सारांश: यह शोध–पत्र सेशेल्स गणराज्य के राष्ट्रपति की फरवरी 2026 में भारत की राजकीय यात्रा को, बदलती समकालीन वास्तविकताओं के अनुरूप द्विपक्षीय संबंधों की निरंतरता में एक महत्वपूर्ण पल के रूप में देखता है। भारत की महासागर (MAHASAGAR) परिकल्पना के अधीन यह तर्क दिया गया है कि यह यात्रा आपसी संबंधों के रणनीतिक विस्तार का प्रतीक है। इसके तहत सुदृढ़ समुद्री साझेदारी में संधारणीयता, जलवायु– लचीलापन और डिजिटल रूपांतरण को एकीकृत किया गया है, जिससे सहयोग के बहुतआयामी संरचना को और अधिक मज़बूती मिली है।
सेशेल्स गणराज्य के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी की 5 से 10 फरवरी 2026 तक भारत की पांच दिवसीय यात्रा महत्वपूर्ण रही क्योंकि इस वर्ष सेशेल्स अपनी स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ मना रहा है और यह वर्ष भारत– सेशेल्स के राजनयिक संबंधों का भी 50वां वर्ष है। सेशेल्स, जो 115- द्वीपसमूहों का देश है, पश्चिमी हिन्द महासागर में स्थित है और भारत से लगभग 3,600–3,800 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह एक रणनीतिक लघु द्वीप विकासशील राज्य (SIDS) है जो इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के साथ– साथ नीली अर्थव्यवस्था से जुड़े पहलों का नेतृत्व कर रहा है।
यह ऐतिहासिक दौरा द्विपक्षीय वार्ताओं में रणनीतिक महत्व रखता है जहाँ समुद्री सुरक्षा जैसी परंपरागत सुरक्षा चिंताओं के साथ– साथ भारत के महासागर (MAHASAGAR) विज़न के तहत स्थिरता और डिजिटलीकरण जैसी समकालीन संरचनात्मक एवं गैर–परंपरागत प्राथमिकताओं को भी शामिल किया गया है– जिससे इस साझेदारी का दायरा दीर्घकालिक सुदृढ़ता के लिए और भी विस्तृत हो गया है। अतः यह शोध पत्र व्यापक हिंद महासागर कूटनीति और अफ़्रीकी समुद्री क्षेत्र के भीतर उभरती वास्तविकताओं के संदर्भ में, भारत– सेशेल्स संबंधों की निरंतर विकास–यात्रा का आकलन करता है।
विकसित होते भारत– सेशेल्स द्विपक्षीय संबंधों में निरंतरता
भारत और सेशेल्स के संबंधों की जड़ें 1770 के दशक में फ्रांसीसी शासन के दौरान मिलती हैं जब भारतीय इस द्वीप के सबसे शुरुआती दर्ज निवासियों में से थे। ब्रिटिश काल के दौरान, सेशेल्स का प्रशासन कुछ समय तक बॉम्बे प्रेसीडेंसी से किया जाता था जिससे व्यापार और प्रवासन के संबंध मज़बूत हुए और देश के क्रेओल सामाजिक ताने–बाने में वर्तमान भारतीय प्रवासियों की नींव पड़ी। वर्ष 1976 में सेशेल्स की आज़ादी के बाद, भारत ने तत्काल उसके साथ राजनयिक संबंध स्थापित कर लिए, इस कदम का एक प्रतीकात्मक संकेत आज़ादी के जश्न में आईएनएस नीलगिरि की भागीदारी थी– जो कि दोनों देशों के संबंधों के समुद्री आयाम का एक आरंभिक संकेत था। आज भी यह उनकी समुद्री साझेदारी को परिभाषित करता है। वर्ष 1979 में, भारत ने विक्टोरिया में राजनयिक मिशन खोला, जिसमें दार–एस–सलाम स्थित उसके उच्चायुक्त को साथ ही सेशेल्स के लिए भी मान्यता दी गई। इसके बाद के वर्षों में, नियमित मंत्री– स्तरीय दौरों और निरंतर उच्च– स्तरीय वार्ताओं के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों और प्रगाढ़ किया गया।[i]
यह संबंध शीत युद्ध के दौर से चली आर रही रणनीतिक स्वायत्तता की साझा परंपरा के दायरे में विकसित हुआ। गुटनिरपेक्ष आंदोलन के सदस्य के रूप में दोनों देशों ने संप्रभुता, नीतिगत स्वतंत्रता और आपसी सहयोग पर ज़ोर दिया। समय के साथ, भारत की गुटनिरपेक्षता व्यापक रणनीतिक बहु–संरेखण सिद्धांत के रूप में विकसित हुई जिसने उसे अपनी स्वायत्तता को बनाए रखते हुए विभिन्न वैश्विक साझीदारों के साथ जुड़ने में समर्थ बनाया। सेशेल्स ने, छोटे द्वीप–राष्ट्र होने के बावजूद, वैसे ही संतुलन बनाने की रणनीति अपनाई है जिसके तहत वह भारत, पश्चिमी शक्तियों और चीन के साथ संबंध बनाए रखता है लेकिन किसी भी बाध्यकारी सैन्य गठबंधन में शामिल नहीं होता।[ii]
