सारांश: हालाँकि अमेरिका ने 3 जनवरी 2026 को मादुरो को पकड़ने को मुख्य रूप से अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नार्को– टेररिज़्म के खतरों के नज़रिए से देखा है लेकिन वेनेजुएला भी एक ऐसा केंद्र बन गया है जहाँ अमेरिका की कई बड़ी सामरिक चिंताएं एक साथ आ गई हैं। वेनेज़ुएला के मुख्य साझीदारों (चीन, रूस, ईरान और क्यूबा) के लिए मादुरो के बाद के दौर ने अनिश्चितता का बड़ा दौर शुरू कर दिया है जिसका उदाहरण 13 फऱवरी 2026 को वेनेज़ुएला के ऊर्जा क्षेत्र के ले अमेरिका का सामान्य लाइसेंस जारी करना है। वहीं, लैटिन अमेरिका के लिए अमेरिकी अभियान ने सामरिक स्वायत्तता के लिए मौजूद विकल्पों के बारे में महत्वपूर्ण सवाल पैदा कर दिए हैं।
परिचय
3 जनवरी 2026 को, अमेरिका ने वेनेज़ुएला में बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया, जिसका नाम ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व था। इसका उद्देश्य वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लेना था। बाद में दोनों को नार्को– टेररिज़्म, नशीले पादर्थों की तस्करी और हथियार इकट्ठा करने जैसे आपराधिक आरोपों के तहत अमेरिका भेज दिया गया। अमेरिकी सरकार ने वेनेज़ुएला में अपने अभियान को सबसे सामने कानून प्रवर्तन मिशन बताया जिसका उद्देश्य मादुरो के खिलाफ लंबे समय से चल रहे आपराधिक आरोपों को सिद्ध करना था जिससे उनकी संप्रभु प्रतिरक्षा समाप्त हो गई थी।
इस कार्रवाई ने तत्काल अंतरराष्ट्रीय चिंताओं को बढ़ा दिया जिसमें किसी वर्तमान देश के मुखिया के खिलाफ़ देश के बाहर कार्रवाई करने की कानूनी मान्यता, संयुक्त राष्ट्र की मंज़ूरी का न होना और इस प्रकार की कार्रवाई से नियम– आधारित व्यवस्था हेतु जो मिसाल कामय होती है, इन सब पर सवाल उठे। फिर भी, इन तात्कालिक कानूनी प्रभाव से परे, वेनेज़ुएला का मामला 'नए विश्व (उत्तर और दक्षिण अमेरिका महाद्वीप, अटलांटिक महासागर और प्रशांत महासागर के क्षेत्र)' के प्रति अमेरिकी नीति में बड़े बदलाव का संकेत देता है।
अमेरिका के लिए वेनेज़ुएला का मित्र राष्ट्र से राष्ट्रीय सुरक्षा का चिंता बन जाना
पूरी 20वीं सदी में, वेनेज़ुएला नए विश्व में संयुक्त राज्य अमेरिका का विश्वसनीय साझीदार[i] बना रहा। 1920 और 1930 के दशक के मध्य, रियायत आधारित कानूनी रूपरेखा के तहत अमेरिकी कंपनियों ने वेनेज़ुएला में तेल निकालने के लिए ज्यादातर बुनियादी ढांचों का निर्माण किया और अमेरिका वेनेज़ुएला के तेल का प्राथमिक बाज़ार बन गया। हालाँकि, 1998 में ह्यूगो चावेज़ के आने और उनकी बोलिवेरियन विचार के साथ ये हालात बदल गए। इस विचार में “तेल संप्रभुता” की बात कही गई थी और इसलिए प्राकृतिक संसाधनों पर सरकार के अधिक नियंत्रण की बात कही गई थी। वर्ष 2001 में, अपने विचार के तहत, चावेज़ ने जैविक हाइड्रोकार्बन कानून नाम से एक कानून पारित किया। इसमें संवैधानिक नियमों को मज़बूत बनाया गया और कहा गया कि हाइड्रोकार्बन भंडार सरकार के हैं। साथ ही नए तेल भंडारों की खोज और तेल निकालने संबंधी गतिविधियों को PDVSA या संयुक्त उपक्रमों द्वारा किए जाने को अनिवार्य बनाया गया। साथ ही यह भी अनिवार्य बनाया गया कि ऐसी गतिविधियों में अधिकांश हिस्सेदारी वेनेज़ुएला की सरकार की रहे जबकि कुछ निजी कंपनियों को डाउनस्ट्रीम गतिविधियों (जैसे रिफाइनिंग और बिक्री) की अनुमति दी गई।
वर्ष 2004 से 2007 के बीच, विदेशी साझीदारों के साथ संचालन समझौता को मुख्य रूप से सरकार के नियंत्रण में लाया गया जिसमें PDVSA के पास न्यूनतम 60%– 80% का मालिकाना अधिकार था, जबकि साथ ही रॉयल्टी और टैक्स दर बढ़ाकर निजी हितों को कम किया गया।[ii] वर्ष 2007 तक, अमेरिका की प्रमुख कंपनियां जैसे एक्सॉनमोबिल (ExxonMobil) और कोनोकोफिलिप्स (ConocoPhillips) ने नई शर्तों को मानने से इनकार कर दिया और वेनेज़ुएला के तेल क्षेत्र से बाहर हो गईं, ओरिनोको बेल्ट में हेवी– ऑयल परियोजनाओं में अपनी बड़ी हिस्सेदारी को छोड़ दिया।[iii]
चावेज़ ने धीरे– धीरे अमेरिका के प्रति अधिक विवाद वाला रवैया अपनाया, जो उनके बोलिवेरियन दृष्टिकोण पर आधारित था जिसमें राष्ट्रीय संप्रभुता और साम्राज्यवाद के विरोध पर ज़ोर दिया गया था। चावेज़ ने 9/11 हमलों[iv] के बाद अफ़गानिस्तान में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई पर खुलेआम सवाल उठाए और दोनों देशों के बीच आपसी संबंध और बिगड़ गए, विशेष रूप से 2002 में तख़्तापलट की नाकाम कोशिश के बाद, जिसके दौरान चावेज़ सरकार ने अमेरिका पर इसमें शामिल होने का आरोप लगाया था।
मार्च 2013 में चावेज़ की मौत के बाद, उनके चुने हुए वारिस, निकोलस मादुरो ने वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण किया और बोलिवेरियन क्रांति को जारी रखा। हालाँकि, मादुरो के शुरुआती कार्यकाल में विश्व भर में तेल की कीमतों में गिरावट आई, जो 2014 में लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल से गिर कर उस साल की पहली तिमाही में लगभग 40 डॉलर प्रति बैरल रह गई थी।[v] कीमतों में इस गिरावट ने अर्थव्यवस्था को विशेष रूप से प्रभावित किया क्योंकि निर्यात से होने वाली कमाई में तेल की हिस्सेदारी लगभग 98% थी और यह सामाज कल्याण कार्यक्रमों के लिए धन उपलब्ध कराने के लिए आय का मुख्य स्रोत था।
इसके साथ ही, दशकों तक राजनीतिक नियुक्तियों, भ्रष्टाचार, कम निवेश और तकनीकी विशेषज्ञता की कमी के कारण पेट्रोलियोस डी वेनेज़ुएला, एसए (PDVSA) की स्थिति खराब होती चली गई, जिससे तेल का उत्पादन बहुत कम हो गया।[vi] इसके अलावा, आर्थिक कुप्रबंधन भी था, सरकार ने बुनियादी वस्तुओं पर मूल्य सीमा निर्धारित कर दी थी। मांग के अधिक एवं आपूर्ति के कम होने की वजह से व्यावसायिक लाभ नहीं कमा सके और उत्पादन गिर गया। इसकी वजह से अनिवार्य वस्तुओं की बड़े पैमाने पर कमी हो गई।
सरकार ने मुद्रा पर भी सख्त नियंत्रण रखा जिससे आधिकारिक विनिमय दर और काले– बाज़ार में डॉलर की दर के बीच बड़ा अंतर पैदा हुआ, इससे आयात महंगा हुआ और खरीदना मुश्किल हो गया। बजट के बड़े घाटे को पूरा करने के लिए, सरकार ने और मुद्राएं छापीं, जिससे वेनेज़ुएला की मुद्रा बोलिवर पर विश्वस कम हो गया और महंगाई बहुत अधिक बढ़ गई।
फरवरी 2014 से, पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।[vii] मादुरो सरकार ने इसका सख्ती से जवाब दिया और मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप बढ़ गए। दिसंबर 2014 में, वेनेज़ुएला मानवाधिकार और नागरिक समाज रक्षा अधिनियम 2014 पारित किया जिससे मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपी वेनेज़ुएला के अधिकारियों पर लक्षित प्रतिबंध (वीज़ा प्रतिबंध और संपत्ति कुर्की समेत) लगाए। इसके अलावा फरवरी 2015 में, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने वीज़ा पर रोक लगाई और मार्च 2015 में राष्ट्रपति ओबामा ने कार्यकारी आदेश 13692 जारी करके वेनेज़ुएला को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बताया।
