जैसे– जैसे भारत घरेलू स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाता जा रहा है और जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता को कम करता जा रहा है उसका ऊर्जा संक्रमण एक महत्वपूर्ण चरण में पहुँचते जा रहा है। यह 2047 तक विकसित देश बनने और 2070 तक नेट ज़ीरो का लक्ष्य प्राप्त करने के अनुकूल है। वैश्विक ऊर्जा संक्रमण काल में हाइड्रोजन का महत्व अहम हिस्सा बनता जा रहा है। यह उन क्षेत्रों को कार्बन रहित बनाने में मदद करता है जिन्हें कम करना मुश्किल है जैसे भारी उद्योग, उड्डयन, शिपिंग और भू– परिवहन। विद्युतीकरण के उलट, जिसमें भंडारण क्षमता और ऊर्जा घनत्व की सीमा होती है, हाइड्रोजन व्यावसायिक प्रयोग में उत्पादन, भंडारण और प्रयोग के लिए बहु–उपयोगी माध्यम प्रदान करता है।
जैसे– जैसे भारत विकास करेगा, वैसे– वैसे इसके संसाधनों और ऊर्जा की ज़रूरतें बढ़ेंगी। बीते 20 वर्षों में इसकी ऊर्जा की मांग दोगुनी हो गई है और 2030 तक इसके 25 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है।[i] इसके अलावा, ऊर्जा की यह मांग 90 अरब डॉलर से अधिक के आयात द्वारा पूरी की जाती है जो मुख्य रूप से ऊर्जा आवश्यकताओं का 40 प्रतिशत ही है।[ii] परंपरागत संसाधन वर्तमान में भारत की ऊर्जा आपूर्ति का 80 प्रतिशत से अधिक हैं, जिसमें मुख्य रूप से हाइड्रोकार्बन हैं।[iii]
वर्तमान में भारत कई उद्योगों, जिसमें धातु शोधन, शिपिंग, उड्डन और भू– परिवहन शामिल हैं, में, हर साल लगभग 5 मिलियन मीट्रिक टन हाइड्रोजन का प्रयोग करता है। इसमें से लगभग सारा हाइड्रोजन जीवाश्म ईंधन से स्टीम रिफॉर्मिंग प्रक्रिया से बनता है, जिसे आमतौर पर ग्रे हाइड्रोजन के नाम से जाना जाता है और यह पर्यावरण को बहुत प्रदूषित भी करता है।[iv]
स्टीम रिफॉर्मिंग एक किफायती तरीका है जो सामान्य रूप से जीवाश्म ईंधन से हाइड्रोजन बनाने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। यह एक रसायनिक प्रक्रिया है जिसमें प्राकृतिक गैस को उच्च दबाव में स्टीम (जलवाष्प) के साथ प्रतिक्रिया करा कर हाइड्रोजन बनाया जाता है।[v] उदाहरण के लिए, उत्प्रेरक की उपस्थिति में, मीथेन और वाष्प के बीच अधिक तापमान पर एक ऊष्माशोषी अभिक्रिया (ताप का अवशोषण) होता है। लेकिन, इस प्रक्रिया के दौरान, ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन भी होता है।
इसके उलट, विद्युत अपघटन (इलेक्ट्रोलाइसिस) एक तरीका है जिससे ग्रीन हाइड्रोजन बनाया जा सकता है। इसके अलावा, इलेक्ट्रोलाइज़र और फ्यूअल सेल प्रतिक्रिया के लिए आवश्यक खनिजों की ज़रूरत होती है ताकि प्राकृतिक गैस के स्टीम रिफॉर्मिंग के माध्यम से विद्युत अपघटन को उत्प्रेरित किया जा सके। फ्यूअल सेल में, हाइड्रोजन विद्युत– रासायनिक विधि (इलेक्ट्रोकेमिकली) से ऑक्सीजन के साथ मिलकर ऊर्जा पैदा करता है जिसमें ताप और जल ही उपउत्पाद होते हैं। यही प्रक्रिया फ्यूअल सेल को बिना किसी उत्सर्जन के विद्युत बनाने का एक कारगर और स्वच्छ तरीका बनाती है।
इसके लिए परंपरागत तरीकों से हटकर ऐसी तकनीक की अपनाने की आवश्यकता है जो ऊर्जा पोर्टफोलियो में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाए और शिपिंग, धातु शोधन, उड्डयन, परिवहन उद्योग और व्यावसायिक प्रयोग में हाइड्रोकार्बन की आवश्यकता को धीरे– धीरे कम करे। अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बने ग्रीन हाइड्रोजन में कार्बन उत्सर्जन कम करने की क्षमता है क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाली बिजली को स्वच्छ ऊर्जा स्रोत से बनाया जाता है।
भारत का ग्रीन हाइड्रोजन मिशन
