/ (Accessed November 04, 2025).
[iv] MoFA&ET. Permanent Mission of Bhutan to the United Nations, “Global Peace Prayer Festival 2025,” Ministry of Foreign Affairs & External Trade, Bhutan, September 15 2025. https://www.mfa.gov.bt/pmbg/global-peace-prayer-festival-2025 (Accessed November 07, 2025).
[v] PIB. “Exposition of Holy Relics of Lord Buddha Strengthens the Cultural and Spiritual Ties between India and Bhutan, Reinforcing the Shared Heritage of Peace and Compassion Inspired by Lord Buddha: Dr. Virendra Kumar,” Press Information Bureau, Government of India. November 8 2025, Release ID 2187957, https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=21879 (Accessed November 10, 2025).
[vi] The Hindu. “Buddha Relics Reach Bhutan as India’s Gift for Global Peace Prayer Festival,” The Hindu. November 08, 2025. https://www.thehindu.com/news/international/buddha-relics-reach-bhutan-as-indias-gift-for-global-peace-prayer-festival/article70256508.ece (Accessed November 10, 2025).
[vii] ANI News. “India Extended Significant Support to Bhutan’s Global Peace Prayer Festival, Says Bhutanese PM Tobgay,” ANI. November 3 2025. https://www.aninews.in/news/world/asia/india-extended-significant-support-to-bhutans-global-peace-prayer-festival-says-bhutanese-pm-tobgay20251103224158/?amp= (Accessed November 07, 2025).
[viii] PIB. “Sacred Buddha Relics from India to Grace Bhutan in a Grand Exposition for Global Peace.” November 7, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2187407&ref=official-press.com®=3&lang (Accessed November 07, 2025).
[ix] “GPPF,” Global Peace Prayer Festival 2025, n.d. https://globalpeaceprayers.org/about-gpp/ (Accessed November 06, 2025).
[x] Ibid.
[xi] Sonam Wangdi. “Massive transformations underway at Kuensel Phodrang ahead of Global Peace Prayer Festival.” Bhutan Broadcasting Service (BBS). October 20, 2025, https://www.bbs.bt/234480/ (Accessed October 21, 2025).
[xii] Global Peace Prayer Festival. @gppbhutan. “As time closes in for the Global Peace Prayer Festival, here's a quick update of the progress on the sculpting of the 14-foot Kalachakra statue. With sculpting of parts completed, it only awaits piecing them whole and the paint job.” video post on Instagram Reel. https://www.instagram.com/reel/DP25464ADiP/ (Accessed November 13, 2025).
[xiii] YouTube. “Behind the Scenes Global Peace Prayers Bhutan.” YouTube video, 12:34, posted September 20, 2025. https://www.youtube.com/watch?v=41UNKuW7lck (Accessed November 06, 2025).
[xiv] Ibid.
[xv] Global Peace Prayer Festival. “Bhutan,” Global Peace Prayer Festival, https://globalpeaceprayers.org/bhutan/ (Accessed November 13, 2025).
[xvi] Author contributed to the GPPF using QR code.
[xvii] Global Peace Prayer Festival, “About GPPF,” Global Peace Prayer Festival, accessed November 13, 2025, https://globalpeaceprayers.org/about-gpp/ (Accessed November 13, 2025).
[xviii] Ibid.
[xix] Ibid.
[xx] Global Peace Prayer Festival, “Who Is Attending,” Global Peace Prayer Festival. https://globalpeaceprayers.org/who-is-attending/ (Accessed November 13, 2025).
[xxi] Hindu Dharma Samudaya of Bhutan (HDSB) is a religious foundation, established in the year 2009 and is registered with Chhodey Lhentshog, the Commission for Religious Organization of Bhutan. It is dedicated to promote traditions and spiritual practices of Sanathan Dharma in Bhutan to enable foster and strengthen human values. The aims and objectives of this organization is to promote peaceful co-existence and reverence of all sentient beings in all segments of Bhutanese society. Accessed from: Hindu Dharma Samudaya of Bhutan, “About Us.” https://www.bhutanhindudharma.com/aboutus.php (Accessed November 13, 2025).
[xxii] Global Peace Prayer Festival. “Programmes,” Global Peace Prayer Festival. https://globalpeaceprayers.org/programmes/ (Accessed November 13, 2025).
[xxiii]Global Peace Prayer Festival. “Spiritual leaders gracing the Global Peace Prayers (November 4–10),” Global Peace Prayer Festival. https://globalpeaceprayers.org/who-is-attending/ (Accessed November 13, 2025).
[xxiv] The Hindu. “Bhutan Eyes Spiritual Global-Peacemaker Role,” The Hindu. https://www.thehindu.com/news/international/bhutan-eyes-spiritual-global-peacemaker-role/article70259167.ece (Accessed November 13, 2025).
[xxv] Tshering Tobgay (@TsheringTobgay), “An accomplished spiritual master, Prime Minister @narendramodi, inaugurated and blessed the sacred Kalachakra Empowerment which began today as part of the ongoing Global Peace Prayer Festival.” (post to X/Twitter), November 12, 2025, 10:11 AM. https://x.com/tsheringtobgay/status/1988467174210707563 (Accessed November 12, 2025).