वर्ष 2016 के आखिर तक, वेनेज़ुएला में अतिस्फीति का दौर शुरू हो गया था क्योंकि खाद्य पदार्थों और दवाओं की कमी हो गई थी, अर्थव्यवस्था धड़ाम हो चुकी थी और वेनेज़ुएला के लाखों लोग बुनियादी ज़रूरतों और रहने के बेहतर स्थान की तलाश में विदेशों का रुख करने लगे थे। अगस्त 2017 से शुरू होकर 2019 तक, अमेरिका ने वेनेज़ुएला पर सख्त वित्तीय प्रतिबंध लगाए, जिससे वेनेज़ुएला की सरकार और सरकारी तेल कंपनी– PDVSA, अमेरिकी वित्तीय बाज़ार में पूरी तरह से प्रतिबंधित हो गईं। इन कदमों का मकसद निकोलस मादुरो की सरकार को पैसे जुटाने और अमेरिकी पूंजी तक पहुँच बनाने से रोकना था।
राजनीतिक मोर्चे पर, संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2018 के वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। इन चुनावों में निकोलस मादुरो को विजेता घोषित किया गया था। अमेरिका ने कहा कि वेनेज़ुएला में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की स्थिति नहीं थी। जनवरी 2019 में, वाशिंगटन ने औपचारिक रूप से विपक्षी नेता युआन गुएदो को वेनेज़ुएला के अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में मान्यता दी जिससे मादुरो की वैधता को प्रत्यक्ष चुनौती मिली।
छह साल के बाद, जुलाई 2024 में हुए राष्ट्रपति चुनाव की भी अमेरिका ने इसी तरह आलोचना की और कहा कि यह न तो स्वतंत्र थी और न ही निष्पक्ष। इसके साथ ही, चुनावों में बाधा डालने में भूमिका के लिए मादुरो और उनके सहयोगियों पर पहले से अधिक प्रतिबंध लगा दिए। विशेष बात यह है कि इस बार, अमेरिका ने निकोलस मादुरो पर 'कार्टेल डे लॉस सोल्स (कार्टेल ऑफ़ द संस)' जो अमेरिका में नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए ज़िम्मेदार है, के मुखिया होने का भी आरोप लगाया[viii]। 25 जुलाई 2025 को अमेरिकी वित्त विभाग ने कार्टेल को विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी इकाई बताया और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया।[ix]
3 जनवरी 2026 तक, अमेरिका ने मादुरो को निकालने के लिए वेनेज़ुएला में सैन्य अभियान किया जिसे नार्को– टेररिज़्म– रोधी उपाय के रूप में उचित ठहराया गया। अभियान के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि संयुक्त राज्य अमेरिका वेनेज़ुएला में ‘सुचारू परिवर्तन की कार्ययोजना की देखरेख करेगा’ जो क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने और वेनेज़ुएला के तेल क्षेत्र को पुनःस्थापित करने के लिए आवश्यक है।[x] इसके बाद, अमेरिका ने वेनेज़ुएला के अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज़, पहले उप– राष्ट्रपति थे और मादुरो को हटाए जाने के बाद इन्होंने ही पदभार ग्रहण किया था, के साथ बातचीत शुरू की।
ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व– चरणबद्ध त्वरण रणनीति का परिणाम
3 जनवरी को चलाया गया अमेरिकी अभियान कोई अलग–थलग या प्रतिक्रियात्मक घटना नहीं थी बल्कि यह लंबे समय की, धीरे–धीरे बढ़ने की रणनीति का नतीजा था जिसे उन राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक बुनियाद को समाप्त करने के लिए बनाया गया था जिनकी वजह से मादुरो सरकार दबाव झेल पाई थी।
सबसे पहले, प्रतिबंध– दिसंबर 2014 में, अमेरिकी कांग्रेस ने वेनेज़ुएला मानवाधिकार और नागरिक समाज रक्षा अधिनियम और मार्च 2015 में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने वेनेज़ुएला को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ‘असामान्य और असाधारण खतरा’ बताया।[xi] इस संकेत के बाद वरिष्ठ अधिकारियों पर लक्षित प्रतिबंध लगाए जा सके। वर्ष 2017 के बाद ट्रंप प्रशासन ने मादुरो सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए वेनेज़ुएला सरकार पर वित्तीय प्रतिबंध और PDVSA पर क्षेत्रीय प्रतिबंध लगाया।[xii]
दूसरा, राजनीतिक अवैधता– 2018 और 2024 के वेनेज़ुएला में हुए राष्ट्रपति चुनाव में, संयुक्त राष्ट्र ने, व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ, निकोलस मादुरो की जीत को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। इस लगातार न मानने से वेनेज़ुएला का कूटनीतिक अलगाव और बढ़ गया एवं सरकार की राजनीतिक वैधता कम हो गई।
तीसरा– मादक पदार्थों के खिलाफ जनादेश के तहत नौसेना की तैनाती– 19 अगस्त 2025 को, अमेरिका ने परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बी समेत नैसेना के पोतों को दक्षिण कैरिबियन में तैनात कर दिया[xiii]। इस तैनाती को नारकोटिक्स रोधी अभियानों के तहत उचित ठहराया गया जिससे वेनेज़ुएला के तत्कालीन रणनीतिक माहौल में अमेरिकी सेना की मौजूदगी बढ़ी है।
चौथा– अमेरिका के कानूनी साधनों का विस्तार और समुद्री संपत्तियों पर लक्षित आक्रमण– 20 फरवरी 2025 को, अमेरिका ने ड्रग कार्टेल को विदेशी आतंकवादी संगठन बताया[xiv] जिससे अमेरिका के अधिकार क्षेत्र का दावा वास्तव में उसकी सीमाओं के परे चला गया। इसके बाद, 2 सितंबर 2025 को, अमेरिकी सेना ने कैरिबियन में वेनेज़ुएला के एक जहाज पर हमला किया, जिससे उसमें सवाल 11 लोगों की मौत हो गई। संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस अभियान को यह कह कर सही ठहराया कि जिन जहाजों को निशाना बनाया गया था वे कथित रूप से मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल थे। 2 अक्टूबर 2025 तक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि अमेरिका ड्रग कार्टेल के साथ ‘सशस्त्र युद्ध’ में संलग्न है।[xv]
आखिर में, तेल टैंकरों को ज़ब्त करना– दिसंबर के मध्य में, अमेरिका ने वेनेज़ुएला के तेल टैंकरों को ज़ब्त करना तेज़ कर दिया जिन्हें प्रतिबंधित तेल ले जाने वाले तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है। इन कार्रवाईयों का उद्देश्य प्रतिबंध को सख्ती से लागू करना है।
ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व के रणनीतिक कारण
हालाँकि अमेरिका नार्को–तस्करी और नार्को–टेररिज़्म के लिए मादुरो को पकड़ने को सही ठहराता है जिसने अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती दी थी, लेकिन वेनेजुएला भी अमेरिका की कई दूसरी चिंताओं का एक मिला– जुला केंद्र था। इसलिए, उसे निशाना बनाना कोई इत्तेफाक नहीं था। इसे विशेष रूप से इसलिए चुना गया था क्योंकि वेनेज़ुएला में सफलता प्रत्यक्ष प्रभाव के तौर पर काम करेगी और अमेरिका के कड़े शर्तों पर विश्वास वापस लाएगी।
क. व्यापक रणनीतिक संदर्भ
प्रणालीगत स्तर पर वेनेज़ुएला के दखल ने अमेरिका के लिए बड़ा संकेत देने का काम किया। अमेरिका के प्रभाव में कमी और बहुध्रवीयता पर बातचीत तेज़ होने की घटनाओं के बीच अमेरिका पर यह दिखाने का दबाव था कि वह सख्त शर्तें लागू करने की अपनी काबिलियत दिखा सकता है, विशेष रूप से नई दुनिया (पश्चिमी गोलार्ध) में, जिसे पहले उसका रणनीतिक बैकयार्ड माना जाता था। वेनेज़ुएला ने बहुत स्पष्ट शर्तें लगाईं, जिससे अमेरिका को यह संकेत मिला कि दुश्मनो या अमेरिकी प्रतिबंध वाले देशों के साथ गठबंधन करने का जबरदस्त नुकसान होता है।
वास्तव में, पश्चिमी गोलार्ध एक रणनीतिक रंगमंच के रूप में फिर से उभरा है। पिछले दस सालों में चीन, रूस और ईरान जैसी अतिरिक्त क्षेत्रीय शक्तियों ने लैटिन अमेरिका में अपनी भागीदारी बढ़ाई है। क्यूबा, निकारागुआ और वेनेज़ुएला जैसी सरकारों के साथ आर्थिक, कूटनीतिक और कुछ मामलों में सुरक्षा साझीदारी की है जिन्हें अक्सर पश्चिम विरोधी माना जाता है। ये संबंध अमेरिका के हितों के लिए अलग– अलग चुनौतियां पेश करते हैं जो बड़ी शक्तियों के बीच मुकाबले में इस इलाके में बढ़ती अहमियत को दिखाते हैं। साथ ही, वाम– झुकाव वाली कई अमेरिकी सरकारों ने बाहरी लोगों को बंदरगाह, दूरसंचार, अंतरिक्ष अवसंरचना, खनिज और तेल जैसे रणनीतिक संपत्तियों तक पहुँच प्रदान की है।