वर्ष 2023 में, भारत सरकार ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम/ NGHM) शुरू किया, यह एक ऐसा प्रोग्राम है जिसे ग्रीन हाइड्रोजन पारितंत्र बनाने के लिए तैयार किया गया है। यह मिशन औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता की दिशा में बढ़ने वाला रणनीतिक मार्ग है जिससे आयात का बोझ कम होगा (2030 तक 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक[vi]) और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी। यह न केवल निरंतरता को आत्मनिर्भरता से जोड़ने वाली ऊर्जा परियोजना है बल्कि निर्यात बढ़ाने पर भी फोकस करती है। स्वच्छ ऊर्जा पहल के माध्यम से इसका उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन और इसके डेरिवेटिव्स (ग्रीन अमोनिया) के उत्पादन, प्रयोग और परिवहन हेतु वैश्विक केंद्र बनना है जो आत्मनिर्भर भारत विज़न का समर्थन करता है।
एनजीएचएम की पूरी रणनीति में किफायत, बाज़ार प्रोत्साहन, नियामक रूपरेखा और प्रौद्योगिकीय उन्नति शामिल हैं ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक स्थायी और कम कार्बन वाला भविष्य निर्मित हो सके। वर्ष 2023 में, सरकार ने 2030 तक 19,744 करोड़ रु. का आरंभिक निवेश करने की बात की है। इसमें मिशन के दूसरे हिस्सों के लिए 388 करोड़ रुपये, शोध और विकास कार्यों के लिए 400 करोड़ रु., पायलट परियोजनाओं के लिए 1,466 करोड़ रु. और ग्रीन हाइड्रोजन संक्रमण (SIGHT) योजना के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप हेतु 17,490 करोड़ रु. शामिल हैं।[vii] SIGHT एक प्रोत्साहन कार्यक्रम है जो ग्रीन हाइड्रोजन उद्योग मूल्य श्रृंखला को बढ़ाने और इलेक्ट्रोलाइज़र की स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने में मदद करता है।
उद्योगों के लिए ग्रे हाइड्रोजन से ग्रीन हाइड्रोजन में बदलते समय ग्रीन हाइड्रोजन बनाने की लागत को कम करना ही सबसे बड़ी बाधा है। फिर, उच्च लागत वाली तकनीक और पूंजी डूबने की संभावना लागत संबंधी चिंताओं की वजह से भारत में ग्रीन हाइड्रोजन को अपनाना सीमित है। जैसे, ग्रीन हाइड्रोजन बनाने की लागत प्रति किलो 3.5 से 5 डॉलर होती है जबकि परंपरागत ईंधन (हाइड्रोकार्बन) की जगह ग्रीन हाइड्रोजन का प्रयोग करने की ब्रेक इवन लागत 2 डॉलर प्रति किलो से भी कम है।[viii]
हालांकि, मिशन के उद्देश्य को पूरा करने के लिए पूर्ण रणनीति की आवश्यकता है जो अलग– अलग क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों को एक साथ लाए। इसले रणनीति में निम्नलिखित शामिल हैं– (क) घरेलू स्तर पर उत्पादित ग्रीन हाइड्रोजन की मांग पैदा करना, इसे घरेलू और निर्यात दोनों बाज़ारों के लिए प्रतिस्पर्धी बनाना, (ख) आपूर्ति–पक्ष की समस्याओं को दूर करने के लिए प्रोत्साहन रूपरेखा का प्रयोग करना और (ग) विकास और प्रवर्धन को सरल बनाने के लिए अच्छा माहौल बनाना।
ध्यान देने वाली बात है कि ग्रीन हाइड्रोजन के लिए भारत की प्रतिबद्धता बजट 2026–2027 में भी दुहराई गई थी। बजट में बड़े स्वतंत्र आवंटन की बजाय व्यापक नीति समर्थन का प्रावधान किया गया जिससे ग्रीन हाइड्रोजन के लिए भारत की प्रतिबद्धता सुनिश्चित हुई। जैसा कि ऊपर बताया गया है, स्वच्छ ऊर्जा पर फोकस किया गया और इससे संबंधित उद्योगों के लिए अधिक धन की व्यवस्था की गई। परिणामस्वरूप, इलेक्ट्रोलाइज़र और अक्षय ऊर्जा उत्पादन के लिए आवश्यक पूंजीगत वस्तुओं पर सीमा शुल्क में छूट मिली ताकि घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा मिले, उत्पादन लागत कम हो और हाइड्रोजन मूल्य श्रृंखला को समर्थन मिले।
