सारांश: भारत और नेपाल के लोगों के बीच क्षेत्रीय पर्यावरण भूगोल और आपसी संबंधों का जटिल ताना– बाना, साथ ही खुली अंतरराष्ट्रीय सीमाएं, विभिन्न संदर्भों में सीमा–पार अपराधों की प्रकृति और उनके पीछे के उद्देश्यों को और भी अधिक जटिल बना देते हैं। परिणामस्वरूप, सुरक्षा सहयोग और मज़बूत कानूनी तालमेल अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाते हैं। आपराधिक मामलों में आपसी कानूनी सहायता पर हाल ही में हस्ताक्षरित समझौता, इन मुद्दों को प्रभावी तरीके से सुलझाने और क्षेत्रीय स्थिरता को बेहतर बनाने के लिए ठोस कानूनी ढांचा स्थापित करके, भारत एवं नेपाल के बीच सुरक्षा सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करता है।
परिचय
17 फरवरी 2026 को, भारत और नेपाल ने काठमांडू में आपराधिक मामलों में,[i] आपसी कानूनी सहायता (एमएलए/MLA) पर लंबे समय से लंबित समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके साथ ही दोनों देशों के बीच वर्षों से चल रही बातचीत समाप्त हो गई। यह समझौता दोनों देशों के बीच आपराधिक जांच, अभियोजन और न्यायिक कार्यवाही में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए औपचारिक कानूनी ढांचा स्थापित करता है।[ii] इसमें साक्ष्य एकत्र करना और साझा करना, जानकारी का आदान–प्रदान करना और सक्षम प्राधिकारियों के बीच प्रयासों का समन्वय करना शामिल है।[iii]
भारत के विभिन्न देशों के साथ 48 द्विपक्षीय प्रत्यर्पण समझौते हैं– जिनमें अफ़गानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान और नेपाल शामिल है और साथ ही 12 प्रत्यर्पण व्यव्स्थाएं भी हैं, जिनमें से एक श्रीलंका के साथ है।[iv] इसके अलावा, भारत और नेपाल बिमस्टेक (BIMSTEC) के दूसरे सदस्य देशों के साथ मिलकर, आपराधिक मामलों में आपसी कानूनी सहायता से जुड़े बहुपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षरकर्ता हैं।[v] यह देखते हुए कि नेपाल की सीमाएँ भारत के पाँच राज्यों से लगती हैं। भारत के साथ उसके मज़बूत सांस्कृतिक व आपसी संबंध और व्यापक आर्थिक एवं व्यापारिक संबंध हैं, वह सीमा–पार अपराधों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बना हुआ है। इनमें मानव तस्करी, अवैध घुसपैठ, नशीले पदार्थों की तस्करी, आतंकवाद से जुड़े अपराध, तस्करी, साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी शामिल हैं। इस संदर्भ में, भारत और नेपाल के बीच एमएलए समझौता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।
भारत और नेपाल के बीच सुरक्षा, कानूनी और प्रत्यर्पण सहयोग की पृष्ठभूमि l
भारत– नेपाल सुरक्षा सहयोग अक्टूबर 1953 से चला आ रहा है जब दोनों देशों के बीच पहली प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस संधि ने औपचारिक कानूनी ढांचा स्थापित किया, जिसके तहत दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि वे उन व्यक्तियों को एक–दूसरे को सौंप देंगे, जिन पर दूसरे देश के क्षेत्र में किए गए कुछ गंभीर अपराधों का आरोप है या जिन्हें उन अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया है।