इस संदर्भ में, भारत की 2015 की क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास (सागर/SAGAR) पहल, जो इसी नज़रिए को दर्शाती है, को, सेशेल्स के हिंद महासागर नज़रिए में भी समर्थन मिला। आज, इस क्षेत्र में बड़ी शक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के माहौल में साझा विरासत समुद्री सुरक्षा, विकास साझेदारी और कूटनीतिक जुड़ाव के क्षेत्र में सहयोग का आधार बनी हुई है।
हालाँकि, 2015 से, यह साझेदारी उभरती हुई वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप धीरे–धीरे ढलती गई है, यह मुख्य रूप से समुद्री सुरक्षा–उन्मुख साझेदारी से अधिक बहुआयामी रणनीतिक जुड़ाव में बदल गई है जिसमें सतत विकास, समुद्री और महासागरीय शासन एवं आर्थिक सहयोग शामिल हैं। इस दिशा को 2023 में महासागर (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास हेतु पारस्परिक एवं समग्र उन्नति/MAHASAGAR– Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions), की रूपरेखा के साथ और मज़बूती मिली। यह सागर (SAGAR) के समुद्री रूपरेखा पर आधारित है।
हालांकि महासागर (MAHASAGAR) ने अपनी शुरुआत से ही हिंद महासागर के तटीय देशों के साथ भारत की लंबे समय से चली आ रही साझेदारियों को अपने दायरे में समेटा हुआ है लेकिन फरवरी 2026 में सेशेल्स के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान सेशेल्स के साथ इसके जुड़ाव की एक बार फिर पुष्टि हुई है, इसके साथ ही दोनों देशों के बीच सहयोग और समझौतों को अब विशेष रूप से महासागर (MAHASAGAR) की परिकल्पना के अनुरूप ही आगे बढ़ाया जाएगा।
महासागर विज़न के अंतर्गत बहुआयामी साझेदारी को सुदृढ़ करना
सेशेल्स के नए राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी का भारत का हाल में किया गया दौरा महासागर ( MAHASAGAR) के साझा नज़रिए द्वारा स्पष्ट किया गया है। यह नज़रिया उनके दीर्घकालिक समुद्री सुरक्षा संरचना में गैर–परंपरागत सुरक्षा (एनटीएस/NTS) संबंधी चिंताओं, विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन और प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल शासन को एकीकृत करता है।
जलवायु लचीलापन और नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल परिवर्तन, महासागर अवलोकन और समुद्री वैज्ञानिक अनुसंधान (हाइड्रोग्राफी समेत), स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग, खाद्य पदार्थों की खरीद, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं सांस्कृतिक आदान– प्रदान के क्षेत्रों में सात समझौता ज्ञापनों (MoUs) और समझौते किए गए। सामूहिक रूप से ये समझौते क्षेत्र– विशेष सहयोग से इतर अधिक एकीकृत और बहुआयामी साझेदारी की ओर बढ़ते विकास को दर्शाते हैं।[iii]
अपनी बढ़ती विकास साझेदारी के हिस्से के रूप में भारत ने 175 मिलियन डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। इसमें 125 मिलियन डॉलर की रुपये में दी जाने वाली लाइन ऑफ क्रेडिट ( LoC) और 50 मिलियन डॉलर की अनुदान सहायता राशि शामिल है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक आवास, बुनियादी ढांचा, मोबिलिटी, क्षमता निर्माण, समुद्री सुरक्षा और प्राथमिकता वाले अन्य क्षेत्रों में बहु– क्षेत्रीय परियोजनाओं को बढ़ावा देना है।[iv] विशेष बात यह है कि यह भारत की तीसरी रुपया–आधारित आधिकारिक विकास सहायता है, इससे पहले अक्टूबर 2024 में मॉरीशस को[v] और जुलाई 2025 में[vi] मालदीव को ऋण सुविधा दी गई थी।
