परिचय
13 जनवरी को, अमेरिका एवं आर्मेनिया ने अंतरराष्ट्रीय शांति एवं समृद्धि की ओर ट्रंप मार्ग (Trump Route for International Peace and Prosperity– TRIPP) के कार्यान्वयन रूपरेखा की घोषणा की। यह एक बहुआयामी परिवहन गलियारा है जिसका उद्देश्य दक्षिण कॉकस में संपर्क और व्यापार को बेहतर बनाना है।
ऐसा लगता है कि यह परियोजना मध्य एशिया और कैस्पियन क्षेत्र को यूरोप से जोड़ता है। साथ ही अज़रबैजान को उसके नखचिवान स्वायत्त गणराज्य से भी जोड़ता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और आर्मेनिया के विदेश मंत्री अरात मिर्ज़ोयान ने वाशिंगटन में मुलाक़ात कर रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें TRIPP को लागू करने और आर्मेनिया में कुशल बहु–माध्यम पारगमन व्यवस्था स्थापित करने की व्यापक रणनीति की रूपरेखा दी गई है, जिससे दक्षिण कॉकस क्षेत्र में स्थायी शांति को बढ़ावा मिलेगा।
दक्षिण आर्मेनिया से गुज़रने वाला 27-मील लंबा ज़मीनी हिस्सा, दक्षिण कॉकस के भू–राजनीतिक समीकरणों को बदलने के लिए तैयार है। TRIPP पूरे यूरेशिया में वैकल्पिक पारगमन मार्ग विकसित करने की अमेरिका की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। रूस से होकर गुज़े वाले उत्तरी मार्ग, प्रतिबंधों और सुरक्षा चिंताओं के कारण कम विश्वसनीय हैं, जबकि ईरान के रास्ते होने वाला पारगमन लगातार अनिश्चित होता जा रहा है। TRIPP मध्य एशिया– कैस्पियन– दक्षिण कॉकस– यूरोप अक्ष को कार्यात्मक और संस्थागत रूप से एकीकृत गलियारे में बदलने का प्रयास करता है।
हालाँकि, इस पहल को भू–राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। रूस और ईरान, TRIPP को इस क्षेत्र में अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों के लिए भू–आर्थिक और रणनीतिक चुनौती के रूप में देखते हैं। दक्षिण कॉकस में सुरक्षा और पारगमन नेटवर्क पर मॉस्को का पारंपरिक दबदबा कम हो रहा है। साथ ही, तेहरान उन बदलावों पर बारीकी से नज़र रखता है जो उत्तर और दक्षिण एवं पूरब और पश्चिम के बीच पारगमन संतुलन को प्रभावित करते हैं। अमेरिका ने शांति वार्ता में मध्यस्थता करके और TRIPP जैसी कनेक्टिविटी पहलों की शुरुआत कर अपनी रणनीतिक भागीदारी को बढ़ाया है।
TRIPP शायद दूसरे ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति की सबसे स्पष्ट रूप से सकारात्मक उपलब्धि है। इसकी वजह ठीक यही है कि यह परस्पर विरोधी आवश्यकताओं के बीच संतुलन बिठाती है: अज़रबैज़ान की नखचिवान से जोड़ना, साथ ही अर्मेनिया की संप्रभुता की स्पष्ट रूप से रक्षा करना, मध्य गलियारे को मज़बूत बनाना और अमेरिकी कंपनियों एवं अमेरिकी सरकार को इस सफलता में वित्तीय हिस्सेदारी देना।
हालांकि, TRIPP के सफल कार्यान्वयन को कई बड़ी भू–राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जिनमें आर्मेनिया– तुर्की संबंधों का धीमा सामान्यीकरण, ईरान– आर्मेनिया सीमा पर संवेदनशील सीमा सुरक्षा, अज़रबैजान– ईरान के बीच तीव्र प्रतिद्वंद्विता और परस्पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्रीय बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शामिल हैं, जो सुचारू पारगमन में बाधा डालती हैं। इस संदर्भ में, यह विशेष रिपोर्ट TRIPP के माध्यम से दक्षिण कॉकस में अमेरिकी रणनीतिक भागीदारी और इसके क्षेत्रीय भू– राजनीतिक प्रभावों की पड़ताल करती है।
TRIPP पहल: संक्षिप्त इतिहास
TRIPP “ज़ंगेज़ूर गलियारा” (मानचित्र 1 देखें) का नया रूप है। यह विचार सोवियत युग का है जब एक रेलमार्ग अज़रबैजान को आर्मेनिया के स्यूनिक क्षेत्र से होते हुए नखचिवान से जोड़ता था। वर्ष 1991 में आर्मेनिया और अज़रबैजान के स्वतंत्र होने के बाद, ज़ंगेज़ुर क्षेत्र आर्मेनिया गणराज्य का हिस्सा बन गया। इस प्रकार, मुख्य अज़रबैजान को उससे अलग करने वाला एकमात्र इलाका नखचिवान स्वायत्त गणराज्य ही रह गया। पहले काराबाख युद्ध (1992–1994) के दौरान उनके बीच का रेलमार्ग बंद कर दिया गया था और ज़मीन के रास्ते यात्रा रोक दी गई थी। तब से लोग अज़रबैजान से नखचिवान तक केवल हवाईजहाज़ से या ईरान के रास्ते ही यात्रा कर सकते हैं।[i]
मानचित्र 1: ज़ंगेज़ुर गलियारा
स्रोत: https://www.caspianpolicy.org/research/category/on-the-prospects-of-the-zangezur-corridor-for-central-asia
वर्ष 2020 में दूसरे काराबाख युद्ध के बाद अज़रबैजान ने ज़ंगेज़ुर गलियारा खोलने के अपने प्रयासों को फिर से तेज़ कर दिया। उसने मांग की कि इस मार्ग पर सीमा शुल्क नियंत्रण समाप्त कर दिया जाए लेकिन आर्मेनिया ने अपनी संप्रभुता को लेकर चिंताओं के कारण इसका विरोध किया। वर्ष 2021 में, अज़रबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने कहा कि अज़रबैजान ज़ंगेज़ुर गलियारा बनाने को प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह काम आर्मेनिया की मंज़ूरी के साथ या उसके बिना भी आगे बढ़ेगा। यदि आर्मेनिया सहयोग करता है तो यह प्रक्रिया आसान हो जाती लेकिन यदि वह ऐसा नहीं करता तो अज़रबैजान बल का प्रयोग करेगा। परिणामस्वरूप यूरोपीय संघ एवं रूस समेत विभिन्न तीसरे पक्षों की भागीदारी के साथ बाकू और येरेवान के बीच बातचीत के कई दौर हुए।
