सारांश: पश्चिम एशिया के इलाकों में पानी दुर्लभ वस्तु रही है। विश्व के सबसे सूखे प्रदेशों में से एक में अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से, इस इलाके में विश्व के सबसे अधिक पानी की कमी वाले देश हैं। इस तरह, पश्चिम एशिया एक कमज़ोर स्थिति में है जिसका प्रभाव पर्यावरण से कहीं अधिक राजनीति, शांति और क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ता है।
परिचय
जल संकट को समझने में दो बातें बहुत महत्वपूर्ण हैं– पानी की कमी और जल तनाव।[i] पानी की कमी को आम तौर पर पानी के संसाधन की भौतिक, उपलब्धता की कमी के रूप में समझा जात है। दूसरी ओर, जल तनाव का अर्थ ऐसी स्थिति से हैं जहाँ पानी के संसाधन की मांग, उपलब्ध पानी की आपूर्ति से कहीं अधिक हो जाती है। पश्चिम एशिया में पानी की कमी के साथ– साथ जल तनाव भी है। वर्ष 2019 के आंकड़ों के अनुसार, विश्व के 25 सबसे अधिक पानी की कमी वाले देशों में से 16 देश पश्चिम एशिया में हैं।[ii] वर्ष 2023 तक, सात देशों को पानी की सबसे अधिक कमी वाले देशों की श्रेणी में रखा गया था और उनमें से छह देश पश्चिम एशिया में हैं।[iii] ये देश हैं– कुवैत, ओमान, क़तर, बहरीन, लेबनान और संयुक्त अरब अमीरात।
पानी की गंभीर कमी उस कठिन भू–राजनीतिक हालात की वजह से और बढ़ जाती है जिससे यह इलाका लगातार जूझ रहा है। युद्धों और उथल– पुथल की स्थिति में, जो अधिकांश पश्चिम एशियाई देशों की विशेषता रही है, पानी के स्रोतों की कमी के कारण पानी तक पहुंच में बनावटी बाधाओं से और बढ़ जाते हैं। जहाँ पूरा इलाका पानी की कमी से जूझ रहा है, वहीं ईरान और इराक में हाल के महीनों में हालात काफी बिगड़ गए हैं। यह शोधपत्र इस इलाके में पानी की कमी की समस्या का संक्षिप्त विवरण देता है और ईरान एवं इराक की स्थिति पर रोशनी भी डालता है।
पश्चिम एशिया में पानी की कमी का संक्षिप्त विवरण
पश्चिम एशिया में पानी के संसाधन बहुत कम हैं। इस इलाके में तीन बड़ी नदी घाटी हैं– जिनमें जॉर्डन नदी घाटी, नील और टाइग्रिस– यूफ्रेट्स नदी घाटी शामिल हैं।[iv] जॉर्डन नदी घाटी मृत सागर में मिल जाती है, जिसके पश्चिम में इज़रायल और वेस्ट बैंक एवं पूर्व में सीरिया के गोलन हाइट्स और जॉर्डन हैं।

चित्र. 1 जॉर्डन नदी घाटी
दूसरी तरफ, नील नदी मिस्र से होकर गुज़रती है और कई युद्धों का केंद्र रही है। टाइग्रिस– यूफ्रेट्स नदी घाटी तुर्की से निकलती है और इराक, सीरिया एवं तुर्की से होकर बहती है। हालांकि, इन स्रोतों के पानी का स्तर तेज़ी से कम हो रहा है और शेष क्षेत्रों में पानी के स्रोत बहुत कम या बिल्कुल नहीं हैं।

चित्र. 2 नील नदी

चित्र. 3 टाइग्रिस– यूफ्रेट्स नदी
स्रोत: https://www.chathamhouse.org/2025/08/iraqs-water-crisis-dammed-neighbours-failed-leaders
अरब प्रायद्वीप
अरब प्रायद्वीप विश्व के उन प्रदेशों में से एक है जहाँ पानी की सबसे अधिक कमी है। प्रायद्वीप का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा रेगिस्तान है और सऊदी अरब, ओमान, क़तर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और बहरीन जैसे कुछ देशों में कोई नदी या कोई प्राकृतिक जल स्रोत नहीं है।[v] यमन अरब प्रायद्वीप का ऐसा एक और देश है जो बहुत समय से जंग से जूझ रहा है।