इस संधि का मुख्य उद्देश्य अपराधियों को खुली सीमा पार करके न्याय से बचने से रोकना और आपराधिक मामलों में, आपसी लेन–देन और संप्रभुता के प्रति आपसी सम्मान पर आधारित सहयोग को बढ़ावा देना था। इस संधि में यह प्रावधान किया गया था कि कुछ निश्चित अपराधों के लिए प्रत्यर्पण की अनुमति दी जाएगी, जो कि प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों के अधीन होगा, इन उपायों में पर्याप्त सबूत और उचित दस्तावेज़ीकरण की आवश्यकता भी शामिल है।[vi]
इसमें उन शर्तों का भी उल्लेख किया गया था जिनके तहत प्रत्यर्पण से इनकार किया जा सकता था– जिनमें राजनीतिक अपराधों से जुड़े मामले भी शामिल थे और साथ ही राष्ट्रीयता, खर्चों एवं कानूनी प्रक्रियाओं से संबंधित नियम भी निर्धारित किए गए थे।[vii] इस संधि ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच कानून प्रवर्तन सहयोग को मजबूत करने और कानून के शासन को बनाए रखने के लिए व्यवस्थित और पारस्परिक तंत्र स्थापित किया।[viii]
2000 के दशक की शुरुआत में विशेष रूप से 1999 के विमान अपहरण[ix] और इसके बाद भारत में अपराध करने के बाद अपराधियों के नेपाल भाग जाने के मामलों में हुई वृद्धि के बाद, प्रत्यर्पण संधि में संशोधन की आवश्यकता महसूस हुई। इसके अतिरिक्त, अपराधों के बदलते स्वरूप और अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण मानदंडों में आए बदलावों ने भी इस संशोधन की आवश्यकता को और अधिक रेखांकित किया। वर्ष 1953 की संधि का दायरा सीमित था, क्योंकि यह केवल विशिष्ट अपराधों एवं केवल अनुरोध करने वाले देश के नागरिकों पर ही लागू होती थी।
तीसरे देशों के अपराधियों को भी शामिल करने के लिए प्रत्यर्पण प्रावधानों का विस्तार करने की आवश्यकता भी बढ़ती जा रही थी। परिणामस्वरूप, संधि में संशोधन के लिए बातचीत हुई, और 19–20 जनवरी 2005 को गृह सचिव–स्तरीय वार्ता के दौरान नई प्रत्यर्पण संधि का मसौदा और एमएलए पर समझौते को अंतिम रूप दिया गया।[x] हालाँकि, उस समय यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी, फिर भी एक अद्यतन प्रत्यर्पण संधि के लिए वार्ता जारी रही। जुलाई 2025 में, गृह सचिव–स्तरीय वार्ता के दौरान, संशोधित एमएलए समझौते के मसौदे को अंतिम रूप दिया गया, और दोनों पक्ष इसके शीघ्र समापन की दिशा में काम करने पर सहमत हुए।[xi]
हालाँकि, संशोधित प्रत्यर्पण संधि पर अभी भी चर्चा जारी है। ऐसी उम्मीद थी कि नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली की प्रस्तावित यात्रा के दौरान नई दिल्ली में नए एमएलए समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।[xii] हालाँकि, सितंबर 2025 में जेन– ज़ी (Gen-Z) के विरोध– प्रदर्शनों और ओली के नेतृत्व वाली सरकार को हटाए जाने के कारण, इस समझौते पर हस्ताक्षर करने में देरी हुई।
एमएलए पर हस्ताक्षर करने की तारीख तय करने के लिए द्विपक्षीय वार्ता पिछले छह महीनों से चल रही थी, जो फरवरी 2026 में संपन्न हुई। यह समझौता राजनयिक अधिसूचना के बाद लागू होगा और इससे संस्थागत समन्वय में सुधार होने की उम्मीद है।
सीमावर्ती राज्यों में सीमा–पार अपराधों की रोकथाम के लिए एमएलए का महत्व