वर्ष 2023 में, निकोल पाशिन्यान ने “ज़ंगेज़ुर गलियारा” शब्द को “आर्मेनिया के खिलाफ क्षेत्रीय दावे करने का ज़रिया” बताया। येरेवान का कहना है कि यह रास्ता उन देशों के अधिकार क्षेत्र में ही रहना चाहिए जिनसे होकर यह गुज़रता है।[ii] अक्टूबर 2023 में, पशिन्यान ने विक्लप के रूप में “शांति चौराहा” (मानचित्र 2 देखें) का पहला प्रस्ताव रखा। पशिन्यान ने “शांति चौराहा” के लिए चार मुख्य सिद्धांत बताएं। पहला, सभी बुनियादी ढांचे “उन राष्ट्रों की संप्रभुता और अधिकार क्षेत्र के अधीन संचालित होते हैं जिनसे होकर वे गुज़रते हैं”। दूसरा, प्रत्येक देश अपने क्षेत्र में अपनी सीमा और सीमा–शुल्क नियमों को लागू करेगा।
तीसरा, यह अवसंरचना अंतरराष्ट्रीय और घरेलू आवागमन के लिए खुला है। आखिर में, देश एक–दूसरे के अवसंरचनाओं को प्रयोग बराबरी एवं निष्पक्षता से करते हैं जिससे सीमा और सीमा–शुल्क जांच को सरल बनाने में मदद मिल सकती है। इस परियोजना का उद्देश्य अज़रबैजान और उसके नखचिवान क्षेत्र को जोड़ने से कहीं आगे बढ़कर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाना है। इसका मुख्य उद्देश्य सड़कों, रेलमार्गों, पाइपलाइनों, केबलों और बिजली के लाइनों का प्रयोग कर अज़रबैजान, आर्मेनिया, ईरान और तुर्की के बीच संबंधों को बेहतर बनाना है।[iii]
मानचित्र 2: शांति चौराहा योजना
स्रोत: https://www.atlanticcouncil.org/blogs/new-atlanticist/how-armenias-crossroads-for-peace-plan-could-transform-the-south-caucasus/
8 अगस्त 2025 को, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड की पहल पर अज़रबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान ने आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच शांति स्थापित करने वाले समझौते पर हस्ताक्षर किए।[iv] यह समझौता दक्षिण कॉकस के दो पड़ोसी देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह समझौता द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं को संबोधित करता है जिसमें संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की आपसी मान्यता भी शामिल है। साथ ही, समझौते पर हस्ताक्षर के साथ ही आर्मेनिया, अज़रबैजान और अमेरिका के नेताओं ने बातचीत के दौरान सात–सूत्रीय त्रिपक्षीय घोषणा जारी की। इस घोषणा का महत्वपूर्ण बिंदु क्षेत्रीय संचार मार्गों को खोलना है।
वाशिंगटन में हस्ताक्षरित दस्तावेज़ पारगमन मार्ग की स्थिति को बदल देता है जैसा कि त्रिपक्षीय घोषणा के अनुच्छेद 3 में उल्लेख किया गया है: पक्षों ने पुष्टि की कि अज़रबैजान के एक्सक्लेव नखचिवान (नखचिवान का एकांत क्षेत्र) के साथ परिवहन संपर्क खोले जाने चाहिए और यह काम आर्मेनिया एवं अज़रबैजान की “संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता एवं क्षेत्राधिकार के सम्मान के आधार पर” किया जाना चाहिए। इसके बाद अनुच्छेद 4 के तहत, येरेवान आर्मेनियाई क्षेत्र पर अंतरराष्ट्रीय शांति औऱ समृद्धि की ओर ट्रंप मार्ग (TRIPP) की स्थापना हेतु वाशिंगटन एवं तीसरे पक्षों के साथ सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।[v]
ट्रंप ने कहा कि आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर में आ रही मुख्य बाधा अब दूर हो गई है। TRIPP के माध्यम से, दोनों देश एक ऐसे पारगमन मार्ग को खोलने की योजना बना रहे हैं जो अज़रबैजान की मुख्य भूमिका को उसके नखचिवान के एकांत क्षेत्र से जोड़ेगा, इस काम में आर्मेनियन– अमेरिकी सहायता संघ भी शामिल होगा।[vi] त्रिपक्षीय घोषणा के साथ–साथ आर्मेनिया ने अमेरिकी के साथ द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जिसमें दोनों पक्ष “शांति चौराहा" परियोजना को संयुक्त रूप से विकसित करने पर सहमत हुए– यह इस क्षेत्र में संचार मार्गों को खोलने की आर्मेनिया की पहल है।
आर्मेनिया के प्रधानमंत्री ने “शांति चौराहा” में निवेश करने की अमेरिका की सक्रिए मंशा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस संवाद में बहुत सक्रिय रहा, जिसमें राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम भी शामिल थी, और जो विकल्प सामने आया वही आर्मेनिया ने रूस और दूसरे साझेदारों के समक्ष प्रस्तुत किया था।
ट्रंप ने कहा कि TRIPP एक “विशेष पारगमन ज़ोन बनाएगा जो आर्मेनिया की संप्रभुता का सम्मान करते हुए अज़रबैजान को नखचिवान में अपने क्षेत्र तक पूर्ण पहुँच प्रदान करेगा”। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी कंपनियाँ जो “इन दोनों देशों में प्रवेश करने के लिए बहुत उत्सुक हैं” और “बहुत पैसा खर्च करेंगी, जिससे हमारे तीनों देशों को आर्थिक लाभ मिलेगा,” इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का विकास करेंगी।[vii] आर्मेनिया के प्रधानमंत्री की माने तो, TRIPP “रणनीतिक आर्थिक अवसर खोलेगा जिनसे दीर्घकालिक लाभ मिलेंगे” और "अवसंरचनाओं में निवेश को बढ़ावा देगा, क्षेत्रीय संपर्क को बेहतर बनाएगा और युद्ध समाधान के पैरौकार के रूप में अमेरिकी नेतृत्व को मज़बूत बनाएगा।”[viii]
TRIPP अज़रबैजान को दक्षिण आर्मेनिया (स्युनिक/ज़ंगेज़ुर प्रांत) के रास्ते उसके नखचिवान एकांत क्षेत्र से जोड़ता है और फिर उत्तर (अज़रबैजान, जॉर्जिया) और पश्चिम (तुर्की) की ओर बढ़ता है। अतं में यह मार्ग ट्रांस–कैस्पियन इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट रूट (TITR) से जुड़ जाएगा, जो चीन को यूरोप से जोड़ने का काम करता है। आर्मेनियाई हिस्से की लंबाई लगभग 27 मील (या 42 किमी) अनुमानित है। (मानचित्र 3 देखें)।
मानचित्प 3: TRIPP गलियारा