पश्चिम एशिया का यह हिस्सा विश्व की कुल भू–क्षेत्र का लगभग 4.7 प्रतिशत है और विश्व की कुल आबादी की 4.25 प्रतिशत आबादी यहाँ बसती है।[vi] हालाँकि, विश्व के कुल जल संसाधनों का केवल 1.1 प्रतिशत संसाधन ही यहाँ है जो इस क्षेत्र में पानी की कमी के स्तर और गंभीरता को दर्शाता है।[vii] हालाँकि, भू–जल जलभृत मौजूद हैं लेकिन ये ज्यादातर गैर–नवीकरणीय हैं और धीर– धीरे कम होते जा रहे हैं।
इसके अलावा, जैसे– जैसे छह (6) खाड़ी देश आर्थिक परिवर्तन के दौर से गुज़र रहे हैं, इलाके में पानी की खपत बढ़ती जा रही है। जैसे, 2020 में सऊदी अरब में पानी की मांग 15.98 अरब घन मीटर थी और इसमें शहरी पानी की मांग 3.6 अरब घन मीटर थी।[viii] नीतीगत सुधारों के साथ इस संख्या में बहुत कमी आई और यह 9,356 मिलियन घन मीटर रह गया।[ix] दूसरी तरफ बहरीन में पानी की मांग 2023 में 163.75 मिलियन घन मीटर से बढ़कर 2024 में 164.68 मिलियन घन मीटर हो गयी। [x]
लेवांत
लेवांत में सीरिया, जॉर्डन, इज़रायल, फ़िलिस्तीन और लेबनान आते हैं। जॉर्डन पानी की बहुत कमी वाला देश है और 2023 में यह पानी की कमी वाले देशों में 15वें स्थान पर था।[xi] विशेष बात यह है कि जॉर्डन– यारमौक नदी इस देश से होकर बहती है लेकिन इज़रायल और सीरिया के नदी का रुख बदलने के कारण पानी का स्तर बहुत कम हो गया है।[xii] दूसरी तरफ, सीरिया में सरकार बदली है और उसे काफी समय तक गृह युद्ध का सामना करना पड़ा है जिससे देश में मौजूद पानी के सीमित संसाधनों पर दबाव बढ़ा है।[xiii]
युद्ध की वजह से लगभग दो– तिहाई पानी के स्रोतों को बहुत नुकसान हुआ है या वे तबाह हो गए हैं जिसमें शोधन संयंत्र, पंपिंग स्टेशन और सीवेज सिस्टम शामिल हैं।[xiv] हालांकि नई सरकार ने पानी की समस्या को स्वीकार किया है लेकिन कारगर नीति बनाने में बहुत समय लगेगा। पानी की लगातार आपूर्ति के लिए सीरिया को अपने पड़ोसी देशों इराक और तुर्की के साथ भी मजबूत और दीर्घकालिक संबंध स्थापित करने होंगे क्योंकि टाइग्रिस– यूफ्रेट्स नदी एक बड़ा स्रोत है जिसे तीनों देश साझा करते हैं।[xv]
लेबनान, जो 65 वर्षों में सूखे के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है, में भी, जल संकट का खतरा मंडरा रहा है।[xvi] देश की बड़ी नदियाँ तेज़ी से सूखती जा रही हैं। देश की सबसे बड़ी झील, काराउन, में पानी का स्तर 1959 के बाद सबसे कम हो गया है।[xvii] इज़रायल और फ़िलिस्तीन में बहुत समय से जारी जंग ने इन देशों में पानी का बड़ा संकट पैदा कर दिया है।[xviii]
तुर्की और मिस्र भी पानी की कमी का सामना कर रहे हैं हालांकि उनके देश में जल का स्तर बाकी देशों के जैसे खतरे के निशान पर नहीं है। ईरान और इराक इस इलाके में पानी के संकट के हॉटस्पॉट बन कर उभरे हैं, जिसके बड़े प्रभाव नज़र आएंगे।
ईरान में पानी की कमी और उसका प्रभाव
ईरान की भौगोलिक स्थिति उसे रणनीतिक रूप से लाभकारी स्थिति में बनाए रखती है। हालाँकि, जब इसके पानी के संसाधन की बात आती है तो यह बात चुनौतीपूर्ण साबित हुई है। ईरान पृथ्वी की “शुष्क पट्टी” में है जहाँ इसका लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र शुष्क और अर्ध– शुष्क प्रदेशों में है।[xix]

