प्रस्तावना
मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) का अर्थ है प्राकृतिक आपदाओं या मानवीय आपात स्थितियों के बाद मानव पीड़ा को कम करने और आवश्यक सेवाओं को फिर से शुरू करने के लिए सामग्री, लॉजिस्टिक, चिकित्सा और तकनीकी सहायता प्रदान करना। विगत कुछ वर्षों में एचएडीआर अंतरराष्ट्रीय सहयोग और विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण साधन बन गया है, जिसके माध्यम से देश कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करते हैं और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देते हैं।[i] इस बदलते संदर्भ में भारत धीरे-धीरे एक भरोसेमंद सबसे पहले सहायता पहुंचाने वाले देश के रूप में उभरा है, जो दुनिया भर में आपदाओं से प्रभावित देशों को तेजी से मानवीय सहायता देने में सक्षम है। वैश्विक परिदृश्य में भारत एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है और तेजी से जुड़ती दुनिया की बढ़ती जरूरतों का जवाब देने हेतु अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है।[ii] यह दृष्टिकोण 1991 के बाद भारत द्वारा अपनाई गई नव-उदारवादी नीति के अनुरूप भी है, जिसमें विदेश नीति के माध्यम से मानवीय सहयोग को राष्ट्रीय हितों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के साथ जोड़ने का प्रयास किया जाता है।[iii] भारत के मूल सिद्धांतों, क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता, व्यापक विकास संबंधी उद्देश्यों तथा उसकी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एचएडीआर सहायता प्रदान करने में भारत एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की अच्छी स्थिति में है।[iv]
मानव कल्याण को बढ़ावा देने में भारत की बढ़ती भूमिका उसकी दार्शनिक और सभ्यतागत सिद्धांत ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ में गहराई से निहित है, जो एक प्राचीन संस्कृत विचार है जिसका अर्थ है “दुनिया एक परिवार है”।[v] यह सिद्धांत सामूहिक कल्याण, मानवीय एकजुटता और मानवता के प्रति साझा जिम्मेदारी पर जोर देता है। इसके अलावा, भारतीय राजनीतिक विचार की ऐतिहासिक व्याख्याएँ, विशेष रूप से ‘धर्म’ की अवधारणा, जिसका अर्थ नैतिक कर्तव्य है, एक ऐसी मानक रूपरेखा को मजबूत करती हैं जिसमें भारत की मानवीय सहायता को केवल विदेश नीति के लेन-देन वाले साधन के रूप में नहीं बल्कि एक व्यापक नैतिक जिम्मेदारी के हिस्से के रूप में देखा जाता है।[vi]
वैचारिक और दार्शनिक आधारों के अनुरूप भारत ने दुनिया भर के देशों को एचएडीआर सहायता प्रदान करने के लिए एक संस्थागत ढांचा विकसित किया है। यह रूपरेखा अंतरराष्ट्रीय एचएडीआर पर दिशानिर्देश के रूप में उपलब्ध है। ये दिशानिर्देश 2016 में आयोजित एशियन मिनिस्टेरियल कॉन्फ्रेंस ऑन डिजास्टर रिस्क रिडक्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत ‘दस सूत्रीय एजेंडा’ से लिए गए हैं।[vii] इन दिशानिर्देशों को अधिक मजबूत और प्रभावी बनाने के लिए यूरोपीय संघ, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा एचएडीआर ढांचों का व्यापक अध्ययन किया गया।[viii] इसके अलावा, ये दिशानिर्देश यूनाइटेड नेशन्स ऑफिस फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (यूएनडीआरआर) के जेंडर एक्शन प्लान का भी पालन करते हैं, जो आपदा जोखिम में कमी और मानवीय सहायता में लैंगिक रूप से संवेदनशील, समावेशी और समान दृष्टिकोण पर जोर देता है।[ix] यह शोध पत्र सात प्रमुख कारणों और दस मार्गदर्शक सिद्धांतों को बताता है, जो मिलकर एचएडीआर में भारत की सक्रिय भागीदारी के महत्व को स्पष्ट करते हैं।[x]
भारत के एचएडीआर के प्रमुख मार्गदर्शक सिद्धांत
स्रोत: लेखक द्वारा तैयार किया गया
भारत के एचएडीआर के पीछे का तर्क
स्रोत: लेखक द्वारा तैयार किया गया
इसके अलावा, यह शोधपत्र एचएडीआर संचालन में शामिल विभिन्न हितधारकों की संचालन रूपरेखा और उनकी भूमिकाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी भी प्रदान करता है।[xi] इस रूपरेखा के अंतर्गत भारत आपदा सहायता की पाँच श्रेणियाँ प्रदान करता है, जिनमें उपकरण, प्रशिक्षित कर्मी, वित्तीय सहायता, चिकित्सा और लॉजिस्टिक सामग्री, तथा परिवहन सहायता शामिल हैं।[xii]
भारत के एचएडीआर की संचालन रूपरेखा
स्रोत: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण
ऐसी सहायता को प्रभावी रूप से प्रदान करने के लिए भारत सरकार ने 2005 के आपदा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) को प्रमुख एजेंसी के रूप में नियुक्त किया है, जो बड़े आपदाओं से प्रभावित देशों को सहायता प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है।[xiii] इस जिम्मेदारी को निभाने हेतु एनडीएमए कई मंत्रालयों और एजेंसियों के साथ निकट समन्वय करता है, जिनमें विदेश मंत्रालय (एमईए), गृह मंत्रालय (एमएचए), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), रक्षा मंत्रालय (एमओडी) के अंतर्गत मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ (एचक्यू आईडीएस), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएच एंड एफडब्ल्यू), तथा अन्य संबंधित एजेंसियाँ और संस्थाएँ शामिल हैं।[xiv] इस बहु-एजेंसी समन्वय व्यवस्था के ज़रिए भारत अंतरराष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया अभियानों के दौरान संसाधनों को जुटाने, राहत टीमों को तैनात करने और मानवीय सहायता को प्रभावी ढंग से पहुँचाने में सक्षम होता है।
एचएडीआर संचालन में शामिल विभिन्न हितधारकों की भूमिकाएँ और जिम्मेदारियाँ
स्रोत: लेखक द्वारा तैयार किया गया
दिशानिर्देशों में अलग होने की प्रक्रिया से जुड़ी कार्यविधियों का भी उल्लेख किया गया है, ताकि मेजबान देश की संप्रभुता और स्वायत्तता का पूरा सम्मान करते हुए मानवीय अभियानों का समापन सुचारु और व्यवस्थित रूप से किया जा सके।[xv] इन प्रयासों का प्रबंधन और निगरानी विदेश मंत्रालय के डेवलपमेंट पार्टनरशिप एडमिनिस्ट्रेशन (डीपीए) प्रभाग द्वारा की जाती है, जो भारत के विकास सहयोग और मानवीय सहायता पहलों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।[xvi] एचएडीआर अभियानों के वित्तीय पहलुओं के प्रबंधन के लिए भारत ने वार्षिक केंद्रीय बजट में “विदेशी सरकारों को अनुदान एवं ऋण” भाग के अंतर्गत ‘आपदा राहत के लिए सहायता’ शीर्षक से एक अलग मद बनाई है।[xvii] सामूहिक रूप से ये दार्शनिक सिद्धांत, संस्थागत व्यवस्थाएँ और वित्तीय तंत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एचएडीआर प्रदान करने के लिए एक संगठित और समन्वित रूपरेखा विकसित करने के प्रति भारत की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
इन सभी एजेंसियों और मार्गदर्शक रूपरेखाओं के साथ भारत दुनिया भर में विभिन्न एचएडीआर अभियानों का संचालन कर रहा है। हाल के कुछ आँकड़ों को देखें तो पिछले पाँच वर्षों में भारत ने 150 से अधिक देशों को सहायता प्रदान की है।[xviii] इसने दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों के देशों को सहायता दी है, चाहे वह लैटिन अमेरिका हो, पश्चिम एशिया, दक्षिण एशिया, अफ्रीका या यूरोप।[xix] वर्ष 2000 से 2024 के बीच भारत ने दुनिया के विभिन्न देशों में लगभग 30 अलग-अलग एचएडीआर अभियान चलाए हैं।[xx] दुनिया भर में भारत की मानवीय भागीदारी का स्वरूप मुख्य रूप से प्रभावित लोगों की जरूरतों से निर्देशित होता है, न कि संकीर्ण राजनीतिक विचारों से, जो लोगों को केंद्र में रखने वाले व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है। इस दृष्टिकोण का एक प्रमुख उदाहरण 2023 में सूडान के संघर्ष के दौरान देखा गया, जब सैन्य गुटों के बीच तीव्र लड़ाई ने गंभीर मानवीय संकट पैदा कर दिया था।[xxi] अस्थिर राजनीतिक स्थिति के बावजूद भारत ने प्रभावित लोगों की सहायता के लिए 23 टन चिकित्सा सामग्री और राहत सामग्री भेजकर मानवीय सहायता प्रदान की।[xxii] इसी तरह, सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान, जब देश गंभीर राजनीतिक संकट से गुजर रहा था, भारत ने प्रभावित समुदायों की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगभग 2,000 मीट्रिक टन चावल मानवीय सहायता के रूप में प्रदान किया।[xxiii] सामूहिक रूप से ऐसे प्रयास यह दिखाते हैं कि भारत की मानवीय भागीदारी का मुख्य उद्देश्य मानव जीवन की रक्षा करना और तत्काल मानवीय जरूरतों को पूरा करना है। भारत का लोगों-केंद्रित दृष्टिकोण कोविड-19 महामारी के दौरान वैश्विक वैक्सीन सहायता में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। अपनी पहल ‘वैक्सीन मैत्री’ के तहत भारत ने लगभग 101 देशों को कोवैक्सीन की 52 मिलियन से अधिक खुराक और लगभग 3.2 मिलियन डॉलर मूल्य की चिकित्सा सामग्री प्रदान की।[xxiv]
हालाँकि भारत की मानवीय सहायता दुनिया के कई क्षेत्रों और देशों तक फैली हुई है, लेकिन उसका तात्कालिक पड़ोस उसके एचएडीआर सहयोग का मुख्य क्षेत्र बना हुआ है, जो उसकी नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी के अनुरूप भी है। भारत का पड़ोस घनी आबादी, नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और जलवायु से उत्पन्न खतरों के अधिक जोखिम के कारण दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है।[xxv] 1970 के बाद से इस क्षेत्र में आपदाओं की संख्या पाँच गुना बढ़ गई है, और प्रत्यक्ष नुकसान का अनुमान 806 बिलियन डॉलर से अधिक है।[xxvi] यह क्षेत्र बाढ़ के प्रति दुनिया में सबसे अधिक संवेदनशील है और चक्रवातों के मामले में दूसरा सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र है, जबकि यहाँ अधिकांश आपदा से होने वाली मौतें भूकंप के कारण होती हैं।[xxvii] आपदाओं के जोखिम से परे, भारत का पड़ोस नई दिल्ली के लिए गहरा भू-राजनीतिक और सुरक्षा महत्व भी रखता है। इस क्षेत्र में कुल मिलाकर 1.66 बिलियन से अधिक लोग रहते हैं, जो वैश्विक आबादी का लगभग एक-चौथाई हिस्सा हैं, और पड़ोसी देशों में होने वाले घटनाक्रम अक्सर भारत की आंतरिक सुरक्षा, प्रवासन के पैटर्न और आर्थिक स्थिरता पर सीधा प्रभाव डालते हैं।[xxviii] पड़ोसी देशों में मानवीय संकट जल्दी ही शरणार्थियों के प्रवाह, सीमा-पार सुरक्षा चिंताओं और व्यापार व संपर्क में बाधा के रूप में सामने आ सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता भारत के लिए एक प्रमुख राष्ट्रीय हित बन जाती है।[xxix] साथ ही, दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र धीरे-धीरे प्रमुख शक्तियों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का क्षेत्र भी बनते जा रहे हैं, विशेष रूप से चीन जैसे बाहरी देशों की बढ़ती आर्थिक और बुनियादी ढाँचा उपस्थिति के कारण।[xxx] इस व्यापक रणनीतिक संदर्भ में भारत की क्षेत्रीय भागीदारी एक्ट ईस्ट पॉलिसी जैसी पहलों से भी निर्देशित होती है, जिसका उद्देश्य म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों के माध्यम से दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ आर्थिक संपर्क और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है। इसके अलावा, समुद्री मानवीय और सुरक्षा सहयोग के क्षेत्र में भारत की भूमिका उसकी सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) की परिकल्पना और उसके विस्तारित ढाँचे महासागर (क्षेत्रों के पार सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) से भी प्रभावित होती है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय विकास और समन्वित आपदा प्रतिक्रिया पर जोर देते हैं। इन सभी मानवीय, सुरक्षा और भू-राजनीतिक कारणों को देखते हुए यह आश्चर्य की बात नहीं है कि भारत की कुल एचएडीआर सहायता का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा उसके पड़ोसी देशों की ओर गया है।[xxxi]