इन रुझानों के एक साथ देखें तो, अमेरिका के रणनीतिक दृष्टिकोण से, एक बहुध्रुवीय पश्चिमी गोलार्ध को चुपचाप मंज़ूरी देना होगा, जिसे आम तौर पर अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ मेल नहीं खाने वाले नतीजा माना जाता है। इसी संदर्भ में ट्रंप प्रशासन की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति 2025 एक नए पश्चिमी गोलार्ध सिद्धांत को बताती है। ‘ट्रंप कोरोलरी टू द मोनरो डॉक्ट्रिन’ के तौर पर तैयार की गई इस रणनीति का उद्देश्य गैर– गोलार्ध कारक को रणनीतिक संपत्ति को नियंत्रित करने या इलाके में प्रभाव डालने की काबिलियत से दूर रखना है।
ख. वेनेज़ुएला का उस व्यवस्था को फिर से लागू करने के लिए सबसे अहम स्थान के रूप में उभरना
वेनेज़ुएला, पश्चिमी गोलार्ध में वाशिंगटन के लिए व्यवस्था को फिर से लागू करने के लिए सबसे अहम जगह के तौर पर उभरा, क्योंकि इसने खास तौर पर चार संरचनात्मक चुनौतियों को अमेरिकी नीति बनाने वालों के लिए एक ही रणनीतिक समस्या में मिला दिया।
सबसे पहले, वेनेज़ुएला के पास विश्व का सबसे बड़ा तेल का भंडार था जिससे उत्पादन में गिरावट के बावजूद देश को भू– राजनीतिक वैल्यू मिली। अमेरिका के लिए, चिंता केवल चावेज़ और मादुरो के राज में राष्ट्रीयकरण की वजह से बाहर होने वाली अमेरिका ऊर्जा कंपनियों के लिए हर्जाना पाने की नहीं थी, बल्कि यह तय करने की भी थी कि वेनेज़ुएला का कच्चा तेल कौन, किन शर्तों पर इस्तेमाल कर सकता है, जिसका वैश्विक ऊर्जा मूल्यन और मार्केट गवर्नेंस पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
दूसरा, मादुरो के लगातार राजनीतिक विरोध (क्यूबा के कास्त्रो की तरह) ने इसे दूसरे लैटिन अमेरिकी देशों से अलग बनाया, जहाँ अमेरिका के दबाव के कारण आखिरकार उम्मीद के मुताबिक नीति में बदलाव हुआ। वेनेजुएला के तेल होने वाली कमाई, हालांकि बहुत कम हो गई, मादुरो के शासन के कल्याण कार्यक्रम को वित्त पोषण करती रही, जिससे अंदरूनी एकता और नाराज़गी बनी रही। यह रूस, चीन और ईरान के लगातार समर्थन की वजह से संभव हुआ।
तीसरा, वेनेज़ुएला ने अपनी सीमाओं के बाहर अमेरिका के प्रतिबंधों को कमज़ोर करने में अहम भूमिका निभाई। वेनेज़ुएला के तेल विशेषज्ञ ने क्यूबा की अर्थव्यवस्था को बनाए रखने में मदद की, जिससे अमेरिका के प्रतिबंध वाले एक और देश को मदद मिली। इसके अलावा, प्रतिबंधों का सामना करते हुए, वेनेज़ुएला टैंकरों के एक ‘शैडो फ्लीट’ पर निर्भर था तो तेल निर्यात करते रहे, जिससे अमेरिकी प्रतिबंधों का प्रभाव कम हो गया।
चौथा, इस ऑपरेशन का उद्देश्य वेनेज़ुएला में अतिरिक्त– गोलार्ध शत्रुता के प्रभाव को कम करना था। चावेज़ और मादुरो, दोनों की सरकारों ने साफ तौर पर अमेरिका के खिलाफ रवैया अपनाया था, इन कारकों (चीन, रूस और ईरान) ने वेनेज़ुएला की अमेरिका से बढ़ती दूरी का लाभ उठाकर अपनी दिलचस्पी बढ़ाई। इस तरह, मादुरो को हटाने का उद्देश्य उस रणनीतिक पारितंत्र को बिगाड़ना था जिसके माध्यम से इन देशों ने पश्चिमी गोलार्ध में अपना प्रभाव बढ़ाया था।
वेनेज़ुएला का अपने प्रमुख साझीदारों के साथ संबंध: अमेरिका और मादुरो के बाद के संबंधों पर प्रभाव
ह्यूगो चावेज़ और बाद में निकोलस मादुरो के राज में, वेनेज़ुएला ने क्यूबा चीन, रूस और ईरान के साथ विशेष संबंधों पर करीबी संबंध बनाए। इन साझेदारी से सरकार को ऐसे समय में बाज़ार, पैसा, तकनीकी मदद और राजनीतिक मदद मिली, जब अमेरिका के प्रतिबंधों ने पश्चिमी बाज़ारों तक वेनेज़ुएला की पहुंत को कम कर दिया था।
30 अक्टूबर 2000 को व्यापक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करने के साथ ह्यूगो चावेज़ के समय क्यूबा– वेनेज़ुएला साझेदारी को नई रफ्तार मिली। इस समझौते का एक प्रमुख स्तंभ ऊर्जा– सेवा विनिमय था, जिसके तहत वेनेज़ुएला ने क्यूबा को बाज़ार दर से कम पर तेल आपूर्ति किया जबकि क्यूबा ने वेनेज़ुएला को मेडिकल पेशे, शिक्षाविद् और तकनीकी विशेषज्ञता दी। यह समर्थन निकोलस मादुरो के समय भी जारी रहा, जिन्होंने राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले साल में 51 समझौते पर हस्ताक्षर करके रणनीतिक गठबंधन को मज़बूत किया जिसमें ऊर्जा प्रबंधन और स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और मनोरंजन जैसे क्षेत्र में सामाजिक कार्यक्रम शामिल थे।
आर्थिक और सामाजिक सहयोग के अलावा, इस गठबंधन ने अहम सुरक्षा पहलू भी बनाया। क्यूबा ने बोलिवेरियन राष्ट्रीय सशस्त्र बल (FANB) को फिर से बनाने में अहम भूमिका निभाई। इसी संदर्भ में हाल ही में वेनेज़ुएला में अमेरिकी अभियान के दौरान क्यूबा के 32 सैनिक मारे गए।[xvi]
ईरान– वेनेज़ुएला की साझेदारी कई दशकों पुरानी है। 1960 के दशक में दोनों देशों के ओपेक के संस्थापक सदस्य देश बनने की वजह से बने राजनयिक संबंधों का परिणाम है। हालाँकि, 2000 के दशक की शुरुआत में वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ और ईरान के राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी के समय में संबंध बहुत अच्छे हुए, जिसकी वजह अमेरिका के खिलाफ दोनों नेताओं की एक जैसी सोच थी। इसके अलावा, ईरान के लिए, वेनेजुएला ने पश्चिमी गोलार्ध में अपनी रणनीतिक उपस्थिति बढ़ाने का मौका दिया।
इसका परिणाम यह हुआ कि दोनों देशों के बीच सरकारी दौरे हुए और ऊर्जा, आवास एवं अवसंरचना के क्षेत्र में सहयोग के समझौते किए गए। चावेज़ ने ईरान के परमाणु कार्यक्रमों का भी खुलकर समर्थन किया और शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु तकनीक विकसित करने के ईरान के अधिकार की हिमायत की।[xvii] यह साझेदारी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेज़ाद के समय और बेहतर हुई। अहमदीनेज़ाद ने ह्यूगो चावेज़ के साथ करीबी व्यक्तिगत संबंध बनाया और तेल एवं गैस शोधन एवं ऊर्जा तकनीक, खनिज अन्वेषण, निर्माण परियोजनाओं, ऑटोमोबाइल उत्पादन और बैकिंग कार्यक्रमों से जुड़े आर्थिक सहयोग में वृद्धि का प्रबंध किया।
आर्थिक संबंधों के साथ– साथ रक्षा संबंधों में धीरे– धीरे सुधार हुए, 2006 के आसपास से, तेहरान ने वेनेज़ुएला को मोहजर– सीरीज़ के मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी/UAVs) की आपूर्ति शुरू कर दी जिन्हें ईरान की क़ुद्स एविएशन इंडस्ट्रीज़ (QAI) ने बनाया था। बाद में इन प्लेटफॉर्म्स को दूसरे ब्रांड का नाम दिया गया और वेनेज़ुएला में एएनएसयू (ANSU)- श्रृंखला के ड्रोन के रूप में असेंबल किया गया ताकि वेनेज़ुएला की सेनाएं इनका इस्तेमाल कर सकें।
वास्तव में, स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई/SIPRI) के 2020–2024 के आंकड़ों के मुताबिक, ईरान के हथियारों के निर्यात का दूसरा सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता वेनेज़ुएला था जो ईरान के कुल निर्यात का 11% था। हस्तांतरण में शामिल ज्यादातर यूएवी (UAV) ईरान के डिज़ाइन किए गए थे। [xviii]