चित्र. 4: ईरान के जलवायु का मानचित्र
औसल वार्षिक वर्षा लगभग 250 मिलिमीटर होती है जो पूरे देश में अलग– अलग होती है, मध्य ईरान में बारिश हर साल लगभग 50 मिलिमीटर होती है।[xx] उच्च तापमान की वजह से, 72 प्रतिशत[xxi] पानी भाप बन कर उड़ जाता है। इसलिए, बांध की आवश्यकता पड़ती है और ये बांध ही ईरान की लगभग सभी जल आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।[xxii]
पानी का एक बड़ा हिस्सा खेती– बाड़ी में प्रयोग में लाया जाता है। यह क्षेत्र हर साल लगभग 42.43 अरब घन मीटर पानी का इस्तेमाल करता है।[xxiii] कम पानी के साधनों का एक बड़ा हिस्सा प्रयोग में लेने के बाद भी कृषि क्षेत्र अभी भी आत्मनिर्भर नहीं है। इन कारणों से, ईरान में समय–समय पर पानी की कमी होती रहती है। हाल के महीनों में पानी की कमी की समस्या और गंभीर हो गई है। कुछ रिपोर्टों की मानें तो ईरान लगातार छठे वर्ष सूखे की स्थिति का सामना कर रहा है।[xxiv]
वर्तमान जल संकट के कारण
हालाँकि जलवायु कारक ईरान में प्राकृतिक जल की कमी की वजह हैं लेकिन इस जल संकट के गंभीर होने के कई अन्य कारण भी हैं। एक मुख्य कारण कृषि क्षेत्र है। दशकों से, ईरान खाद्य सुरक्षा के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है, जिसमें पानी का बहुत प्रयोग किया गया है।[xxv] ईरान में 90 प्रतिशत से अधिक पानी का प्रयोग कृषि क्षेत्र में कर लिया जाता है लेकिन औसत उत्पादकता लगभग 0.75 किग्रा प्रति घनमीटर है।[xxvi]
यह उस पानी की मात्रा की तुलना में बहुत कम है जो इस क्षेत्र के लिए इस्तेमाल किया गया है। पहली नज़र में ऐसा लग सकता है कि ईरान में कृषि क्षेत्र को जो महत्व दिया गया है, वह गलत है, लेकिन इसकी रणनीतिक और ऐतिहासिक जड़ें बहुत गहरी हैं। वर्ष 1925 से 1979 तक, जब पहलवी वंश सत्ता में था, तो कृषि को कम अहमियत दी गई ताकि पूंजी और श्रमिकों को तेल और भारी उद्योगों में लगाया जा सके।[xxvii] हालांकि, क्रांति के बाद ईरान में कृषि क्षेत्र को अहमियत मिली क्योंकि यह देश की सत्यता और न्याय का प्रतीक बन गया, इस मायने में कि विदेशी निर्भरता काफी कम हो जाएगी।[xxviii]
ईरान– इराक युद्ध (1980-1988) ने इस नीति को और मज़बूत किया और कृषि में आत्मनिर्भरता “खोदकफ़ाई” विचारधारा का अनिवार्य हिस्सा बन गई।[xxix] इस प्रकार, पानी का बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र में जाता रहता है।
बढ़ता शहरीकरण एक और कारण है जिससे ईरान में पानी का संकट पैदा हुआ है। ईरान का लगभग 77 प्रतिशत[xxx] इलाका शहरी है, जिससे पानी के सीमित संसाधनों पर दबाव बहुत है। जैसे– जैसे शहरी इलाके बढ़ रहे हैं, आबादी भी उतनी ही बढ़ रही है, जिससे प्रति व्यक्ति पानी की मांग और प्रयोग बढ़ रहा है। दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों में पानी की कमी के कारण लोग ईरान के बड़े शहरों का रुख कर रहे हैं जिससे संकट बढ़ता जा रहा है।[xxxi] राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में पानी का गंभीर संकट है और वे 'डे ज़ीरो'( वह दिन जब नल से पानी आना बंद हो जाएगा) के कगार पर हैं।[xxxii]