इस संदर्भ में यह शोधपत्र समय के साथ अपने पड़ोस में पहले सहायता देने वाले देश के रूप में भारत की भूमिका पर केंद्रित है।
नेपाल
भारत ने नेपाल को मानवीय सहायता प्रदान करने में लगातार सक्रिय भूमिका निभाई है, विशेष रूप से उन बड़े प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जिन्होंने हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित किया है।
ऐसे सहयोग का एक सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण तब देखा गया जब 25 अप्रैल 2015 को काठमांडू शहर के पास 7.8 तीव्रता का भीषण भूकंप आया, जिसमें 9,000 लोगों की मृत्यु हो गई और 2.8 मिलियन लोग विस्थापित हो गए।[xxxii] भारत ने ‘ऑपरेशन मैत्री’ शुरू किया और चिकित्सा तथा तकनीकी सहायता दल तैनात किए।[xxxiii] भारतीय वायु सेना ने नेपाली सेना के जवानों की मदद की ताकि पहुँच योग्य क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुँचाई जा सके।[xxxiv] इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) भी आगे आया और पद्म श्री पुरस्कार प्राप्त एक डॉक्टर के नेतृत्व में 13 डॉक्टरों की टीम भेजी, और बाद में हार्ट फाउंडेशन और उद्योग डेवलपमेंट फाउंडेशन के सहयोग से 42 लाख रुपये की दवाइयाँ भी भेजीं।[xxxv] ऑपरेशन मैत्री 4 जून 2015 को समाप्त हुआ, जिसके दौरान भारत ने 2223 उड़ानें भरीं, लगभग 11,200 लोगों को सुरक्षित निकाला, 1700 टन राहत सामग्री वितरित की और 12,000 से अधिक लोगों को चिकित्सा सहायता दी।.[xxxvi] अपने बड़े पैमाने के कारण ऑपरेशन मैत्री को विदेश भूमि पर भारत द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा राहत अभियान माना गया। नेपाल ने इस बड़े पैमाने के बचाव अभियान के लिए भारत के प्रति सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त किया और कहा कि संकट के समय भारत ने असाधारण सहयोग और संवेदनशीलता दिखाई।[xxxvii]
ऑपरेशन मैत्री
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चिकित्सा सहायता
➔ 18 चिकित्सा दल |
तकनीकी सहायता
➔ 10 इंजीनियर टास्क फोर्स |
राहत सामग्री
➔ 10,000 कंबल
➔ 1,000 टेंट
➔ 1,000 तिरपाल शीट |
स्रोत: लेखक द्वारा तैयार किया गया
राहत चरण के पश्चात् भारत ने नेपाल को 1 बिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता भी प्रदान की, जिससे नेपाल के गोरखा और नुवाकोट जिलों में 50,000 घरों के पुनर्निर्माण में मदद मिली।[xxxviii]
कोविड-19 महामारी के फैलने के बाद नेपाल की सहायता के लिए भारत ने इसी तरह के प्रयास किए। अप्रैल 2020 में भारत ने 23 टन दवाइयाँ भेजीं, जिनमें हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और पैरासिटामोल शामिल थीं।[xxxix] बाद में, 2021 की शुरुआत में नेपाल के स्वास्थ्यकर्मियों और आम लोगों की सुरक्षा के लिए भारत ने भारत में निर्मित वैक्सीन की 1 मिलियन खुराक भेजीं।[xl] फिर जून 2021 से नेपाल के स्वास्थ्य क्षेत्र को सहयोग देने के लिए भारत ने 28.80 करोड़ रुपये मूल्य के वेंटिलेटर, आईसीयू बेड और पीपीई किट उपलब्ध कराए।[xli]
कोविड-19 के दौरान नेपाल को भारत द्वारा दी गई सहायता
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तारीख |
विवरण |
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22 अप्रैल 2020 |
पैरासिटामोल की 3.2 लाख खुराक
हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की 2.5 लाख खुराक
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मार्च 2021 |
कोविशील्ड की 1 लाख खुराक |
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21 जनवरी 2021 |
कोविशील्ड की 1 मिलियन खुराक |
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11 जून 2021 |
वेंटिलेटर आईसीयू बेड एंबुलेंस पीपीई किट |
स्रोत: लेखक द्वारा तैयार किया गया
हाल ही में, नवंबर 2023 में नेपाल के जाजरकोट और पश्चिम रुकुम जिलों में 6.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे 153 लोगों की मृत्यु हो गई, 300 से अधिक लोग घायल हुए और लगभग 2,00,000 लोग विस्थापित हो गए।[xlii] भारत ने पहले सहायता देने वाले देश के रूप में तेजी से कार्रवाई करते हुए कई आपातकालीन राहत सामग्री भेजीं।[xliii] 11 टन आवश्यक सामग्री की पहली खेप, जिसकी कीमत लगभग 160 मिलियन रुपये थी, 5 नवंबर 2023 को भारतीय वायु सेना के विशेष सी-130 विमान के माध्यम से नेपालगंज (नेपाल) भेजी गई।[xliv] जैसे-जैसे अभियान आगे बढ़ा, भारत ने तीन और खेप भेजीं और 5 नवंबर 2023 से 21 नवंबर 2023 के बीच कुल मिलाकर 33 टन से अधिक आवश्यक सहायता सामग्री नेपाल को प्रदान की।[xlv]
नेपाल को 2023 में भारत द्वारा भेजी गई एचएडीआर सहायता सामग्री
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खेप |
खेप की आपूर्ति की तिथि |
खेप का विवरण |
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पहली |
5 नवंबर 2023 |
11 टन (छोटे टेंट, बड़े टेंट, स्लीपिंग बैग, कंबल) |
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दूसरी |
7 नवंबर 2023 |
9 टन (अधिक टेंट और स्लीपिंग बैग) |
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तीसरी |
9 नवंबर 2023
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12 टन (पोर्टेबल वेंटिलेटर और स्वच्छता सामग्री) |
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चौथी |
21 नवंबर 2023 |
महत्वपूर्ण दवाइयाँ और उपकरण |
स्रोत: लेखक द्वारा कई स्रोतों का उपयोग करके तैयार किया गया
2023 के भूकंप के दौरान नेपाल को एचएडीआर सहायता प्रदान करता भारत
स्रोत: भारत का दूतावास, काठमांडू, नेपाल [xlvi]
प्राकृतिक आपदा आने से पहले ही नेपाल कोविड-19 महामारी के बाद गंभीर आर्थिक झटके और आपदा प्रतिक्रिया के लिए सीमित वित्तीय संसाधनों की समस्या से जूझ रहा था।[xlvii] इसलिए तत्काल राहत से आगे बढ़कर भारत द्वारा अधिक मानवीय सहायता देने की नेपाल ने सराहना की।[xlviii] जनवरी 2024 में भारत के विदेश मंत्री की नेपाल यात्रा के दौरान भारत ने लगभग एनपीआर 1000 करोड़ का एक वित्तीय पैकेज घोषित किया, जिसमें 200 तैयार घर, 1200 कंबल, 150 टेंट और 2000 स्लीपिंग बैग शामिल थे।[xlix]
भू-राजनीतिक नज़रिए से नेपाल भारत और चीन के बीच एक संवेदनशील भौगोलिक स्थिति रखता है। इस संदर्भ में नेपाल को दी गई भारत की एचएडीआर सहायता ने उसकी सद्भावना को मजबूत किया।[l]
म्यांमार
म्यांमार के साथ भारत की एचएडीआर भागीदारी अचानक आने वाली आपदाओं के समय तेज़ी से संसाधनों की तैनाती और उसके बाद लक्षित स्वास्थ्य तथा राहत सहायता को दर्शाती है।
ऐसा ही एक उदाहरण तब देखने को मिला जब 3 मई 2008 को चक्रवात ‘नरगिस’ म्यांमार से टकराया, जिसकी हवाओं की गति 200 किमी/घंटा तक थी और इससे 2.4 मिलियन लोग गंभीर रूप से प्रभावित हुए।[li] भारत ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन सहायता’ शुरू किया और भारतीय नौसेना के जहाजों के माध्यम से राहत और आवश्यक सामग्री की आपूर्ति की।[lii] भारत ने दो चिकित्सा दल भी तैनात किए जो दो सप्ताह से अधिक समय तक कार्यरत रहे और प्रतिदिन लगभग 1,500 बीमार लोगों का इलाज करते थे।[liii] अल्पकालिक राहत से आगे बढ़कर सामाजिक स्थिति को फिर से सामान्य बनाने में सहायता देने के लिए भारत ने नकद सहायता[liv] भी प्रदान की और प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण तथा बुनियादी रोशनी की व्यवस्था के लिए नालीदार स्टील शीट और सोलर टॉर्च उपलब्ध कराईं।[lv] बाद में 2010 में एक संयुक्त बयान में म्यांमार ने चक्रवात ‘नरगिस’ के दौरान भारत के राहत और पुनर्वास प्रयासों की सराहना की और दोनों देशों ने आगे भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।[lvi]
ऑपरेशन सहायता
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चिकित्सा सहायता ➔ 47 डॉक्टरों की दो टीमें सहायक कर्मचारियों के साथ
➔ 1.8 लाख बोतलें आई.वी. तथा अन्य चिकित्सा सामग्री |
पुनर्निर्माण सहायता ➔ श्वेडागोन पगोडा परिसर के पुनर्निर्माण के लिए $2,00,000, जहाँ गौतम बुद्ध के बालों के अवशेष सुरक्षित रखे गए हैं ➔ छत के लिए 1020 टन नालीदार स्टील ➔ 500 सौर टॉर्च और लालटेन ➔ ट्रांसफॉर्मर |
राहत सामग्री आपूर्ति ➔ खाद्यान्न ➔ टेंट |
स्रोत: लेखक द्वारा तैयार किया गया
म्यांमार के लिए भारत की प्रथम प्रतिक्रिया की भूमिका अगस्त 2015 में चक्रवात ‘कोमेन’ के दौरान फिर दिखाई दी, जिसने म्यांमार के 12 क्षेत्रों में बाढ़ ला दी थी।[lvii] म्यांमार सरकार के आधिकारिक अनुरोध पर भारत ने भारतीय वायु सेना के माध्यम से चावल और दवाइयाँ उन प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँचाईं जो पहुँचना कठिन थे, जैसे काली और मंडाले।[lviii]
2017 में भारत ने म्यांमार में दो अलग-अलग मानवीय आपात स्थितियों का जवाब दिया। पहला, इन्फ्लुएंजा के प्रकोप के दौरान भारत ने 20,000 एन-95 मास्क, वैक्सीन की खुराकें और अन्य चिकित्सा सामग्री भेजी।[lix] दूसरा, जब चक्रवात ‘मोरा’ पश्चिमी म्यांमार से टकराया, तब भारत ने कपड़ों, टेंट और पुनर्वास सामग्री के कई टन भेजे।[lx]