स्रोत: https://infra.economictimes.indiatimes.com/news/logistics/new-economic-corridor-the-tripp-and-its-role-in-global-deal-diplomacy/123710974
TRIPP कार्यान्वय रूपरेखाः संरचना, लक्ष्य और चुनौतियाँ
अमेरिका और आर्मेनिया ने वाशिंगटन में संयुक्त रूप से TRIPP कार्यान्वयन रूपरेखा जारी किया। यह क्षेत्रीय पारगमन पहल है जिसका उद्देश्य दक्षिण कॉकस क्षेत्र में कनेक्टिविटी और व्यापार को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और आर्मेनिया के विदेश मंत्री अरात मिर्ज़ोयान ने TRIPP के लिए ठोस रणनीति का अनावरण किया। यह रूपरेखा आर्मेनिया से होकर निर्बाध बहु– माध्यम पारगमन गलियारे की स्थापना की रूपरेखा प्रस्तुत करती है जिसका उद्देश्य अज़रबैजान को नखचिवान से जोड़ना और आर्मेनिया को व्यापक ट्रांस– कैस्पियन व्यापार मार्ग में एकीकृत करना है।
यह पहला संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और पारस्परिकता के मूल सिद्धांतों पर ज़ोर देती है जिसमें आर्मेनिया अपने क्षेत्र में क्षेत्राधिकार, सुरक्षा और सीमा शुल्क पर पूर्ण नियंत्रण बनाए रखता है। अमेरिका के लिए, TRIPP नए बाज़ारों, कच्चे माल और दुर्लभ धातुओं तक पहुँचने के अवसर प्रदान करता है। साथ ही यूरोप और एशिया के साथ व्यापार मार्गों का विस्तार भी करता है। इस परियोजना को क्षेत्रीय एकीकरण एवं दीर्घकालिक साझेदारी के लिए रणनीतिक मंच के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
संयुक्त आर्मेनियाई– अमेरिकी कंपनी "TRIPP डेवलपमेंट" इस परियोजना की देखरेख करेगी। वित्त पोषण के बदले अमेरिका के पास आरंभ में 74% हिस्सेदारी होगी, जबकि आर्मेनिया की हिस्सादारी 26% होगी। कंपनी के पास 49 वर्षों तक अवसंरचना (सड़के, रेल, ऊर्जा और डिजिटल) की योजना तैयार करने, डिज़ाइन तैयार करने, निर्माण, संचालन और रख–रखाव करने का विशेष अधिकार होगा, जिसे और 50 वर्ष तक बढ़ाने का विकल्प भी दिया जाएगा। विस्तार के दौरान आर्मेनिया की हिस्सेदारी बढ़कर 49% होने की उम्मीद है। रूपरेखा में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह रूपरेखा आर्मेनिया या अमेरिका, किसी के लिए भी कोई कानूनी दायित्व या जवाबदेही निर्धारित नहीं करती है।[ix]
इस समझौते में यह शर्त रखी गई है कि यह मार्ग पूरी तरह से आर्मेनियाई क्षेत्र में ही रहेगा और आर्मेनियाई कानूनों के तहत ही संचालित होगा। इसका प्रबंधन अमेरिकी नेतृत्व वाले सहयोग संघ द्वारा किया जाएगा, जिसमें इसके प्रशासन में अज़रबैजान की कोई भागीदारी "नहीं" होगी। इस मार्ग के लिए सुरक्षा उपायों को आर्मेनिया और अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से लागू किया जाएगा। आर्मेनिया के पास इस गलियारे के साथ– साथ सुरक्षा बलों की तैनात करने का अधिकार सुरक्षित है जबकि अमेरिका बिना किसी स्थायी सैन्य उपस्थिति के तकनीकी और सलाहकार सहायता प्रदान करके गारंटर की भूमिका निभाएगा।
TRIPP के लिए वित्तपोषण अमेरिका के निजी निवेशकों, सरकारी अवसंरचना कोष और विश्व बैंक एवं ईबीआरडी (EBRD) जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से जुटाई जाएगी। इसका निर्माण 2026 की वसंत ऋतु में शुरू होने वाला है और इस मार्ग के 2028 के अंत तक चालू हो जाने की उम्मीद है। इसका कार्यान्वयन चरणबद्ध तरीके से होगा– शुरुआत परिवहन अवसंरचना से होगी जिसके बाद ऊर्जा और डिजिटल घटक शामिल होंगे और 2030 तक इसे यूरेशियाई लॉजिस्टिक्स में एकीकृत कर दिया जाएगा।
येरेवान कंपनी के कामकाज की देखरेख करेगा, और किसी भी प्रकार के संरचनात्मक परिवर्तनों के लिए दोनों सरकारों की मंजूरी आवश्यक होगी। यह संरचना इस परियोजना के उस उद्देश्य पर ज़ोर देता है जिसके तहत आर्मेनिया में बिना किसी रुकावट के बहुमॉडल पारगमन लिंक को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही यह “शांति चौराहा” परियोजना के अनुरूप, देश की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और अधिकार क्षेत्र को बनाए रखते हुए क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता को भी बढ़ावा देगा। इस गलियारे से आर्मेनिया के लिए अंतरराष्ट्रीय और घरेलू परिवहन में सुधार कर और ट्रांस–कैस्पियन व्यापार नेटवर्क में महत्वपूर्ण कड़ी स्थापित कर आपसी लाभ मिलने की आशा है।
TRIPP की मुख्य विशेषता इसका अनुमानित आर्थिक प्रभाव है– सालाना 20 लाख टन तक माल की ढुलाई करना, पारगमन समय को 30 प्रतिशत तक कम करना और प्रशुल्क में 15 प्रतिशत की कटौती करना जिससे क्षेत्रीय व्यापार को बहुत बढ़ावा मिलेगा। TRIPP का उद्देश्य आर्मेनिया और अज़रबैजान में सुरक्षा को मज़बूत करना, अमेरिकी व्यापार का विस्तार करना और मध्य एशिया, कैस्पियन सागर एवं यूरोप को जोड़ने वाले मार्ग पर लॉजिस्टिक्स में सुधार करना है।[x]
क्षेत्र में अमेरिका की रणनीतिक भागीदारी
अमेरिका दक्षिण कॉकस में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है और शांति–स्थापना की भूमिका निभाते हुए अपना भू– राजनीतिक नियंत्रण स्थापित कर रहा है। सबसे विशेष बात यह है कि अमेरिका ने शांति कार्यक्रम में केवल एक बाहरी मध्यस्थ की भूमिका निभाने की बजाय उसके अवसंरचनात्मक निर्माता की भूमिका अपना ली है और वाशिंगटन के लिए TRIPP एक ऐसी बहु–स्तरीय व्यवस्था के रूप में उभरता है जिसे क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को भू– आर्थिक संपर्क से जोड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया है। TRIPP मार्ग जिसमें अमेरिका को एक निर्णायक भूमिका सौंपी गई है, सोवियत–संघ के विघटन के बाद क्षेत्र में पहली ऐसी अवसंरचनात्मक परियोजना है जिसमें वाशिंगटन केवल एक भागीदारी ही नहीं बल्कि प्रभावी मुख्य हितधारक भी है।