हालांकि, अंदरूनी मुश्किलें बड़ी हैं लेकिन ईरान में जल संकट अंदरूनी वजहों से नहीं हैं। सीमा–पार जल तनाव और जल–राजनीति ने जल संकट को और बड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक क्षेत्र के रूप में पश्चिम एशिया में भौगोलिक कारणों से पहले से ही पानी की कमी है। इस इलाके में नदियों की कमी होने की वजह से कई देश एक सी स्रोत से पानी साझा करते हैं। ईरान भी इससे अलग नहीं है और हेलमंद (ईरान और अफ़गानिस्तान, चित्र. 5 देखें), हरिरुद (अफ़गानिस्तान, ईरान और तुर्कमेनिस्तान, चित्र. 6 देखें) और अरास (तुर्की, आर्मेनिया, अज़रबैजान और ईरान, चित्र. 7 देखें) जैसी सीमा पार नदियों पर बहुत अधिक निर्भर है।[xxxiii]
वैसे, ईरान ने एक से अधिक सीमा पार जल संधियां कर रखी हैं। लेकिन इसके पड़ोस के अस्थिर प्रकृति ने उचित सहयोग में बाधाएं पैदा कर दी हैं। वर्ष 1973 में अफ़गानिस्तान के साथ हस्ताक्षरित हेलमंद नदी संधि कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों की वजह से समय– समय पर सुर्खियों में रही है। इस संधि ने ईरान को सालाना 820 मिलियन घन मीटर पानी मिलने की गारंटी दी थी लेकिन इसे शायद ही कभी लागू किया जा सका।[xxxiv] अफ़गानिस्तान ने नदी पर कई बांध बनाए हैं जैसे कज़ाकी बांध, अरघंदब और कमाल खान परियोजनाएं।[xxxv] हर बांध बनने के साथ ईरान की पानी की आपूर्ति खतरे में पड़ जाती है। इसी तरह टाइग्रिस और यूफ्रेट्स के साथ– साथ अरास नदियों पर तुर्की की परियोजनाएं ईरान में पानी के प्रवाह को कम कर देती हैं।[xxxvi]

चित्र. 5 हेलमंद नदी
चित्र. 6. हरिरुद नदी
चित्र. 7. अरास नदी
स्रोत: https://www.britannica.com/place/Aras-River
इन सबके अलावा, अभी जो पाबंदियां लगी हैं, उनसे ईरान के लिए जल संकट को कम करने की रणनीति बनाना और उसे कम करना पहले से भी मुश्किल हो गया है क्योंकि तकनीक तक पहुँच कठिन हो गई है।
इराक में सदी का सबसे भयंकर सूखा
इराक 1933 के बाद से अपने सबसे भयंकर सूखे का सामना कर रहा है क्योंकि टाइग्रिस और यूफ्रेट्स नदियों में जल का बहाव कम हो गया है।[xxxvii] कम बारिश और उर्ध्वप्रवाह (अपस्ट्रीम) जल प्रतिबंधों की वजह से दोनों नदियों में पानी का बहाव 27 प्रतिशत तक कम हो गया है।[xxxviii] वर्ष 2024 में, नदियों से बहने वाले जल की कुल मात्रा 18 अरब घन मीटर थी जो अब 2025 में घटकर 10 अरब घन मीटर रह गई है।[xxxix] इराक में बढ़ते पानी के संकट की वजह से बड़े पैमाने पर लोगों को दूसरे स्थानों पर बसाना पड़ रहा है और पानी संबंधी बीमारियाँ भी फैली हैं। जैसे, धी क़ार में पानी की कमी की वजह से लगभग 10,000 परिवारों को विस्थापित होना पड़ा है।[xl]
कृषि क्षेत्र पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है, नवंबर 2025 में कृषि मंत्रालय ने ऐलान किया कि देश का शीतकालीन कृषि योजना में 50 प्रतिशत की कटौती की जाएगी और अधिशेष गेहूँ के निर्यात में देरी होगी।[xli] यह इराक के लिए चिंता की एक बड़ी वजह है क्योंकि कई दशकों की सरकारी कोशिशों के बाद उसने 2023 में गेहूँ के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली थी।[xlii] यह लगातार तीसरा साल था जब इराक ने कृषि क्षेत्र में इस गति को बनाए रखने में कामयाबी हासिल की थी लेकिन जल संकट की वजह से स्थिति खराब हो गई। इराक में जल का संकट, मानव सभ्यता के जन्मस्थल के रूप में मेसोपोटामिया क्षेत्र की ऐतिहासिक भूमिका के उलट दुखद घटना है।