यह कदम मात्र वित्तीय उदारता ही नहीं बल्कि उससे कहीं बढ़कर है, यह ग्लोबल साउथ में भारत के पड़ोसी देशों के साथ उसकी आर्थिक कूटनीति में आए सुनियोजित परिवर्तन का संकेत देता है।[vii] ऋण को भारतीय रुपये में निर्धारित कर, नई दिल्ली रुपये के क्रमिक अंतरराष्ट्रीयकरण को आगे बढ़ाती है और साथ ही अपने दक्षिण– दक्षिण सहयोग मॉडल में आर्थिक संप्रभुता को भी समाहित करती है।
साथ ही, इस व्यवस्था से लघु द्वीप विकासशील राज्य (एसआईडीएस) को ठोस लाभ मिलते हैं जिन्हें अक्सर अमेरिकी डॉलर के लिए कर्ज की वजह से विदेशी मुद्रा विनिमय दर में उतार–चढ़ाव से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, इस प्रकार, यह व्यवस्था भारत की विकास मदद को द्वीपीय अर्थव्यवस्थाओं की संरचनात्मक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाती है।
इसके अलावा, दोनों नेताओं ने बेहतर जुड़ाव के माध्यम से स्थिरता, आर्थिक विकास और सुरक्षा (एसईएसईएल/SESEL) हेतु व्यापक संयुक्त विज़न की घोषणा की जिसके द्वारा द्विपक्षीय स्तर पर महासागर (MAHASAGAR) विज़न को कार्यान्वित किया जाएगा। यह ढांचा दोनों देशों की राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं पर ज़ोर देता है, जिसका उद्देश्य जलवायु लचीलेपन और सतत विकास, आर्थिक विकास एवं सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करना है।[viii]
यह परंपरागत समुद्री सुरक्षा से हटकर एक व्यापक सुरक्षा ढांचे की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, इसमें समकालीन एनटीएस (NTS) आयाम भी शामिल हैं जो सीमाओँ से परे हैं– जैसे कि जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा, नीली अर्थव्यवस्था और आर्थिक लचीलापन।
इस विकसित होती साझेदारी में दो मुख्य स्तंभ उभरकर सामने आते हैं– जलवायु अनुकूलन और डिजिटल पारितंत्र का विकास। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के तहत नवीकरणीय ऊर्जा पहलों के माध्यम से भारत के सहयोग ने सेसेल्स में पहले ही सामुदायिक स्तर पर लाभ पहुँचाए हैं। इसी क्रम में, भारत ने ऊर्जा संरक्षण और हरित गतिशीलता के क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करने, साथ ही बिजली ग्रिड प्रबंधन एवं बुनियादी ढांचे के विकास और जलवायु जोखिमों को कम करने के लिए बहु–संकट पूर्व चेतावनी प्रणालियों को लागू करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
नई दिल्ली में मुख्यालय वाले आपदा– रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन में शामिल होने के सेशेल्स के फ़ैसले से द्विपक्षीय सहयोग के दारये में जलवायु–रोधी क्षमता को अधिक संस्थागत रूप मिलता है।[ix] डिजिटल क्षेत्र में, दोनों देश डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा विकसित करने में सहयोग करने पर सहमत हुए हैं जिसमें डिजिटल शासन मंच और डिजिटल भुगतान संरचना शामिल हैं।[x] इस पहल का उद्देश्य सेशेल्स में वित्तीय समावेशन, सेवा वितरण और डिजिटल शासन को बेहतर बनाना है, साथ ही तकनीकी सहयोग को आर्थिक विकास के लक्ष्यों से जोड़ना है।
इस प्रकार, सतत विकास और डिजिटल परिवर्तन केवल अलग–थलग सुधारों के रूप में नहीं बल्कि शासन सुधार और आर्थिक आधुनिकीकरण के समकालीन संबल के रूप में उभरते हैं। फिर भी निरंतरता स्पष्ट बनी हुई हैः समुद्री अपराध, अवैध रूप से मछली पकड़ना और सीमा–पार के संकट अभी भी प्रमुखता से हैं। अतः रक्षा और समुद्री सहयोग इसके मूलभूत स्तंभ बने हुए हैं।