चावेज़ की मौत के बाद, ईरान– वेनेज़ुएला के संबंधों में शुरू– शुरू में तो रफ्तार धीमी हुई क्योंकि ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने अपनी आरंभिक विदेश नीति में लैटिन अमेरिका को प्राथमिकता नहीं दी। हालाँकि, 2018 में अमेरिका द्वारा ईरान पर और 2019 में वेनेज़ुएला के PDVSA पर फिर से प्रतिबंध लगाने के बाद दोनों देशों के संबंधों में सामरिक महत्व फिर से बढ़ा, जिससे आर्थिक और ऊर्जा संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिली। वर्ष 2019 से ऊर्जा सहयोग और बढ़ाया गया क्योंकि ईरान ने वेनेज़ुएला के पंगु हो चुके तेल क्षेत्र को फिर से दुरुस्त करनेक लिए ईंधन, रिफाइनरी घटकों और तकनीकी मदद उपलब्ध कराई। कहा जाता है कि दोनों पक्षों ने अमेरिकी प्रतिबंध से बचने के लिए शैडो शिपिंग नेटवर्क पर भी विश्वास किया[xix]।
वर्ष 2021 में इब्राहिम रईसी के कार्यभार संभालने के बाद संबंध और बेहतर हुए जिसका नतीजा यह हुआ कि मादुरो 2022 में तेहरान गए और ऊर्जा, वित्तीय क्षेत्र के साथ– साथ "रक्षा परियोजनाओं पर मिलकर काम करने" के लिए 20-वर्षीय रणनीतिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर कर आए।[xx]। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के समय में संबंधों में बेहतरी जारी रही, ईरान ने निकोलस मादुरो को अपना समर्थन फिर से दिया, जबकि वेनेज़ुएला ने जून 2025 में ईरान के खिलाफ इज़रायली कार्रवाई की निंदा की।
दो दशकों से भी अधिक समय में, रूस ने वेनेज़ुएला के सैन्य और ऊर्जा क्षेत्र में अपनी जगह बनाई, ह्यूगो चावेज़ और उनके बाद आए निकोलस मादुरो को समर्थन दिया और पश्चिमी गोलार्ध में अपनी मज़बूत पकड़ बनाई।
ऊर्जा के क्षेत्र में, ह्यूगो चावेज़ द्वारा वेनेज़ुएला के तेल उद्योग के राष्ट्रीयकरण के बाद, देश को उत्पादन बनाए रखने के लिए भारी पूंजी एवं तकनीकी सहायता की आवश्यकता थी। नतीजतन, वेनेज़ुएला ने अपने तेल क्षेत्र के पुनर्विकास में सहयोग के लिए मास्को का रुख किया। वर्ष 2009 में, वेनेज़ुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA और प्रमुख रूसी उत्पादकों (TNK‑BP, रोसनेफ्ट, लुकोइल, गज़प्रोम नेफ्ट और सर्गुटनेफ्टेगाज़) ने एक संघ ने ओरिनोको ऑयल बेल्ट में जुनिन–6 (Junín‑6) ब्लॉक विकसित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसमें PDVSA के पास 60 % और रूसी संघ के पास 40 % हिस्सेदारी की बात थी[xxi]। हालांकि, 2010 के दशक में, इनमें से ज्यादातर रूसी साझेदारों ने कम उत्पादन परिणामों, संचालन संबंधी कठिनाइयों और वेनेज़ुएला के अत्यधिक चुनौतीपूर्ण तेल माहौल में अनिश्चित आर्थिक संभावनाओं के कारण उससे बाहर निकल गए।
इससे रोसनेफ्ट वेनेज़ुएला की अपस्ट्रीम परियोजनाओं में प्रमुख ऊर्जा कंपनी बन गई। 2010 के दशक के मध्य तक, वेनेज़ुएला की अर्थव्यवस्था गंभीर गिरावट के दौर से गुज़र रही थी और PDVSA नकद की कमी, तेल के उत्पादन में कमी और आयात के लिए भुगतान करने या अभियान जारी रखने की सीमित क्षमता से जूझ रही थी। अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रतिबंध ने संकट को और बढ़ा दिया जिससे अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण तक पहुँच बंद हो गई।
तेल का प्रवाह बनाए रखने के लिए, रोसनेफ्ट ने 2014 और 2017 के बीच PDVSA को अग्रिम भुगतान और ऋण दिए, जिसमें तेल डिलीवरी के हिसाब से पुनर्भुगतान निर्धारित किया गया।[xxii] इस दौरान रोसनेफ्ट ने और ओरिनोको बेल्ट वेंचर्स में भी हिस्सेदारी खरीदी। जैसे– जैसे अमेरिकी प्रतिबंध बढ़ते गए, न केवल वेनेज़ुएला के तेल बल्कि वेनेज़ुएला की मदद करने वाले विदेशी बिचौलियों को भी निशाना बनाया गया, रोसनेफ्ट को अपनी व्यापार गतिविधियों के लिए अधिक कानूनी और वित्तीय जोखिमों का सामना करना पड़ा। इसके जवाब में रोसनेफ्ट ने 2020 में अपने वेनेज़ुएला की संपत्तियों को रूस की सरकारी ऊर्जा कंपनी रोसज़ारुबेज़नेफ्ट को हस्तांतरित कर दिया ताकि उन्हें प्रतिबंधों से बचाया जा सके और वे परिचालन जारी रख सकें।[xxiii]
वर्ष 2018 के बाद से, रूस ने वेनेज़ुएला को नए ऋण देने का ऐलान सार्वजनिक रूप से नहीं किया है, और यूक्रेन युद्ध शुरू होने और पश्चिमी देशों के प्रतिबंध के दबाव के बाद विदेशी निवेश का वित्त पोषण करने या बढ़ाने की उसकी योग्यता भी कम हुई है। इन बाधाओं के बावजूद, ऊर्जा सहयोग कायम रहा है। मई 2025 में, रूस और वेनेज़ुएला ने नए रणनीतिक साझेदारी और सहयोग समझौते किए जिसमें तेल और गैस की खोज, संयुक्त उपक्रम और ऊर्जा बाज़ार सहयोग पर मिलकर काम करने के वादे शामिल थे[xxiv]। बाद में, 20 नवंबर 2025 को, वेनेज़ुएला की नेशनल असेंबली ने PDVSA और रूस के रोस्ज़ारूबेज़नेफ्ट के बीच दीर्घकालिक संयुक्त उद्यमों के 15‑वर्ष के विस्तार को मंजूरी दे दी[xxv]।
इसके बाद, रक्षा क्षेत्र में संबंधों में सुधार हुए क्योंकि वेनेज़ुएला अमेरिकी हथियारों और प्रशिक्षण पर वर्षों से निर्भरता के बाद विविधता लाने की आशा कर रहा था। वर्ष 2005–2006 के आसपास, चावेज़ के नेतृत्व में वेनेज़ुएला ने रूसी हथियारों के लिए बड़े ऑर्डर दिए जिनमें कलाश्निकोव राइफलें, हेलीकॉप्टर और सुखोई एसयू– 30एमके2 (Su‑30MK2) लड़ाकू विमान शामिल हैं। मई 2011 में, दोनों सरकारों ने मॉस्को में एक अंतर– सरकारी सैन्य–तकनीकी सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए जिससे रक्षा संबंध औपचारिक हुए और रूस वेनेज़ुएला का प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता बना[xxvi]। इस रूपरेखा के तहत, रूस ने बहु– भूमिका वाले लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर (Mi‑17, Mi‑35, Mi‑26), टैंक, बख़्तरबंद गाड़ियां, तोपें और वायु रक्षा प्रणालियों समेत कई प्रकार के सैन्य हार्डवेयर दिए और लाइसेंस– प्राप्त उत्पादन तकनीक भी उपलब्ध कराई।[xxvii]
इस बीच, रूस के लिए वेनेज़ुएला, यूक्रेन और जॉर्जिया को अमेरिका के समर्थन के खिलाफ एक माध्यम बन गया। सत्ता अयन के हिस्से के रूप में, रूस ने तीन अवसरों पर वेनेज़ुएला में Tu-160 सामरिक बमवर्षक विमान तैनात किए। पहली तैनाती सितंबर 2008 में हुई थी, रूस– जॉर्जिया युद्ध के तुरंत बाद। दूसरी बार अक्टूबर 2013 में हुई जब Tu-160 बमवर्षक विमान लैटिन अमेरिका में लंबी दूरी की प्रशिक्षण उड़ानों के हिस्से के तौर पर वेनेज़ुएला में रुके थे।
अंतिम बार, दिसंबर 2018 में वेनेज़ुएला के अंदरूनी राजनीतिक संकट के बीच इसकी तैनाती हुई थी। मार्च 2019 में रूस ने भी सेना की एक छोटी टुकड़ी वेनेज़ुएला भेजी थी। हालाँकि रूस ने कहा कि इन लोगों को वर्तमान सैन्य– तकनीकी सहयोग समझौते के तहत रख–रखाव, प्रशिक्षण एवं परामर्श के लिए तैनात किया गया था। क्योंकि विमानों की तैनाती वेनेज़ुएला के गहराते राजनीतिक संकट के बीच हुई, इसलिए इस कदम को राष्ट्रपति मादुरो के लिए प्रतीकात्मक समर्थन समझा जा सकता है।
वेनेज़ुएला में चीन का बढ़ा प्रभाव 2001 में राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ के समय में “सामरिक विकास साझेदारी” पर हस्ताक्षर करने के साथ शुरू हुआ था। यह कदम अमेरिका से अपने आर्थिक संबंधों को अलग करने के लिए उठाया गया था जो लंबे समय से वेनेज़ुएला का मुख्य व्यापार साझीदार और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का मुख्य स्रोत था। आगे चल कर मादुरो के शासन में संबंध और बेहतर हुए, 2014 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी और 2023 में बारहमासी रणनीतिक साझीदारी, जो बहुत गहरे, मज़बूत और दीर्धकालिक सहयोग का संकेत है। 14 सितंबर 2018 को वेनेज़ुएला भी चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) में शामिल हो गया[xxviii]।