इराक में सूखे की वजह
इराक में वर्तमान जल संकट और सूखा कोई नई बात नहीं है बल्कि 1970 के दशक से ही ऐसा समय– समय पर होता आ रहा है।[xliii] इराक में सूखे की स्थिति को और खराब करने के कई कारण हैं। इनमें से एक सबसे महत्वपूर्ण कारक है– इराक अपनी जलापूर्ति के बड़े हिस्से के लिए अपने पड़ोसी देशों पर बहुत अधिक निर्भर है। टाइग्रिस और यूफ्रेट्स नदियां इराक के जलापूर्ति व्यवस्था की रीढ़ हैं। इराक का लगभग 71 प्रतिशत पानी तुर्की से, 6.9 प्रतिशत ईरान से और 4 प्रतिशत सीरिया से आता है।[xliv] जैसे– जैसे पड़ोसी देश तुर्की और ईरान नदी पर बांध बनाते जा रहे हैं, टाइग्रिस– यूफ्रेट्स से इराक की तरफ पानी का बहाव कम होता जा रहा है। तुर्की के दक्षिणपूर्वी अनातोलिया परियोजना में टाइग्रिस और यूफ्रेट्स पर 22 से अधिक बड़े बांध और 19 जलविद्युत संयंत्र बनाए गए हैं।[xlv] दूसरी तरफ ईरान ने भी 20 से अधिक बांध बनाए और अनेकों संबंधित परियोजनाएं चला रहा है।[xlvi]
इसके अलावा, इराक की राजनीतिक व्यवस्था की जटिल प्रकृति पानी की कमी को कम करने के लिए सक्रिए उपाय करने में संरचनात्मक बाधाएं पैदा करती हैं। हालांकि यह एक बड़ी बात है कि 2003 के बाद इराक में लोकतांत्रिक चुनाव मानक बन गए हैं लेकिन सरकार बनाना अभी भी मुश्किल है। वर्ष 2021 में पांचवें आम चुनाव के बाद, सरकार बनने में लगभग 382 दिनों का समय लग गया।[xlvii]
इराक में 2003 से रुझान यह दिखाता है कि चुनाव और सरकार बनने के बीच औसतन 203 दिनों का समय लगता है।[xlviii] इसका मतलब है कि ज़रूरी मुद्दों से निपटने के लिए सरकार की नीति में बड़ा अंतर है। हालांकि एक कामचलाऊ सरकार इस कमी को पूरा करती है लेकिन नीति के मामले में वह ज्यादा कुछ नहीं कर सकती है। शायद यही वजह है कि इराक जल के बंटवारे के इंतज़ाम पर बातचीत में अपनी बात नहीं रख पाया है।
जलवायु परिवर्तन के साथ मिलकर इन वजहों ने समस्या को और बढ़ा दिया है।[xlix] इसकी वजह से बारिश अनियमित रूप से हुई है, अचानक बाढ़ आई है, साथ ही बढ़ते तापमान ने पानी की उपलब्धता को प्रभावित किया है।[l]
भविष्य की कार्ययोजना
ईरान और इराक एवं व्यापक पश्चिम एशिया प्रदेशों में जल संकट जटिल है। धरती के सूखे प्रदेशों में उनकी स्थिति की वजह से वे स्वाभाविक रूप से घाटे वाली स्थिति में हैं। हालांकि, सीमा पार नदी के पानी को साझा करने के तरीके, सरकारी बाधाएं और पानी के प्रयोग के तरीकों जैसी कई दूसरी वजहों से ईरान और इराक में पानी का संकट और बढ़ गया है।
ईरान के मामले में, कृषि क्षेत्र में बड़े सुधारों की आवश्यकता है जिससे अधिक पानी का प्रयोग करने वाली फसलों की बजाय कम पानी में होने वाले फसलों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। आधुनिक सिंचाई प्रणालियों के विकास की आवश्यकता है जिससे भू–जल का प्रयोग कम हो। आखिर में, यह सुनिश्चित करना होगा कि सीमा पार नदी जल साझाकरण संधि के वर्तमान तरीकों का पालन किया जाए। इस संबंध में ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच ठोस राजनयिक संवाद की आवश्यकता है जिससे जल संसाधनों के मामले में आपसी ज़रूरतों को समझने में मदद मिलेगी।