भारत ने सेशेल्स को अनुकूलित सैन्य प्रशिक्षण, नौसेना और हवाई साज़ो–सामान की आपूर्ति, परिवहन मंचों और सेशेल्स रक्षा बलों की क्षमता–निर्माण के ज़रिए काफी समय से चला आ रहा अपना समर्थन जारी रखा है। 10 फरवरी 2026 को, दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों ने रक्षा सहयोग को और प्रगाढ़ करने के तरीकों की समीक्षा करते हुए हिंद महासागर में शांति, स्थिरता और सुरक्षा के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने 2001 से आयोजिक की जा रही द्विवार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास LAMITYE के आगामी 12वें संस्करण का भी स्वागत किया, जो परिचालन संबंध में संस्थागत निरंतरता को दर्शाता है।[xi]
भविष्य में सहयोग के क्षेत्रों, जैसे कि हाइड्रोग्राफी, जहाज़ों और विमानों की नियमित यात्राएं, रक्षा आदान– प्रदान और समुद्री सुरक्षा समन्वय को बढ़ाने पर चर्चा की गई, जिसमें दीर्घकालिक क्षमता आधुनिकीकरण पर विशेष ज़ोर दिया गया। विशेष रूप से, भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) और सेशेल्स मीटीअरलाजिकल अथॉरिटी के बीच समझौता कर हाइड्रोग्राफिक सहयोग को बेहतर बनाया गया है।
यह संयुक्त सर्वेक्षणों, निगरानी, सूचना साझाकरण और तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से समुद्री क्षेत्र की जागरुकता को सुदृढ़ बनाता है। वर्ष 2015 से चली आ रही संस्थागत सहयोग की नींव पर समर्पित सेशेल्स हाइड्रोग्राफिक इकाई स्थापित करने की योजना, सुरक्षा को सतत महासागरीय शासन को प्रोत्साहित करेगा।[xii]
कुल मिलाकर, यह दौरा न तो परंपरागत सुरक्षा सहयोग से कोई भटकाव को दर्शाता है और न ही यह केवल अतीत की परिपाटी का ही विस्तार है। बल्कि, यह एक रणनीतिक परत–दर–परत व्यवस्था को दर्शाता है, जिसमें समुद्री सुरक्षा, जलवायु अनुकूलन क्षमता, डिजिटल शासन और आर्थिक कूटनीति को व्यापक सुरक्षा संरचना में समाहित किया गया है। ये सभी मिलकर बहुआयामी और सह–विकासात्मक साझेदारी का निर्माण करते हैं। सेशेल्स जैसे द्वीपीय राष्ट्र के लिए जो जलवायु संबंधी झटकों और आर्थिक अस्थिरता के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, इस प्रकार का एकीकृत ढांचा न केवल सुरक्षा की गारंटी देता है, बल्कि तकनीकी और विकासात्मक लचीलापन भी प्रदान करता है।
महासागर विज़न के अंतर्गत, बेहतर संपर्कों के माध्यम से स्थिरता, आर्थिक विकास एवं सुरक्षा का संयुक्त विज़न (एसईएसईएल)
भारत– सेशेल्स की बहुआयामी एवं सह– विकासपरक साझेदारी के संबल के रूप में समुद्री सुरक्षा, जलवायु सुदृढ़ता और डिजिटल एवं विकास कूटनीति का रणनीतिक संयोजन।
पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र (WIOR) में सेशेल्स का वैश्विक रणनीतिक महत्व
सेशेल्स का महत्व एक ऐसे हिंद महासागर में जहाँ प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है, उसकी भौगोलिक स्थिति, समुद्री शासन में नेतृत्व और रणनीतिक कूटनीति के मेल से पैदा होता है। यह छोटा सा द्वीपीय देश पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र (WIOR) में असमान रणनीतिक महत्व का स्थान रखता है। संचार की प्रमुख समुद्री सीमाओं के निकट स्थित यह द्वीपसमूह उन समुद्री गलियारों के साथ लगा है जो पूर्वी अफ़्रीका, पश्चिम एशिया, दक्षिण एशिया और व्यापक हिंद–प्रशांत क्षेत्र को आपस में जोड़ते हैं।
ये रास्ते वैश्विक व्यापार और ऊर्जा प्रवाह की बड़ी मात्रा को सुगम बनाते हैं जिससे आस–पास के जलक्षेत्रों में समुद्री स्थिरता भू–आर्थिक सुरक्षा के लिए बहुत महत्व रखती है। इसके अलावा, इसका 1.3 मिलियन वर्ग किलोमीटर से अधिक का विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) इसे क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने की इच्छा रखने वाले किसी भी देश के लिए अनिवार्य भागीदार बनाता है।[xiii] परिणामस्वरूप, समुद्री क्षेत्र की जागरुकता, रसद समन्वय और तटीय निगरानी जैसे क्षेत्रों में सेशेल्स के साथ की गई साझेदारियाँ शिपिंग मार्गों को सुरक्षित रखने, समुद्री डकैटी और सीमा– पार समुद्री अपराधों से निपटने और WIOR में नियम आधारित समुद्री व्यवस्था को बनाए रखने में योगदान देती है।[xiv]