TRIPP डेवलपमेंट कंपनी में 74% हिस्सेदारी हासिल करके अमेरिकी हितों और उपस्थिति को सुरक्षित करते हुए, ट्रंप अमेरिकियों को यह विश्वास दिला सकते हैं कि वे दक्षिण कॉकस में अमेरिकी कूटनीतिक जुड़ाव के आर्थिक लाभ उठा रहे हैं और अमेरिकी कंपनियों के लिए नए अवसर खुल रहे हैं।
इससे पहले, अमेरिकी सरकार ने अपने वैश्विक अवसंरचना और निवेश साझेदारी (PGII) कार्यक्रम के माध्यम से मिडिल कॉरिडोर (मध्य गलियारा) का समर्थन किया था। यह एक बहुमॉडल व्यापार मार्ग है जो कैस्पियन सागर और अज़रबैजान एवं जॉर्जिया में मौजूद अवसंरचना हब के रास्ते मध्य एशिया को तुर्की एवं यूरोप से जोड़ता है।[xi] वाशिंगटन 'मिडिल कॉरिडोर' को एशिया के साथ ज़मीनी व्यापार में रूस को दरकिनार करने के तरीके के रूप में देखता है जिसमें मध्य एशिया से प्रमुख खनिजों और दुर्लभ खनिजों के संभावित निर्यात की संभावना भी शामिल है।
एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अमेरिका इस धुरी को मज़बूत कर रहा है जिससे रूस, अज़रबैजान और तुर्की के साथ ईरान का तालमेल कमज़ोप पड़ रहा है। वाशिंगटन के लिए TRIPP यूरेशिया के कनेक्टिविटी ढांचे को फिर से डिज़ाइन करने का रणनीतिक प्रयास है। इस संदर्भ में, TRIPP यूरेशिया में वैकल्पिक पारगमन मार्ग विकसित करने की एक व्यापक अमेरिकी रणनीति के दक्षिण कॉकस खंड का निर्माण करता है (मानचित्र 4 देखें)।
मानचित्र 4: पूरे यूरेशिया में वैकल्पिक पारगमन मार्ग बनाने की अमेरिकी रणनीति

स्रोत: https://www.caspianpolicy.org/research/middle-corridor/iran-azerbaijan-and-the-geopolitics-of-escalation-in-the-south-caucasus
क्षेत्रीय भू–राजनीतिक प्रभाव
आर्मेनिया
TRIPP समझौता आर्मेनिया को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक बेहतर पहुँच, अधिक व्यापार, कम लागत और लोगों व वस्तुओँ की अधिक कुशल आवाजाही का अवसर देता है। TRIPP सीमावर्ती क्षेत्रों में संतुलित विकास का वादा करता है और इससे विदेशी निवेश बढ़ेगा, विशेष रूप से दक्षिण में। पूरी तरह से फिर से खुलने से कार्स– ग्युमरी रेलमार्ग (मानचित्र 5 देखें) फिर से शुरू हो जाएगा और तुर्की एवं अज़रबैजान जैसे पड़ोसी देशों के साथ संबंध बेहतर होंगे। इससे आर्मेनिया यूरोप से मध्य एशिया तक के रास्तों पर, रूस और ईरान को दरकिनार करते हुए महत्वपूर्ण पारगमन हब के रूप में मज़बूती से स्थापित हो पाएगा। इन मौकों का लाभ उठाते हुए आर्मेनिया अब क्षेत्रीय पारगमन के और भी विकल्पों का लाभ उठाने की स्थिति में है।
मानचित्र 5: कार्स– ग्युमरी– तिबलिसी रेल मार्ग (लाल रंग में)
स्रोत: https://www.railwaygazette.com/infrastructure/baku-tbilisi-kars-railway-corridor-inaugurated/45406.article
"शांति चौराहा" के सिद्धांतों का पालन करते हुए ट्रंप मार्ग आर्मेनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कैस्पियन सागर के रास्ते रूस और यूरेशियन आर्थिक संघ के दूसरे सदस्य देशों जैसे कज़ाकिस्तान, तक पहुँचने के लिए तुर्की और अज़रबैजान के पारगमन मार्गों के प्रयोग को संभव बनाता है। इस पहुँच से आर्मेनिया की किसी एक ही गलियारे पर निर्भरता कम हो जाती है। TRIPP में शामिल होकर, आर्मेनिया अपनी विदेश नीति का रुख सुरक्षा और युद्ध से हटाकर क्षेत्रीय सहयोग और एकीकरण की तरफ करता है।
TRIPP परियोजना, जून 2026 के संसदीय चुनावों के लिए प्रधानमंत्री पशिन्यान के "वास्तविक आर्मेनिया" अभियान का मुख्य आधार है। इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना, शांति सुनिश्चित करना और विदेश नीति में विविधता लाना है। विशेष रूप से आर्थिक लाभ– मुख्य रूप से अमेरिका की बढ़ती भागीदारी और बेहतर कनेक्टिविटी– प्रधानमंत्री पशिन्यान की राजनीतिक स्थिति को मज़बूत कर सकते हैं जबकि TRIPP आर्मेनिया को एक क्षेत्रीय परिवहन केंद्र के रूप में स्थापित करता है।
हालाँकि संबंधित पक्ष सीधे तौर पर चिंताएं उठाते हैं, और यह तर्क देते हैं कि 99-वर्ष का लीज़ समझौता और विदेशी प्रबंधन इस परियोजना पर आर्मेनिया के अधिकार को कमज़ोर कर सकता है। कुछ विशेषज्ञों को डर है कि विदेश नियंत्रण आर्मेनिया को बाहरी राजनीतिक या आर्थिक दबावों के सामने ला सकता है जिससे सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं, वहीं, कुछ दूसरे लोग स्पष्ट रूप से परिभाषित निगरानी की कमी का हवाला देते हैं जिससे स्थानीय भागीदारी और नियंत्रण कम हो सकता है। इन जोखिमों के कारण TRIPP राष्ट्रवादी और लोकलुभावन समूहों का प्रमुख निशाना बन जाता है। इसके अलावा, अज़रबैजान द्वारा ट्रंप मार्ग को “ज़ंगेज़ुर गलियारा” का नाम दिया जाना, आर्मेनिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर TRIPP के प्रभाव को लेकर आशंकाओं को और बढ़ा देता है।[xii]
अज़रबैजान
“ट्रंप मार्ग” अज़रबैजान को उसके नखचिवान स्वायत्त क्षेत्र और तुर्की तक सीधी पहुँच प्रदान करता है, पश्चिमी बाज़ारों तक लॉजिस्टिक मार्गों को छोटा बनाता है और पूर्वी एशिया एवं यूरोप के बीच महत्वपूर्ण भूमि संपर्क स्थापित करता है। बाकू ने हमेशा संचार मार्गों को फिर से खोलने को स्थायी क्षेत्रीय सुरक्षा की कुंजी माना है। अमेरिका के समर्थन से, TRIPP अब इस नज़रिए को अंतरराष्ट्रीय पहचान प्रदान करता है और इसे एक क्षेत्रीय योजना से बहुपक्षीय रणनीतिक मंच में बदल देता है।