[xxvi] “PM Modi Inaugurates ‘Kalachakra Empowerment’ Ceremony in Bhutan,” NDTV, November 12 2025, https://www.ndtv.com/india-news/pm-modi-inaugurates-kalachakra-wheel-of-time-in-presence-of-bhutan-9620303 (Accessed November 12, 2025).
[xxvii] 14th Dalai Lama, “Introduction to the Kalachakra,” in Teachings, The Office of His Holiness the Dalai Lama, accessed November 10, 2025, https://www.dalailama.com/teachings/kalachakra-initiation (Accessed November 12, 2025).
[xxviii] Raymond Lam, ““Sign of Shambhala” — The Revolution of Bhutan’s Global Peace Prayer Festival.” Tea House (Buddhistdoor). October 23, 2025. https://teahouse.buddhistdoor.net/sign-of-shambhala-the-revolution-of-bhutans-global-peace-prayer-festival/ (Accessed November 12, 2025).
[xxix] ___“History of the Kalachakra Tantra,” Namgyal Monastery Institute of Buddhist Studies, n.d. https://namgyal.org/pages/history-of-the-kalachakra-tantra (Accessed November 10, 2025).
[xxx] Shambhala Times. “Shambhala in the Kalachakra Tantra,” Shambhala Times. October 28, 2018. https://shambhalatimes.org/2018/10/28/shambhala-in-the-kalachakra-tantra/ (Accessed November 15, 2025).
[xxxi] 14th Dalai Lama, “Introduction to the Kalachakra,” in Teachings, The Office of His Holiness the Dalai Lama. https://www.dalailama.com/teachings/kalachakra-initiation (Accessed November 10, 2025).
[xxxii] “Kalachakra Empowerment,” Dzokden. https://dzokden.org/af/kalachakra-empowerment-af/ (Accessed November 10, 2025).
[xxxiii] Shambhala Times. “Shambhala in the Kalachakra Tantra,” Shambhala Times. October 28, 2018. https://shambhalatimes.org/2018/10/28/shambhala-in-the-kalachakra-tantra/ (Accessed November 15, 2025).
[xxxiv] 14th Dalai Lama, “Introduction to the Kalachakra,” in Teachings, The Office of His Holiness the Dalai Lama. https://www.dalailama.com/teachings/kalachakra-initiation (Accessed November 10, 2025).
[xxxv] Raymond Lam, ““Sign of Shambhala” — The Revolution of Bhutan’s Global Peace Prayer Festival,” Tea House (Buddhistdoor). October 23, 2025. https://teahouse.buddhistdoor.net/sign-of-shambhala-the-revolution-of-bhutans-global-peace-prayer-festival/ (Accessed November 12, 2025).
[xxxvi] 14th Dalai Lama, “Introduction to the Kalachakra,” in Teachings, The Office of His Holiness the Dalai Lama. https://www.dalailama.com/teachings/kalachakra-initiation (Accessed November 10, 2025).
[xxxvii] ____. “Niraj Kumar and the Kalachakra Tantra: A Life’s Work.” Teahouse. July 11, 2023. https://teahouse.buddhistdoor.net/niraj-kumar-and-the-kalachakra-tantra-a-lifes-work/ (Accessed November 10, 2025).
[xxxviii] ____“History of the Kalachakra Tantra,” Namgyal Monastery Institute of Buddhist Studies. https://namgyal.org/pages/history-of-the-kalachakra-tantra (Accessed November 10, 2025).
[xxxix] ____“History of the Kalachakra Tantra,” Namgyal Monastery Institute of Buddhist Studies. https://namgyal.org/pages/history-of-the-kalachakra-tantra (Accessed November 10, 2025).
[xl] Shambhala Times. “Shambhala in the Kalachakra Tantra,” Shambhala Times. October 28, 2018. https://shambhalatimes.org/2018/10/28/shambhala-in-the-kalachakra-tantra/ (Accessed November 15, 2025).
[xli] Ibid.
[xlii] Ibid.
[xliii] Ibid.
[xliv] 14th Dalai Lama, “Introduction to the Kalachakra,” in Teachings, The Office of His Holiness the Dalai Lama. https://www.dalailama.com/teachings/kalachakra-initiation (Accessed November 10, 2025).
[xlv] ____“Shri Neeraj Kumar on Kalachakra — Global Peace Prayers Bhutan,” YouTube video, 1:02:34, posted [date unknown]. https://www.youtube.com/watch?v=EDjEAgoC3fw (Accessed November 6, 2025).
[xlvi] Press Information Bureau, “Joint Press Release on the State Visit to Bhutan by Prime Minister of India,” Press Information Bureau, November 12, 2025. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2189049 (Accessed November 12, 2025).
[xlvii] Ibid.
[xlviii] Ibid.
[xlix] Ibid.
[l] Ibid.