चिर प्रतीक्षित भारत–यूरोपीय संघ (ईयू/EU) मुक्त व्यापार समझौता, नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत– यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के मौके पर 27 जनवरी 2026 को अनावृत हुआ। यह समझौता कई विवादों, व्यापार और टैरिफ बाधाओं एवं बढ़ते वैश्विक भू–राजनीतिक उथल–पुथल, जिससे आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित हुईं और भू–आर्थिक बंटवारा हुआ, के बीच हुआ है। हालांकि इस समझौते में कुछ बातें अधूरी हैं लेकिन भारत– ईयू मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए/FTA) एक ऐतिहासिक पल है जिसमें विश्व की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने ‘मदर ऑफ ऑल डील्स (सबसे बड़े और ऐतिहासिक समझौते)’ पर हस्ताक्षर किए हैं और ‘वैश्विक व्यापार के क्षेत्र में’ नया अध्याय लिखा है।[1] यह मुद्दा सार भारत– यूरोपीय संघ एफटीए की पृष्ठभूमि बताता है और इसके मुख्य बिन्दुओं पर चर्चा करता है।
भारत-ईयू एफटीए की पृष्ठभूमि और दायरा
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष, महामहिम सुश्री उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष महामहिम श्री एंटोनियो कोस्टा ने 25–27 जनवरी 2026 को भारत का राजकीय दौरा किया। अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन और अध्यक्ष कोस्टा भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि भी थे। उनके साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया था जिसमें विदेश मामलों और सुरक्षा नीति के उच्चाधिकारी सुश्री काया कल्लास और व्यापार आयुक्त श्री मारोश शेफकोविच शामिल थे, जिन्होंने नई दिल्ली में 16वें भारत– यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन और प्रथम भारत– यूरोपीय संघ व्यापार फोरम में हिस्सा लिया।[2] यह दौरा पिछले साल 27–28 फरवरी को अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन के नेतृत्व में यूरोपीय संघ कॉलेज ऑफ कमिश्नर्स के भारत के ऐतिहासिक दौरे का फॉलोअप था[3] जिसने पिछले साल फरवरी से एफटीए वार्ता को अभूतपूर्व गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
यहाँ इस बात को ध्यान में रखना ज़रूरी है कि भारत–यूरोपीय संघ वार्ता दो दशक पूर्व 2007 में शुरू हुई थी लेकिन 'बाज़ार में पहुँच' और 'नियामक नियंत्रण' को लेकर मतभेदों की वजह से यह वार्ता साल 2013 में रुक गई थी।[4] आठ वर्ष के अंतराल के बाद जुलाई 2022 में एफटीए वर वार्ता फिर से शुरू हो पाई थी।
वार्ता शुरू करने से पहले अप्रैल 2022 में व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी/TTC) बनाई गई थी। टीटीसी का उद्देश्य व्यापार, विश्वसनीय प्रौद्योगिकी और सुरक्षा के क्षेत्र में रणनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए भारत और यूरोपीय संघ के बीच उच्च– स्तरीय समन्वय मंच बनाना था।[5] वार्ता के बीच में यूरोपीय आयोग ने 17 सितंबर 2025 को भारत के साथ यूरोपीय संघ के सहयोग को गहरा, व्यापक और बेहतर तरीके से समन्वित करने के लिए एक नया रणनीतिक यूरोपीय संघ– भारत एजेंडा भी प्रस्तुत किया।[6]
इस एजेंडा को अक्टूबर 2025 में परिषद ने भी मंजूरी दे दी थी। 16वें भारत– यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के दौरान, यह एजेंडा भारत और यूरोपीय संघ ने मिलकर जारी किया था (संयुक्त भारत– ईयू व्यापक रणनीतिक एजेंडा), जिसमें दोनों पक्षों ने भारत– यूरोपीय संघ सहयोग को ‘व्यापक, गहरा और बेहतर तालमेल वाला’ बनाने पर सहमति जताई थी। इस एजेंडा का उद्देश्य पांच प्रमुख स्तंभों में तरक्की पर ध्यान देना है: समृद्धि और निरंतरता; प्रौद्योगिकी और नवाचार; सुरक्षा और रक्षा; कनेक्टिविटी और वैश्विक चुनौतियां; और कौशल, गतिशीलता, व्यापार और लोगों के बीच संबंधों जैसे सहयोगी कारक।[7]