आज, अमेरिका के बाद चीन वेनेज़ुएला का दूसरा सबसे बड़ा व्यापार साझीदार है। वेनेज़ुएला से चीन के आधिकारिक आयात को दो– तिहाई से अधिक हिस्सा तेल और तेल से जुड़े उत्पाद हैं। दिसंबर 2004 में चावेज़ के बीजिंग दौरे के बाद, ऊर्जा क्षेत्र में संबंध बहुत गहरे हो गए, जहाँ उन्होंने तेल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। चीन की बड़ी सरकारी ऊर्जा कंपनियां (CNPC, सिनोपेक (Sinopec), और CNOOC) कच्चा तेल खरीदने, अपस्ट्रीम निवेश, पेट्रोकेमिकल वेंचर और संरचनात्मक वित्तपोषण व्यवस्था में शामिल हो गईं। बाद में इन निवेश का परिणाम 2007 में चीन– वेनेज़ुएला संयुक्त कोष (CVJF) बनाए जाने के रूप में सामने आया।[xxix]
इसके मुताबिक, चीन ने वेनेज़ुएला को तेल पर आधारित विकास ऋण के रूप में अरबों डॉलर दिए, जिसका प्रयोग देश ने रेलवे और विद्युत संयंत्रों जैसे अवसंरचनात्मक परियोजनाओं के वित्त पोषण में किया। भुगतान दीर्घकालिक क्रूड शिपमेंट के माध्यम से किया गया।
वर्ष 2014 से पहले तेल के मूल्यों में तेज़ी के सालों में, वेनेज़ुएला ने इस मॉडल के तहत चीन से लगभग 60 अरब अमेरिकी डॉलर का भारी कर्ज लिया था।[xxx] हालाँकि, 2014 में तेल की कीमतों में गिरावट ने पूरी स्थिति बदल दी। जैसे– जैसे निर्यात से होने वाली कमाई में कमी आई, PDVSA को उन्हीं ऋण शर्तों को पूरा करने के लिए अधिक तेल भेजना पड़ा जिससे वित्तीय बोझ बढ़ गया। 2010 के दशक के मध्य तक, भुगतान का दबाव स्पष्ट रूप से नज़र आने लगा और शिपमेंट में देरी और फिर अक्सर बैठकें होने लगीं।
हालांकि बीजिंग ने 2016 और 2018 के बीच सीमित वित्तीय मदद जारी रखी लेकिन वेनेज़ुएला के आर्थिक संकट के गहराने के साथ बड़े पैमाने पर नए ऋण बहुत कम मिलने लगे। वर्ष 2019 में PDVSA पर अमेरिकी प्रतिबंध लगने से CNPC जैसी चीनी सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिबंध की वजह से प्रत्यक्ष रूप से कच्चा तेल उठाना औपचारिक रूप से रोकना पड़ा।[xxxi] फिर भी, वेनेज़ुएला का तेल बिचौलियों और दूसरे स्पष्ट न नज़र आने वाले व्यापार व्यवस्थाओं के माध्यम से चीन के बाज़ारों में पहुँचता रहा।
ऊर्जा के अलावा रक्षा संबंध भी प्रगाढ़ हुए हैं और 2005 से वेनेज़ुएला लैटिन अमेरिका में चीनी हथियारों का बड़ा खरीददार बन गया है। इन खरीद में हल्के टैंक, सैनिकों को ले जाने वाली बख़्तरबंद गाड़ियां, रॉकेट लॉन्च सिस्टम, रडार सिस्टम और परिवहन एवं प्रशिक्षण विमान शामिल हैं। चीन ने वेनेज़ुएला की अंतरिक्ष और उपग्रह महत्वाकांक्षाओं का भी समर्थन किया है जिसमें एल सोम्ब्रेरो सैटेलाइट ग्राउंड स्टेशन और इसकी बैकअप सुविधा, लुएपा सैटेलाइट कंट्रोल ग्राउंड स्टेशन का निर्माण शामिल है।[xxxii]
क. अमेरिका के लिए रणनीति प्रभाव
अमेरिका के लिए, वेनेज़ुएला का अपने प्रमुख साझीदारों के साथ बनाए रखा गया हर एक संबंध पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका के हितों के लिए एक अलग स्तर और प्रकार की चुनौती थी। इसलिए निकोलस मादुरो को हटाना इस साझेदारी से पैदा होने वाले अलग– अलग रणनीतिक संकटों को समाप्त करने के बारे में था।
क्यूबा के मामले में, वेनेज़ुएला ने क्यूबा पर अमेरिका के प्रतिबंध को कमज़ोर किया, विशेषरूप से सब्सिडी वाले तेल आपूर्ति के माध्यम से, क्योंकि उसने क्यूबा के लिए मुख्य आर्थिक लाइफलाइन का काम किया। अमेरिका के नज़रिए से, वेनेज़ुएला पर दबाव बनाने से क्यूबा को बिना सीधे दखल दिए कमज़ोर करने का अप्रत्यक्ष तरीका मिल गया जिससे क्यूबा में ऐसे बदलाव को बढ़ावा मिला जिससे अमेरिकी हितों के साथ तालमेल बेहतर हो सकता था। ट्रंप ने वास्तव में कहा था कि क्यूबा अपने आप गिर जाएगा और दखल देने की ज़रूरत नहीं है[xxxiii], इस बयान की गंभीरता शायद क्यूबा की अर्थव्यवस्था में वेनेज़ुएला की भूमिका को समझने के बाद है।
प्रणालीगत स्तर पर, वेनेज़ुएला बड़ी शक्तियों (चीन और रूस) के लिए एक मंच की तरह काम करता था, ताकि वे अमेरिकी सीमा के पास अपनी राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा मौज़ूदगी बढ़ा सकें। वेनेज़ुएला में चीन की बढ़ती उपस्थिति को अमेरिका ने तात्कालिक संकट की बजाय दीर्घकालिक रणनीतिक चुनौती के रूप में देखा। अमेरिका की चिंता वेनेज़ुएला में चीन के चलाए जा रहे ग्राउंड स्टेशन और दोहरे प्रयोग वाली अवसंरचनाओं पर भी थी[xxxiv], जिनसे कथित तौर पर बीजिंग को उस गोलार्ध में अमेरिका की गतिविधियों तक सूदूर पहुँच और संभावित खुफिया जुटाने की अनुमति मिलती है।
इस बीच, वेनेज़ुएला में रूस की भूमिका को अमेरिका अधिक खुले तौर पर टकराव वाली मानता है। भले ही अमेरिका के प्रतिबंधों और यूक्रेन युद्ध की वजह से रूस की आर्थिक क्षमता पर रोक लगी हो, लेकिन 2008, 2013 और 2019 में वेनेज़ुएला में TU-160 रणनीतिक बमवर्षक विमान तैनात करने जैसे उसके कामों को अमेरिका के प्रभाव को चुनौती देने के लिए जानबूझकर शक्ति दिखाने के रूप में देखा जाता है।
असममित संकट स्तर पर ईरान ने वेनेज़ुएला के साथ संबंध ने अलग प्रकार की चिंताएं पैदा की हैं। अमेरिका ने बार– बार आरोप लगाया है कि ईरान के समर्थन वाले हिज़बुल्लाह नेटवर्क वेनेज़ुएला को पश्चिमी गोलार्ध में एक रसद, वित्तीय और संचालन हब के रूप में प्रयोग करते हैं जिससे उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती मिलती है।[xxxv]
“ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व” नाम इसलिए रखा गया ताकि यह दिखाया जा सके कि वेनेज़ुएला से आने वाले संकटों को पूरी तरह से खत्म करने के लिए अमेरिका तैयार है। ऑपरेशन के तुरंत बाद, अमेरिका ने प्रतिबंधों में राहत और तेल क्षेत्र तक पहुंच का लाभ उठाकर वेनेज़ुएला की अंतरिम सरकार पर दबाव डाला है कि वह चीन, रूस, ईरान और क्यूबा के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को बहुत सीमित कर दे।
ख. मादुरो के बाद: वेनेज़ुएला के प्रमुख साझीदारों की चिंताएं
1. वर्तमान राजनीतिक प्रतिबंधताओं और व्यावसायिक अनुबंधों का सम्मान
मादुरो के बाद के दौर ने वेनेज़ुएला के प्रमुख साझीदारों के बीच बहुत अधिक अनिश्चितता पैदा कर दी है, विशेष रूप से इस बात पर कि क्या डेल्सी रोड्रिगेज के नेतृत्व में अंतरिम सरकार अमेरिका का दबाव झेल पाएगी और वर्तमान राजनीतिक प्रतिबद्धताओं और व्यावसायिक अनुबंधों का सम्मान करना जारी रखेगी।
खबर है कि अमेरिका– वेनेजुएला के बीच चल रही बातचीत भविष्य में तेल सहयोग और वर्तमान अनुबंध को बनाए रखने को अमेरिका की लगाई गई शर्तों से जोड़ती है। इसलिए 13 फरवरी 2026 को, अमेरिका के वित्त विभाग की विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने दो जनरल लाइसेंस, जनरल लाइसेंस संख्या 49 और 50 जारी किए, जो मिलकर वेनेज़ुएला के तेल और गैस क्षेत्र में विदेशी तेल कंपनियों के लिए सीमित, शर्तों वाले मार्ग खोलती है।