अज़रबैजान देश और नखचिवान स्वायत्त गणराज्य के बीच स्पष्ट जुड़ाव बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करता है। यह दर्शाता है कि TRIPP किस तरह से अज़रबैजान के ज़ंगेज़ुर गलियारे को व्यापक अंतरराष्ट्रीय ढांचे में एकीकृत करता है। यह साझेदारी अज़रबैजान के कनेक्टिविटी लक्ष्यों को औपचारिक बहुपक्षीय मंच पर आगे बढ़ाने में मदद करती है। बाकू शांति को किसी निर्धारित समझौते के तौर पर नहीं बल्कि आर्थिक संबंधों, कनेक्टिविटी और साझा लाभों के परिणाम के रूप में देखता है। परिवहन मार्ग बनाना और लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाना ही इस विचार का आधार है। TRIPP अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ इस नज़रिए को साकार करता है जिससे इस क्षेत्र को युद्ध से सहयोग की ओर बढ़ने में मदद मिलती है और अज़रबैजान का यह विश्वास मज़बूत होता है कि स्थायी शांति क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग पर निर्भर करती है।
राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने कहा कि आर्मेनिया के साथ शांति स्थापित करने के बाद अज़रबैजान ने सभी परिवहन प्रतिबंध हटा दिए। इससे कज़ाकिस्तान और रूस से आने वाला माल अज़रबैजान के रास्ते आर्मेनिया तक पहुँच सका और आर्मेनिया को कम कीमतों पर महत्वपूर्ण तेल उत्पाद उपलब्ध हो सके। उन्होंने यह भी बताय कि ये बदलाव दर्शाते हैं कि किस तरह कनेक्टिविटी और साझा आर्थिक हित इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देते हैं। अक्टूबर 2025 में, अज़रबैजान ने आर्मेनिया के लिए पारगमन प्रतिबंध हटा दिए, जिससे कज़ाकिस्तान की स्वतंत्रता के बाद से पहली बार कज़ाकिस्तान से आर्मेनिया तक अज़रबैजान और जॉर्जिया के रास्ते रिकॉर्ड रेल शिपमेंट संभव हो पाया।
कैस्पियन बेसिन से यूरोपीय और भूमध्यसागरीय बाज़ारों तक संपर्क बेहतर बनाकर, अज़रबैजान एक ट्रांजिट हब के रूप में अपनी भूमिका और क्षेत्रीय आर्थिक मामलों में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। फिर भी, अज़रबैजान के लिए यह ज़रूरी है कि इस परियोजना में स्पष्ट गारंटी शामिल हो कि आर्मेनिया पश्चिमी अज़रबैजान और नखचिवान के बीच के संपर्क को बिना किसी रुकावट के खुला रखेगा। हालाँकि यह आर्मेनिया की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अज़रबैजान के समर्थन पर भी निर्भर करेगा।
रूस
रूस को बाहर रखने वाला कोई भी समझौता उसकी क्षेत्रीय स्थिति को बहुत कमज़ोर बना देगा और दक्षिण कॉकस से उसके धीरे– धीरे बाहर होने का संकेत देगा। TRIPP परियोजना इस क्षेत्र में रूस के प्रभाव को कम करता है और उसके पारगमन मार्गों एवं रणनीतिक संपत्तियों के लिए चुनौती प्रस्तुत करता है। मॉस्को ने लगातार इस पहल की आलोचना की है। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि दक्षिण कॉकस के मामलों में गैर–क्षेत्रीय पक्षों की भागीदारी मुख्य रूप से क्षेत्रीय देशों और उनके पड़ोसियों के हितों को दर्शाती होनी चाहिए।
उन्होंने आगे बताया कि आर्मेनिया, यूरेशिया आर्थिक संघ के एकल सीमा शुल्क क्षेत्र का हिस्सा बना हुआ है, दक्षिण कॉकस रेलवे रूसी रेलवे की सहायक कंपनी के रूप में काम करती है और रूसी सीमा रक्षक, अंतरराष्ट्रीय संधि के तहत उस क्षेत्र की सीमा सुरक्षा बनाए रखते हैं जहाँ से प्रस्तावित मार्ग से गुज़रने की आशा है। यूरेशियन आर्थिक संघ (EAEU) में इस पहल को लागू करना, रूस की भागीदारी के बिना चुनौतूपर्ण काम है।[xiii]
इसके जवाब में, आर्मेनियाई संसदीय आयोग के प्रमुख सरगिस खंडन्यान ने कहा कि TRIPP परियोजना के तहत बनने वाला नया रेल खंड दक्षिण कॉकस रेलवेज़ (SCR) की बैलेंसशीट में दर्ज नहीं किया जाएगा; विशेषरूप से, ट्रंप मार्ग के अंतर्गत आने वाले 43 किमी रेल मार्ग का स्वामित्व TRIPP के पास रहेगा।[xiv]
क्षेत्रीय प्रभावों पर और विस्तार से बताते हुए ज़खारोवा ने दोहराया कि यह नया मार्ग तुर्की देशों, मुख्य रूप से अज़रबैजान और तुर्की, के हितों के साथ अधिक मेल खाता है। IMEMO RAS में कॉकस क्षेत्र के प्रमुख वादिम मुखानोव ने कहा कि आर्मेनिया एक हारी हुई पार्टी होने के नाते, रियायते देने को विवश है और इस मार्ग की पहल करने वाला नहीं है। इसके साथ ही ऐसी ख़बरें हैं कि आर्मेनियाई अधिकारी तुर्की के साथ सीमा पर स्थित अखुरिक चेकप्वाइंट से रूसी सीमा प्रहरियों को हटाने की तैयारी कर रहे हैं जो सीमा प्रबंधन और क्षेत्रीय कूटनीति के प्रति येरेवान के नज़रिए में संभावित परिवर्तन का संकेत देता है। [xv]
इससे पहले, रूसी सीमा रक्षक ज़्वार्टनोट्स हवाईअड्डा और आर्मेनिया– ईरान सीमा चौकी से हट गए थे। आर्मेनिया में जनता की भावना राष्ट्रीय सीमाओं पर फिर से नियंत्रण पाने के प्रयासों का ज़ोरदार समर्थन करती है, कई लोग इन उपायों को राज्य के अधिकार को बहाल करने और राष्ट्र हितों की रक्षा के लिए ज़रूरी मानते हैं।[xvi] सरकार के लिए सीमा प्रबंधन पर फिर से नियंत्रण हासिल करना न केवल जनता की मांगों का उत्तर है बल्कि यह उसकी आंतरिक वैधता को भी मज़बूत करता है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब वह एक संवेदनशील राजनीतिक माहौल से गुज़र रही है।