मुख्य बातें
यह समझौता बहुत बड़ा है और इसे 'साझा खुशहाली का ब्लूप्रिंट' बताया गया है।[8] यह विश्व की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को मिलाकर मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाता है जो विश्व की कुल जीडीपी का एक चौथाई हिस्से को कवर करेगा और इसमें 2 अरब उपभोक्ता होंगे, जो विश्व की जीडीपी का एक चौथाई होगा।[9]
समझौते से पहले भी, यूरोपीय संघ वस्तुओं के मामले में भारत का मुख्य व्यापार साझीदार रहा है, 2024-25 में दोनों के बीच लगभग 136.54 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था। इस बीच, हाल के वर्षों में भारत– यूरोपीय संघ के बीच सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार में भी लगातार वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2024 में अनुमानित 83.10 अरब डॉलर।[10] एफटीए को अंतिम रूप दिए जाने के साथ ही आपसी लाभ के लिए व्यापार और नवाचार को और आगे बढ़ाने की बड़ी संभावना खुल गई है। एफटीए भारत को यूरोपीय बाज़ारों में विशेष पहुँच प्रदान करता है जिसमें लगभग 10,000 भारतीय निर्यातकों पर टैरिफ को या तो हटाया जाएगा या कम किया जाएगा। साथ ही, इस पहल में सेवा क्षेत्र को भी ध्यान में रखा गया है। आईटी, शिक्षा और वित्तीय सेवाओं, पर्यटन समेत पेशेवर स्थानांतरण के क्षेत्र में भी लाभ होगा, जिससे यूरोपीय बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
इस बीच, यह समझौता भारत में यूरोपीय निवेश को भी बढ़ावा देगा, जिससे नई, उभरती और उन्नत प्रौद्योगिकी, विकास एवं नवाचार के साथ– साथ दूसरे उपक्रमों में भी सहयोग बढ़ेगा। सबसे ज़रूरी बात यह है कि यह सौदा ‘समान अवसर' और ‘आपूर्ति श्रृंखला का गहन एकीकरण’ पक्का करने के उद्देश्य से किया गया है क्योंकि यूरोपीय संघ और भारत दोनों के मूल में लोकतांत्रिक भावना है।
जैसा कि अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन ने कहा, “यह इस बात का संकेत है कि यूरोप और भारत बिखराव के बजाय सहयोग और अनिश्चितता की बजाय साझेदारी को चुन रहे हैं”।[11] भारत और यूरोपीय संघ दोनों को होने वाले मुख्य लाभों को तालिका 1 में बताया गया है।
तालिका 1
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यूरोपीय संघ को मुख्य लाभ |
भारत को मुख्य लाभ |
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यूरोपीय संघ से निर्यात होने वाले 96.6 प्रतिशत वस्तुओं पर टैरिफ को कम या खत्म कर दिया जाएगा। इससे मशीनरी, ऑटोमोबाइल, वाहन और शराब, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स जैसे क्षेत्रों को बड़ा लाभ होगा।
यूरोपीय उत्पादों पर देय ड्यूटी में हर साल लगभग 4 अरब यूरो की बचत होगी।
बाज़ार पहुँच से यूरोपीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी लाभ मिलता है।
वित्तीय सेवाओं और समुद्री परिवहन जैसे प्रमुख क्षेत्र में भारतीय सेवा बाज़ार तक विशेष पहुँच।
आसान और त्वरित निर्यात के लिए सीमा–शुल्क प्रक्रियाओं को आसान बनाना।
ट्रेडमार्क जैसी यूरोपीय संघ बौद्धिक संपदा की सुरक्षा।
यूरोपीय संघ के लघु व्यापारों के लिए विशेष अध्याय।
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97 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर यूरोपीय बाज़ारों तक अधिमान्य पहुँच जिसमें 99.5 प्रतिशत व्यापार मूल्य शामिल है।