जनरल लाइसेंस सं. 49 विदेशी कंपनियों को ओएफएसी (OFAC) से अलग परमिट के साथ वेनेज़ुएला के तेल और गैस में नए निवेश के लिए PDVSA के साथ अनुबंध करने की इजाज़त देता है। यह अधिकार रूस, ईरान या चीन की कंपनियों या उन देशों के लोगों के साथ संयुक्त उपक्रम के मालिकाना हक वाली या उनके नियंत्रण वाली इकाई के साथ लेन–देन की भी इजाज़त नहीं देता है।[xxxvi] दूसरी तरफ, जनरल लाइसेंस सं. 50 वेनेज़ुएला के तेल और गैस क्षेत्र में सीमित संचालन गतिविधि की इजाज़त देता है, केवल बीपी, शेवरॉन, एनी, रेपसोल और शेल जैसी पांच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों को। हालांकि इन कंपनियों को वेनेज़ुएला सरकार और PDVSA के साथ विशेष लेन– देन करने की इजाज़त है लेकिन लाइसेंस के अनुसार अधिकांश पैसे के भुगतान जैसे रॉयल्टी, टैक्स या फीस, अमेरिका– पर्यवेक्षण वाले विदेशी सरकारी जमा कोष में जमा करने होंगे।[xxxvii]
जारी किए गए लाइसेंस के जवाब में, अमेरिका ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने फरवरी 2026 में वेनेज़ुएला के अपने दौरे के दौरान इस बात पर ज़ोर दिया कि अमेरिका ऊर्जा नीति का मुख्य उद्देश्य वेनेज़ुएला के तेल और गैस क्षेत्र में अमेरिकी निवेश को बढ़ाना है, साथ ही देश के ऊर्जा उद्योग में चीन, रूस और ईरान जैसी बाहरी शक्तियों के असर को कम करना है।[xxxviii] इसके बाद, इससे वेनेज़ुएला के केंद्रीय साझेदारों में चिंता बढ़ गई है।
क्यूबा के मामले में, वेनेज़ुएला केवल क्यूबा के लिए एक सुविधा वाला साथी नहीं था, बल्कि एक ऐसा साथी था जिसके साथ उसने “बोलिवेरियन ब्रदरहुड” बनाया और क्यूबा की बाहरी अस्तित्व की रणनीति के लिए आवश्यक था। हालांकि, वेनेज़ुएला की अंतरिम सरकार ने पुष्टि किया है कि दोनों देशों के संबंध स्वयं फैसला करने, देश की आज़ादी, भाईचारा, एकता, सहयोग और आपसी लेन–देन के सिद्धांतों पर चलते रहेंगे लेकिन क्यूबा के अधिकारियों को अभी भी पक्का नहीं है कि नेतृत्व इस लंबे समय से चले आ रहे गठबंधन को कमज़ोर करने के उद्देश्य से लगातार अमेरिका के दबाव का सामना कर पाएगी या नहीं। वर्तमान में, क्यूबा एक गंभीर ऊर्जा और आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, जो अमेरिकी प्रतिबंध की वजह से वेनेज़ुएला से तेल शिपमेंट में कमी की वजह से और बढ़ गया है।[xxxix] इसके अलावा, वेनेज़ुएला के समर्थन में कमी से क्यूबा की आर्थिक और ऊर्जा संबंधी कमियां और बढ़ सकती हैं।
ईरान की चिंताएं अधिक संरचनात्मक हैं। मादुरो के बाद अमेरिका के साथ फिर से तालमेल होने से लैटिन अमेरिका में ईरान की संचालन, पारगमन और प्रभावित करने की क्षमता पर बहुत प्रभाव होगा। वेनेज़ुएला, पश्चिमी गोलार्ध में ईरान के लिए मुख्य रसद और राजनयिक आधार के रूप में काम करता रहा है इसलिए वेनेज़ुएला के राजनीतिक नज़रिए में परिवर्तन से ईरान का क्षेत्रीय संचालन क्षेत्र कम हो जाएगा और उसके प्रतिबंध से बचने के नेटवर्क कमज़ोर हो जाएंगे।
चीन और रूस सबसे अधिक रणनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं का सामना कर रहे हैं। 13 फरवरी 2026 को अमेरिका द्वारा जारी लाइसेंस के उत्तर में, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने प्रतिबंधों को भेदभावपूर्ण बताया[xl], मॉस्को की दीर्घकालिक परियोजनाओं पर प्रकाश डाला और वेनेज़ुएला की तेल संपत्तियों में निवेश स्वामित्व का दावा किया।
विशेष रूप से चीन के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है क्योंकि तेल के बदले लोन चुकाने की रूपरेखा के तहत देश को लगभग 4.4 अरब बैरल[xli] वेनेज़ुएला के भंडार का अधिकार है, जिससे यह मॉडल दबाव में आ गया है। बीजिंग को यह भी भय है कि अमेरिकी दबाव में वेनेज़ुएला की अंतरिम सरकार वेनेज़ुएला में चीन के अंतरिक्ष ट्रैकिंग और ग्राउंड स्टेशन को बंद कर सकती है जो चीन के रणनीतिक रूप से सबसे संवेदनशील विदेशी प्रतिष्ठानों में से एक है।
मादुरो के बाद के दौर में, चीन और रूस दोनों मुख्य रूप से वेनेजुएला में अपने वर्तमान आर्थिक और रणनीतिक निवेश को सुरक्षित रखने और बचाने पर ध्यान दे रहे हैं।
2. चीन और रूस की बड़ी चिंताएं
दोनों ही देश मादुरो के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई को एक परेशान करने वाली मिसाल मानते हैं और यह संकेत देते हैं कि अमेरिका पहले से मानी हुई सीमा रेखा को पार करने के लिए तैयार है, जिससे नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय सीमा से हटकर खुले तौर पर शक्ति दिखाने की तरफ बदलाव तेज़ होगा। उन्हें चिंता है कि क्या भविष्य में दूसरे कारकों में भी ऐसा हो सकता है, जहाँ उन्होंने भारी निवेश किया है।
इसके अलावा, पश्चिमी गोलार्ध में ऊर्जा, पुर्जे, रसद, दूरसंचार और रक्षा जैसे सामरिक क्षेत्र से एलए सरकारों (विशेष रूप से चीन और कुछ हद तक रूस) को बाहर रखने के लिए अमेरिका का लगातार दबाव चिंता का विषय बन गया है। वेनेज़ुएला के तेल क्षेत्र की तरह, अमेरिका के कूटनीतिक और रणनीतिक दबाव ने पहले भी लैटिन अमेरिकी सरकारों को दूसरे इलाकों के लोगों के साथ अपने जुड़ाव को फिर से जांचने, रोकने या फिर से तय करने के लिए विवश किया है। जैसे, पनामा में अमेरिकी दबाव ने चीन से जुड़े बंदरगाह रियायतों की समीक्षा और उन्हें रद्द करने में योगदान दिया[xlii], जबकि कोस्टा रिका में महत्वपूर्ण दूरसंचार अवसंरचना में चीन की भागीदारी को प्रतिबंधित करने के लिए नियामक और सुरक्षा ढांचे को फिर से तैयार किया गया[xliii]।
लेकिन, वर्तमान में इस बात के बहुत कम संकेत हैं कि बीजिंग या मॉस्को सीधे तौर पर तनाव बढ़ाने की मंशा रखते हैं। इसके बजाय, दोनों इंतज़ार करने और देखने का तरीका अपनाने के लिए तैयार दिखते हैं और वे वेनेज़ुएला के मामले को यूक्रेन, ताइवान या दूसरी जगहों पर इसी तरह की कार्रवाई के लिए ब्लूप्रिंट के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।
लैटिन अमेरिका की सामरिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी अभियान का प्रभाव
वेनेज़ुएला में अमेरिकी सैन्य अभियान ने पूरे लैटिन अमेरिका में गहरी दरारों को सामने ला दिया है। इलाके के लोगों की प्रतिक्रियाएं बहुत बंटी हुई हैं– क्यूबा, मेक्सिको, कोलंबिया और ब्राज़ील की वाम– झुकाव वाली सरकारों ने इस कदम की निंदा की है और इसे संप्रभुता का उल्लंघन और इलाके की स्थिरता के लिए खतरनाक मिसाल बताया है जबकि अर्जेंटीना, पेरू, पैराग्वे, चिली और इक्वाडोर की कई अनुदारपंथी सरकारों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है या इसे वेनेज़ुएला के तानाशाही और पारदेशीय आपराधिक नेटवर्क के लिए आवश्यक झटका बताया है।[xliv] ध्रुवीकरण की ये विशेषताएं वैचारिक मतभेद को दर्शाती हैं जो एलएसी (LAC) क्षेत्र में बाहरी दखल के लिए एकजुट प्रतिक्रिया देने को सीमित करता है।
यह अभियान एलएसी (LAC) की रणनीतिक स्वतंत्रता के लिए वर्तमान स्थान पर भी सवाल खड़े करता है। एक तरफ, वेनेज़ुएला में अमेरिकी अभियान यह संकेत देता है कि खुले तौर पर विचारधारा का टकराव, विशेष रूप से जब संवेदनशील क्षेत्र में अमेरिका के रणनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के साथ मज़बूत तालमेल के साथ हो, इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। हालांकि अमेरिका की दूसरी शक्तियों के साथ बातचीत नामुमकिन नहीं है। जो चीज़ कम हो रही है वह संबंधों को बदलने की काबिलियत नहीं है बल्कि खुले तौर पर विरोध करने वाली भू– राजनीतिक स्थिति के लिए स्थान है।