इसी तरह, इराक को भी अपने पड़ोसी देशों विशेष रूप से तुर्किए के साथ राजनयिक संवाद से लाभ हो सकता है। इराक और तुर्किए के बीच हस्ताक्षरित "पानी के बदले तेल" समझौता इसका एक उदाहरण है।[li] बेहतर तालमेल से ऐसे और समझौते हो सकते हैं और आपसी फ़ायदे के लिए सहयोग बढ़ाया जा सकता है। हालांकि इराक के जटिल राजनीतिक प्रणाली के साथ पैंतरेबाज़ी करने की गुंजाइश कम है लेकिन देश के अधिकांश लाभ के लिए सहभागितावादी लोकतंत्र में अलग– अलग समूहों के बीच राजनीतिक सहयोग बढ़ा कर देश में पानी की कमी को कम करने में मदद मिल सकती है।
आखिर में, जलवायु परिवर्तन एक ऐसा कारक है जिसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ रहा है और विश्व के सभी देशों पर इसका संकट मंडरा रहा है। हालांकि पश्चिम एशियाई देश स्वाभाविक रूप से अधिक संवेदनशील हैं लेकिन किसी भी प्रकार की राहत के लिए जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
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*स्तुति गोगोई, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण:
[i].CEO Water Mandate. (2017) “What do Water Scarcity, Water Stress and Water Risk actually Mean”, January 17. https://ceowatermandate.org/posts/water-scarcity-water-stress-water-risk-actually-mean/ Accessed February 5, 2026.
[ii] World Population Review. 2026. “Water Stress by Country 2026”. https://worldpopulationreview.com/country-rankings/water-stress-by-country Accessed January 6, 2026.
[iii] Ibid.
[iv] Khalid, Mohammed. 2021. “Geopolitics of Water Conflict in West Asia: Tigris-Euphrates Basin” https://finsindia.org/geopolitics-of-water-conflict-in-west-asia-the-tigris-euphrates-basin.html#:~:text=Water%20is%20an%20important%20strategic,Euphrates%20flows%20for%201%2C230%20km. Accessed January 7, 2026.
[v] Times of India. 2025. “Countries that do not have rivers including Saudi Arabia, Qatar, Oman and more.” February 27.
https://timesofindia.indiatimes.com/world/countries-that-do-not-have-rivers-including-saudi-arabia-qatar-oman-and-more/articleshow/118584303.cms Accessed January 7, 2026.
[vi] Odhiambo, George. 2016. “Water Scarcity in the Arabian Peninsula and its Socio-Economic Impact.” Applied Water Science 7: 2479-2492. https://doi.org/10.1007/s13201-016-0440-1. Accessed January 7, 2026.
[vii] Ibid
[viii] US-Saudi Business Council. 2022. “Saudi Arabia’s Water Sector”. https://ussaudi.org/wp-content/uploads/2022/02/Water-2022-Economic-Brief.pdf. Accessed January 8, 2026.
[ix] General Authority for Statisticcs. 2025. “Consumption of Non-Renewable groundwater decreases by 7% in 2023.” GASTAT Consumption of non-renewable groundwater decreases by 7% in 2023 (stats.gov.sa) Accessed January 8, 2026
[x] Kingdom of Bahrain. “Average Daily Water Consumption” https://shorturl.at/yD8V2%3D accessed January 8, 2026
[xi] Op. Cit. 1.