एमएलए समझौता सीमावर्ती राज्यों के लिए सीमा–पार अपराधों– जिनमें मनी लॉन्ड्रिंग, महिलाओं और बच्चों की तस्करी और तीसरे देश के नागरिकों की अवैध सीमा–पार आवाजाही शामिल है, से निपटने में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे भारतीय राज्य नेपाल के तराई क्षेत्र के साथ लगभग 1,300 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं। यह एक खुली और मुक्त सीमा है जहाँ लोगों एवं सामान की सीमा– पार आवाजाही अक्सर होती रहती है। इस संदर्भ को देखते हुए, अपराधियों के लिए अपराध करना और छिप जाना आसान हो जाता है।
अनुसंधान से पता चलता है कि भारत– नेपाल सीमा के खुलेपन ने, दोनों तरफ प्रशासन और कानून– व्यवस्था में अंतर के कारण, आपराधिक गतिविधियों के अवसर पैदा किए। ऐतिहासिक वृत्तांतों से पता चलता है कि औपनिवेशिक काल में डाक वाहकों को निशाना बनाकर सुनियोजित सड़क– किनारे लूटपाट की जाती थी।[xiii] औपनिवेशिक अभिलेखों से यह भी पता चलता है कि जैसे– जैसे वर्षों के दौरान सीमा– पार आवागमन बढ़ा, डाक कर्मचारियों को निशाना बनाने वाली सशस्त्र लूट की घटनाएं भी अधिक बार होने लगीं और कभी– कभी इनके परिणामस्वरूप जान भी चली जाती थी।[xiv] आज़ादी के बाद के दौर में, सीमा– पार अपराधों की प्रकृति लगातार जटिल होती गई है, जिससे सीमा प्रबंधन और इस क्षेत्र के भीतर कानून– व्यवस्था के शासन के समक्ष महत्वपूर्ण चुनौतियाँ पैदा हो गई हैं।
मानव तस्करी सबसे बड़े सीमा–पार अपराधों में से एक है। भारत के राज्य सभा में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की राज्य मंत्री द्वारा इस मुद्दे पर पूछे गए प्रश्न के जवाब में प्रस्तुत आंकड़ों से पता चलता है कि 2018 से 2022 के दौरान सीमावर्ती राज्यों में ऐसे मामलों की संख्या बहुत अधिक रही है (तालिका 1)। इन राज्यों में बिहार पहले स्थान पर है।
तालिका 1: 2018-2022 के दौरान सीमावर्ती राज्यों में मानव तस्करी के पीड़ित
|
राज्य |
वर्ष
|
2018 |
2019 |
2020 |
2021 |
2022 |
|
मामला |
||||||
|
बिहार |
पंजीकृत मामले |
127 |
106 |
75 |
111 |
260 |
|
तस्करी पीड़ित |
631 |
316 |
179 |
384 |
751 |
|
|
बचाए गए पीड़ित |
622 |
316 |
179 |
384 |
751 |
|
|
सिक्किम |
पंजीकृत मामले |
1 |
0 |
1 |
0 |
0 |
|
तस्करी पीड़ित |
4 |
2 |
3 |
0 |
1 |
|
|
बचाए गए पीड़ित |
4 |
2 |
4 |
0 |
1 |
|
|
उत्तर प्रदेश |
पंजीकृत मामले |
35 |
48 |
90 |
103 |
126 |
|
तस्करी पीड़ित |
90 |
137 |
180 |
121 |
141 |
|
|
बचाए गए पीड़ित |
86 |
137 |
174 |
121 |
138 |
|
|
उत्तराखंड |
पंजीकृत मामले |
29 |
20 |
9 |
16 |
16 |
|
तस्करी पीड़ित |
58 |
36 |
14 |
22 |
30 |
|
|
बचाए गए पीड़ित |
58 |
36 |
13 |
22 |
30 |
|
|
पश्चिम बंगाल |
पंजीकृत मामले |
172 |
120 |
59 |
61 |
67 |
|
तस्करी पीड़ित |
262 |
159 |
71 |
84 |
93 |
|
|
बचाए गए पीड़ित |
254 |
94 |
75 |
97 |
103 |
स्रोत: लेखक द्वारा भारत के संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया https://sansad.in/getFile/annex/267/AU3664_ZnOK5f.pdf?source=pqars.