यह प्रक्रिया तब तक जारी रहने की उम्मीद है जब तक आर्मेनिया की बाहरी सीमाओं पर कोई भी विदेशी सैनिक शेष न रह जाए। हालाँकि, रूस के नज़रिए से, ये घटनाक्रम संभवतः एक महत्वपूर्ण भू–राजनीतिक परिवर्तन को दर्शाते हैं, क्योंकि मॉस्को धीरे– धीरे एक–एक कर आर्मेनिया और दक्षिण कॉकस पर अपना भौतिक नियंत्रण खोता जा रहा है।
ईरान
आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत करने के बावजूद, ईरान के राष्ट्रपति को यह आशंका है कि ट्रंप मार्ग इस क्षेत्र में ईरान के हितों के लिए संकट बन सकता है। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच शांति का स्वागत किया है, लेकिन इसमें अमेरिका की संलिप्तता को लेकर चिंता भी जताई है, इस बात पर ज़ोर देते हुए कि आर्मेनिया के साथ ईरान के रणनीतिक संबंधों को भू– राजनीतिक सौदेबाज़ी का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।[xvii]
ईरानी नेतृत्व ने यह तर्क देते हुए इस गलियारे का कड़ा विरोध किया है कि इससे क्षेत्रीय भू–राजनीति बदल सकती है, सीमाएं फिर से तय की जा सकती हैं और आर्मेनिया की क्षेत्रीय अखंडता को खतरा हो सकता है। ईरान के अधिकारी सीमाओं को फिर से निर्धारित किए जाने की संभावना को न केवल स्थानीय संकट के रूप में देखते हैं बल्कि इसे शक्ति संतुलन में एक ऐसे बदलाव के रूप में भी देखते हैं जिससे रूस और ईरान दोनों की कीमत पर दक्षिण कॉकस क्षेत्र में अमेरिका का प्रभाव बढ़ सकता है। ये चिंताएं पूर्व में ज़ंगेज़ुर गलियारे के संबंध में उठाई गई चिंताओं से मेल खाती हैं।
इस संदर्भ में, तेहरान ट्रंप मार्ग को रूस की मौजूदगी का मुकाबला करने और क्षेत्रीय समीकरणों को नया रूप देने की अमेरिका की व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में देखता है– ठीक वैसे ही, जैसे इस क्षेत्र में पहले के अमेरिकी– समर्थित पारगमन परियोजनाएं थीं। ईरान ने दक्षिण कॉकस में अपने सुरक्षा हितों की रक्षा करने का अपना दृढ़ संकल्प दोहराया है, फिर चाहे उसे रूस का समर्थन मिले या न मिले।[xviii]
कूटनीतिक वार्ता के बाद ईरान के अधिकारियों ने यह स्वीकार किया है कि उनकी मुख्य चिंताओं का समाधान हो चुका है क्योंकि इस परियोजना को एक ऐसे गलियारे की बजाय जो ईरान और क्षेत्रीय हितों को नुकसान पहुँचा सकता था, आर्मेनिया की संप्रभुता के तहत पारगमन मार्ग के रूप में फिर से तैयार किया गया है। फिर भी, तेहरान अभी भी सतर्क है और उसे इस बात का अंदेशा है कि अमेरिका के नियंत्रण वाला कोई भी नया मार्ग क्षेत्रीय व्यापार में उसकी भूमिका को हाशिए पर धकेल सकता है।
ट्रंप मार्ग को लेकर ईरान की आर्थिक चिंताएं बहुत महत्वपूर्ण हैं। इस मार्ग से ईरान को पारगमन शुल्क से होने वाली अच्छी– खासी कमाई से हाथ धोना पड़ेगा और यातायात का बड़ा हिस्सा दूसरी तरफ मुड़ जाएगा। इससे दक्षिण कॉकस के व्यापार में ईरान का हिस्सा कम हो जाएगा और ज़रूरी वस्तुओं की आवाजाही पर उसका दबदबा भी कम हो जाएगा। अगर इसे लागू किया जाता है तो ट्रंप मार्ग अज़रबैजान पर ईरान के रणनीतिक बढ़त को भी कम कर सकता है। तेहरान और बाकू के बीच अक्सर तनावपूर्ण संबंध रहे हैं जिसकी एक वजह बाकू के इज़रायल के साथ संबंध हैं।[xix] ये घटनाक्रम इस क्षेत्र में ईरान के आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव के व्यापक निहितार्थों को रेखांकित करते हैं।
मध्य एशिया
मध्य एशिया में ट्रंप मार्ग महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक लाभ प्रदान करता है। यह एक तेज़ और सुरक्षित ज़मीनी गलियारा उपलब्ध कराता है जो व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में विविधता लाने में मदद करता है, इससे रूस और ईरान से होकर गुज़रने वाले परंपरागत मार्गों पर इस क्षेत्र की निर्भरता कम होती है। रूस से होकर गुज़रने वाले उत्तरी गलियारे या ट्रांस– ईरानी मार्ग जैसे दूसरे गलियारे की तुलना में ट्रंप मार्ग कम पारगमन समय, बेहतर सुरक्षा और भू– राजनीतिक मुद्दों से कम जोखिम के कारण सबसे अलग है।
मध्य एशिया के देश ट्रंप मार्ग को अधिक समृद्ध एवं वैश्विक बाज़ारों से मज़बूत जुड़ाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं। यह मार्ग कॉकस के रास्ते नया पारगमन मार्ग उपलब्ध कराकर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाता है, जिससे परिवहन नेटवर्क की मज़बूती और क्षमता बढ़ती है। C5 से C5+1 तक क्षेत्रीय ढांचे का विस्तार, जिसमें अज़रबैजान को भी शामिल किया गया है, कैस्पियन क्षेत्र में अधिक सुनियोजित सहयोग की दिशा में परिवर्तन का संकेत है।[xx] अज़रबैजान और कज़ाकिस्तान अधिक व्यापार को संभालने केलिए अपने बंदरगाह अवसंरचना के विस्तार में निवेश कर रहे हैं जिससे प्रमुख क्षेत्रीय रसद केंद्रों के रूप में उनकी भूमिका मज़बूत हो रही है।
ट्रंप मार्ग से शिपिंग की लागत कम होने और मध्य एशिया से यूरोप और दूसरे बाज़ारों तक सामान और ज़रूरी कच्चे माल के परिवहन में तेज़ी आने की भी उम्मीद है। कार्यकुशलता में इस वृद्धि से विदेशी निवेश आकर्षित होना चाहिए, औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलना चाहिए और पूरे क्षेत्र में नए आर्थिक अवसर पैदा होने चाहिए। समय के साथ यह मार्ग सहयोग को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है जिससे मध्य एशियाई देशों को अपनी व्यापार और आर्थिक नीतियों पर अधिक नियंत्रण मिल सकेगा। हालाँकि, इसे हासिल करना पारगमन देशों के बीच मज़बूत संस्थानों और एकसमान नियमों पर निर्भर करता है। ट्रंप मार्ग पर भी इसी प्रकार के सुधारों और नियमों में एकरूपता लाने से मध्य एशियाई देशों को अपने व्यापारिक माहौल को स्वतंत्र रूप से संभावने और इस नए गलियारे का पूरा लाभ उठाने में मदद मिलेगी।