[xii] Garthwaite, Josie. 2021. “Stanford Study Reveals a Deepening Water Crisis in Jordan and a way forward.” https://news.stanford.edu/stories/2021/03/jordans-worsening-water-crisis-warning-world Accessed January 8, 2026.
[xiii] Fanack Water. “Syria’s Water Sector After Regime Change” https://water.fanack.com/syria-water-crisis-regime-change-2025/ Accessed January 8, 2026.
[xiv] Ibid.
[xv] Ibid.
[xvi] Tello, Anan. 2025. “How war and drought have resulted in Lebanon’s worst water crisis in decades”. September 26. Arab News https://www.arabnews.com/node/2616453/middle-east Accessed January 8, 2026.
[xvii] Raydan, Rodayna. 2025. “The Next Disaster: Lebanon’s Water Crisis Reaches Breaking Point”. July 24. NOW Lebanon https://nowlebanon.com/the-next-disaster-lebanons-water-crisis-reaches-breaking-point/ Accessed January 8, 2026.
[xviii] The Water Project. “Water in Crisis – Israel, Palestine and Jordan”. https://thewaterproject.org/water-crisis/water-in-crisis-israel-palestine-jordan Accessed January 8, 2026.
[xix] Czulda, Robert. 2022. “Iran’s Water Security: An Emerging Challenge”. May 11. Middle East Policy 29(2), 113-123. https://onlinelibrary.wiley.com/doi/full/10.1111/mepo.12626?casa_token=J3RmbiPBfZMAAAAA%3AooO34ocV9SDVVMwXC3OXCc_rMFI-TMSw7jvaWYLubJCcbXpTGnEIzwKuaKwiZUQOiCf1M6rCVazHLA accessed January 9, 2026.
[xx] Ibid.
[xxi] Khatibi, S. and Arjjumend, H. (2019). Water Crisis in Making in Iran. Grassroots Journal of Natural Resources, 2(3): 45-54. Doi: https://doi.org/10.33002/nr2581.6853.02034 Accessed January 19, 2026.
[xxii] Food and Agriculture Organization. “Water Efficiency, Productivity and Sustainability in the MENA Region: Iran”. https://www.fao.org/in-action/water-efficiency-nena/countries/iran/en/ Accessed January 9, 2026.
[xxiii] Khorsandi, Mostafa; Omidi Tayebeh and Oel Peter van. 2023. “Water related limits to growth for agriculture in Iran”. Heliyon 9. https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S240584402303339X Accessed January 9, 2026.
[xxiv]Hein, Shabnam von. 2025. “Iran’s Drought: A Disaster in Slow Motion”. Deutsche Welle. https://www.dw.com/en/irans-drought-a-disaster-in-slow-motion/a-74700581#:~:text=Iran%20has%20now%20seen%20six,short%20of%20the%20projected%20goal. Accessed January 9, 2026.
[xxv] Romaniuk, Scott N; Rozsa Erzsebet N. and Csicsmann, Laszlo. 2025. “Iran’s Water Crisis: A National Security Imperative”. December 27. Geopolitical Monitor https://www.geopoliticalmonitor.com/irans-water-crisis-a-national-security-imperative/ Accessed January 19, 2026.
[xxvi] Op. Cit. 19.
[xxvii] Kayvanfar, Kamyar. 2025. “Iran’s Water Crisis: Historical Roots, Ideological Dimensions and Policy Challenges”, November 20. Observer Research Foundation Middle East. https://www.orfonline.org/research/iran-s-water-crisis-historical-roots-ideological-dimensions-and-policy-challenges Accessed January 20, 2026.
[xxviii] Ibid.
[xxix] Babagoli, Mozhdeh and Ikeda, Satoshi. 2019. ”Six Decades of the Second Food Regime in Iran, the Trajectory of Iranian National Food Regime”. Open Journal of Social Sciences, 7, 191-205.
[xxx] Op. Cit. 19.
[xxxi] Mitchell, Penelope. 2025. “Mounting Water Crisis a Major Test for Iranian State”, September 26. Geopolitical Monitor. https://www.geopoliticalmonitor.com/mounting-water-crisis-a-major-test-for-iranian-state/ Accessed January 20, 2026.