एशिया फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित शोध रिपोर्ट में यह बताया गया है कि नेपाल और भारत के बीच खुली सीमा के कारण मानव तस्करी के पीड़ितों की पहचान करना बहुत मुश्किल हो जाता है। संस्थागत कमियों के कारण प्रभावी जांच प्रक्रियाएं और भी बाधित होती हैं, इनमें ऐसी प्रथाएं भी शामिल हैं जिनके तहत पीड़ितों को अपने अपराधियों के साथ समझौता करने एवं पैसे ले–देकर मामलों को निपटाने के लिए मज़बूर किया जाता है।[xv]
अन्य बाधाओं में पीड़ितों की पहचान के संबंध में स्पष्ट सरकारी दिशानिर्देशों का अभाव, पीड़ितों के बीच कानूनी सुरक्षा उपायों के प्रति सीमित जागरूकता और अधिकारियों एवं अपराधियों के बीच कथित मिलीभगत शामिल हैं।[xvi] इस संदर्भ में, भारत और नेपाल के बीच एमएलए समझौते से मानव तस्करी की बढ़ती घटनाओं को कम करने, सत्यापन और कानूनी सुरक्षा प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।
सीमा पार से जुड़ी एक और बड़ी चुनौती है– खुली सीमा के रास्ते अनाधिकृत घुसपैठ और तीसरे देशों के नागरिकों की अवैध घुसपैठ। इस स्थिति से विद्रोह, नशीले पदार्थों की तस्करी, आतंकवाद और धार्मिक कट्टरपंथ के उभार जैसे जोखिम पैदा होते हैं। जैसे, सितंबर 2025 में नेपाल में जेन– ज़ी (Gen-Z) विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई अशांति और जेल तोड़ने की खबरों के बाद, कम– से– कम दस विचाराधीन कैदी नेपाल की एक जेल से भाग निकले और बिहार में घुसने की कोशिश की।
हालाँकि, सीमा पार से भागकर आने वाले अपराधियों एवं कानून–व्यवस्था पर पड़ने वाले व्यापक प्रभावों को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बीच, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी/SSB) ने उन्हें भारत– नेपाल सीमा पर रोक लिया और भारतीय क्षेत्र में उनके प्रवेश को रोकने के लिए उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया।[xvii] इसी तरह बिहार पुलिस और एसएसबी के हालिया संयुक्त अभियान में बिहार के पश्चिम चंपारण ज़िले में सिंधवालिया छटिया घाट के पास दो नेपाली नागरिकों को एक मोटरसाइकिल पर 39 किलोग्राम गांजा (कैनबिस) ले जाते हुए कथित तौर पर गिरफ्तार किया गया।[xviii] हाल ही में हुई एक और घटना में उत्तर प्रदेश के बलरामपुर ज़िले में भारत– नेपाल सीमा पर एसएसबी ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। उस पर आरोप है कि वह जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके, खुद को नेपाली नागरिक बताकर नेपाल में घुसने की कोशिश कर रहा था।[xix] सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह की बार– बार होने वाली घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं, और हो सकता है कि प्रमुख मीडिया मंचों पर इन्हें अधिक कवरेज न मिले। हालाँकि, स्थानीय समाचार माध्यम इन घटनाओं की समय पर और प्रासंगिक कवरेज नियमित रूप से उपलब्ध कराते हैं।
इसके अलावा, भारत– नेपाल की खुली सीमा पर विशेष रूप से तराई के वन– क्षेत्र में जहाँ बाघ, हाथी, तेंदुए और गैंडे जैसे लुप्तप्राय प्रजातियाँ पाई जाती हैं– वन्यजीवों का अवैध व्यापार और सीमा– पार से होने वाला शिकार एक गंभीक सीमा– पार अपराध है, जिसके लिए सुरक्षा सहयोग को और अधिक बढ़ाने की आवश्यकता है।[xx]
इसके अलावा, सीमा– पार होने वाले अपराध अब केवल पारंपरिक तस्करी तक ही सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि अब वे तेज़ी से ऐसे अत्याधुनिक और तकनीक–आधारित वित्तीय अपराधों से जुड़ते जा रहे हैं, जिनके लिए समन्वित अंतरराष्ट्रीय पुलिस कार्रवाई की आवश्यकता होती है। ₹15-करोड़ की “डिज़िटल अरेस्ट” से जुड़ा हालिया धोखाधड़ी का एक मामला भारत और नेपाल के बीच सीमा पार अपराधों की बढ़ती जटिलता को उजागर करता है, विशेष रूप से साइबर धोखाधडी के नेटवर्क में।[xxi]