तुर्की
ट्रंप मार्ग एशिया और यूरोप के बीच प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में तुर्की की भूमिका को मज़बूत करता है, अज़रबैजान के साथ व्यापारिक संबंधों को सुदृढ़ करता है और कैस्पियन सागर और मध्य एशिया तक सीधी पहुँच प्रदान करता है। इसके अलावा ट्रंप मार्ग अंकारा के उस उद्देश्य से भी मेल खाता है जिसके तहत वह तुर्की भाषी देशों से जुड़ना चाहता है और "मध्य गलियारे" को मज़बूत करना चाहता है, जो पूर्व–पश्चिम व्यापार को सुगम बनाता है।
विशेष बात यह है कि आर्मेनिया और तुर्की के बीच बेहतर होते संबंध मध्य गलियारे को रूस और ईरान के रास्तों का वास्तविक विकल्प बना सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप इस घटनाक्रम से यूरोप, दक्षिण कॉकस और मध्य एशिया तक तुर्की की पहुँच और व्यापक हो जाएगी। पारगमन के लिए ईरान और रूस पर अपनी निर्भरता कम करके तुर्की दक्षिण कॉकस में अपने क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों पर बढ़त हासिल कर लेता है। फ़िलहाल, तुर्की और आर्मेनिया दोनों ही अपनी ज़मीनी सीमा को फिर से खोलने और रेल संपर्क बहाल करने पर काम कर रहे हैं जिसमें विशेष रूप से मार्गारा– अलीकान क्रॉसिंग और कार्स– ग्युमरी रेलमार्ग पर ध्यान दिया जा रहा है।[xxi]
आर्मेनिया ने मार्गारा चेकप्वाइंट को चालू हालात में लाने और उसके आधुनिकीकरण पर 2.5 मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है।[xxii] कार्स– इग्दिर– अरालिक– दिलुकु रेलमार्ग का जारी निर्माण कार्य ऊर्जा, माल ढुलाई और फाइबर–ऑप्टिक्स के प्रवाह को बढ़ाएगा, जिससे रसद के क्षेत्र में तुर्की की भूमिका और मज़बूत होगी।[xxiii] यह मार्ग तुर्की और आर्मेनिया के बीच संबंधों को सामान्य बनाने में भी मदद करता है जिससे संभवतः उनकी सीमा फिर से खुल सकती है।
हालाँकि, इन लाभों के बावजूद, अंकारा सतर्क बना हुआ है। 99-वर्ष के जनादेश के तहत आर्मेनिया में अमेरिका की स्थायी उपस्थिति, समय के साथ, तुर्की की रणनीतिक गहराई को सीमित कर सकती है।
निष्कर्ष: चुनौतियाँ और संभावनाएं
आर्मेनिया और तुर्की के बीच संबंधों का सामान्य होना, अज़रबैजान के साथ शांति स्थापित करना और TRIPP पहल में इस क्षेत्र का मुख्य पारगमन हब में बदलने की क्षमता है। हालांकि, जारी क्षेत्रीय विवादों, सुरक्षा संबंधी चुनौतियों और जटिल लॉजिस्टिक्स संबंधी बाधाओं की वजह से ट्रंप मार्ग का सफल कार्यान्वयन अभी भी अनिश्चित बना हुआ है। इन कारणों से परिचालन में देरी हो सकती है और निवेशकों एवं स्थानीय समुदायों के लिए जोखिम बढ़ सकते हैं। शांति प्रक्रिया में प्रगति के बावजूद, आर्मेनिया और अज़रबैजान ने अभी तक किसी व्यापर और कानूनी रूप से बाध्यकारी शांति संधि पर हस्ताक्षर या उसका अनुसमर्थन नहीं किया है। अगस्त 2025 में ह्वाइट हाउस द्वारा समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद, ध्यान आर्मेनिया के संवैधानिक संशोधनों पर केंद्रित हो गया जो तब से मुख्य बाधा बन गए हैं।
अज़रबैजान का कहना है कि आर्मेनिया के संविधान में संशोधन करना शांति संधि को अंतिम रूप देने की अनिवार्य शर्त है जो इसके पूरी तरह से लागू होने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। एक सर्वमान्य शांति संधि न होने के कारण कानूनी संरचना कमज़ोर पड़ जाती है जिससे फिर से तनाव बढ़ने का संकट बढ़ जाता है। इस संदर्भ में, आर्मेनिया के जून 2026 के संसदीय चुनावों के परिणाम महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यदि संवैधानिक सुधारों में और अधिक रुकावट आती है तो शांति प्रक्रिया को लंबे गतिरोध का सामना करना पड़ सकता है।
नतीजतन संप्रभुता, अमेरिका के परिचालन अधिकारों और स्थानीय नियंत्रण को लेकर जारी अनसुलझी बहस इस रूपरेखा पर विश्वास को कमज़ोर कर सकीत है। हालाँकि यह रूपरेखा आर्मेनिया की संप्रभुता की गारंटी देता है फिर भी अमेरिका को संचालक के रूप में विकास, परिचालन और राजस्व के अधिकार दिए जाने से पैदा होने वाले नियंत्रण संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं।
हालांकि, TRIPP की सफलता प्रभावी संस्थागत प्रबंधन एवं राजनीतिक तालमेल पर निर्भर करती है। यदि यह साकार हो जाता है तो दक्षिण कॉकस को भू–राजनीतिक टकराव के क्षेत्र से बदलकर स्थिर एवं समृद्ध गलियारे में बदल सकता है जिससे इस क्षेत्र के आर्थिक भविष्य में संयुक्त राज्य अमेरिका की स्थिति मज़बूत होगी। इसकी निरंतरता, विशेष रूप से स्थानीय और क्षेत्रीय सत्ता समीकरणों को देखते हुए, बुनियादी ढांचे पर कम और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर अधिक निर्भर करेगी।
*****
*डॉ. पुनीत गौर, शोधकर्ता, आईसीडब्ल्यूए।
अस्वीकरण: व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं।
डिस्क्लेमर: इस अनुवादित लेख में यदि किसी प्रकार की त्रुटी पाई जाती है तो पाठक अंग्रेजी में लिखे मूल लेख को ही मान्य माने ।
अंत टिप्पण
[i] Council on Foreign Relations “Tensions Between Armenia and Azerbaijan”, February 18, 2026, Accessed February 25, 2026, https://www.cfr.org/global-conflict-tracker/conflict/nagorno-karabakh-conflict.