2020 में भी भारत ने सहायता प्रदान की जब म्यांमार आंतरिक विस्थापन के कारण मानवीय दबाव का सामना कर रहा था, और रखाइन राज्य में विस्थापित लोगों के लिए 20,000 से अधिक खाद्य सामग्री किट और तिरपाल टेंट उपलब्ध कराए।[lxi]
2020 में म्यांमार को चिकित्सा सामग्री सौंपते भारत के अधिकारी
स्रोत: भारत का दूतावास, यांगून, म्यांमार[lxii]
कोविड-19 महामारी के दौरान म्यांमार को दी जाने वाली भारत की मानवीय सहायता आपदा राहत सामग्री से आगे बढ़कर स्वास्थ्य आपातकालीन सहायता की ओर केंद्रित हो गई। भारत ने चिकित्सा सामग्री, [lxiii] कोविड वैक्सीन[lxiv] और खाद्य सामग्री[lxv] भेजकर म्यांमार को महामारी से लड़ने में सहायता की।
कोविड-19 के दौरान म्यांमार को भारत द्वारा दी गई सहायता
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तारीख |
विवरण |
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5 मई 2020 |
2,00,000 इकाइयाँ चिकित्सा सामग्री |
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22 जनवरी 2021 |
कोविशील्ड की 1.5 मिलियन खुराक |
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30 मार्च 2020 |
10,000 टन चावल 200 टन गेहूँ |
स्रोत: लेखक द्वारा तैयार किया गया
कोविड-19 महामारी के बाद जब 15 मई 2023[lxvi] को चक्रवात ‘मोचा’ म्यांमार से टकराया, तो इससे रखाइन राज्य के सभी सात जिलों में लगभग 1.2 मिलियन लोग प्रभावित हुए और 2,00,000 से अधिक इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं।[lxvii] भारत ने 18 मई 2023 को ‘ऑपरेशन करुणा’ शुरू किया और पहले ही दिन भारतीय नौसेना के चार जहाजों के माध्यम से लगभग 40 टन राहत सामग्री भेजी।[lxviii] इसके अलावा, अगले दिन रखाइन राज्य में वितरण के लिए दवाइयाँ और अन्य चिकित्सा सामग्री हवाई मार्ग से भेजी गईं।[lxix]
सितंबर 2024 की शुरुआत में टाइफून यागी के कारण आई अचानक बाढ़ के जवाब में, जिसमें 433 से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई और म्यांमार के 8 क्षेत्रों[lxx] में 10,17,285 इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं, भारत ने 17 सितंबर 2024 को ‘ऑपरेशन सद्भाव’ शुरू किया। भारत ने अचानक आई बाढ़ के दो दिनों के भीतर भारतीय वायु सेना के माध्यम से 53 टन आपातकालीन बाढ़ राहत सामग्री, जिसकी कीमत लगभग 1 मिलियन डॉलर थी, बागो, काया, कयिन, मगवे, मंडाले, मोन, नेपी तॉ और रखाइन क्षेत्रों में पहुँचाई।[lxxi]
म्यांमार में भारत की एचएडीआर सहायता का सबसे व्यापक और हालिया प्रयास तब देखा गया जब 28 मार्च 2025 को म्यांमार में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके बाद 6.4 तीव्रता का एक और भूकंप आफ्टरशॉक के रूप में आया।[lxxii] इन दोनों भूकंपों के कारण कम से कम 3,700 लोगों की मृत्यु हो गई, 4,800 लोग घायल हुए और 129 लोग लापता बताए गए।[lxxiii] इसे ध्यान में रखते हुए भारत ने 29 मार्च 2025 को ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ शुरू किया और तुरंत राहत सामग्री के साथ छह विमान और पाँच नौसेना के जहाज भेजे।[lxxiv]
भारत ने एडवांस बचाव उपकरणों के साथ एनडीआरएफ के बचावकर्मियों की एक टीम भी तैनात की, [lxxv] और बचाव तथा चिकित्सा अभियानों में सहायता के लिए मंडाले में 200-बेड का फील्ड अस्पताल स्थापित करने हेतु भारतीय सेना की फील्ड हॉस्पिटल टीम[lxxvi] भेजी गई। भारतीय सेना का फील्ड अस्पताल और चिकित्सा दल म्यांमार के लिए बहुत सहायक साबित हुआ, क्योंकि उसने कई सर्जरी कीं और लगभग 2519 मरीजों का इलाज किया।[lxxvii]
‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत फील्ड अस्पताल के भीतर घायल लोगों का उपचार करते भारतीय चिकित्सा दल
स्रोत: द हिंदू[lxxviii]
‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत अपना सहयोग आगे बढ़ाते हुए भारत ने बाद में भूकंप के बाद स्थिति को फिर से सुधारने में भी म्यांमार की सहायता की। भारत ने पुनर्निर्माण सामग्री के साथ सेना के इंजीनियरों की एक टीम भेजी, जिसने म्यांमार को क्षतिग्रस्त मंडाले-नेपीतॉ पुल और ऐतिहासिक ओल्ड आवा रेलवे पुल के पुनर्निर्माण में मदद की।[lxxix] भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों के स्थानीय निवासियों ने बचाव दल और राहत सामग्री भेजने के लिए भारत की सार्वजनिक रूप से सराहना भी की।[lxxx]
“ऑपरेशन ब्रह्मा”
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तारीख |
सहायता का विवरण |
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29 मार्च 2025 |
734 टन टेंट, कंबल, खाद्य सामग्री आदि |
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30 मार्च 2025 |
5 टन एचएडीआर सामग्री
80 एनडीआरएफ कर्मियों की टीम 17 टन सुरक्षा और बचाव उपकरणों के साथ
118 सदस्यों की भारतीय सेना फील्ड अस्पताल टीम 60 टन सर्जिकल और चिकित्सा सामग्री के साथ |
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1st अप्रैल, 2025 |
70 टन आवश्यक कपड़े, पेयजल, नूडल्स आदि
884 मीट्रिक टन चावल, खाना पकाने का तेल, बिस्कुट आदि |
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6th अप्रैल, 2025 |
भारतीय सेना के 6 सदस्यीय इंजीनियर दल के साथ 20 तैयार इकाइयाँ और 250 मीट्रिक टन सीमेंट |
स्रोत: लेखक द्वारा तैयार किया गया
पिछले तीन वर्षों में म्यांमार में भारत की मानवीय प्रतिक्रिया एक लंबे राजनीतिक संकट के बीच हुई। फरवरी 2021 में म्यांमार की सेना द्वारा प्रशासन अपने हाथ में लेने के बाद से देश में तीव्र राजनीतिक अस्थिरता और आंतरिक संघर्ष देखने को मिला है, जिसने शासन व्यवस्था को कमजोर किया है और संकटों से प्रभावी ढंग से निपटने की राज्य की क्षमता को कम कर दिया है।[lxxxi] देश का आर्थिक प्रदर्शन भी कमजोर रहा है, क्योंकि 2021 के बाद से मुद्रास्फीति, गरीबी और आर्थिक गिरावट लगातार बनी हुई है।[lxxxii]
इस संदर्भ में म्यांमार के साथ भारत की निरंतर मानवीय भागीदारी के कई उद्देश्य रहे। इससे भारत को सहयोग के कार्यात्मक चैनलों को बनाए रखने में मदद मिली और उसके उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में शरणार्थियों के संभावित प्रवाह तथा अस्थिरता जैसे प्रभावों को कम करने में भी सहायता मिली।[lxxxiii]
श्रीलंका
श्रीलंका के साथ भारत की मानवीय भागीदारी कई दशकों से है और यह दोनों देशों के बीच गहरे द्विपक्षीय संबंधों को दर्शाती है। मानवीय सहयोग का एक प्रारंभिक और उल्लेखनीय उदाहरण जून 1987 में देखा गया, जब भारत ने ‘ऑपरेशन पूमालाई’ शुरू किया और बढ़ते संघर्ष के दौरान जाफना में 25 टन खाद्य सामग्री और आवश्यक वस्तुओं को हवाई मार्ग से गिराया।[lxxxiv]
श्रीलंका के साथ भारत की मानवीय भागीदारी 2004 के हिंद महासागर सुनामी के दौरान अधिक आपदा-प्रतिक्रिया केंद्रित हो गई, जिसमें लगभग 35,000 लोगों की मृत्यु हुई।[lxxxv] हालांकि, भारत उस वक्त स्वयं भी सुनामी से प्रभावित हुआ था, फिर भी उसने श्रीलंका का साथ दिया और सहायता प्रदान की। भारत ने “ऑपरेशन रेनबो” शुरू किया और श्रीलंका को जहाज, चिकित्सा सहायता, वित्तीय सहायता तथा संपर्क संबंधी सहयोग प्रदान किया।[lxxxvi] श्रीलंका ने सुनामी के तुरंत बाद भारत की त्वरित प्रतिक्रिया के लिए गहरा आभार व्यक्त किया और कहा कि ऐसी समय पर मिली सहायता ने प्रभावित समुदायों के जीवन को सामान्य बनाने और नष्ट हो चुके तटीय क्षेत्रों के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।[lxxxvii]
ऑपरेशन रेनबो
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ऑपरेशन रेनबो |
कनेक्टिविटी सहायता |
वित्तीय सहायता
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➔ त्रिंकोमाली और गाले में 14 भारतीय नौसेना और तटरक्षक जहाजों की तैनाती।
➔ भारतीय सेना की फील्ड एम्बुलेंस द्वारा टीकाकरण और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था।
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➔ अरुगम बे में 350 फुट के बेली ब्रिज के पुनर्निर्माण में सहायता।
➔ कोलंबो-मतारा रेल लिंक के पुनर्निर्माण के लिए $167.4 मिलियन की रियायती एलओसी।
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➔ राहत और पुनर्निर्माण परियोजनाओं के लिए 100 करोड़ रुपये का अनुदान।
➔ अगले 3 वर्षों के लिए ऋण भुगतान पर रोक। |
स्रोत: लेखक द्वारा तैयार किया गया
हालाँकि पहले श्रीलंका के साथ भारत की मानवीय भागीदारी मुख्य रूप से प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु से जुड़ी आपात स्थितियों से प्रभावित रही थी, लेकिन कोविड-19 महामारी ने एक नया चरण शुरू किया। कोविड महामारी के दौरान भारत ने श्रीलंका को टनों दवाइयाँ, लाखों कोविड वैक्सीन और अन्य आवश्यक चिकित्सा सामग्री प्रदान की।[lxxxviii] भारत के इन शुरुआती प्रयासों ने श्रीलंका के 1,50,000 स्वास्थ्यकर्मियों और 1,15,000 सैन्य तथा पुलिस कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद की।[lxxxix]
कोविड-19 के दौरान श्रीलंका को भारत की सहायता
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तारीख |
विवरण |
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मई, 2021 |
25 टन आवश्यक दवाइयाँ |
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जनवरी, 2021 |
एस्ट्राजेनेका की 5,00,000 खुराक |
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अगस्त, 2021 |
140 मीट्रिक टन तरल चिकित्सा ऑक्सीजन के परिवहन में सहायता
आवश्यक सामग्री की त्वरित आपूर्ति के लिए नौसेना जहाज ‘घरियाल’ की तैनाती |
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नवंबर, 2021 |
100 टन उच्च गुणवत्ता वाले नाइट्रोजन उर्वरक |
स्रोत: लेखक द्वारा तैयार किया गया
श्रीलंका में भारत की सबसे हालिया और उच्च-तीव्रता वाली एचएडीआर सहायता चक्रवात ‘डिटवाह’ के दौरान हुई, जो 28 नवंबर 2025 को श्रीलंका के पूर्वी तट से टकराया और पूरे देश में गंभीर बाढ़ तथा अव्यवस्था का कारण बना। इससे श्रीलंका के 25 जिलों में लगभग 1.4 मिलियन लोग प्रभावित हुए।[xc] भारत ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए उसी दिन ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ शुरू किया और अपनी वायु सेना तथा नौसेना की मदद से आपातकालीन राशन और राहत सामग्री जैसे टेंट, कंबल और भीष्म मॉड्यूलर ट्रॉमा क्यूब भेजे।[xci] भारतीय वायु सेना ने श्रीलंकाई वायु सेना के सहयोग से गर्भवती महिलाओं, शिशुओं और गंभीर रूप से घायल लोगों को हवाई मार्ग से सुरक्षित निकालने के लिए बचाव अभियान भी चलाया।[xcii] जमीनी सहायता के लिए भारत ने एक चिकित्सा टीम भेजी, जिसने मौके पर प्रशिक्षण दिया, और एक अर्बन सर्च एंड रेस्क्यू (यूएसएआर) टीम भी भेजी, जिसने जमीन पर बचाव कार्यों में सहायता की।[xciii]