टैरिफ लाइनों के 70.4 प्रतिशत हिस्से पर, जिसमें भारत के 90.7 प्रतिशत निर्यात शामिल हैं, वस्त्र, चमड़ा और फुटवियर, चाय, कॉफी, मसाले, खेल उत्पाद, खिलौने, रत्न और आभूषण एवं कुछ समुद्री उत्पादों जैसे महत्वपूर्ण श्रमिक– आधारित क्षेत्रों के लिए तत्काल चुंगी (ड्यूटी) खत्म कर दी जाएगी।
भारत के निर्यात के 2.9 प्रतिशत को कवर करने वाली 20.3 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर कुछ समुद्री उत्पादों, प्रसंस्कृत खाद्य वस्तुओं, हथियार और गोलाबारूद आदि के लिए 3 और 5 वर्षों में शून्य शुल्क (ड्यूटी) पहुँच मिलेगा।
भारत के 6 प्रतिशत निर्यात को कवर करने वाली 6.1 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को कुछ कुकुट उत्पादों, डिब्बाबंद सब्जियों, बेकरी उत्पादों आदि के लिए टैरिफ में कमी के माध्यम से या कारों, इस्पात, विशेष झींगा/प्रॉन उत्पादों आदि के लिए टीआरक्यू के माध्यम से अधिमान्य पहुँच मिलेगा।
आईटी/ आईटीईएस पेशेवर सेवाओं, शिक्षा और दूसरी व्यापार सेवाओं समेत 144 सेवा उप– क्षेत्रों में व्यापक और गहन प्रतिबद्धताएं। |
स्रोत: यूरोपीय आयोग[12] और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत[13]
भारत और यूरोपीय संघ ने श्रम गतिशीलता पर एक नया सहयोग रूपरेखा भी लॉन्च किया है ताकि भारत से उच्च– कुशल और मौसमी कामगारों को सरल पहुँच मिल सके। इसके अलावा, दोनों ने यूरोपीय संघ के प्रमुख शोध और नवाचार कार्यक्रम, होराइज़न (Horizon) के तहत सह– वित्त पोषण एवं संयुक्त समन्वय के माध्यम से डिजिटल, ऊर्जा, जल, कृषि– खाद्य, स्वास्थ्य, सेमीकंडक्टर, जैवप्रौद्योगिकी, एडवांस्ड मटीरियल के क्षेत्रों में सहयोग को और प्रगाढ़ करने पर सहमति जताई है। इसके अलावा, भारत और यूरोपीय संघ ने विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में कई समझौतों पर सहमति जताई है, जो प्रौद्योगिकी नीति पर उनके बढ़ते तालमेल को दिखाता है। [14]
सुरक्षा और रक्षा समझौता
भारत– यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के दौरान, भारत और यूरोपीय संघ ने सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर भी एक समझौता किया। जापान और दक्षिण कोरिया के बाद यह यूरोपीय संघ और किसी एशियाई देश के बीच इस प्रकार का तीसरा समझौता है। यह समझौता ‘व्यापक रूपरेखा की नींव रखता है जो शांति, सुरक्षा और रक्षा के मुद्दे पर उनके सहयोग को आकार’ देने के लिए यूरोपीय संघ और भारत के रणनीतिक लक्ष्यों के स्तर को परिभाषित करता है।[15] व्यापक सहयोग को सरल बनाने हेतु यह सालाना सुरक्षा और रक्षा संवाद शुरू करने की बात भी करता है।
इस समझौते को यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप की रणनीतिक स्वतंत्रता की तलाश और बदलते अटलांटिक पार गठबंधन के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। जैसा कि यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षी नीति की उच्च प्रतिनिधि काया कैल्लास ने कहा, वैश्विक व्यवस्था में परिवर्तन के बीच, यूरोपीय संघ 'विश्व भर में अपने राजनयिक और आर्थिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाता रहेगा' क्योंकि मज़बूत साझेदारी यूरोपीय संघ की शक्ति को बढ़ाती है।[16] उन्होंने भारत को ‘उपयुक्त साझीदार’ बताया क्योंकि यह 'नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था' को बढ़ावा देने के लिए यूरोपीय संघ की प्रतिबद्धता को साझा करता है।[17]