सेशेल्स का भू– रणनीतिक महत्व कोई नई बात नहीं है। शीत युद्ध के दौरान, इसकी भौगोलिक स्थिति ने उन प्रतिस्पर्धी शक्तियों का ध्यान अपनी ओर खींचा जो हिंद महासागर क्षेत्र में अपना प्रभाव जमाना चाहती थीं। आज के दौर में जब बड़ी शक्तियों के बीच आपसी होड़ फिर से तेज़ हो गई है, सेशेल्स की प्रासंगिकता पहले से अधिक बढ़ गई है। हालाँकि, कई रणनीतिक रूप से स्थित द्वीपीय राष्ट्रों के उलट सेशेल्स ने अपने छोटे आकार के बावजूद, उल्लेखनीय कूटनीतिक प्रभाव दिखाया है।[xv] केवल प्रतिस्पर्धा का निष्क्रिय स्थल होने की बजाय, इसने अपनी समुद्री भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाकर क्षेत्रीय सुरक्षा शासन और महासागरीय स्थिरता से संबंधित विमर्श को आकार दिया है। इसकी यह सक्रिए भूमिका बहुपक्षीय समुद्री पहलों में इसकी नेतृत्वकारी भूमिकाओं में नज़र आती है।
सेशेल्स 2009 में अवैध समुद्री गतिविधियों पर संपर्क समूह (जिसे पहले सोमालिया के तट पर समुद्री डकैती पर संपर्क समूह कहा जाता था) की अध्यक्षता करने वाला पहला क्षेत्रीय देश बना और तब से इसने कई बार इसकी अध्यक्षता संभाली है, फरवरी 2025 भी इसमें शामिल है। [xvi] इसी महीने, सेशेल्स मत्स्य पालन पारदर्शिता पहल मानक का पूरी तरह से पालन करने वाला पहला देश बन गया है,[xvii] जिससे पारदर्शी और सतत महासागर शासन क्षेत्र में उसकी साख पहले से मज़बूत हुई है।
इस प्रकार के विशिष्ट मुद्दों पर आधारित नेतृत्व के माध्यम से सेशेल्स ने अपनी भौगोलिक आकार की तुलना में कहीं अधिक अंतरराष्ट्रीय सद्भावना और तकनीकी विश्वसनीयता प्राप्त की है। इसी नींव पर आगे बढ़ते हुए सेशेल्स वैश्विक ‘नीली अर्थव्यवस्था’ संरचना के अग्रणी देश के रूप में उभरा है। वर्ष 2015 में, इसने महासागर संरक्षण हेतु डेट–फॉर–नेचर स्वैप का ऐतिहासिक समझौता किया जिसके तहत पेरिस क्लब के साथ सहमति से इसने अपने 21.6 मिलियन डॉलर के ऋण का पुनर्गठन किया। इसके बाद वर्ष 2018 में, इसने विश्व का पहला संप्रभु ब्लू बॉन्ड लॉन्च किया और इसके माध्यम से सतत समुद्री संसाधन प्रबंधन के समर्थन हेतु 15 मिलियन डॉलर की राशि जुटाई।[xviii]
सेशेल्स 2011 से हिंद महासागर तटीय क्षेत्रीय सहयोग संघ (IORA) का सक्रिए सदस्य भी रहा है जो व्यापार, नीली अर्थव्यवस्था, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में अपनी भागीदारी निभा रहा है।[xix] इन पहलों ने विक्टोरिया को न केवल समुद्री शासन संरचना के लाभार्थी के रूप में बल्कि महासागरों की स्थिरता के क्षेत्र में मानदंड–निर्धारक संस्था के रूप में स्थापित किया है।
व्यापक अफ़्रीकी समुद्री क्षेत्र में सेशेल्स
अफ़्रीकी नज़रिए से सेशेल्स भले ही WIOR के दस अफ़्रीकी द्वीपीय देशों में सबसे छोटा हो[xx] फिर भी इसका प्रभाव आकार की तुलना में कहीं अधिक है। उच्च–आय वाले देश और वैश्विक मानव विकास संकेतकों पर अफ़्रीका के सर्वोच्च रैंकिंग वाले देश के रूप में यह अक्सर अपनी शासन क्षमता का प्रयोग महाद्वीपीय मंचों पर मानक–निर्धारक और कूटनीतिक नेतृत्व प्रदान करने के लिए करता है।[xxi]