लैटिन अमेरिकी सरकारें अभी भी अतिरिक्त क्षेत्रीय कारकों के साथ जुड़ सकती हैं लेकिन ऐसे जुड़ाव को ध्यान से अंशांकित किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, वाम झुकाव वाले लूला के नेतृत्व में ब्राज़ील ने दिखाया है कि रणनीतिक स्वतंत्रता को अभी भी "सक्रिए गैर– संरेखण" के तहत अंशांकित संतुलन के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है, न कि प्रत्यक्ष विरोध कर। ब्राज़ील ने चीन के साथ मजबूत व्यापार संबंध बनाए रखे हैं लेकिन बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में औपचारिक रूप से शामिल होने से इनकार कर दिया है, जिससे अमेरिका के साथ सहयोग की गुंजाइश बनी हुई है और चीनी दूरसंचार कंपनियों को बाहर करने के अमेरिका के दबाव का सामना किया जा रहा है[xlv]। इस प्रकार की व्यावहारिक बचाव इस बात पर ज़ोर देती है कि जब बाहरी शक्तियों के साथ बातचीत को बिना उकसावे के सावधानी से प्रबंधित किया जाता है तो स्वतंत्रता बनी रहती है।
असल में, वेनेज़ुएला में अमेरिकी अभियान के कारण लैटिन अमेरिका के पास बहुत कम विकल्प बचे हैं। एक रास्ता यह है कि देश द्विपक्षीय संबंधों के माध्यम से अमेरिका के दबाव के हिसाब से समायोजन करे। दूसरे रास्ते में क्षेत्रीय स्तर पर अधिक राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा समन्वय शामिल है ताकि सामूहिक सौदेबाज़ी की शक्ति को बढ़ाया जा सके और स्वतंत्रता को बढ़ाया जा सके। हालाँकि, इस विकल्प के लिए वैचारिक मतभेदों, संस्थागत कमियों और संसाधनों की कमी को दूर करना होगा, जिसने ऐतिहासिक रूप से लैटिन अमेरिकी एकीकरण को कमज़ोर किया है। इसके साथ ही, सरकारें भारत, आसियान, अफ़्रीका जैसे कारकों के साथ साउथ– साउथ साझीदारी को भी प्रगाढ़ कर सकती है ताकि किसी एक शक्ति पर अधिक निर्भरता कम हो और उनके पास पैंतरेबाज़ी के अधिक अवसर हों।
निष्कर्ष
3 जनवरी 2026 को वेनेज़ुएला में अमेरिकी अभियान, पश्चिमी गोलार्ध के प्रति अमेरिका के दृष्टिकोण अहम मोड़ है। हालाँकि अमेरिका ने मादुरो की गिरफ्तारी को मुख्य रूप से अमेरिका की राष्ट्रीय सुर६ के लिए नार्को– टेररिज़्म के संकटों के नज़रिए से देखा है लेकिन वेनेज़ुएला भी एक ऐसा केंद्र बन गया है जहाँ अमेरिका की कई बड़ी रणनीतिक चिंताएं एक ही साथ आ गईं। इनमें देश का लगातार राजनीतिक विरोध, उसके बड़े तेल भंडाल का भू– राजनीतिक और आर्थिक महत्व, प्रतिबंध से बचने के केंद्र के रूप में उसकी भूमकि, और उसके आर्थिक, सुरक्षा एवं राजनीतिक संरचना में गोलार्ध के बाहर के दुश्मनों का बढ़ता प्रभाव शामिल था। इस तरह इस अभियान ने अमेरिका के दुश्मनों को यह संकेत दिया कि वह उन्हें किसी प्रतिबंधित देश के आवश्यक आर्थिक क्षेत्र में प्रभाव पाने या बनाए रखने से रोकने के लिए शक्ति का प्रयोग करने को तैयार है, जिससे पश्चिमी गोलार्ध में पहले स्वीकार्य सीमा रेखा को पार करने की इच्छा ज़ाहिर होती है।
वेनेज़ुएला के मुख्य साझीदारों (क्यूबा, ईरान, चीन और रूस) के लिए मादुरो सरकार ने पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका के प्रभाव को चुनौती देने और उनकी अर्थव्यवस्था को बनाए रखने के लिए आवश्यक जगह दी। हालांकि, मादुरो के बाद के दौर ने इस बात को लेकर गहरी अनिश्चितता पैदा कर दी है कि क्या अमेरिकी दबाव अंतरिम सरकार की राजनीतिक तालमेल बनाए रखने और लंबे समय से चली आ रही वाणिज्यिक और रणनीतिक प्रतिबद्धताओं की रक्षा करने की क्षमता को बाधित करेगा, जिससे उन्हें कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा क्षेत्रों में बढ़े हुए जोखिमों का सामना करना पड़ेगा।
ये चिंताएं पहले ही बढ़ गई हैं क्योंकि अमेरिका ने 13 फरवरी 2026 को वेनेज़ुएला के ऊर्जा क्षेत्र के लिए जनरल लाइसेंस जारी किए हैं। इससे वेनेज़ुएला के तेल उद्योग में उनके निवेश और प्रभाव के भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। इसके अलावा, उन्हें इस बात की चिंता है कि क्या भविष्य में दूसरे क्षेत्रों में भी ऐसा हो सकता है, जिन क्षेत्रों में उन्होंने भारी निवेश भी किया है।
वेनेज़ुएला में अमेरिकी अभियान का लैटिन अमेरिका की रणनीतिक स्वायत्तता पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इस बारे में यह हस्तक्षेप इस बात पर ज़ोर देता है कि लैटिन अमेरिका की रणनीतिक स्वतंत्रता इस बात से तेज़ी से तय हो रही है कि देश अपनी विदेश नीति के विकल्पों को किस तरह अपनाते हैं। मादुरो के राज में वेनेजुएला दिखाता है कि खुले तौर पर भू– राजनीतिक विरोध में अधिक जोखिम होता है जबकि लूला के ब्राज़ील में देखा गया सोच– समझकर बनाए गए संबंध और व्यावहारिक बचाव अभी भी कारगर रणनीति हैं। आखिर में, लैटिन अमेरिका की स्वतंत्रता का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि इस इलाके की सोच– विचार के मतभेदों को दूर करके क्षेत्रीय एकीकरण को सुदृढ़ करने की काबिलियत क्या है।
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*डॉ. गिरिशंकर एस.बी.,भारतीय विश्व मामलों की परिषद (आईसीडब्ल्यूए) में अनुसंधान सहयोगी हैं।
अस्वीकरण: व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण
[i] Michael Crowley, “How Venezuela Went From U.S. Ally to Trump Target,” New York Times, December 19, 2025, updated December 20, 2025, https://www.nytimes.com/2025/12/19/us/politics/venezuela-united-states-history.html
[ii] Igor Hernández and José La Rosa Reyes, Reforming Venezuela’s Oil and Gas Sector: 02 The Context in Venezuela (Chatham House, May 20, 2021), https://www.chathamhouse.org/2021/05/reforming-venezuelas-oil-and-gas-sector/02-context-venezuela
[iii] NBC News. “Exxon, Conoco Refuse to Sign Venezuela Deal.” June 26, 2007. https://www.nbcnews.com/id/wbna19431319.
[iv]Democracy Now! “Chavez Slams Bush Administration; Predicts End of U.S. Empire.” Accessed February 16, 2026. https://www.democracynow.org/2006/9/21/headlines/chavez_slams_bush_administration_predicts_end_of_us_empire .
[v] “Venezuela: The Rise and Fall of a Petrostate | Council on Foreign Relations.” November 30, 2018. https://www.cfr.org/backgrounders/venezuela-crisis.
[vi] The Policy Circle. “Socialism: A Case Study on Venezuela.” Accessed February 16, 2026. https://www.thepolicycircle.org/minibrief/socialism-a-case-study-on-venezuela/.
[vii] BBC News. “What Lies behind the Protests in Venezuela?” Latin America & Caribbean. February 25, 2014. https://www.bbc.com/news/world-latin-america-26335287.
[viii] United States District Court for the Southern District of New York. United States of America v. Nicolás Maduro Moros, Diosdado Cabello Rondón, Ramón Rodríguez Chacín, Cilia Adela Flores de Maduro, Nicolás Ernesto Maduro Guerra, and Héctor Rusthenford Guerrero Flores, Superseding Indictment, No. S4 11 Cr. 205 (AKH). Filed January 3, 2026. United States Department of Justice. Accessed January 19, 2026. https://www.justice.gov/opa/media/1422326/dl..