हालाँकि यह समझौता अभी अपने आरंभिक चरण में है लेकिन यह यूरोपीय संघ और भारत दोनों के लिए लाभकारी साबित होगा। यह ध्यान देने वाली बात है कि यह समझौता भारतीय रक्षा विनिर्माताओं को यूरोपीय संघ के महत्वाकांक्षी ‘री–आर्म यूरोप/ ReArm Europe’ पहल के तहत खरीद व्यवस्था तक पहुँच प्रदान करेगा, जिसे पिछले साल ही शुरू किया गया था। यूक्रेन संकट पर यूरोपीय संघ और भारत के बीच मतभेद होने के बावजूद यह साझेदारी हुई है। इस लिहाज़ से, दोनों पक्षों ने व्यापाक सहयोग के साथ अपने मतभेदों को सुलझाने के लिए आपसी विश्वास और समझ का उच्च स्तर दिखाया है।
तालिका 2
सुरक्षा और रक्षा साझेदारीः सहयोग के मुख्य क्षेत्र
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समुद्री सुरक्षा |
परिस्थितिजन्य जागरूकता एवं सूचनाओं का आदान– प्रदान |
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साइबर मुद्दे |
बहुपक्षीय समन्वय |
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और उभरती एवं विघटनकारी प्रौद्योगिकी |
अप्रसार एवं निरस्त्रीकरण |
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हाइब्रिड संकट |
अंतरिक्ष सुरक्षा और रक्षा |
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लचीलापन और महत्वपूर्ण इमारतों की सुरक्षा |
सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में साझीदारों का क्षमता निर्माण |
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आतंकवाद का मुकाबला करना और हिंसक उग्रवाद को रोकना |
रक्षा पहल, जिसमें रक्षा उद्योग से संबंधित मामले शामिल हैं |
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संगठित अपराध से लड़ने के बाह्य पहलू |
अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा |
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प्रशिक्षण और शिक्षा; वाणिज्य दूतावास संबंधी मामले |
महिला, शांति और सुरक्षा
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स्रोत: यूरोपीय आयोग[18]
इसके अलावा, दोनों पक्षों ने रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्रों में मज़बूत सहयोग को बढ़ावा देने के लिए गोपनीय सूचनाओं और खुफिया जानकारी के आदान– प्रदान को संभव बनाने के लिए सूचना सुरक्षा समझौता (एसआईए/SIA) पर बातचीत भी शुरू की है।
कुल मिलाकर, भारत– यूरोपीय संघ कुछ मतभेदों के बावजूद एफटीए पर सहमत होने के लिए भारत और यूरोपीय संघ की आपसी इच्छा को दर्शाता है। भारत के नज़रिए से, यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज़्म (सीबीएएम/CBAM) टैक्स को लेकर अभी भी कुछ चिंताएं हैं जो भारतीय इस्पात और एल्युमिनियम निर्यात पर प्रभाव डाल सकता है, साथ ही सख्त स्वास्थ्य एवं उत्पाद सुरक्षा नियम भी हैं जो भारतीय निर्यातकों के लिए नॉन– टैरिफ ट्रेड बैरियर बन सकते हैं। भारतीय पक्ष अपने डेयरी क्षेत्र, बीफ़ और पोल्ट्री, डेयरी उत्पादों, मछली और सीफूड, अनाज (विशेषरूप से चावल और गेहूँ), फल और सब्जियाँ, मेवे, खाद्य तेल, चाय, कॉफी, मसाले, तंबाकू आदि को बचाने में कामयाब रहा है,[19] लेकिन ऑटोमोबाइल क्षेत्र को खोलने का प्रभाव और घरेलू विनिर्माताओं पर इसके परिणाम बहुत समय बाद नज़र आएंगे।
निष्कर्ष: वैश्विक उथल– पुथल के बीच किया गया समझौता