[ii] Onnik James Krikorian (2025). “Armenia Balances Between the TRIPP and Zangezur Corridor”, Eurasia Digest, Volume 1, Issue 31, pp, 8-13.
[iii] Minoyan Hoory (20234), “Pashinyan presents “Crossroads of Peace,” pursuing regional connectivity”, Armenia Weekly, November 1, 2023, Accessed February 28, 2026 https://armenianweekly.com/2023/11/01/pashinyan-presents-crossroads-of-peace-pursuing-regional-connectivity/#:~:text=YEREVAN%E2%80%94Armenian%20Prime%20Minister%20Nikol,Caspian%20Sea%20to%20the%20Mediterranean.
[iv] US Department of State, "United States Publishes Documents from Historic Armenia and Azerbaijan Meeting", Media Note, August 29, 2025, Accessed February 29, 2026. https://www.state.gov/releases/2025/08/united-states-publishes-documents-from-historic-armenia-and-azerbaijan-meeting.
[v] The Prime Minister of the Republic of Armenia, "Joint Declaration by the President of the Republic of Azerbaijan, the Prime Minister of the Republic of Armenia and the President of the United States of America on the outcomes of their meeting in Washington D.C., United States of America" August 9, 2025, Accessed March 02, 2026 https://www.primeminister.am/en/press-release/item/2025/08/09/Nikol-Pashinyan-visit-US-declaration/.
[vi] The White House, "President Trump Brokers another Historic Peace Deal" August 8, 2025, Accessed March 04, 2026, https://www.whitehouse.gov/articles/2025/08/president-trump-brokers-another-historic-peace-deal/.
[vii] New Eurasia Strategies Centre, "The South Caucasus after the Washington meeting: What has really changed, and how Russia is responding", February 19, 2026, Accessed February 28, 2026 https://nestcentre.org/the-south-caucasus-after-the-washington-meeting/?print=print
[viii] Armen Press "Armenia, US generate content of TRIPP project", October 16, 2025, Accessed March 02, 2026, https://armenpress.am/en/article/1232316
[ix] The US Department of State, "The TRIPP Implementation Framework (TIF)", Accessed 7 March 2026, https://www.state.gov/wp-content/uploads/2026/01/TRIPP-Implementation-Framework.pdf
[x] Eurasian Star "TRIPP project and the transit potential of South Caucasus", October 14, 2025, Accessed March 08, 2026, https://www.eurasianstar.com/tripp-project-and-the-transit-potential-of-south-caucasus/#:~:text=U.S.%20President%20Donald%20Trump's%20meeting,across%20the%20country%20in%202024.
[xi] Punit Gaur (2023), "Significance of the Middle Corridor in Changing Geopolitical Landscape", November 14, 2023, Accessed March 09, 2026, /show_content.php?lang=1&level=3&ls_id=10186&lid=6497.
[xii] Linderman L. et al., "Armenia’s Strategic Dilemma: Geography versus History", SILK ROAD PAPER October 2025, Accessed March 10, 2026, https://www.silkroadstudies.org/resources/SR_Armenia_Strategic_Dilemma_LLP.pdf.
[xiii] The Ministry of foreign affairs of the Russian Federation, “Comment by Foreign Ministry Spokeswoman Maria Zakharova on the talks between Azerbaijanian and Armenian leaders in Washington (United States)”, August 09, 2025, Accessed March 10, 2026, https://mid.ru/en/foreign_policy/international_safety/regprla/2040852/#:~:text=The%20most%20suitable%20option%20to,mediation%20in%20the%20Middle%20East.
[xiv] Caliber, “Armenia builds railway outside Russian oversight: Pashinyan ally details TRIPP project”, December 18, 2025, Accessed March 02, 2026, https://caliber.az/en/post/armenia-builds-railway-outside-russian-oversight-pashinyan-ally-details-tripp-project
[xv] Azernews, “Armenia takes control of its borders as old dependencies from Russia unravel”, January 14, 2026, Accessed March 05, 2026, https://www.azernews.az/analysis/252965.html.
[xvi] Onnik James Krikorian (2024), "Armenia Ends Russian Oversight at Yerevan Airport as Security Concerns Persist", Eurasia Daily Monitor, Volume 21 Issue 124, Accessed March 07, 2026, https://jamestown.org/armenia-ends-russian-oversight-at-yerevan-airport-as-security-concerns-persist/
[xvii] Iran International, “Iran presses Armenia to address concerns over foreign forces near shared border”, August 19, 2025, Accessed March 05, 2026, https://www.iranintl.com/en/202508193238.
[xviii] Iran International, “Iran rebukes Russia over its policy shift on Zangezur corridor", September 2, 2024, Accessed March 16, 2026, https://www.iranintl.com/en/202409022022
[xix] Emil Avdaliani (2025), "New ‘Trump’ Corridor Leaves Iran Scrambling to Preserve Influence in the South Caucasus", Stimson, September 10, 2025, Accessed March 8, 2026, https://www.stimson.org/2025/new-trump-corridor-leaves-iran-scrambling-to-preserve-influence-in-the-south-caucasus/#:~:text=New%20'Trump'%20Corridor%20Leaves%20Iran,of%20Baku's%20ties%20to%20Israel
[xx] Eka Tkeshelashvili (2026), “Central Asia finds strength in integration”, GIS, March 4, 2026, Accessed March 10, 2026, https://www.gisreportsonline.com/r/central-asia-integration/
[xxi] Akbar Novruz (2026), “Türkiye intensifies work to reopen Alican–Margara border checkpoint with Armenia”, Azernews, February 9, 2026, Accessed March 1, 2026, https://www.azernews.az/region/254145.html#:~:text=The%20report%20notes%20that%20infrastructure,finalized%20and%20political%20conditions%20allow.
[xxii] The Armeina Report (2024), "Armenia Spends $2.5 Million Renovating Margara Checkpoint on Turkey Border", November 4, 2024, Accessed March 4, 2026, https://www.thearmenianreport.com/post/armenia-spends-2-5-million-renovating-margara-checkpoint-on-turkey-border
[xxiii] RailFreight, "Türkiye starts building Kars-Dilucu railway, a key part of the Zangezur Corridor", August 22, 2025, Accessed March 6, 2026, https://www.railfreight.com/beltandroad/2025/08/22/turkiye-starts-building-kars-dilucu-railway-a-key-part-of-the-zangezur-corridor/?gdpr=deny