जांच में पता चला है कि दिल्ली स्थित प्रवासी दंपत्ति को निशाना बनाने वाला यह घोटाला अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा था, जिसके संचालन के संबंध नेपाल और कंबोडिया तक फैले हुए थे।[xxii] इस योजना में, दलाल धोखाधड़ी करने के लिए आपस में सहयोग करते थे जबकि भारत में स्थानीय सहयोगी मनी लॉन्ड्रिंग को सुविधाजनक बनाने के लिए फर्जी बैंक खातों का प्रबंधन करते थे।[xxiii] इन अपराधों में तेजी से बहुस्तरीय अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क शामिल होते जा रहे हैं जो पीड़ितों का शोषण करने के लिए प्रतिरूपण और “डिजिटल अरेस्ट” जैसी रणनीति का प्रयोग करते हैं और धोखाधड़ी के माध्यम से धन हस्तांतरित करते हैं।
सीमा पार होने वाली अपराध की लगातार घटनाएं यह दर्शाती हैं कि अपराधियों ने किस प्रकार समन्वित कानून प्रवर्तन में मौजूद कमियों, कानूनी ढांचों की जटिलताओं और भारत एवं नेपाल के बीच प्रभावी सहयोग की कमी का लाभ उठाकर गंभीर अपराधों को अंजाम दिया है और पकड़े जाने से बचते रहे हैं। हाल ही में लागू हुआ एमएलए समझौता इन चुनौतियों से निपटने में सुधार लाने में सहायक हो सकता है।
निष्कर्ष
सुरक्षा किसी भी देश की अपने नागरिकों, पर्यावरण, वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा सुनिश्चित करने की क्षमता का बुनियादी पहलू है। क्षेत्रीय पर्यावरण भूगोल और भारत व नेपाल के लोगों के बीच आपसी संबंधों के घनिष्ठ तालमेल ने– साथ ही खुली अंतरराष्ट्रीय सीमाओं ने जो लोगों की आवाजाही को आसान बनाती हैं– समय के साथ सीमा– पार अपराधों की प्रकृति और उनके पीछे के उद्देश्यों के लिहाज़ से और भी अधिक जटिल बना दिया है। इस संदर्भ में, भारत और नेपाल जैसे देशों के लिए, मज़बूत कानूनी और न्यायिक सहयोग के साथ– साथ, सुरक्षा सहयोग को बढ़ाना बहुत आवश्यक है।
हालांकि नेपाल और भारत ने सीमा–पार सुरक्षा चुनौतियों और आपराधिक गतिविधियों से निपटने के लिए कई संयुक्त पहलें और द्विपक्षीय तंत्र स्थापित किए हैं, फिर भी हाल ही में पारस्परिक कानूनी सहायता समझौते पर हस्ताक्षर ने इस साझेदारी को और सुदृढ़ किया है और इन मुद्दों से अधिक प्रभावी तरीके से निपटने के लिए मज़बूत कानूनी ढांचा प्रदान किया है।
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*डॉ. सुबोध चंद्र भारती, रिसर्च एसोसिएट, विश्व मामलों की भारतीय परिषद, नई दिल्ली
अस्वीकरण: व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण
[i] Government of Nepal, Ministry of Law, Justice and Parliamentary Affairs, प्रेस विज्ञप्ति। २०८२/११/०५ (नेपाल सरकार तथा गणतन्त्र भारत सरकारबिच फौजदारी विषयमा पारस्परिक कानूनी सहायता सम्बन्धी सम्झौता (Agreement between the Government of Nepal and the Government of the Republic of India on Mutual Legal Assistance in Criminal Matters) मा हस्ताक्षर सम्पन्न भएको सम्बन्धमा) (Kathmandu: Ministry of Law, Justice and Parliamentary Affairs, 2082 [B.S.]), https://www.moljpa.gov.np/public/uploads/e9d1f397-e99b-4d56-b153-2d38bccba066.pdf (Accessed March 12, 2026).
[ii] Anil Giri, “Nepal and India Sign Mutual Legal Assistance Deal After Years of Talks,” The Kathmandu Post. February 18, 2026. https://kathmandupost.com/national/2026/02/18/nepal-and-india-sign-mutual-legal-assistance-deal-after-years-of-talks (Accessed March 12, 2026).
[iii] Ibid.
[iv] Government of India. “List of Extradition Treaties/Arrangements,” Ministry of External Affairs, Government of India, last updated February 20, 2023. https://www.mea.gov.in/leta.htm (Accessed March 12, 2026).