[xxxii] Meadway, James. 2026. “How ‘day zero’ water shortages in Iran are fuelling protests”, January 15. The Guardian. https://www.theguardian.com/world/2026/jan/15/how-day-zero-water-shortages-in-iran-are-fuelling-protests#:~:text=Gripped%20by%20a%20terrible%20drought,Pezeshkian%2C%20said%20back%20in%20November. Accessed January 20, 2026.
[xxxiii] Fanack Water. 2025. “Iran’s Transboundary Tensions and Regional Water Politics” https://water.fanack.com/iran-transboundary-water-tensions/ Accessed January 20, 2026.
[xxxiv] Ibid.
[xxxv] Boltuc, Silvia. 2025. “Water, Security and Cooperation: Iran and Afghanistan Address the Helmand River Dispute”. Special Eurassia 29(6). https://www.specialeurasia.com/2025/01/30/helmand-river-iran-afghanistan/ Accessed January 20, 2026.
[xxxvi] Shahbazov, Fuad. 2022. “Iran and Turkey Rift grows over dam construction projects". July 12. Hidropolitik Akademi. https://hidropolitikakademi.org/en/article/29650/iran-and-turkey-rift-grows-over-dam-construction-projects Accessed January 20, 2026.
[xxxvii] Al Jazeera. 2025. “Iraq is facing a water crisis, hit by one of its worst droughts in century”. August 19. https://www.aljazeera.com/news/2025/8/19/iraq-is-facing-a-water-crisis-hit-by-one-of-its-worst-droughts-in-century Accessed January 14, 2026
[xxxviii] Ibid
[xxxix] Al-Shakeri, Hayder. 2025. “Iraq’s Water Crisis: Dammed by neighbors, failed by leaders”. August 13. Chatham House, https://www.chathamhouse.org/2025/08/iraqs-water-crisis-dammed-neighbours-failed-leaders Accessed January 14, 2026.
[xl] Op. Cit. 35.
[xli] The New Region. 2025. “Iraq postpones surplus wheat export amid water crisis”. https://thenewregion.com/posts/3567#:~:text=ERBIL%2C%20Kurdistan%20Region%20of%20Iraq,required%20level%2C%E2%80%9D%20he%20added. Accessed January 19, 2026.
[xlii] Salem, Amr. 2025. “Iraq achieves self sufficiency in Wheat for third year in a row” July 15. Iraqi News. https://www.iraqinews.com/iraq/iraq-achieves-self-sufficiency-in-wheat-for-third-year-in-a-row/ Accessed January 19, 2026.
[xliii] Cooke, Georgia and Mansour, Renad. 2020. “Same Old Politics will not Solve Iraq Water Crisis.” April 15. Chatham House. https://www.chathamhouse.org/2020/04/same-old-politics-will-not-solve-iraq-water-crisis Accessed January 21, 2026.
[xliv] Al Ansari, Nadhir and Adamo, Nasrat. 2018. “Present Water Crisis in Iraq and its Human and Environmental Implications”. June 7. Engineering 10. 305-319.
[xlv] Op. Cit. 37.
[xlvi] Muhammad, Khalil Karim and Baban Mahmood. 2025. “The Drying Up of Iraq and the Kurdistan Region: A Study of Domestic Challenges and Transboundary Water Control.” July 14. Rudaw Research Centre. https://rudawrc.net/en/article/the-drying-up-of-iraq-and-the-kurdistan-region-a-study-of-domestic-chalenges-and-transboundary-water-control-2025-07-14 accessed January 21, 2026.
[xlvii] Quamar, Md. Muddassir. 2025. “Iraq stands on the brink of another political impasse”. November 8. The Week. https://www.theweek.in/news/middle-east/2025/11/08/opinion-iraq-stands-on-the-brink-of-another-political-impasse.html Accessed January 22, 2026.
[xlviii] Ibid.
[xlix] Op. Cit. 42
[l] Op. Cit. 37
[li] Amwaj. 2025. “Politicians hail Iraq-Turkey ‘oil for water’ accord as critics play foul.” https://amwaj.media/en/media-monitor/officials-hail-iraq-turkey-oil-for-water-accord-as-critics-cry-foul Accessed January 22, 2026.