इस परिवर्तन में कई पहलें शामिल हैं। पहला, अमोनिया बनाने और पेट्रोलियम को संसोधित करने की प्रक्रिया में जीवाश्म ईंधन से मिलने वाले हाइड्रोजन के स्थान पर ग्रीन हाइड्रोजन का प्रयोग करना। जैसे, पेट्रोलियम रिफाइनरियों में, हाइड्रोजन का प्रयोग सल्फर– मुक्त बनाने (ईंधन से सल्फर अलग करने) और हाइड्रोक्रैकिंग (हाइड्रोकार्बन को हल्के और सरल रूपों में बदलना) में किया जाता है। दूसरा है, नगर गैस वितरण प्रणाली में ग्रीन हाइड्रोजन को शामिल करना।
तीसरा, शिपिंग, धातु शोधन, उड्डयन और भू– परिवहन जैसे कई उद्योगों में जीवाश्म ईंधन के स्थान पर ग्रीन हाइड्रोजन से बने इंधन का प्रयोग करना। मिशन को लागू करने की रणनीति उद्योग की बदलती प्रकृति और इसके विकास के आरंभिक चरण को ध्यान में रख कर बनाई गई है। मिशन का उद्देश्य ऐसा पारितंत्र विकसित करना है जो अनुसंधान और विकास को बढ़ावा दे, नियम निर्धारित करें और पायलट परियोजनाएं शुरू करे।
वैश्विक हाइड्रोजन केंद्र बनना
जैसे– जैसे विश्व भर में नेट ज़ीरो के लिए आम सहमति बन रही है, ग्रीन हाइड्रोजन और इसके डेरिवेटिव्स का बाज़ार बढ़ने की उम्मीद है। अलग– अलग देशों और प्रदेशों में ग्रीन हाइड्रोजन की अनुमानित मांग और आपूर्ति में अंतर की वजह से ग्रीन हाइड्रोजन और इसके डेरिवेटिव्स (ग्रीन अमोनिया) का अंतरराष्ट्रीय व्यापार बढ़ने की संभावना है। पर्यावरण संबंधी चिंताओं, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं और विश्व भर में उथल– पुथल के लिए जीवाश्म ईंधन के संवेदनशील होने की वजह से जीवाश्म ईंधन से ग्रीन ईंधन में परिवर्तन तेज़ हो गया है। भारत के पास अब ग्रीन हाइड्रोजन और इसके डेरिवेटिव्स का एक बड़ा उत्पादक और पारगमन केंद्र बनने का मौका है।
दिलचस्प बात यह है कि यूरोपीय संघ, दक्षिण कोरिया, जापान आदि जैसे कुछ देशों ने अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन और उसके डेरिवेटिव्स को आयात करने की योजना स्पष्ट कर दी है। जैसे, यूरोपीय संघ 2030 तक 10 मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन आयात करने की योजना बना रहा है।[ix]
तालिका 1: ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में अलग– अलग देशों के साथ भारत की साझेदारी
|
देश |
तिथि |
सहयोग के क्षेत्र |
|
संयुक्त अरब अमीरात |
जुलाई 2023 |
आगामी वर्षों में ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रिड कनेक्टिविटी में सहयोग बढ़ाना[x] |
|
जापान |
जनवरी 2024 |
मूल्य श्रृंखला में साझादीर बनें और जापान के उपभोक्ताओं को ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति करें[xi] |
|
यूनाइटेड किंग्डम |
फरवरी 2025 |
हाइड्रोजन मानकीकरण पर सहयोग, जिसमें विश्व भर में एक जैसे नियम, आचार संहिता और मानकों पर ज़ोर दिया जाएगा जो सुरक्षित, मापनीय हों और जिनका उद्देश्य व्यापार को बेहतर बनाना हो[xii] |
|
सिंगापुर |
अक्टूबर 2025 |
ग्रीन हाइड्रोजन और इसके डेरिवेटिव्स का केंद्र बनना और निर्यात करना[xiii] |
|
ऑस्ट्रेलिया |
नवंबर 2025 |
भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन उद्योग को बढ़ाने के लिए संयुक्त पहल[xiv] |
|
यूरोपीय संघ |
जनवरी 2026 |
अपशिष्ट से हाइड्रोजन बनाने की संयुक्त पहल[xv] |
|
मलेशिया |
फरवरी 2026 |
ग्रीन हाइड्रोजन परिदृश्य में चल रही साझीदारी को बेहतर करना[xvi] |
(स्रोत: लेखक द्वारा संकलित)
भविष्य की कार्ययोजना