जैसे-जैसे अभियान तत्काल राहत से आगे बढ़कर प्रारंभिक पुनर्प्राप्ति चरण में पहुँचा, भारतीय वायु सेना ने दिसंबर 2025 में एक मॉड्यूलर सेना फील्ड अस्पताल और मोबाइल वाटर प्यूरीफिकेशन यूनिट्स हवाई मार्ग से भेजीं, ताकि तत्काल चिकित्सा जरूरतों और पेयजल की कमी को पूरा किया जा सके।[xciv] इसके बाद भारत ने 6 दिसंबर 2025 को तमिलनाडु सरकार द्वारा प्रदान किए गए सूखे राशन और अन्य राहत सामग्री को तीन नौसेना लैंडिंग क्राफ्ट यूटिलिटी जहाजों के माध्यम से समुद्री मार्ग से भेजने की व्यवस्था की।[xcv]
ऑपरेशन सागर बंधु
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तारीख |
सहायता का विवरण |
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28 नवंबर 2025 |
9.5 टन आपातकालीन सूखा राशन |
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29 नवंबर 2025 |
27 टन टेंट, तिरपाल, किट आदि दो भीष्म मॉड्यूलर ट्रॉमा क्यूब 4 टन आवश्यक चिकित्सा सामग्री ट्रॉमा विशेषज्ञों की एक आरोग्य मैत्री टीम दो विशेष अर्बन सर्च एंड रेस्क्यू टीमें |
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1 दिसंबर 2025 |
अतिरिक्त 12 टन राहत सामग्री |
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2 दिसंबर 2025 |
73 सहायक कर्मियों के साथ एक मॉड्यूलर भारतीय सेना फील्ड अस्पताल
500 मोबाइल वाटर प्यूरिफिकेशन यूनिट्स |
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6 दिसंबर 2025 |
तमिलनाडु सरकार से 997 टन सूखा राशन और अन्य सामग्री |
स्रोत: लेखक द्वारा तैयार किया गया
भारत की त्वरित प्रतिक्रिया से 3388 लोगों[xcvi] को सहायता और उपचार प्रदान करने में मदद मिली और श्रीलंका के कुछ सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों, जैसे किलिनोच्ची जिले में, 4 बेली ब्रिज स्थापित करके संपर्क व्यवस्था को बहाल किया गया।[xcvii] भारत की एनडीआरएफ टीम ने 450 लोगों को भी बचाया।[xcviii] बचाव दलों की तेज़ तैनाती और तत्काल राहत सामग्री भेजने के लिए भारत को श्रीलंका के राजनीतिक नेतृत्व, जनप्रतिनिधियों और प्रभावित लोगों से व्यापक सराहना भी मिली।[xcix]
श्रीलंका में भारतीय सेना द्वारा बनाया गया बेली ब्रिज
स्रोत: न्यूज़ऑनएयर[c]
भारत के ये प्रयास ऐसे समय में हुए जब 2020 के आर्थिक संकट के बाद जारी आर्थिक सुधार प्रक्रिया के कारण श्रीलंका की शासन व्यवस्था और सार्वजनिक सेवा प्रणालियों पर दबाव बना हुआ था।[ci] इस पृष्ठभूमि में भारत की समय पर की गई सहायता ने न केवल तत्काल मानवीय जरूरतों को पूरा किया बल्कि राष्ट्रीय पुनर्प्राप्ति के इस संवेदनशील चरण में वर्तमान प्रशासन के प्रयासों को भी सहयोग दिया।
भारत की सहायता ने एक भू-रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोस में राजनीतिक विश्वास और रणनीतिक सद्भावना को भी मजबूत किया। संकट से उबरने के लिए श्रीलंका को जापान, अमेरिका, चीन, यूएई और पाकिस्तान जैसे कई बाहरी देशों से भी सहायता मिली।[cii] इससे यह स्पष्ट हुआ कि आपदा प्रतिक्रिया अब क्षेत्रीय कूटनीति और प्रभाव के साथ तेजी से जुड़ती जा रही है। इस स्थिति में भारत की मानवीय सहायता हिंद महासागर क्षेत्र में एक व्यापक रणनीतिक महत्व भी प्राप्त करती है।
श्रीलंका हिंद महासागर में प्रमुख समुद्री संचार मार्गों (एसएलओसी) के किनारे एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, जिनसे होकर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।[ciii] भारत के लिए श्रीलंका का स्थान, जो पाल्क जलडमरूमध्य के पार उसकी दक्षिणी तटरेखा से केवल 30 किलोमीटर दूर है, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अत्यंत रणनीतिक महत्व रखता है।[civ] इसके अलावा बाहरी शक्तियों, विशेष रूप से चीन की बढ़ती उपस्थिति ने इस क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा दिया है।[cv] इस संदर्भ में श्रीलंका के साथ भारत की मानवीय भागीदारी न केवल तत्काल आपदा जरूरतों को पूरा करती है बल्कि हिंद महासागर में अपने रणनीतिक हितों की रक्षा करते हुए एक जिम्मेदार क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदाता के रूप में उसकी भूमिका को भी मजबूत करती है।
श्रीलंका में चक्रवात ‘डिटवाह’ के दौरान कार्रवाई में भारत की एनडीआरएफ टीम
स्रोत: द हिंदू[cvi]
अफगानिस्तान
भारत-अफगानिस्तान एचएडीआर सहयोग यह दिखाता है कि अफगानिस्तान में राजनीतिक अनिश्चितता के बीच भी भारत ने संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के माध्यम से राहत पहुँचाकर अपनी मानवीय सहायता जारी रखने का प्रयास किया। ऐसा ही एक उदाहरण अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सरकार के पतन के दौरान देखा गया। भारत ने 11 दिसंबर 2021 को ‘ऑपरेशन देव शक्ति’ शुरू किया और मानवीय सहायता की खेप भेजी।[cvii] इस अभियान के तहत भारत ने भारतीयों और अफगानों सहित 699 लोगों को सुरक्षित निकाला, साथ ही गुरु ग्रंथ साहिब के 2 स्वरूप और कुछ प्राचीन हिंदू पांडुलिपियाँ भी बाहर लाईं।[cviii]
अफगानी नागरिकों का हिंडन वायु सेना स्टेशन, गाज़ियाबाद पर आगमन
स्रोत: इंडिया टुडे[cix]
इसके बाद भारत ने कोविड-19 महामारी के दौरान अफगानिस्तान की सहायता के लिए संयुक्त राष्ट्र (यूएन), विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के माध्यमों का उपयोग किया। भारत ने अफगानिस्तान के लिए खाद्य सामग्री, दवाइयाँ, कोविड वैक्सीन और कपड़े भेजे तथा ईरान में रहने वाले अफगान शरणार्थियों के लिए पोलियो और कोविड वैक्सीन भी भेजीं।[cx] अफगानिस्तान ने भारत के प्रयासों की सराहना की और इस सहायता को दोनों देशों के मजबूत संबंधों के प्रति ‘उदारता और प्रतिबद्धता’ का स्पष्ट संकेत बताया।[cxi]
अफगानिस्तान को कोविड-19 के दौरान भारत की मानवीय सहायता
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खाद्य सामग्री
➔ 2000 मीट्रिक टन गेहूँ (डब्ल्यूएफपी के माध्यम से) |
दवाइयाँ
➔ अफगान लोगों और ईरान में अफगान शरणार्थियों के लिए 13 टन से अधिक आवश्यक दवाइयाँ |
वैक्सीन
➔ अफगान लोगों के लिए 5,00,000 खुराक
➔ ईरान में अफगान शरणार्थियों के लिए 1 मिलियन खुराक
➔ ईरान में अफगान शरणार्थियों के लिए पोलियो वैक्सीन की 60 मिलियन खुराक |
स्रोत: लेखक द्वारा तैयार किया गया
हाल के समय में अफगानिस्तान के लोगों के प्रति अपने निरंतर समर्थन को आगे बढ़ाते हुए और देश की तत्काल स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत ने नवंबर 2025 में 73 टन दवाइयाँ, वैक्सीन और आवश्यक पूरक सामग्री भेजी।[cxii]
सामूहिक रूप से ये पहलें दिखाती हैं कि अफगानिस्तान में भारत की मानवीय भागीदारी शासक व्यवस्था की राजनीतिक परिस्थितियों के बजाय अफगान लोगों के कल्याण पर केंद्रित रही। मानवीय जरूरतों को प्राथमिकता देकर और जब प्रत्यक्ष संपर्क सीमित था तब अंतरराष्ट्रीय संगठनों के माध्यम से काम करके भारत ने एचएडीआर के प्रति लोगों-केंद्रित दृष्टिकोण दिखाया, जिसमें मानवीय जिम्मेदारी और मानव सुरक्षा को भू-राजनीतिक विचारों से ऊपर रखा गया।
पाकिस्तान
पाकिस्तान को भारत की मानवीय सहायता को संकट-विशिष्ट, सावधानीपूर्वक संतुलित और अक्सर बहुपक्षीय या सहमत माध्यमों के जरिए प्रदान की गई सहायता के रूप में समझा जा सकता है। ऐसा 8 मार्च 2005 को पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आई बाढ़ के बाद स्पष्ट रूप से देखा गया। भारत ने 14 अक्टूबर 2005 को लाहौर के लिए एक ट्रेन भेजी, जिसमें कंबल, टेंट और प्लास्टिक शीट के साथ सहायता के लिए भारतीय सशस्त्र बलों के कर्मी भी शामिल थे।[cxiii] आने वाले महीनों में भारत ने अपनी राहत सहायता को और बढ़ाया और लगभग 1,300 टन अतिरिक्त राहत सामग्री भेजी, जिसमें चिकित्सा उपकरण, दवाइयाँ और बर्फीले क्षेत्रों के लिए स्लीपिंग बैग शामिल थे।[cxiv]
दूसरा बड़ा उदाहरण 2010 में पाकिस्तान में आई सबसे भीषण बाढ़ के दौरान देखा गया, जिसमें लगभग 1700 लोगों की मृत्यु हुई और कुल मिलाकर 14-20 मिलियन लोग प्रभावित हुए।[cxv] अगस्त 2010 में भारत ने डब्ल्यूएफपी और संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से पाकिस्तान को 25 मिलियन डॉलर की सहायता देने की पेशकश की।[cxvi] पाकिस्तान ने भारत की सहायता का स्वागत किया और इसे “सद्भावना का संकेत” बताया।[cxvii]
ये उदाहरण दर्शाते हैं कि भारत की मानवीय प्रतिक्रियाएँ अक्सर राजनीतिक तनाव के बावजूद प्रभावित लोगों के कल्याण को प्राथमिकता देती रही हैं। मानवीय संकट के समय पाकिस्तान को सहायता देकर भारत ने एचएडीआर के प्रति अपने लोगों पर केंद्रित नज़रिए को प्रदर्शित किया, जिसका उद्देश्य राजनीतिक मतभेदों से परे मानव पीड़ा को कम करना है।
बांग्लादेश
बांग्लादेश के साथ भारत की एचएडीआर भागीदारी एक सहयोगपूर्ण माहौल को दर्शाती है। इसका पहला प्रमुख उदाहरण नवंबर 2007 में चक्रवात ‘सिद्र’ के बांग्लादेश में आने के बाद देखा गया। इसे ध्यान में रखते हुए भारत ने एक राहत पैकेज[cxviii], नकद सहायता, खाद्य सामग्री और प्राथमिक उपचार सामग्री भेजी।[cxix] बाद में 2011 में भारत ने चक्रवात से प्रभावित परिवारों के लिए घर बनाने में भी सहायता की।[cxx]
चक्रवात ‘सिद्र’ के दौरान बांग्लादेश को भारत की सहायता
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वित्तीय सहायता ➔ $10 मिलियन नकद सहायता |
आवश्यक सामग्री
➔ $40 मिलियन से अधिक मूल्य की आवश्यक सामग्री
➔ निर्यात प्रतिबंध हटाने के बाद 5,00,000 टन चावल |
चक्रवात के बाद पुनर्निर्माण सहायता
➔ 2500 करोड़ रुपये मूल्य के आश्रयों के पुनर्निर्माण में सहायता |
स्रोत: लेखक द्वारा तैयार किया गया
एक दशक बाद 2017 में, जब बांग्लादेश रोहिंग्या शरणार्थियों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए संघर्ष कर रहा था, तब भारत फिर आगे आया और 14 सितंबर 2017 को ‘ऑपरेशन इंसानियत’[cxxi] के तहत चिटगाँव में 55 टन राहत सामग्री हवाई मार्ग से पहुँचाई। भारत ने कोविड-19 के दौरान भी इसी प्रकार के प्रयास किए और बांग्लादेश को दवाइयाँ, चिकित्सा सामग्री[cxxii] और कोविड वैक्सीन की खुराकें प्रदान कीं।[cxxiii]
कोविड-19 के दौरान बांग्लादेश को भारत की सहायता
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वर्ष/तारीख |