11 से 12 फरवरी 2026 तक अफ़्रीकी संघ (AU) की कार्यकारी परिषद के 48वें साधारण सत्र के दौरान, सेशेल्स ने लीबिया, मेडागास्कर, मॉरीशस और कोमोरोस के साथ द्विपक्षीय बैठकें कर और अफ़्रीकी संघ की संरचना में छोटे द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) की सामूहिक आवाज़ को बुलंद कर अपनी भूमिका को और ठोस बनाया। इन वार्ताओं ने हिंद महासागर आयोग के तहत साझा क्षेत्रीय प्राथमिकताओं– विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा, सतत विकास और अफ़्रीकी संघ एवं अफ़्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र में संस्थागत समन्वय पर ज़ोर दिया।[xxii]
इसके अलावा, सेशेल्स की महासागर शासन और सतत समुद्री विकास हेतु लगातार वकालत, अफ़्रीकी संघ की अफ़्रीका एकीकृत समुद्री रणनीति (AIMS) 2050 के साथ पूरी तरह मेल खाती है। इस रणनीति में अफ़्रीका के महासागरों और समुद्रों को एक सुरक्षित और सतत नीली अर्थव्यवस्था के माध्यम से पैसे बनाने के रास्ते के रूप में देखा गया है, विशेष रूप से इसलिए भी क्योंकि 53 अफ़्रीकी देशों में से 38 देश या तो द्वीप हैं या फिर तटीय देश।[xxiii] विशेष रूप से विक्टोरिया ने महाद्वीपीय विमर्श में “नीली अर्थव्यवस्था” को महत्व दिलाने में एजेंडा– निर्धारक भूमिका निभाई, जिससे AIMS 2050 के मुख्य स्तंभ के रूप में इसकी पहचान स्थापित करने में योगदान मिला।[xxiv]
इस संबंध में समुद्री संरक्षण, आर्थिक लचीलेपन और समुद्री सुरक्षा को आपस में जोड़ने का सेशेल्स का राष्ट्रीय अनुभव व्यापर अफ़्रीकी समुद्री रणनीति को दिशा देने और उसे सुदृढ़ बनाने में सहायक रहा है। ऐसा करके, यह द्वीपीय देश दूसरे अफ़्रीकी देशों– विशेष रूप से छोटे द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) के लिए शासन के आदर्श मॉडल के रूप में उभर रहा है, जो सुरक्षा, स्थिरता और आर्थिक लचीलेपन के संगम पर आगे बढ़ रहे हैं।
भारत के लिए, सेशेल्स का रणनीतिक महत्व भूगोल और शासन के मेल में निहित है। WIOR में इसकी केंद्रीय भूमिका, महासागरों की स्थिरता और संस्थागत जुड़ाव में इसके सिद्ध नेतृत्व के साथ मिलकर इसे भारत के महासागर (MAHASAGAR) विज़न– ऐसा विज़न जो विभिन्न क्षेत्रों में समग्र समुद्री सुरक्षा को सतत विकास के साथ एकीकृत करने का प्रयास करता है, को आगे बढ़ाने में स्वाभाविक साझेदार बनाती है।[xxv]
नवंबर 2025[xxvi] में कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन के छठे पूर्ण सदस्य के रूप में सेशेल्स का शामिल होना, उसे एक ऐसे सहकारी क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में और भी मज़बूती से शामिल करता है जिसमें भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति हर्मिनी की हाल ही में भारत की राजकीय यात्रा के दौरान इस संस्थागत तालमेल को और मज़बूती मिली, जहाँ दोनों पक्षों ने समुद्री स्थिरता, जलवायु अनुकूलन और सतत विकास के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धताओं को दोहराया। यह दिशा सुरक्षा सहयोग से पीछे हटने का संकेत नहीं है बल्कि यह सुरक्षा सहयोग के व्यापक मानवीय सुरक्षा और स्थिरता संरचना में विस्तार को दर्शाती है। भारत– सेशेल्स संबंध जो व्यापक अफ़्रीकी समुद्री और विकास रणनीति के अंतर्गत आते हैं, भारत के अफ़्रीका के साथ संबंधों के लिए दस मार्गदर्शक कंपाला सिद्धांतों (2018) के साथ भी मेल खाते हैं।
इस लिहाज़ से, वे परंपरागत द्विपक्षीयता से आगे निकल जाते हैं और अफ़्रीका एवं व्यापक ग्लोबल साउथ में सुरक्षा सहयोग के विकास–केंद्रित मॉडल का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसमें रणनीतिक स्वायतत्ता, नीली अर्थव्यवस्था का प्रबंधन, डिजिटल और जलवायु संबंधी साझेदारियां और स्थानीय मुद्रा में वित्तपोषण जैसे नए वित्तीय व्यवस्थाओं का समावेश होता है। इस प्रकार, यह साझेदारी दर्शाती है कि अफ़्रीका में भारत की समुद्री रणनीति किस प्रकार संस्थागत साझेदारी की ओर विकसित हो रही है, जो महासागर (MAHASAGAR) के साझा दक्षिण– दक्षिण नज़रिए के अंतर्गत सुरक्षा, विकास और वित्तीय संप्रभुता को एक साथ लाती है।