वर्ष 2021 से, भारत ने 8 व्यापार समझौते किए हैं। केवल बीते सात महीनों में ही भारत ने यूनाइटेड किंग्डम, न्यूज़ीलैंड और ओमान के साथ अहम व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे पहले वर्ष 2024 में, भारत ने 4- देशों के यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ ब्लॉक के साथ भी एक समझौता किया था जिसमें नॉर्वे, स्विट्ज़रलैंड, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। इसी समय, यूरोपीय संघ ने जापान, इंडोनेशिया, मैक्सिको और दक्षिण अमेरिका (मर्कोसुर) के साथ भी व्यापार समझौते किए हैं। यह भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ती संपूरकता को दिखाता है क्योंकि विश्व में बढ़ते भू–राजनीतिक विभाजन के बीच दोनों अपने व्यापार में विविधता लाना चाहते हैं।
भारत– यूरोपीय संघ एफटीए कई संकटों, बढ़ते संरक्षणवाद, व्यापार और टैरिफ जंग के माहौल में किया गया है जिससे आपूर्तिश्रृंखला में बाधा आ रही है। भारत– यूरोपीय संघ एफटीए भारत और यूरोपीय संघ, दोनों में विविधता और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नई आपूर्ति श्रृंखला को बनाना दर्शाता है। भारत 'रणनीतिक स्वतंत्रता' का प्रबल समर्थक के रूप में जाना जाता है, जबकि 2022 में यूक्रेन युद्ध आरंभ होने के बाद यूरोपीय संघ एक नए ‘युग परिवर्तन’ की दौरा से गुज़र रहा है।
इस लिहाज़ से, भारत– यूरोपीय संघ समझौता प्रतीकात्मक है क्योंकि यह ‘नियम– आधारित’ व्यापार के साथ– साथ रणनीतिक सहयोग की नींव रखती है। इसका उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच सुरक्षा, रक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है, साथ ही दोनों पक्षों को रणनीतिक स्वायत्ता प्राप्त करने में भी लाभ पहुँचाना है।
आखिर में, जारी भू–राजनीतिक परिवर्तन और उससे होने वाले आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं, आमतौर पर, और विशेष रूप से ट्रंप प्रशासन के टैरिफ, लगभग दो दशकों की बातचीत के बाद भारत– यूरोपीय संघ व्यापार समझौता को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण रहे हैं। हालांकि, कुछ मुद्दों पर मतभेद, जैसे कार्बन टैक्स पर भारती की चिंताएं या कृषि क्षेत्र पर यूरोप की चिंताएं, अभी भी बनी हुई हैं, फिर भी यह समझौता सब कुछ कवर करती है। यह भारतीय वस्त्र, परिधान, फुटवियर, चमड़े के सामान और हस्तशिल्प एवं समुद्री उत्पादों को लाभ पहुँचाकर 'निष्पक्ष मुकाबले' को बढ़ावा देता है, साथ ही यूरोप की वाइन और शराब, ऑटोमोबाइल, रसायनों और फार्मास्यूटिकल्स को भी लाभ पहुँचाता है। साथ ही, यह सेवा और गतिशीलता के क्षेत्रों में बेहतर सहयोग का मार्ग भी खोलता है। कुल मिलाकर, यह एक ऐसा समझौता है जिससे दोनों पक्षों को लाभ होगा और यह तेज़ी से टूटती और विभाजित होती दुनिया में भारत– यूरोपीय संघ के मज़बूत संबंधों का प्रतीक भी है। यह 'बंटवारे पर सहयोग और अनिश्चितता पर साझेदारी' का संकेत देता है।
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*डॉ. हिमानी पंत, आईसीडब्ल्यूए (ICWA) में शोध अध्येता हैं।
अस्वीकरण: व्यक्त किए गए विचार लेखिका के व्यक्तिगत विचार हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण
[1]Piyush Goyal, Status on X, February 27, 2025, Available at https://x.com/PiyushGoyal/ status/2016081875228618773, Accessed on 27January, 2026.
[2] European Commission, EU-India Joint Statement on the State Visit of H.E. Mr. Antonio Costa, President of the European Council, and H.E. Ms. Ursula von der Leyen, President of the European Commission, to India, and the 16th EU-India Summit (25–27 January 2026) , Available at https://ec.europa.eu/commission/presscorner/detail/bg/statement_26_225, Accessed on January 27, 2026.