[ix] U.S. Department of the Treasury. “Treasury Sanctions Venezuelan Cartel Headed by Maduro.” December 23, 2025. https://home.treasury.gov/news/press-releases/sb0207.
[x] Wehmeyer, Joseph. “Trump’s Venezuelan Regime Change: Why Do People Keep Getting Him Wrong on Foreign Policy?” War on the Rocks, January 3, 2026. https://warontherocks.com/2026/01/trumps-venezuelan-regime-change-why-do-people-keep-getting-him-wrong-on-foreign-policy/.
[xi] Whitehouse.Gov. “FACT SHEET: Venezuela Executive Order.” March 9, 2015. https://obamawhitehouse.archives.gov/the-press-office/2015/03/09/fact-sheet-venezuela-executive-order.
[xii] US congress Report. Venezuela: Overview of U.S. Sanctions Policy. Accessed January 19, 2026. https://www.congress.gov/crs-product/IF10715
[xiii] Fernández, Sleither. United States Expands Deployment in Caribbean with USS Lake Erie and USS Newport News Nearing Venezuela - Guacamaya. August 26, 2025. https://guacamayave.com/en/united-states-expands-deployment-in-caribbean-with-uss-lake-erie-and-uss-newport-news-nearing-venezuela/.
[xiv] The White House. “Designating Cartels And Other Organizations As Foreign Terrorist Organizations And Specially Designated Global Terrorists.” January 21, 2025. https://www.whitehouse.gov/presidential-actions/2025/01/designating-cartels-and-other-organizations-as-foreign-terrorist-organizations-and-specially-designated-global-terrorists/.
[xv] The New York Times. “Trump Says U.S. Is in ‘Armed Conflict’ with Drug Cartels.” New York Times, October 2, 2025. https://www.nytimes.com/2025/10/02/us/politics/trump-drug-cartels-war.html.
[xvi] International Center for Transitional Justice, “Cuba Says 32 Cuban Fighters Killed in U.S. Raids on Venezuela,” ICTJ, January 5, 2026, https://www.ictj.org/latest-news/cuba-says-32-cuban-fighters-killed-us-raids-venezuela
[xvii] “Venezuela’s Chavez Defends Iran’s Right to Atomic Energy.” Venezuelanalysis, March 11, 2005. https://venezuelanalysis.com/news/994/.
[xviii] Wion. “How Venezuela and Houthis Became Key Recipients of Iran’s Arms Exports.” Accessed February 16, 2026. https://www.wionews.com/photos/how-venezuela-and-houthis-became-key-recipients-of-iran-s-arms-exports-1768650180787.
[xix] Lloyd’s List. “Iran and Venezuela Are the Shadow Fleet’s Top Recruiters.” November 28, 2025. https://www.lloydslist.com/LL1155699/Iran-and-Venezuela-are-the-shadow-fleet%E2%80%99s-top-recruiters.
[xx] Dw.Com. “Iran and Venezuela Sign 20-Year Cooperation Deal.” Accessed February 16, 2026. https://www.dw.com/en/sanctions-hit-iran-and-venezuela-sign-20-year-cooperation-agreement/a-62100737.
[xxi] “Rosneft Increases Its Stake in the National Oil Consortium to 80% of Shares.” Accessed February 16, 2026. https://www.rosneft.com/press/releases/item/173609/.
[xxii] ORF. “Rosneft’s Exit and Russia’s Continued Role in Venezuela.” Orfonline.Org. Accessed February 16, 2026. https://www.orfonline.org/expert-speak/rosneft-exit-russia-continued-role-venezuela-67834.
[xxiii] OilPrice.Com. “Russia Claims Ownership of Oil Assets It’s Developing in Venezuela.” Accessed February 16, 2026. https://oilprice.com/Latest-Energy-News/World-News/Russia-Claims-Ownership-of-Oil-Assets-Its-Developing-in-Venezuela.html.
[xxiv] Dmitry Antonov and Vladimir Soldatkin, “Putin and Venezuela’s Maduro Sign Strategic Partnership Agreement in Moscow,” Reuters, May 7, 2025, https://www.reuters.com/business/energy/putin-maduro-sign-strategic-partnership-agreement-2025-05-07/
[xxv] Mayela Armas, “Venezuela Approves 15‑Year Extension of Russia‑Linked Oil Joint Ventures,” Reuters, November 20, 2025, https://www.reuters.com/business/energy/venezuela-approves-15-year-extension-russia-linked-oil-joint-ventures-2025-11-20/.
[xxvi] TASS, “Russia, Venezuela Successfully Develop Military Cooperation — Defense Minister Shoigu,” TASS, February 12, 2026, https://tass.com/russia/777092.
[xxvii] CNA, “Trends in International Maritime Geography and Maritime Power Projection,” CNA Report IOP‑2019‑U‑020309, June 2019, https://www.cna.org/reports/2019/06/IOP-2019-U-020309-Final.pdf.
[xxviii] affairs, Zhao Yusha Global Times reporter covering international, politics, and society Zhao Yusha. “China, Venezuela Elevate Bilateral Ties during Maduro’s Visit - Global Times.” Accessed February 16, 2026. https://www.globaltimes.cn/page/202309/1298154.shtml.
[xxix] greg. “Venezuela and China Form Bilateral Development Fund.” Venezuelanalysis, November 8, 2007. https://venezuelanalysis.com/news/2812/.
[xxx] “How China’s Oil-Backed Lending in Venezuela Fell into Distress—and What Might Come Next.” Accessed February 16, 2026. https://www.aiddata.org/blog/how-chinas-oil-backed-lending-in-venezuela-fell-into-distress#:~:text=At%20first%2C%20the%20Joint%20Fund,of%20Venezuela’s%20debt%20to%20China.
[xxxi] Deccan Herald. “CNPC Suspends Venezuelan Oil Loading for US Sanctions.” Accessed February 16, 2026. https://www.deccanherald.com/world/cnpc-suspends-venezuelan-oil-loading-for-us-sanctions-755369.html.
[xxxii] “China-Venezuela Fact Sheet.” Accessed February 16, 2026. https://www.uscc.gov/research/china-venezuela-fact-sheet-short-primer-relationship.
[xxxiii] The New York Times, “After Venezuela, Trump Says Cuba Is ‘Ready to Fall,’” New York Times, January 5, 2026, https://www.nytimes.com/2026/01/05/world/americas/trump-venezuela-cuba.html
[xxxiv] See xiv
[xxxv] “-Hezbollah in Latin America: implications for U.S. homeland security.” Accessed January 19, 2026. https://www.govinfo.gov/content/pkg/CHRG-112hhrg72255/html/CHRG-112hhrg72255.htm.
[xxxvi] U.S. Department of the Treasury, “Venezuela Sanctions Program: General License 44 and Related Authorizations,” accessed February 16, 2026, PDF file, https://ofac.treasury.gov/media/935011/download?inline.
[xxxvii] U.S. Department of the Treasury, “Venezuela Sanctions Program: General Licenses, Authorizations, and Frequently Asked Questions,” accessed February 16, 2026, PDF file, https://ofac.treasury.gov/media/935016/download?inline.
[xxxviii] “- YouTube.” Accessed February 16, 2026. https://www.youtube.com/watch?v=iQp7JHp9U5A.
[xxxix] Ramani, Devyanshi Bihani &. Srinivasan. “How Venezuela’s Oil Collapse Is Plunging Cuba into Energy and Food Crisis.” Data. The Hindu, January 27, 2026. https://www.thehindu.com/data/how-venezuelas-oil-collapse-is-plunging-cuba-into-energy-and-food-crisis/article70547120.ece.
[xl] Dmitry Antonov and Anastasia Teterevleva (reporting), “Lavrov Says U.S. Restrictions on Russia’s Role in Venezuela Oil Business Are Discrimination,” Reuters, February 11, 2026, https://www.reuters.com/world/china/lavrov-says-us-restrictions-russias-role-venezuela-oil-business-are-2026-02-11/.
[xli] Tang, Didi, and BERNARD CONDON 5. min read. “Trump Has a China Problem in Venezuela: What to Do with Beijing’s Debt and Oil Stakes.” Yahoo Finance, January 9, 2026. https://finance.yahoo.com/news/trump-china-problem-venezuela-beijings-010046180.html.
[xlii] Press, Associated. “Panama Supreme Court Cancels Hong Kong Company’s Canal Contracts.” World News. The Guardian, January 30, 2026. https://www.theguardian.com/world/2026/jan/30/court-ends-hong-kong-china-panama-canal-contracts.
[xliii] ET. “Chinese Embassy Criticizes Costa Rica for 5G Company Restrictions.” ETTelecom.Com. Accessed February 16, 2026. https://telecom.economictimes.indiatimes.com/news/industry /chinese-embassy-criticizes-costa-rica-for-5g-company-restrictions/104459634.
[xliv] Ioris, Rafael R. “Latin America’s Mixed Reactions to Trump’s Venezuela Intervention.” New Lines Magazine, January 15, 2026. https://newlinesmag.com/argument/latin-americas-mixed-reactions-to-trumps-venezuela-intervention/.
[xlv] “China’s Influence Over Space, Ports, and the Telecommunication Sector in Latin America and the Caribbean Emerges as a Security Concern for the US - Indian Council of World Affairs (Government of India).” Accessed February 16, 2026. /show_content.php?lang=1&level=3&ls_id=13594&lid=8286.