आज, भारत वैश्विक ग्रीन हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था में सबसे आगे है। कई भारतीय कंपनियां ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएं चलाने में सक्रिए रूप से काम कर रही हैं। ध्यान देने की बात यह है कि अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने तीन बंदरगाहों [पारादीप बंदरगाह प्राधिकरण (ओडिशा), वी. ओ. चिदंबरनार बंदरगाह प्राधिकरण (तमिलनाडु), और दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण (गुजरात)] को ग्रीन हाइड्रोजन का हब बताया है। भविष्य में ये बंदरगाह भावी निर्यात, खपत और उत्पादन हेतु एकीकृत पारगमन हब के रूप में काम करेंगे। इसके अलावा, भारत की नेट ज़ीरो लक्ष्य पाने के लिए विदेशी साझेदारी आवश्यक है। ये सहयोग क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला को बेहतर बना सकते हैं और हाइड्रोजन व्यापार को सरल कर सकते हैं।
*****
*आंचल गर्ग, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण:
[i] https://www.iea.org/reports/india-energy-outlook-2021(NITI Aayog and International Energy Agency, India Vision Scenario)
[ii] National Green Hydrogen Mission Document, https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s3716e1b8c6cd17b771da77391355749f3/uploads/2023/01/2023012338.pdf
[iii] Singh, Amit Pratap. "Assessment of India's Green Hydrogen Mission and environmental impact." Renewable and Sustainable Energy Reviews 203 (2024): 114758.
[iv] Birol F. The future of hydrogen: seizing today's opportunities, vol. 20. IEA Report prepared for the G; 2019. p. 442.
[v] SFC Energy, https://www.sfc.com/glossary/steam-reforming/
[vi]Press Information Bureau 2025, https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?id=155990&NoteId=155990&ModuleId=3®=3&lang=2
[vii] Press Information Bureau 2025, https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?id=155990&NoteId=155990&ModuleId=3®=3&lang=2
[viii] https://www.ceew.in/publications/how-can-indian-policymakers-boost-investments-for-domestic-green-hydrogen-financing
[ix] European Union, https://energy.ec.europa.eu/topics/eus-energy-system/hydrogen_en
[x] Press Information Bureau 2023, https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1939795®=3&lang=2
[xi] Press Information Bureau 2024, https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=1998871®=3&lang=2#:~:text=Indian%20Renewable%20Energy%20company%20%2D%20ACME,Ammonia%20from%20India%20to%20Japan
[xii] Press Information Bureau 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2189126®=3&lang=2#:~:text=Building%20Global%20Partnerships,for%20production%2C%20storage%20and%20exports.
[xiii] Press Information Bureau 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2189126®=3&lang=2#:~:text=Building%20Global%20Partnerships,for%20production%2C%20storage%20and%20exports
[xiv] Australian Government (Department of climate change, energy, the environment and water), https://www.dcceew.gov.au/climate-change/international-climate-action/international-partnerships/india-australia-green-hydrogen-taskforce
[xv] Press Information Bureau 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2189126®=3&lang=2#:~:text=Building%20Global%20Partnerships,for%20production%2C%20storage%20and%20exports
[xvi] Ministry of External Affairs 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/40711/India++Malaysia+Joint+Statement+on+the+occasion+of+the+Official+visit+by+Prime+minister+of+India+to+Malaysia+February+08+2026