निष्कर्ष
सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी की भारत की पांच दिवसीय राजकीय यात्रा, भारत के महासागर (MAHASAGAR) विज़न पर आधारित बहुआयामी साझेदारी के सुदृढ़ीकरण का प्रतीक था। इस यात्रा ने बताया कि भारत– सेशेल्स संबंध किस प्रकार रणनीतिक स्तरों के माध्यम से विकसित हो रहे हैं जिसमें पहले से ही मज़बूत समुद्री सुरक्षा ढांचे में जलवायु लचीलापन, नीली अर्थव्यवस्था का प्रबंधन और डिजिटल परिवर्तन जैसी गैर–परंपरागत प्राथमिकताओं को शामिल किया जा रहा है।
इसके साथ ही, हिंद महासागर पूरे अफ़्रीका और व्यापक ग्लोबल साउथ में नीली अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में सेशेल्स की अग्रणी भूमिका, समुद्री सुरक्षा, स्थिरता और आर्थिक लचीलेपन के मेल पर आधारित शासन का शानदार मॉडल प्रस्तुत करती है। भारत के लिए सेशेल्स के साथ साझेदारी यह बताती है कि कैसे विकास– केंद्रित सुरक्षा सहयोग, रणनीतिक स्वायत्तता को संस्थागत क्षमता, वित्तीय नवाचार और महासागर आधारित विकास के साथ जोड़कर अफ़्रीकी देशों– विशेष रूप से SIDS को सशक्त बना सकता है।
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*नंदिनी खंडेलवाल, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में अनुसंधान विश्लेषक हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण:
[i] “High Commission of India.” Mea.gov.in, https://www.mea.gov.in/Portal/CountryNews/11879_Bilateral_Briefs_for_Website.pdf.
[ii] Sen, Gaurav. “Looking inside Seychelles Beneficial Multi Alignment Strategy amidst India China Competition.” Journal of Strategic Security 18, no. 3 (2025): 154–68. https://doi.org/10.2307/48838021.
[iii] Asianet Newsable. “India-Seychelles Relations: Joint Vision Adopted, Key Pacts Signed,” February 9, 2026. https://newsable.asianetnews.com/world/indiaseychelles-relations-joint-vision-adopted-key-pacts-signed-articleshow-04axm8l?utm_source=chatgpt.com.
[iv] Mea.gov.in. “India – Seychelles Joint Vision for Sustainability, Economic Growth and Security through Enhanced Linkages (SESEL),” February 9, 2026. https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl%2F40719%2FIndia++Seychelles+Joint+Vision+for+Sustainability+Economic+Growth+and+Security+through+Enhanced+Linkages+SESEL.
[v] Mea.gov.in. “India Extends Its First-Ever Rupee Denominated Line of Credit under IDEAS,” October 17, 2024. https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/38432/India_extends_its_firstever_Rupee_denominated_Line_of_Credit_under_IDEAS.
[vi] Mea.gov.in. “Transcript of Special Briefing by MEA on State Visit of President of Seychelles to India,” February 10, 2026. https://www.mea.gov.in/media-briefings.htm?dtl/40725/Transcript+of+Special+Briefing+by+MEA+on+State+visit+of+President+of+Seychelles+to+India+February+09+2026.
[vii] The Times of India. “Regional Trade Push: RBI Allows Rupee Credit to Bhutan, Nepal and Sri Lanka; Extends Forex Repatriation Window.” The Times Of India, October 13, 2025. https://timesofindia.indiatimes.com/business/india-business/regional-trade-push-rbi-allows-rupee-credit-to-bhutan-nepal-and-sri-lanka-extends-forex-repatriation-window/articleshow/124532224.cms
[ix] Op.cit.4.