विवरण |
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2020 |
15,000 हेड कवर 50,000 स्टेराइल सर्जिकल ग्लव्स 1,00,000 एचसीक्यू टैबलेट आरटी-पीसीआर टेस्ट किट ऑक्सीजन प्लांट कंसेंट्रेटर |
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27 मार्च 2021 |
एस्ट्राजेनेका कोविड वैक्सीन की 1.2 मिलियन खुराक |
स्रोत: लेखक द्वारा तैयार किया गया
मानवीय सहयोग से आगे बढ़कर बांग्लादेश भारत के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक महत्व भी रखता है। यह दक्षिण एशिया में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और हाल के वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार तेजी से बढ़ा है।[cxxiv] इसके अलावा सुरक्षा सहयोग भारत-बांग्लादेश संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ है, क्योंकि भारत अपने भौगोलिक रूप से संवेदनशील उत्तर-पूर्वी राज्यों में स्थिरता बनाए रखने और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने हेतु बांग्लादेश को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है।[cxxv] इस आर्थिक और रणनीतिक परस्पर निर्भरता को देखते हुए बांग्लादेश को दी गई भारत की मानवीय सहायता दक्षिण एशिया में व्यापक क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता को भी मजबूत करती है।
भूटान
भूटान के साथ भारत का संकट-प्रतिक्रिया सहयोग सबसे अधिक संस्थागत और विश्वास-आधारित साझेदारी को दर्शाता है, जहाँ मानवीय सहायता नियमित अंतर-सरकारी समन्वय और नागरिक-सैन्य सहयोग में शामिल है।
इसका सबसे निरंतर उदाहरण कोविड-19 महामारी के दौरान देखा गया, जब भारत ने कोविड वैक्सीन[cxxvi] और चिकित्सा सहायता की खेप भेजी तथा भूटान की जन स्वास्थ्य प्रणाली की मदद के लिए प्रोजेक्ट टाइड असिस्टेंस (पीटीए) और वित्तीय पैकेज[cxxvii] प्रदान किए। भूटान ने कोविड-19 के दौरान भारत के प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया और बाद में संयुक्त राष्ट्र में भारत को पड़ोस में एक सकारात्मक शक्ति बताया जो क्षेत्र के लोगों के कल्याण को बेहतर बनाने हेतु काम कर रही है।[cxxviii]
कोविड-19 के दौरान भूटान को भारत की सहायता
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वर्ष |
विवरण |
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2021 |
6.47 करोड़ रुपये मूल्य की चिकित्सा सहायता की 12 खेप कोविड-19 महामारी के प्रभाव को कम करने के लिए 501 करोड़ रुपये की विकास सहायता कोविशील्ड की 1.5 लाख खुराक |
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2022 |
2.40 करोड़ रुपये मूल्य की चिकित्सा सहायता चिकित्सा अवसंरचना परियोजनाओं के लिए प्रोजेक्ट टाइड असिस्टेंस (पीटीए) |
स्रोत: लेखक द्वारा तैयार किया गया
भूटान में भारत की मानवीय प्रतिक्रिया की भूमिका अक्टूबर 2025 में दक्षिणी भूटान में आई भीषण बाढ़ के दौरान फिर दिखाई दी, जो भारी वर्षा और वांगछू नदी पर स्थित ताला बांध के ऊपर से पानी बहने के कारण आई थी।[cxxix] हालाँकि भूटान में इस बाढ़ के कारण कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन जब बाढ़ का पानी भारत के उत्तर बंगाल क्षेत्र में पहुँचा, तो इसमें दो भूटानी नागरिकों सहित 32 लोगों की मृत्यु हो गई और लगभग 9,500 लोग विस्थापित हो गए।[cxxx] रॉयल भूटान आर्मी के तत्काल अनुरोध पर 5 अक्टूबर 2025 को भारतीय सेना ने हवाई निगरानी और निकासी अभियान के लिए तथा तत्काल चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने हेतु अपने दो हेलीकॉप्टर तैनात किए।[cxxxi] बाद में भूटान की शाही सरकार ने भारतीय सेना के समय पर और जीवनरक्षक सहयोग के लिए आभार और सराहना व्यक्त की।[cxxxii]
2025 में भूटान की बाढ़ के दौरान भारतीय वायु सेना द्वारा बचाव अभियान चलाया जाना 
स्रोत: न्यूज़ ऑन एयर[cxxxiii]
आपदाओं और महामारी के दौरान भूटान के प्रति भारत की प्रतिक्रियाएँ गहरे रणनीतिक महत्व भी रखती हैं। भूटान की भौगोलिक स्थिति और रणनीतिक रूप से संवेदनशील डोकलाम पठार के निकटता के कारण उसकी स्थिरता भारत की हिमालयी सुरक्षा दृष्टि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।[cxxxiv] दोनों देशों के बीच जलविद्युत सहयोग के माध्यम से आर्थिक परस्पर निर्भरता भी है, जिसमें भारत भूटान की जलविद्युत ऊर्जा का सबसे बड़ा निवेशक और आयातक है, जिससे भूटान के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन जाती है।[cxxxv] चीन-भूटान सीमा वार्ताओं की पृष्ठभूमि और व्यापक क्षेत्रीय रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत की निरंतर मानवीय भागीदारी ने भूटान के प्रमुख सुरक्षा[cxxxvi] और विकास साझेदार के रूप में उसकी भूमिका को और मजबूत किया।
मालदीव
मालदीव में भारत की आपदा सहायता पहलें निकटता और त्वरित संसाधन तैनाती को दर्शाती हैं, जिसने अचानक आने वाली आपदाओं के समय भारत को मालदीव का प्रथम सहायता प्रदाता बना दिया है।
समकालीन समय में मालदीव के लिए भारत की पहली बड़ी आपदा सहायता भूमिका दिसंबर 2004 के हिंद महासागर सुनामी के दौरान देखी गई, जिसने मालदीव की लगभग एक-तिहाई आबादी को प्रभावित किया था।[cxxxvii] भारत ने 27 दिसंबर 2004 को ‘ऑपरेशन कैटर’ के तहत वाटर प्यूरिफिकेशन यूनिट्स, चिकित्सा सामग्री और राहत सामग्री के साथ तीन नौसेना जहाज और दो हेलीकॉप्टर भेजे।[cxxxviii]
ऑपरेशन कैस्टर के तहत मालदीव को राहत सामग्री प्रदान करता भारत
स्रोत: द ग्लोबल इंडियन[cxxxix]
मालदीव के लिए भारत का एक और महत्वपूर्ण मानवीय हस्तक्षेप दिसंबर 2014 के माले जल संकट के दौरान हुआ। मालदीव से आधिकारिक अनुरोध मिलने के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन नीर’ शुरू किया और भारतीय नौसेना तथा भारतीय वायु सेना के माध्यम से लगभग 2300 टन पेयजल पहुँचाया।[cxl]
कोविड-19 के दौरान मालदीव के लिए भारत की सहायता में 1,00,000 कोविशील्ड खुराक और बजट सहायता के लिए 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता शामिल थी।[cxli] बाद में फरवरी 2021 में एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य में मालदीव ने कोविड-19 के दौरान भारत द्वारा दी गई विभिन्न प्रकार की सहायता के लिए आभार व्यक्त किया और विशेष रूप से वित्तीय सहायता को स्वीकार किया।[cxlii]
मालदीव में भारत की एचएडीआर पहलें जहाँ वास्तविक रूप से मानवीय हैं, वहीं वे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की व्यापक रणनीतिक सोच से भी जुड़ी हुई हैं। मालदीव रणनीतिक रूप से लगभग एक ‘टोल गेट’ की तरह स्थित है, जो पश्चिमी हिंद महासागर के चोकपॉइंट्स गुल्फ ऑफ एडन और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ और पूर्वी चोकपॉइंट स्ट्रेट ऑफ मलक्का के बीच स्थित है।[cxliii] इसलिए मालदीव के आसपास की अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग (आईएसएल) वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और भारत के लिए विशेष रूप से आवश्यक हैं, क्योंकि भारत के लगभग 50 प्रतिशत बाहरी व्यापार और लगभग 80 प्रतिशत ऊर्जा आयात इन समुद्री मार्गों से होकर गुजरते हैं।[cxliv] इस रणनीतिक भौगोलिक स्थिति को देखते हुए मालदीव के साथ स्थिरता और मजबूत सहयोग बनाए रखना हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के आर्थिक और सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
भारत के सबसे निकट स्थित पड़ोसी देशों में एचएडीआर अभियानों का निरंतर होते रहना कोई आकस्मिक नहीं है, बल्कि यह उसकी क्षेत्रीय नीति रूपरेखा में निहित एक सुनियोजित रणनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है, विशेष रूप से ‘नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी’ और ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’, जो स्पष्ट रूप से त्वरित संकट प्रतिक्रिया और विकास साझेदारी[cxlv] को प्राथमिकता देती हैं तथा पड़ोस के साथ केवल रणनीतिक और सैन्य संबंधों के बजाय स्थिरता, संपर्क और सहयोगात्मक सुरक्षा पर जोर देती हैं।[cxlvi] समुद्री स्तर पर भारत का सागर सिद्धांत और हाल की महासागर परिकल्पना हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा को मानव सुरक्षा, आपदा सहनशीलता, क्षेत्रीय स्थिरता और नौसैनिक शक्ति के संदर्भ में स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हैं।[cxlvii]
भारत के लिए एचएडीआर अभियान बार-बार नैतिक जिम्मेदारी तथा भौगोलिक स्थिति और क्षमता के परिणाम के रूप में पेश किए जाते हैं, जिसमें यह तर्क दिया जाता है कि भौगोलिक निकटता भारत को दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में सबसे स्वाभाविक प्रथम सहायता प्रदाता बनाती है।[cxlviii] भारत की एचएडीआर पहल को लेन-देन आधारित कूटनीति के रूप में नहीं बल्कि पड़ोस के प्रति जिम्मेदारी के रूप में देखा जाता है, जिसे बार-बार ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की सभ्यतागत भावना और क्षेत्र में एचएडीआर के शुद्ध प्रदाता के रूप में भारत की भूमिका से जोड़ा जाता है।[cxlix]
महत्वपूर्ण रूप से, अब तक पड़ोस में किए गए एचएडीआर अभियान क्षेत्र के बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में मानवीय कूटनीति में विश्वास से प्रभावित हैं, जहाँ आंतरिक राजनीतिक परिवर्तन, विकास संबंधी चुनौतियाँ, जलवायु संबंधी संवेदनशीलताएँ और क्षेत्रीय शक्ति प्रतिस्पर्धा द्विपक्षीय संबंधों पर गहरा प्रभाव डालती हैं। इस तरह भारत द्वारा एचएडीआर का संतुलित उपयोग न केवल तत्काल आवश्यकताओं को पूरा करता है बल्कि एक ऐसी मानक रूपरेखा को भी मजबूत करता है जो संप्रभुता का उल्लंघन किए बिना और हस्तक्षेपकारी प्रतीत हुए बिना सहयोगात्मक सहनशीलता, क्षेत्रीय एकीकरण और साझा सुरक्षा संबंधी ज़रूरतों को प्राथमिकता देती है।
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*सचिन यादव, भारतीय वैश्विक परिषद, नई दिल्ली में शोध प्रशिक्षु हैं।
अस्वीकरण : यहां व्यक्त किए गए विचार निजी हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
टिप्पणियाँ
[i] Levaillant, Mélissa. “Aiding Competition: The Geopolitics of Humanitarian Aid and Disaster Relief in the Indo-Pacific.” European Council on Foreign Relations, March 13, 2024. https://ecfr.eu/article/aiding-competition-the-geopolitics-of-humanitarian-aid-and-disaster-relief-in-the-indo-pacific/.