[3] Ministry of External Affairs, “Visit of President of European Commission to India” (February 27–28, 2025)
22 February, 2025, Available at https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/39096/Visit+of+President+of+European+Commission+to+India+February+2728+2025, Accessed on January 27, 2026.
[4] For instance, Europe’s demands over access to India's automobile market, agriculture goods while India’s demands for better mobility for its professionals, high tariffs, market access, among others were major sticking points.
[5] India – EU Joint Statement 1st Meeting of the Trade and Technology Council, Ministry of External Affairs, 16 May, 2023, https://mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/36553/India++EU+Joint+Statement+1st+Meeting+of+the+Trade+and+Technology+Council, Accessed on 30 January 2026.
[6]European Commission, Joint Communication to The European Parliament And The Council On A New Strategic EU-India Agenda, 17 September 2025, Available at https://www.eeas.europa.eu /sites/default/files/ 2025/documents/JOIN_2025_50_1_EN_ACT_part1_v9.pdf, Accessed on 28 January 2026.
[7] Ministry of External Affairs, Towards 2030: A Joint India-European Union Comprehensive Strategic Agenda, 27 January, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents. htm?dtl/40616/Towards+2030+A+Joint+IndiaEuropean+Union+Comprehensive+Strategic+Agenda, Accessed on 27 January, 2026.
[8] Narendra Modi, Status on X, January 27, 2026, Available at https://x.com/ narendramodi/status/2016152988252045480, Accessed on January 27, 2026.
[9] European Commission, EU and India conclude landmark Free Trade Agreement, 27 January 2026, https://ec.europa.eu/commission/presscorner/detail/en/ip_26_184, Accessed on 28 January 2026.
[10]Ministry of Commerce & Industry, “India And European Union Trade Agreement “Mother Of All Deals” Unlocking Opportunities Empowering india[at]2047”, Available at https://www.commerce.gov.in/wp-content/uploads/2026/01/Factsheet-on-India-EU-trade-deal-27.1.2026.pdf, Accessed on 28 January 2026.
[11] European Commission, Speech by President von der Leyen at the EU-India Business Forum, 27 January 2026, Available at https://ec.europa.eu/commission/presscorner/detail/da/speech_26_243 Accessed on 29 January 2026.
[12] European Commission, Factsheet - EU-India Free Trade Agreement: Main benefitshttps://policy.trade.ec.europa.eu/eu-trade-relationships-country-and-region/countries-and-regions/india/eu-india-agreements/factsheet-eu-india-free-trade-agreement-main-benefits_en, Accessed on 28 January, 2026.
[13] Ministry of Commerce and Industry, India And European Union Trade Agreement “Mother Of All Deals” Unlocking OpportunitiesEmpowering india[at]2047, https://www.pib.gov.in/ Press ReleasePage.aspx?PRID=2219146®=3&lang=2
European Commission, EU-India Free Trade Agreement: Main benefits, https://policy.trade.ec.europa.eu/eu-trade-relationships-country-and-region/countries-and-regions/india/eu-india-agreements/factsheet-eu-india-free-trade-agreement-main-benefits_en . Accessed on January 28, 2026.
[14] David Matthews, , EU-India deal highlights growing alignment on technology policy, Science Business, 29 January 2026, Available at https://sciencebusiness.net/news/international-news/eu-india-deal-highlights-growing-alignment-technology-policy, Accessed on 29 January 2026.
[15] European Union External Action, Security and Defence: EU and India sign security & defence partnership, Available at https://www.eeas.europa.eu/eeas/security-and-defence-eu-and-india-sign-security-defence-partnership_en, Accessed on 28 January 2026.
[16] Kaja Kallas, Status on X, Available at https://x.com/kajakallas/status/2016065739166290176, Accessed on 27 January 2026.
[17] Ibid., note 6.
[18] Ibid.
[19] Ministry of Commerce and Industry, Frequently Asked Questions India And European Union Free Trade, 28 Januaryu 2026. AgreemenThttps:// www.pib.gov.in/ PressReleasePage.aspx?PRID=2220413®=3&lang=2, Accessed on 30 January 2026.