[x] Op.cit.6
[xi] Pib.gov.in. “Defence Secretary Calls on Seychelles’ Minister for Foreign Affairs & Diaspora and Chief of Defence Forces in New Delhi,” February 10, 2026. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2225915®=1&lang=1.
[xii] Bhuyan, Aroonim. “Ocean Data, Shared Security: Why the India–Seychelles MoU on Hydrography Matters.” ETV Bharat News, February 9, 2026. https://www.etvbharat.com/en/international/why-the-india-seychelles-mou-on-hydrography-matters-enn26020906490.
[xiii] Op.cit.2.
[xiv] McDougall, Derek. “Seychelles: Assessing Its International Agency.” Commonwealth & Comparative Politics 63, no. 2 (April 3, 2025): 148–69. https://doi.org/10.1080/14662043.2025.2518640.
[xv] Bueger, Christian, and Anders Wivel. “How Do Small Island States Maximize Influence? Creole Diplomacy and the Smart State Foreign Policy of the Seychelles.” Journal of the Indian Ocean Region 14, no. 2 (May 4, 2018): 170–88. https://doi.org/10.1080/19480881.2018.1471122.
[xvi] Morel, Aline. “Seychelles Assumes Chairpersonship of the Contact Group on Illicit Maritime Activities (CGIMA) - Ministry of Foreign Affairs and the Diaspora.” Ministry of Foreign Affairs and the Diaspora - Republic of Seychelles, February 18, 2025. https://mfa.gov.sc/news/seychelles-assumes-chairpersonship-of-the-contact-group-on-illicit-maritime-activities-cgima/.
[xvii] Kessler, Rebecca. “Seychelles Becomes First Country to Comply with Fisheries Transparency Standard.” Mongabay Environmental News, April 14, 2025. https://news.mongabay.com/2025/04/seychelles-becomes-first-country-to-comply-with-fisheries-transparency-standard/.
[xviii] Senaratne, Malshini . “Charting Seychelles’ Blue Economy.” Indian Council of World Affairs, February 2023. /pdfs/IndiaIslandStatesIndianOcean.pdf.
[xix] mea.gov.in. “Indian Ocean Rim Association and India’s Role,” https://www.mea.gov.in/Portal/ForeignRelation/IORA_new.pdf.
[xx] Preventionweb.net. “Western Indian Ocean Marine Science Association,” July 27, 2020. https://www.preventionweb.net/organization/western-indian-ocean-marine-science-association.
[xxi] “Seychelles Reaffirms Commitment to Continental Cooperation - Ministry of Foreign Affairs and the Diaspora.” Ministry of Foreign Affairs and the Diaspora - Republic of Seychelles, February 12, 2026. https://mfa.gov.sc/news/seychelles-reaffirms-commitment-to-continental-cooperation/.
[xxii] Africa.com. “Seychelles Bolsters Regional and Bilateral Ties at the African Union Executive Council,” February 14, 2026. https://africa.com/seychelles-bolsters-regional-and-bilateral-ties-at-the-african-union-executive-council/.
[xxiii] Singh, Abhay Kumar. “2050 Africa Integrated Maritime Strategy and India’s SAGAR Vision: Charting Convergences and Cooperative Synergy.” In India and Africa: Deepening the Security Engagement, edited by Ruchita Beri and Rajeesh Kumar, 48–62. Pentagon Press, 2024. https://www.researchgate.net/publication/382113702_4_2050_Africa_Integrated_Maritime_Strategy_and_India.
[xxiv] Bonnelame, Betymie. “Seychelles Recognised at Blue Economy Forum in Kenya with Award for Maritime Sector.” Seychelles News Agency, November 29, 2018. https://www.seychellesnewsagency.com/articles/10127/Seychelles+recognised+at+Blue+Economy+forum+in+Kenya+with+award+for+maritime+sector.
[xxv] Chaudhury, Dipanjan. “Seychelles Backs Open Indo-Pacific, Aligns with India’s Mahasagar Vision.” The Economic Times, February 11, 2026. https://economictimes.indiatimes.com/news/india/seychelles-backs-open-indo-pacific-aligns-with-indias-mahasagar-vision/articleshow/128210974.cms?from=mdr.
[xxvi] mea.gov.in. “7th NSA-Level Meeting of the Colombo Security Conclave (November 20, 2025),” November 20, 2025. https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/40314/7th_NSALevel_Meeting_of_the_Colombo_Security_Conclave_November_20_2025.