[ii] Ibid.
[iii] Singh Parmar, Sarabjeet . “Humanitarian Assistance and DisasterRelief (HADR) in India’sNational Strategy.” Journal of Defence Studies 6, no. 1 (January 2012). https://idsa.in/system/files/jds_6_1_SarabjeetParmar.pdf.
[iv] Ibid.
[v] Pal Singh Sidhu, Waheguru. “‘Vasudhaiva Kutumbakam’ for the 21st Century.” Brookings, May 22, 2017. https://www.brookings.edu/articles/vasudhaiva-kutumbakam-for-the-21st-century__trashed/.
[vi] Kumar, Sujeet. “Bharat Adopts Dharma-Based Diplomacy.” Organiser, August 13, 2025. https://organiser.org/2025/08/13/307924/bharat/bharat-adopts-dharma-based-diplomacy/.
[vii] Ministry of Science and Technology, Government of India. “Prime Minister’s Ten-Point Agenda for Disaster Risk Reduction,” 2016. https://dst.gov.in/sites/default/files/Annexure%20II%20details%20of%20ten%20point%20agenda.pdf.
[viii] National Disaster Management Authority, Government of India. “Guidelines on International Humanitarian Assistance and Disaster Relief,” October 2024. https://ndma.gov.in/sites/default/files/PDF/Guidelines/HADR_Guideline_Oct_2024.pdf.
[ix] Ibid.
[x] Ibid.
[xi] Ibid.
[xii] Ibid.
[xiii] Ministry of Home Affairs, Government of India. “The Disaster Management Act, 2005,” 2005. https://ndmindia.mha.gov.in/ndmi/images/The%20Disaster%20Management%20Act.
[xiv] National Disaster Management Authority, Government of India. “Guidelines on International Humanitarian Assistance and Disaster Relief,” October 2024. https://ndma.gov.in/sites/default/files/PDF/Guidelines/HADR_Guideline_Oct_2024.pdf.
[xv] Ibid.
[xvi] Saneet Chakradeo. “Neighbourhood First Responder: India’s Humanitarian Aid and Relief.” CSEP - Centre for Social and Economic Progress, August 18, 2020. https://csep.org/policy-brief/neighbourhood-first-responder-indias-humanitarian-assistance-and-disaster-relief/.
[xvii]Ibid.
[xviii] Ministry of External Affairs, Government of India. “Question No-2324 Relief and Medical Assistance to Other Nations,” March 20, 2025. https://www.mea.gov.in/rajya-sabha.htm?dtl%2F39214%2FQUESTION+NO2324+RELIEF+AND+MEDICAL+ASSISTANCE+TO+OTHER+NATIONS.
[xix] Ibid.
[xx] Nainar, Ammar. “India’s Foreign Assistance: Trends, Processes, and Priorities.” ORF America, May 28, 2024. https://orfamerica.org/newresearch/india-foreign-assistance-priorities.
[xxi] Booty, Natasha, Farouk Chothia, and Wedaeli Chibelushi. “Sudan War: A Simple Guide to What Is Happening.” BBC, November 13, 2025. https://www.bbc.com/news/articles/cjel2nn22z9o.
[xxii] Ministry of External Affairs, Government of India. “Details of Humanitarian Assistance Provided by India over the Last 5 Years,” n.d. https://www.mea.gov.in/Images/CPV/2324-20-03-2025-en-1.pdf.
[xxiii] Ministry of External Affairs, Government of India. “India Delivers Humanitarian Assistance to Syria,” February 12, 2021. https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/33519/India+delivers+humanitarian+assistance+to+Syria.
[xxiv] Ministry of External Affairs, Government of India. “Vaccine Maitri,” June 15, 2023. https://www.mea.gov.in/vaccine-maitri.htm.
[xxv] United Nations Economic and Social Commission for Asia and the Pacific. “The Disaster Riskscape across South and South West Asia,” 2019. https://www.unescap.org/sites/default/files/IDD-APDR-Subreport-SSWA.pdf#page=2.84.
[xxvi] Disaster Risk Management and Climate Change Unit, the World Bank Group. “Disaster Risk Management in South Asia: A Regional Overview,” December 2012. https://documents1.worldbank.org/curated/en/648281468170977802/pdf/763020WP0P11400Box0379791B00PUBLIC0.pdf.
[xxvii] Ibid.
[xxviii] The World Bank Group. “Population, Total - South Asia,” 2024. https://data.worldbank.org/indicator/SP.POP.TOTL?locations=8S.
[xxix] Amey Velangi. “India’s Unstable Neighbourhood and Its Impact on the Indian Economy.” Geojuristoday, August 5, 2024. https://www.geojuristoday.in/post/india-s-unstable-neighbourhood-and-its-impact-on-the-indian-economy.
[xxx] World Geostrategic Insights. “The Shifting Sands: South Asia’s Evolving Geopolitical Landscape,” August 29, 2025. https://www.wgi.world/the-shifting-sands-south-asias-evolving-geopolitical-landscape/.
[xxxi] Saneet Chakradeo. “Neighbourhood First Responder: India’s Humanitarian Aid and Relief.” CSEP - Centre for Social and Economic Progress, August 18, 2020. https://csep.org/policy-brief/neighbourhood-first-responder-indias-humanitarian-assistance-and-disaster-relief/.
[xxxii] NDTV. “A Look Back at the 2015 Nepal Earthquake When 9,000 People Died,” March 5, 2026. https://www.ndtv.com/world-news/2015-nepal-earthquake-when-9-000-people-died-in-one-of-worlds-worst-disasters-11139720.
[xxxiii] Press Information Bureau, Government of India. “Army Launches Operation Maitri,” April 26, 2015. https://www.pib.gov.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=118739.
[xxxiv] Press Information Bureau, Government of India. “Indian Armed Forces Wind up Their Biggest Relief and Rescue Operations Abroad Ever,” June 5, 2015. https://www.pib.gov.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=122332.
[xxxv] Indian Medical Association. “IMA Relief Efforts for Nepal Earthquake Victims,” 2015. https://www.ima-india.org/ima/free-way-page.php?pid=309.
[xxxvi] Press Information Bureau, Government of India. “Indian Armed Forces Wind up Their Biggest Relief and Rescue Operations Abroad Ever,” June 5, 2015. https://www.pib.gov.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=122332.
[xxxvii] NDTV. “Nepal Ambassador Thanks Indian Government for Help after Earthquake,” April 26, 2015. https://www.ndtv.com/world-news/nepal-earthquake-nepal-ambassador-thanks-indian-government-for-rescue-help-758258.
[xxxviii] Embassy of India, Kathmandu, Nepal. “Handing over of Earthquake Relief Materials to the Government of Nepal,” November 5, 2023. https://www.indembkathmandu.gov.in/media-detail/159.
[xxxix] Embassy of India, Kathmandu, Nepal. “India Gifts 23 Tonnes of Essential Medicines to Nepal to Fight COVID-19,” April 22, 2020. https://www.indembkathmandu.gov.in/media-detail/338.
[xl] Embassy of India, Kathmandu, Nepal. “Government of India Gifted One Million Doses of ‘Made in India’ COVID19 Vaccines to Nepal,” January 21, 2021. https://www.indembkathmandu.gov.in/media-detail/390.
[xli] Embassy of India, Kathmandu, Nepal. “Indian Army Hands over Medical Equipment to Nepali Army,” June 21, 2021. https://www.indembkathmandu.gov.in/media-detail/216.
[xlii]UNICEF. “Children Account for Half of Dead and Injured in Nepal Earthquake - UNICEF,” November 7, 2023. https://www.unicef.org/press-releases/children-account-half-dead-and-injured-nepal-earthquake-unicef.
[xliii] kathmandupost.com. “Government in No Rush to Seek Foreign Help for Quake Relief,” November 5, 2023. https://kathmandupost.com/national/2023/11/05/government-in-no-rush-to-seek-foreign-help-for-quake-relief.
[xliv] GorakhaPatra. “India Donates Relief Materials Worth Rs 160 Million,” November 5, 2023. https://risingnepaldaily.com/news/34668.
[xlv] NDTV. “4th Consignment of Relief Materials, Equipment from India Arrives in Quake-Hit Nepal,” November 21, 2023. https://www.ndtv.com/world-news/4th-consignment-of-relief-materials-equipment-from-india-arrives-in-quake-hit-nepal-4593293..
[xlvi]https://www.indembkathmandu.gov.in/media-detail/33#:~:text=The%20first%20consignment%20of%20more,Nepal%20on%205%20November%202023
[xlvii] Prasain, Sangam. “The Kathmandu Post.” @kathmandupost, March 2, 2023. https://kathmandupost.com/money/2023/03/02/nepal-s-growth-to-crawl-to-4-4-percent-amid-slow-trade-poor-investment..
[xlviii]प्रियेश मिश्र. “भारत ने निभाया पड़ोसी धर्म तो गदगद हुआ नेपाल, राजदूत ने दिल खोलकर की मोदी सरकार की तारीफ.” Navbharat Times, November 6, 2023. https://navbharattimes.indiatimes.com/world/asian-countries/nepal-envoy-welcomes-indian-assistance-to-nepal-aftermath-of-the-earthquake/articleshow/105006574.cms#google_vignette.