[v] Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation (BIMSTEC). Convention on Mutual Legal Assistance in Criminal Matters, signed March 30, 2022, PDF, 17 pp. https://bimstec.org/images/content_page_pdf/1696679776_Signed%20BIMSTEC%20Convention%20on%20Mutual%20Legal%20Assistance%20in%20Criminal%20Matters.pdf (Accessed March 20, 2026).
[vi] Ministry of External Affairs. “Treaty of Extradition Between the Government of India and the Government of Nepal, Kathmandu, October 2, 1953, Ministry of External Affairs, Government of India, accessed February 18, 2026, https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/7309/Trade+of+Extradition.
[vii] Ibid.
[viii] Ibid.
[ix] Gautam Chawla, “IC-814: Facts, Trial, Verdict, and Implications,” Institute of Peace and Conflict Studies, February 18, 2008, https://www.ipcs.org/comm_select.php?articleNo=2492.
[x] Ministry of External Affairs, Government of India, “On India-Nepal Home Secretary-level talks,” press release, January 20, 2005, https://www.mea.gov.in/press-releases.htm?dtl/5853/On+IndiaNepal+Home+Secretarylevel+talks.
[xi] Press Information Bureau, “India and Nepal Holds Home Secretary Level Talks in New Delhi,” Press Release, Ministry of Home Affairs (July 23, 2025), https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2147422®=3&lang=2.
[xii] Anil Giri, “Misri Visiting Nepal to Set Stage for PM Oli’s India Trip,” The Kathmandu Post, August 7, 2025, https://kathmandupost.com/national/2025/08/07/misri-due-in-nepal-to-set-stage-for-pm-oli-s-india-visit.
[xiii] Mithilesh Kumar, “Migrants, Smugglers, Traders, and Treacherous Rivers: A Genealogy of the Bihar‑Nepal Border from Treaty of Sugauli to c. 1947,” Journal of Migration Affairs 1, no. 1 (September 2018), 3–20, accessed March 3, 2026, https://tiss.ac.in/uploads/files/2._Mithilesh_Kumar.pdf.
[xiv] Ibid.
[xv] The Asia Foundation, Optimizing Screening and Support Services for Trafficking in Persons Victims in Nepal. San Francisco: The Asia Foundation, 2024. https://asiafoundation.org/wp-content/uploads/2024/08/Optimizing-Screening-and-Support-Services-for-Trafficking-in-Persons-Victims-in-Nepal_English-Report.pdf (Accessed March 25, 2026).
[xvi] Ibid.
[xvii] The Hindu. “At Least 10 Undertrials Fleeing Nepal Jail Detained in Bihar,” The Hindu. September 10, 2025. https://thehindu.com/news/national/at-least-10-undertrials-fleeing-nepal-jail-detained-in-bihar/article70033841.ece (Accessed March 13, 2026).
[xviii] The Times of India. “2 from Nepal Arrested with 39kg Ganja,” The Times of India (Patna), February 08, 2026. https://timesofindia.indiatimes.com/city/patna/2-from-nepal-arrested-with-39kg-ganja/articleshow/128079691.cms (Accessed March 13, 2026).
[xix] PTI. “Man Held in UP’s Balrampur for Attempting to Cross India‑Nepal Border Illegally,” PTI, March 3, 2026., https://www.ptinews.com/story/national/man-held-in-ups-balrampur-for-attempting-to-cross-india-nepal-border-illegally/3432018 (Accessed March 15, 2026).
[xx] “Strengthening Cross Border Wildlife Crime Prevention and Law Enforcement Between India and Nepal,” Wildlife Trust of India. https://www.wti.org.in/projects/strengthening-cross-border-wildlife-crime-prevention-and-law-enforcement-between-india-and-nepal/ (Accessed March 15, 2026).
[xxi] The Times of India. “Cambodia, Nepal Links to ₹15 Cr Fraud,” The Times of India. February 6, 2026. https://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/cambodia-nepal-links-to-15cr-fraud/articleshow/127419822.cms (Accessed March 10, 2026).
[xxii] Ibid.
[xxiii] Ibid.