[xlix]OpIndia. “Nepal Earthquake: India Hands over 5th Tranche of Relief Material, Announces NPR 1000 Crores Assistance during Jaishankar’s Visit,” January 5, 2024. https://www.opindia.com/2024/01/eam-jaishankar-kathmandu-india-announces-npr-1000-crores-help-for-nepal-earthquake-relief/.
[l] Ghosh, Sounak. “Nepal between India and China.” Modern Diplomacy, September 4, 2024. https://moderndiplomacy.eu/2024/09/05/nepal-between-india-and-china/.
[li] GFDRR. “PDNA Undertaken after Cyclone Nargis Killed 84,537 People,” n.d. https://www.gfdrr.org/en/myanmar-2008-pdna-undertaken-after-cyclone-nargis-killed-84537-people.
[lii] Ministry of External Affairs, Government of India. “On India’s Assistance for the Cyclone in Myanmar,” May 12, 2008. https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl%2F2053%2FOn+Indias+assista=.
[liii] Embassy of India, Yangon, Myanmar. “Humanitarian Assistance & Disaster Relief (HADR),” 2016. https://embassyofindiayangon.gov.in/pages/NTQx.
[liv] IANS. “India Pledges Funds Myanmar’s Cycone-Hit Buddhist Shrine,” June 3, 2008. https://twocircles.net/2008jun03/india_pledges_funds_myanmars_cycone_hit_buddhist_shrine.html.
[lv] Embassy of India, Yangon, Myanmar. “Humanitarian Assistance & Disaster Relief (HADR),” 2016. https://embassyofindiayangon.gov.in/pages/NTQx.
[lvi] Ministry of External Affairs, Government of India. “Joint Statement during the Visit of Chairman, State Peace and Development Council of Myanmar,” July 27, 2010. https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/4283/Joint+Statement+during+the+visit+of+Chairman+State+Peace+and+Development+Council+of+Myanmar.
[lvii] World Bank. “Myanmar Floods and Landslides: Post Disaster Needs Assessment,” 2015. https://www.worldbank.org/en/country/myanmar/publication/myanmar-floods-and-landslides-post-disaster-needs-assessment.
[lviii] Ministry of External Affairs, Government of India. “Disaster Relief Support to Myanmar in Response to Flood Emergency,” August 6, 2015. https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl%2F25655%2F=.
[lix] Embassy of India, Yangon, Myanmar. “Humanitarian Assistance & Disaster Relief (HADR),” 2016. https://embassyofindiayangon.gov.in/pages/NTQx.
[lx] ReliefWeb. “India’s Humanitarian Aid for Cyclone Victims Arrives,” June 7, 2017. https://reliefweb.int/report/myanmar/india-s-humanitarian-aid-cyclone-victims-arrives.
[lxi] Ministry of External Affairs, Government of India. “Details of Humanitarian Assistance Provided by India over the Last 5 Years,” March 20, 2025. https://www.mea.gov.in/Images/CPV/2324-20-03-2025-en-1.pdf.
[lxii] https://embassyofindiayangon.gov.in/pages/NTQx
[lxiii] Embassy of India, Yangon, Myanmar. “Handing over of Medical Supplies to Myanmar,” May 5, 2020. https://embassyofindiayangon.gov.in/public_files/assets/pdf/Medical_English_Version.pdf.
[lxiv] Embassy of India, Yangon, Myanmar. “Handing over of COVISHIELD Vaccine to Myanmar,” January 22, 2021. https://embassyofindiayangon.gov.in/public_files/assets/pdf/English_EMBASSY_OF_INDIA_PRESS_RELEASE.pdf.
[lxv] Global New Light Of Myanmar. “Rice and Wheat Donated by India to Be Distributed in Yangon Region Coordinated - Global New Light of Myanmar,” April 14, 2022. https://www.gnlm.com.mm/rice-and-wheat-donated-by-india-to-be-distributed-in-yangon-region-coordinated/.
[lxvi] NASA Science. “Cyclone Mocha Strikes Myanmar,” May 15, 2023. https://science.nasa.gov/earth/earth-observatory/cyclone-mocha-strikes-myanmar-151343/
[lxvii] World Bank. “Extremely Severe Cyclonic Storm Mocha, May 2023,Myanmar”:, June 29, 2023. https://thedocs.worldbank.org/en/doc/d547c7dcb949a8b07aea2cc2e66a7bbc-0070062023/original/GRADE-CycloneMochaMay23Myanmar.pdf.
[lxviii] The Hindu. “India Launches ‘Operation Karuna’ to Assist Cyclone-Hit Myanmar,” May 18, 2023. https://www.thehindu.com/news/national/india-launches-operation-karuna-to-assist-cyclone-hit-myanmar/article66867347.ece.
[lxix] Ibid.
[lxx]World Bank. “Myanmar September 2024 Typhoon Yagi Floods: Flood Extent Note,” January 2025. https://documents1.worldbank.org/curated/en/099061125060524995/pdf/P507337-0e233021-6a0c-45ba-a171-8641c52ae0f2.pdf.
[lxxi] Ministry of External Affairs, Government of India. “Operation Sadbhav: India Sends 53 Tonnes of Emergency Flood Relief Assistance Worth US$ 1 Million to the Union of the Republic of Myanmar,” September 17, 2024. https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/38300/Operation_Sadbhav_India_sends_53_tonnes_of_emergency_flood_relief_assistance_worth_US_1_million_to_the_Peoples_Republic_of_Myanmar.
[lxxii]Rajendran, C P. “How Did the Myanmar Earthquake Occur? | Explained.” The Hindu, April 3, 2025. https://www.thehindu.com/sci-tech/science/how-did-the-myanmar-earthquake-occur-explained/article69403721.ece.
[lxxiii]Mishra, Vibhu. “Myanmar: Thousands Remain in Crisis Weeks after Deadly Earthquakes.” UN News, April 18, 2025. https://news.un.org/en/story/2025/04/1162401.
[lxxiv]Ministry of External Affairs, Government of India. “Press Brief on Operation Brahma ,” April 1, 2025. https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl%2F39317%2FPress_Brief_on_Operation_Brahma_2000_Hrs_April_01_2025=.
[lxxv]National Disaster Response Force, Ministry of Home Affairs, Government of India . “India Extends Humanitarian Aid and Deploys NDRF Rescue Team to Myanmar Following Devastating Earthquake | NDRF - National Disaster Response Force,” March 29, 2025. https://www.ndrf.gov.in/en/pressrelease/india-extends-humanitarian-aid-and-deploys-ndrf-rescue-team-myanmar-following.
[lxxvi]The Hindu. “Field Hospital Operationalised in Mandalay, India Sends More Relief in Ships and Aircraft,” April 1, 2025. https://www.thehindu.com/news/national/field-hospital-operationalised-in-mandalay-india-sends-more-relief-in-ships-and-aircraft/article69400093.ece.
[lxxvii] Misra, Apoorva, and Akash Sharma. “Myanmar Earthquake: Indian Army Medics to Receive WHO Emergency Medical Team Accreditation.” News18, April 15, 2025. https://www.news18.com/india/myanmar-earthquake-indian-army-medics-to-receive-who-emergency-medical-team-accreditation-ws-kl-9299318.html.
[lxxviii]https://www.thehindu.com/news/national/field-hospital-operationalised-in-mandalay-india-sends-more-relief-in-ships-and-aircraft/article69400093.ece
[lxxix] Embassyofindiayangon.gov.in. “Humanitarian Assistance & Disaster Relief (HADR),” 2026. https://embassyofindiayangon.gov.in/pages/NTQx.
[lxxx]ddnews. “म्यांमार भूकंप राहत अभियान : भारत का ऑपरेशन ब्रह्मा जारी, स्थानीय लोगों ने जताया आभार,” April 2, 2025. https://ddnews.gov.in/myanmar-earthquake-relief-operation-indias-operation-brahma-continues-local-people-express-gratitude/.
[lxxxi] Prem, Ashvini. “A Guide to the 2021 Myanmar Military Coup.” LSE Undergraduate Political Review, March 7, 2023. https://blogs.lse.ac.uk/lseupr/2023/03/07/a-guide-to-the-2021-myanmar-military-coup/.
[lxxxii] Glendinning, Aiden. “Threat to Livelihoods Deepens as Myanmar Economic Outlook Remains Weak.” World Bank, June 12, 2024. https://www.worldbank.org/en/news/press-release/2024/06/12/threat-to-livelihoods-deepens-as-myanmar-economic-outlook-remains-weak.
[lxxxiii] Raj, Rohit . “The Indo-Myanmar Border Fence: Challenges and Way Forward.” MP-IDSA, March 6, 2025. https://idsa.in/publisher/comments/the-indo-myanmar-border-fence-challenges-and-way-forward.
[lxxxiv] Roy, Nilova. “Indian Air Force Drops Supplies to Sri Lankan Tamils.” The Washington Post, June 5, 1987. https://www.washingtonpost.com/archive/politics/1987/06/05/indian-air-force-drops-supplies-to-sri-lankan-tamils/d7bbdbe0-0103-42c9-9b7f-689b7a2fab3e/.
[lxxxv] The Hindu. “Sri Lanka Marks 21st Anniversary of 2004 Tsunami; Remembers over 35,000 Dead,” December 31, 2025. https://www.thehindu.com/news/international/sri-lanka-marks-21st-anniversary-of-2004-tsunami-remembers-over-35000-dead/article70439333.ece.
[lxxxvi] High Commission of India, Colombo, Sri Lanka. “Ten Years on from the 2004 Tsunami: Remembering India-Sri Lanka Solidarity - Press Releases | High Commission of India, Colombo, Sri Lanka,” July 13, 2015. https://www.hcicolombo.gov.in/section/press-releases/ten-years-on-from-the-2004-tsunami-remembering-india-sri-lanka-solidarity/?.
[lxxxvii] ReliefWeb. “India Reassures Long-Term Help for Sri Lanka,” April 25, 2005. https://reliefweb.int/report/sri-lanka/india-reassures-long-term-help-sri-lanka.
[lxxxviii] Ministry of External Affairs, Government of India. “Assistance to Sri Lanka,” March 31, 2023. https://www.mea.gov.in/lok-sabha.htm?dtl%2F36431%2Fquestion+no4900+assistance+to+sri+lanka.
[lxxxix] The Times of India. “India’s Gift of 5 Lakh Doses of Covid-19 Vaccines Reach Sri Lanka,” January 28, 2021. https://timesofindia.indiatimes.com/india/indias-gift-of-5-lakh-doses-of-covid-19-vaccines-reach-sri-lanka/articleshow/80496661.cms.
[xc] Who.int. “Cyclone Ditwah 2025,” 2025. https://www.who.int/srilanka/emergencies/cyclone-ditwah-2025.
[xci]Ministry of External Affairs, Government of India. “India Undertakes Operation Sagar Bandhu for Emergency HADR Assistance to Sri Lanka Following Cyclone Ditwah,” December 1, 2025. https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl%2F40354%2FIndia_Undertakes_Operation_Sagar_Bandhu_for_Emergency_HADR_Assistance_to_Sri_Lanka_following_Cyclone_Ditwah=.
[xcii] Ibid.
[xciii] Ibid.
[xciv]Ministry of External Affairs, Government of India. “Operation Sagar Bandhu Continues Providing Emergency HADR Support to Sri Lanka Following Cyclone Ditwah,” December 9, 2025. https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl%2F40420%2FOperation+Sagar+Bandhu+continues+providing+Emergency+HADR+Support+to+Sri+Lanka+following+Cyclone+Ditwah=.
[xcv] Ibid.
[xcvi] Ibid.
[xcvii] Pib.gov.in. “Beyond Battlefield: Indian Armed Forces in Humanitarian Assistance and Disaster Relief,” February 15, 2026. https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?id=157371&NoteId=157371&ModuleId=3®=3&lang=2.
[xcviii]Ministry of External Affairs, Government of India. “Operation Sagar Bandhu Continues Providing Emergency HADR Support to Sri Lanka Following Cyclone Ditwah,” December 9, 2025. https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl%2F40420%2FOperation+Sagar+Bandhu+continues+providing+Emergency+HADR+Support+to+Sri+Lanka+following+Cyclone+Ditwah=.
[xcix] Singh, Abhinav. “Sri Lankan Thanks ‘Indian Soldiers’ for Relief Efforts during Cyclone Ditwah: ‘Forever Grateful.’” www.ndtv.com. NDTV, December 2, 2025. https://www.ndtv.com/feature/sri-lankan-thanks-indian-soldiers-for-relief-efforts-during-cyclone-ditwah-forever-grateful-9734602.
[c]https://www.newsonair.gov.in/india-completes-third-bailey-bridge-in-sri-lanka-under-usd-450-million-post-cyclone-ditwah-assistance/
[ci] World Bank. “Sri Lanka’s Economic Recovery Remains Incomplete as Key Challenges Remain.” World Bank Group, October 7, 2025. https://www.worldbank.org/en/news/press-release/2025/10/07/sri-lanka-s-economic-recovery-remains-incomplete-as-key-challenges-remain.
[cii] Shihar Aneez. “Disaster Diplomacy Aids Sri Lanka as World Rallies after Ditwah’s Trail of Destruction.” EconomyNext, December 10, 2025. https://economynext.com/disaster-diplomacy-aids-sri-lanka-as-world-rallies-after-ditwahs-trail-of-destruction-252276/.
[ciii] Ravihari, KMV, VS Suriyabandara, and KBC Madhushan. “An Analytical Study of Sri Lanka’s Geostrategic Importance in the India-China Power Rivalry.” Journal of Frontiers in Multidisciplinary Research 6, no. 2 (2025): 489–92. https://doi.org/10.54660/.jfmr.2025.6.2.489-492.
[civ] Ibid.
[cv] Ibid.
[cvi]https://www.thehindu.com/news/national/india-sends-more-relief-to-sri-lanka-after-cyclone-ditwah/article70339494.ece
[cvii] Ministry of External Affairs, Government of India. “Evacuation of Indians and Afghans under ‘Operation Devi Shakti’ and Shipment of Humanitarian Assistance for the People of Afghanistan,” December 11, 2021. https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl%2F34643%2FEvacuation+of+Indians+and+Afghans+under+Operation+Devi+Shakti+and+shipment+of+humanitarian+assistance+for+the+people+of+Afghanistan.
[cviii] Ibid.
[cix]https://www.news18.com/news/india/india-evacuated-565-people-from-afghanistan-under-operation-devi-shakti-mea-4516214.html
[cx] Ministry of External Affairs, Government of India. “India’s Humanitarian Assistance to Afghanistan,” June 2, 2022. https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/35381/Indias+humanitarian+assistance+to+Afghanistan.
[cxi] The Times of India. “Afghanistan Thanks India for Sending 5 Lakh Coronavirus Vaccine Doses,” February 7, 2021. https://timesofindia.indiatimes.com/india/afghanistan-thanks-india-for-sending-5-lakh-coronavirus-vaccine-doses/articleshow/80738280.cms.
[cxii] DD News. “India Sends 73 Tonnes of Medicines and Vaccines to Support Afghanistan’s Healthcare,” November 28, 2025. https://www.newsonair.gov.in/india-sends-73-tonnes-of-medicines-and-vaccines-to-support-afghanistans-healthcare/.
[cxiii] Press Information Bureau, Government of India. “Special Train Carrying Relief Supplies Leaves for Pakistan,” October 14, 2005. https://www.pib.gov.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=12676®=3&lang=2.
[cxiv] ReliefWeb. “GOI to Despatch Another Consignment of Relief Material to Pakistan on November 17,” November 16, 2005. https://reliefweb.int/report/pakistan/goi-despatch-another-consignment-relief-material-pakistan-november-17.
[cxv] Kirsch, Thomas D., Christina Wadhwani, Lauren Sauer, Shannon Doocy, and Christina Catlett. “Impact of the 2010 Pakistan Floods on Rural and Urban Populations at Six Months.” PLoS Currents 1 (July 22, 2012). https://doi.org/10.1371/4fdfb212d2432.
[cxvi] Press Information Bureau, Government of India. “India Offers Assistance of $ 25 Million to Pakistan for Flood Relief,” August 31, 2010. https://www.pib.gov.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=65460&utm_source=®=3&lang=2.
[cxvii] Walker, Peter. “Pakistan ‘Welcomes’ $5m Flood Aid from Rival India.” the Guardian, August 20, 2010. https://www.theguardian.com/world/2010/aug/20/pakistan-welcomes-flood-aid-india.
[cxviii] Ministry of External Affairs, Government of India. “On India’s Relief Package for Cyclone Victims in Bangladesh,” November 19, 2007. https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/3398/OnIndiasreliefpackageforcyclonevictimsinBangladesh.
[cxix] Ministry of External Affairs, Government of India. “Transcript of EAM’s Joint Press Conference in Dhaka,” February 9, 2009. https://www.mea.gov.in/incoming-visit-detail.htm?5513/Transcript+of+EAMs+Joint+Press+Conference+in+Dhaka=
[cxx] Ministry of External Affairs, Government of India. “Joint Statement on the Occasion of the Visit of the PM of India to Bangladesh,” September 7, 2011. https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/5147/Joint+Statement+on+the+occassion+of+the+visit+of+the+PM+of+India+to+Bangladesh=.
[cxxi] Press Information Bureau, Government of India. “Operation Insaaniyat,” September 14, 2017. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1502990®=3&lang=2.
[cxxii] Ministry of External Affairs, Government of India. “Details of Humanitarian Assistance Provided by India over the Last 5 Years,” n.d. https://www.mea.gov.in/Images/CPV/2324-20-03-2025-en-1.pdf.
[cxxiii] NDTV . “India Gifts 1.2 Million Free Doses of Covid Vaccine to Bangladesh,” March 27, 2021. https://www.ndtv.com/india-news/india-gifts-1-2-million-free-doses-of-covid-vaccine-to-bangladesh-2400308.
[cxxiv] Ahmed , Kazi Fahim . “Why Bangladesh Is Important to India?” The Geopolitics, August 30, 2022. https://thegeopolitics.com/why-bangladesh-is-important-to-india/.
[cxxv] Ibid.
[cxxvi] The Times of India. “India Dispatches 1.5 Lakh Doses of Covishield Vaccine as Gift to Bhutan,” January 20, 2021. https://timesofindia.indiatimes.com/india/covid-19-india-dispatches-1-5-lakh-doses-of-covishield-vaccine-as-gift-to-bhutan/articleshow/80356867.cms.
[cxxvii] Digital Sansad. “Relief and Medical Assistance to Other Nations,” March 20, 2025. https://sansad.in/getFile/annex/267/AU2324_YjqdzN.pdf?source=pqars.
[cxxviii] NDTV. “Bhutan Prime Minister Thanks India for 4 Lakh Doses of Covid Vaccine,” March 22, 2021. https://www.ndtv.com/india-news/bhutan-prime-minister-thanks-india-for-4-lakh-doses-of-covid-vaccine-2396539.
[cxxix] SANDRP. “Oct 2025: Bhutan’s Tala Dam Overtopped,” October 7, 2025. https://sandrp.in/2025/10/07/oct-2025-bhutans-tala-dam-overtopped/.
[cxxx] Arun Dhital. “Mamata Banerjee Demands Compensation from Bhutan for North Bengal Floods That Killed over 30.” Swarajyamag, October 14, 2025. https://swarajyamag.com/news-brief/mamata-banerjee-demanded-compensation-from-bhutan-for-north-bengal-floods-that-killed-over-30.
[cxxxi] Newsonair.gov.in. “Bhutan Flood Rescue Successful with Support from Indian Army,” October 5, 2025. https://www.newsonair.gov.in/bhutan-flood-rescue-successful-with-support-from-indian-army/.
[cxxxii] ANI News. “Indian Army Rescues Civilians in Flood-Hit Bhutan amid Challenging Conditions,” October 5, 2025. https://www.aninews.in/news/world/asia/indian-army-rescues-civilians-in-flood-hit-bhutan-amid-challenging-conditions20251005203016/.
[cxxxiii] https://www.newsonair.gov.in/bhutan-flood-rescue-successful-with-support-from-indian-army/
[cxxxiv] Stobdan, P. “India and Bhutan: The Strategic Imperative.” MP-IDSA, 2014. https://idsa.in/publisher/occasionalpaper/india-and-bhutan-the-strategic-imperative.
[cxxxv]Ministry of Foreign Affairs, Government of Bhutan. “Bhutan-India Hydropower Relations – Royal Bhutanese Embassy, New Delhi,” n.d. https://www.mfa.gov.bt/rbedelhi/bhutan-india-relations/bhutan-india-hydropower-relations/.
[cxxxvi] Joshi, Manoj. “Bhutan-China: Settling Border Issues.” orfonline.org, November 16, 2023. https://www.orfonline.org/expert-speak/bhutan-china-settling-border-issues.
[cxxxvii] Kan, H, M Ali, and M Riyaz. “The 2004 Indian Ocean Tsunami in Maldives: Waves and Disaster Affected by Shape of Coral Reefs and Islands.” AGU Fall Meeting Abstracts 2005 (December 2005): U11A0814. http://ui.adsabs.harvard.edu/abs/2005AGUFM.U11A0814K/abstract.
[cxxxviii] Ministry of External Affairs, Government of India. “Update in the Wake of Destruction Caused by Tsunami Waves,” December 27, 2004. https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/7333/MEA+update+in+the+wake+of+destruction+caused+by+Tsunami+waves.
[cxxxix]https://www.globalindian.com/story/brand-india/standing-with-the-world-major-relief-operations-undertaken-by-the-indian-agencies/
[cxl] NDTV. “Maldives Water Crisis: India Transports 1,000 Tonnes of Fresh Water to Male,” December 7, 2014. https://www.ndtv.com/india-news/maldives-water-crisis-india-transports-1-000-tonnes-of-fresh-water-to-male-709771.
[cxli] Ministry of External Affairs, Government of India. “Joint Press Statement on Official Visit of External Affairs Minister of India to the Maldives,” February 21, 2021. https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl%2F33556%2Fjoint+press+statement+on+official+visit+of+external+affairs+minister+of+india+to+the+maldives.
[cxlii] Ibid.
[cxliii] Ritika V Kapoor. “Significance of the Maldives to India.” National Maritime Foundation, April 9, 2020. https://maritimeindia.org/significance-of-the-maldives-to-india/.
[cxliv] Ibid.
[cxlv] Ministry of External Affairs, Government of India. “QUESTION NO.3692 NEIGHBOURHOOD FIRST POLICY,” 2026. https://www.mea.gov.in/rajya-sabha.htm?dtl/31673/QUESTION+NO3692+NEIGHBOURHOOD+FIRST+POLICY
[cxlvi] Pib.gov.in. “Act East Policy,” 2015. https://www.pib.gov.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=133837.
[cxlvii] Pib.gov.in. “Union Home Minister and Minister of Cooperation Shri Amit Shah Inaugurates the ‘India Maritime Week - 2025’ in Mumbai,” October 27, 2025. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2182946.
[cxlviii] “Ministry of External Affairs, Government of India. “India-Maldives Bilateral Relations,” 2024. https://www.mea.gov.in/Portal/ForeignRelation/Bilateral-Brief-Unclassified-March-2024.pdf.
[cxlix] Chauhan, Anil. “India Has Emerged as First Responder in Humanitarian Assistance and Disaster Relief (HADR) at Global Level.” Pib.gov.in, March 14, 2023. https://www.pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1906761®=3&lang=2.